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अनकही बातें

तस्वीर गूगल से साभारक्यों पूजे वो तुम्हें?जिसकी मांग का सिंदूर खुद न उतरा थातुमने रगड़ दी थी बदकिस्मतीउसकी मांग परअंगड़ाई भी न टूटी थीजिन मखमली रातों कीउनके ख्वाबों को क्यों रौंदा था तुमनेक्यों डाल दी थी सफेद मायूस चादर?तुमने उसके बदन पर...क्या दिया तुमने नेग में उसे...
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  September 26, 2014, 2:18 pm
Sometimes…Life seems so cluelessLife seems so helplessBut that’s the time…For you to bounce back…With Full Might and who knowsSometimes…Bouncing back takes youTo greater heightsCuz that’s the timeWhen you don’t looseYou just gainEven from your defeats…Sometimes…Life is not ruthlessLife is not brutalLife itself is so livelySo happy, so harmoniousIt’s just cluelessLike a mazeYou just have to find a wayAnd who knows…Sometimes…A maze is what we wantTo find our own destinationTo complete ourPursuit of happinessSo, keep walking ‘cozSometimes…Journey is rather beautifulThan the destinationJourney is everythingDestination is so stale, so oldSo, keep walking…’cozSometi...
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  July 14, 2014, 2:04 pm
सच कहूं तो तनु शर्मा ने सही किया या गलत, ये तो नहीं कह सकता पर वो ऐसा न करती तो शायद ये बहस हमारे मन की अंधेरी ओर काफी हद तक मैली कोठरी में ही घुट घुट कर मर जाती।बहस कि क्यों मजबूर हुई वो आत्महत्या के लिए? क्या हो रहा है पत्रकारिता के बोर्ड टंगे बंद दरवाजों के पीछे? पर, बहस सिर...
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Tag :thought
  June 23, 2014, 2:11 pm
एक किसान था...खेत बेचा था एकसींचना था बड़ा सा दूसरा खेतदाम कम मिले थेपर उम्मीद थी एक दिनवो फसल लहलहाएगी।साल भर अपने बच्चों के साथखून से सींच डाला खेतऔर साल भर बाददेखकर अपने लहलहाते खेतकहता था अपने बच्चों सेआएँगी बहार उनके जीवन मेंपढ़ने जायेंगे खेत कीपगडंडियों से दूरखु...
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Tag :thought
  May 8, 2014, 2:03 am
Image courtesy : The Indian Express‘She was gangraped by 16 boys, nine of them juveniles. She was beaten, cut up and her genitals mutilated. She made it to hospital, but was sent home with first-aid. When she survived to fight, she ran into an indifferent administration and influential accused. Schools denied her admission, and others mocked and threatened her. Chances are you haven't heard this 16-year-old's story. Three days after the brutal attack on her, the Delhi bus gangrape would happen, and a grieving nation's conscience would not find time or space for this distant town in remote Meghalaya.’                                                        -Th...
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Tag :India Gate
  April 15, 2013, 3:26 pm
फोटो गूगल से साभारफेसबुक कमाल की उत्पत्ति है। इसके छोटे से नाम में कितनी बड़ी दुनिया और एक अलग ही सभ्यता नित बन बिगड़ रही है, अंदाज़ा लगाना भी मुमकिन नहीं है। हाँ, कुछ रेशे जरुर पकड़ में आ जाते हैं। शायद यही वजह है कि मुझे कभी कभी महसूस होता है कि इस ख़ास सोशल नेटवर्किंग...
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  April 9, 2013, 2:29 pm
गूगल से साभार शून्य यानी एक नयी श्रृष्टि नया जन्म नया जीवननिराशा का अंत उद्भव आशा का फिर से, जैस पतझड़ का अंत शून्य यानी गोधूलिब्रम्ह्बेला जब कोई नहीं सिर्फ प्रकृति है चारों ओर अनंत  मंडराते अदृश्य जैसे तूफानों का अंत शून्य यानी समाप्ति की ओर एक विकल्प और जन्मी...
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  April 6, 2013, 2:47 pm
फोटो गूगल से साभार जीवन बढ़ा था मेरी ओर मैंने देखा था उसे आते हुए या वह भी था एक ख्वाब का अबूझ सा सिरा नहीं हो सकी हमारी मुलाक़ात शायद भांप लिए थे उसने मेरे जज़्बात टटोल ली थी वो नब्ज़ जो गले की अँधेरी कोठरी से निकलने को बेताब थी या नाप ली थी मेरे खोखले सुनसान मन की गह...
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  April 5, 2013, 1:06 pm
फोटो गूगल से साभारमन शांत और विचार सधे से लग रहे हैं। इसलिए, मेरा नया साल आज है। हर साल की तरह इस साल की पहली रपट पेश कर रहा हूँ। खास बात ये है कि हर बार की तरह इस बार भी ये सोचने की जरुरत नहीं पड़ी कि  विषय क्या हो। विषय मेरे साथ-सामने है। गूगल क्रोम ब्राउजर के दूसरे टैब मे...
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  March 6, 2013, 2:18 pm
पिछले करीब डेढ़ साल में मैंने दो बड़े विद्रोह बहुत करीब से देखे। पहला अन्ना का और दूसरा बिना चेहरे के युवाओं का। यह चढ़ रहा है। बलात्कार के विरोध में। पहला भ्रष्टाचार को लेकर था और दूसरा खुद में स्त्री विमर्श  छिपाए हुए है। दिलचस्प ये है कि दोनों ही विद्रोह सिर्फ व्...
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  December 26, 2012, 1:05 pm
पिछले करीब डेढ़ साल में मैंने दो बड़े विद्रोह बहुत करीब से देखे। पहला अन्ना का और दूसरा बिना चेहरे के युवाओं का। यह चढ़ रहा है। बलात्कार के विरोध में। पहला भ्रष्टाचार को लेकर था और दूसरा खुद में स्त्री विमर्श  छिपाए हुए है। दिलचस्प ये है कि दोनों ही विद्रोह सिर्फ व्य...
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  December 26, 2012, 12:58 pm
चांद ये सुर्ख सा क्यूं हैंक्यूं बेसुब जर्द है सूरज कदम आहिस्ते रखता हूं निशां गुमनाम सब क्यूं हैं क्यूं धरती बह रही है यूं समंदर थम गए क्यूं हैं आसमां देखता मैं हूं धुआं बेरंग सा क्यूं है मकां क्यूं ढह गए सारेक्यूं दुकानें बिक रही हैं ये नजरें बंद करता हूंख्वाब ये जागत...
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  November 1, 2012, 4:37 pm
फोटो गूगल से साभार न मिली नींद भर जमीं, धूप भर आसमां न मिला खामोश रहे वो शायद  कि कोई दूसरा जहाँ भी होगा....न किये तकादे खुदा से, किस्मत से हिसाब न माँगा गम पी गए वो शायदकि कोई दूसरा जहाँ भी होगा... न मांगीसुबह खुशियों की, रातों से आस न मांगी पड़े रहे किनारों पे शायद कि कोई ...
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  September 28, 2012, 2:10 pm
गूगल से साभार क्यूँ हैंये मायूस सी गली गुमसुम सा चाँदहांफती सड़क पे रेंगते निशान...क्यूँ हैये तड़पती सी हवा अनजान सी  सिरहन कोसते सफ़र पे बेजुबान धडकन...क्यूँ हैं...ये चीखते से जश्न  दरकते से तख़्त सूखती नसों पे सिरफिरा वक़्त... क्यूँ हैं, ये उजड़ता सा लम्हाखटकता सा अ...
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  September 22, 2012, 3:41 pm
फोटो गूगल से साभार कौन हैं वो जो कहते हैं खुद को "झूठे"  सच का अनुगामी कौन हैं वो जो कैद हैं कई "धाराओं" मेंबनके अनुयायीकौन हैं वो जो देखते हैं हर एक "इज्म" में अपना प्रतिबिम्ब कौन हैं वोजो ठोकते हैं हर "काल" में अपनी बेसुरी तालकौन हैं वो जो करते हैंहर "कारि...
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  March 30, 2012, 12:50 am
Photo: Google Dear Dravid,First of all let me clarify that I didn't doubt your talent even in the worst moments. You were impeccable! But, red cherry had started making making room between your pads and the bat easily. Your defense was not looking that rock solid (which it was known for). May be it was too old to face the new generation of fast and furious bowlers. Your shots also were not consistent. And above all, the charisma of your batting was missing. So, it was your time to say goodbye. And, let me tell you that I wanted it badly. However, you took a little more time than I had expected. I didn't want to see you hitting ground with your bat or shaking your head in d...
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  March 11, 2012, 9:14 pm
फोटो गूगल से साभार वो देता गुमशुदा यादें/मैं कलम में जस्ब कर लेता//वो सिरहाने तनहाइयाँ रख जाता/मैं पुरवाइयों में बहा देता//वो दिन में बेचता सपने/मैं उम्मीदें भी चुरा लेता//वो अँधेरे बेपनाह देता/मैं उन्हें रौशनी से रंग देता//वो छीन लेता नींद रातों  की/मैं किताबों से दो...
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  February 26, 2012, 11:37 am
फोटो गूगल से साभार जाने क्यूँ...आज याद आ रही है दफ्तर से तुम्हारे हॉस्टल की वो दौड़ वो शीशे-संगमरमर का ताजमहल, चंद पन्नों में प्यार को समेटने की वो होड़वो उम्र से आगे भागते सपने दिल से दरकती वो धड़कन...वो ऑटो की किचकिच, सड़कों पे शोर हमारी आशिकी का वो सुनहला सा दौरवो रू...
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  February 15, 2012, 11:21 pm
फोटो गूगल से साभार हे मतदाता महान,फिर से छिड़ चुका है चुनावी संग्राम.तुम बदल सकते हो जहान,लेकिन क्योंकि तुम वाकई हो सूबे के मतदाता नादान,इसलिए तुमसे कोई नहीं है हलकान!देखो तुम कितने हो भोले-अनजान,कि मैदान में फिर उतरे हैं प्रत्याशी अपराध के पर्याय समान!फिर से तुम्हार...
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  January 20, 2012, 4:23 pm
फोटो महज सिम्बौलिक है. गूगल से साभार. जैसे बारिश के मौसम में जगह-जगह केंचुए निकल आते हैं वैसे ही क्रिकेट के मौसम में गली-कूचे से लेकर, रेल, बस और मेट्रो तक में "क्रिकेट के कोच" नजर आने लगते हैं. इन कोच की फेहरिस्त में वरीयता, पैमाना और अनुभव जैसा कोई मानक नहीं लागू होता. ...
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Tag :Cricket
  January 16, 2012, 6:00 pm
फोटो महज सिम्बौलिक है. गूगल से साभार. जैसे बारिश के मौसम में जगह-जगह केंचुए निकल आते हैं वैसे ही क्रिकेट के मौसम में गली-कूचे से लेकर, रेल, बस और मेट्रो तक में "क्रिकेट के कोच"नजर आने लगते हैं. इन कोच की फेहरिस्त में वरीयता, पैमाना और अनुभव जैसा कोई मानक नहीं लागू होता. इ...
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Tag :Commentary
  January 16, 2012, 6:00 pm
फोटो महज सिम्बौलिक है. गूगल से साभार. जैसे बारिश के मौसम में जगह-जगह केंचुए निकल आते हैं वैसे ही क्रिकेट के मौसम में गली-कूचे से लेकर, रेल, बस और मेट्रो तक में "क्रिकेट के कोच" नजर आने लगते हैं. इन कोच की फेहरिस्त में वरीयता, पैमाना और अनुभव जैसा कोई मानक नहीं लागू होता. इ...
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Tag :Commentary
  January 16, 2012, 6:00 pm
मुकम्मल रौनक की चाह में रौशनी भी जाती रहीइक ख्वाब के खातिर हमने अंधेरों से दोस्ती कर ली...यादों के आशियाने में  वो आ आ के जाती रहीमायूसी के वायस हमने ज़िन्दगी अपनी कर दी... Your code goes here ...
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  November 7, 2011, 10:35 am
फोटो- गूगल से साभार बात ख़ुशी की है. ऐसा आन्दोलन, इतनी जल्दी सकारत्मक परिणाम! गज़ब का जन समर्थन! २७ अगस्त ऐतिहासिक है! संसद सदस्यों ने अभूतपूर्व काम किया! राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर बेहतर कल के लिए सहमति बनाई, लेकिन क्या लगता है कि ये लोग संत हो गए? अचानक ये हृदय परिवर्तन...
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Tag :मीडिया
  August 30, 2011, 1:28 pm
दिल की खामोश गलियों में कोई आज भी एक आहट की आस लगाये बैठा हैकह दो उन मतवालों से कोई आज भी नफरत की बस्ती में प्यार का बाज़ार लगाये बैठा है लफ्ज़ कम हैं, और कहानियां ज्यादाएक वादा इस ज़ुबां पर ताला लगाये बैठा है******************************************हर बात बताते रहे वो हमसे रात दिन और एक दिन वो भी ...
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Tag :मेरी कही-अनकही
  August 11, 2011, 1:29 pm
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