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Blog: अनकही बातें

Blogger: nikhil srivastava
तस्वीर गूगल से साभारक्यों पूजे वो तुम्हें?जिसकी मांग का सिंदूर खुद न उतरा थातुमने रगड़ दी थी बदकिस्मतीउसकी मांग परअंगड़ाई भी न टूटी थीजिन मखमली रातों कीउनके ख्वाबों को क्यों रौंदा था तुमनेक्यों डाल दी थी सफेद मायूस चादर?तुमने उसके बदन पर...क्या दिया तुमने नेग में उसे... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   8:48am 26 Sep 2014 #
Blogger: nikhil srivastava
Sometimes…Life seems so cluelessLife seems so helplessBut that’s the time…For you to bounce back…With Full Might and who knowsSometimes…Bouncing back takes youTo greater heightsCuz that’s the timeWhen you don’t looseYou just gainEven from your defeats…Sometimes…Life is not ruthlessLife is not brutalLife itself is so livelySo happy, so harmoniousIt’s just cluelessLike a mazeYou just have to find a wayAnd who knows…Sometimes…A maze is what we wantTo find our own destinationTo complete ourPursuit of happinessSo, keep walking ‘cozSometimes…Journey is rather beautifulThan the destinationJourney is everythingDestination is so stale, so oldSo, keep walking…’cozSometi... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   8:34am 14 Jul 2014 #
Blogger: nikhil srivastava
सच कहूं तो तनु शर्मा ने सही किया या गलत, ये तो नहीं कह सकता पर वो ऐसा न करती तो शायद ये बहस हमारे मन की अंधेरी ओर काफी हद तक मैली कोठरी में ही घुट घुट कर मर जाती।बहस कि क्यों मजबूर हुई वो आत्महत्या के लिए? क्या हो रहा है पत्रकारिता के बोर्ड टंगे बंद दरवाजों के पीछे? पर, बहस सिर... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   8:41am 23 Jun 2014 #thought
Blogger: nikhil srivastava
एक किसान था...खेत बेचा था एकसींचना था बड़ा सा दूसरा खेतदाम कम मिले थेपर उम्मीद थी एक दिनवो फसल लहलहाएगी।साल भर अपने बच्चों के साथखून से सींच डाला खेतऔर साल भर बाददेखकर अपने लहलहाते खेतकहता था अपने बच्चों सेआएँगी बहार उनके जीवन मेंपढ़ने जायेंगे खेत कीपगडंडियों से दूरखु... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   8:33pm 7 May 2014 #thought
Blogger: nikhil srivastava
Image courtesy : The Indian Express‘She was gangraped by 16 boys, nine of them juveniles. She was beaten, cut up and her genitals mutilated. She made it to hospital, but was sent home with first-aid. When she survived to fight, she ran into an indifferent administration and influential accused. Schools denied her admission, and others mocked and threatened her. Chances are you haven't heard this 16-year-old's story. Three days after the brutal attack on her, the Delhi bus gangrape would happen, and a grieving nation's conscience would not find time or space for this distant town in remote Meghalaya.’                                                        -Th... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   9:56am 15 Apr 2013 #India Gate
Blogger: nikhil srivastava
फोटो गूगल से साभारफेसबुक कमाल की उत्पत्ति है। इसके छोटे से नाम में कितनी बड़ी दुनिया और एक अलग ही सभ्यता नित बन बिगड़ रही है, अंदाज़ा लगाना भी मुमकिन नहीं है। हाँ, कुछ रेशे जरुर पकड़ में आ जाते हैं। शायद यही वजह है कि मुझे कभी कभी महसूस होता है कि इस ख़ास सोशल नेटवर्किंग... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   8:59am 9 Apr 2013 #
Blogger: nikhil srivastava
गूगल से साभार शून्य यानी एक नयी श्रृष्टि नया जन्म नया जीवननिराशा का अंत उद्भव आशा का फिर से, जैस पतझड़ का अंत शून्य यानी गोधूलिब्रम्ह्बेला जब कोई नहीं सिर्फ प्रकृति है चारों ओर अनंत  मंडराते अदृश्य जैसे तूफानों का अंत शून्य यानी समाप्ति की ओर एक विकल्प और जन्मी... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   9:17am 6 Apr 2013 #
Blogger: nikhil srivastava
फोटो गूगल से साभार जीवन बढ़ा था मेरी ओर मैंने देखा था उसे आते हुए या वह भी था एक ख्वाब का अबूझ सा सिरा नहीं हो सकी हमारी मुलाक़ात शायद भांप लिए थे उसने मेरे जज़्बात टटोल ली थी वो नब्ज़ जो गले की अँधेरी कोठरी से निकलने को बेताब थी या नाप ली थी मेरे खोखले सुनसान मन की गह... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   7:36am 5 Apr 2013 #
Blogger: nikhil srivastava
फोटो गूगल से साभारमन शांत और विचार सधे से लग रहे हैं। इसलिए, मेरा नया साल आज है। हर साल की तरह इस साल की पहली रपट पेश कर रहा हूँ। खास बात ये है कि हर बार की तरह इस बार भी ये सोचने की जरुरत नहीं पड़ी कि  विषय क्या हो। विषय मेरे साथ-सामने है। गूगल क्रोम ब्राउजर के दूसरे टैब मे... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   8:48am 6 Mar 2013 #
Blogger: nikhil srivastava
पिछले करीब डेढ़ साल में मैंने दो बड़े विद्रोह बहुत करीब से देखे। पहला अन्ना का और दूसरा बिना चेहरे के युवाओं का। यह चढ़ रहा है। बलात्कार के विरोध में। पहला भ्रष्टाचार को लेकर था और दूसरा खुद में स्त्री विमर्श  छिपाए हुए है। दिलचस्प ये है कि दोनों ही विद्रोह सिर्फ व्... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   7:35am 26 Dec 2012 #
Blogger: nikhil srivastava
पिछले करीब डेढ़ साल में मैंने दो बड़े विद्रोह बहुत करीब से देखे। पहला अन्ना का और दूसरा बिना चेहरे के युवाओं का। यह चढ़ रहा है। बलात्कार के विरोध में। पहला भ्रष्टाचार को लेकर था और दूसरा खुद में स्त्री विमर्श  छिपाए हुए है। दिलचस्प ये है कि दोनों ही विद्रोह सिर्फ व्य... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   7:28am 26 Dec 2012 #
Blogger: nikhil srivastava
चांद ये सुर्ख सा क्यूं हैंक्यूं बेसुब जर्द है सूरज कदम आहिस्ते रखता हूं निशां गुमनाम सब क्यूं हैं क्यूं धरती बह रही है यूं समंदर थम गए क्यूं हैं आसमां देखता मैं हूं धुआं बेरंग सा क्यूं है मकां क्यूं ढह गए सारेक्यूं दुकानें बिक रही हैं ये नजरें बंद करता हूंख्वाब ये जागत... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   11:07am 1 Nov 2012 #
Blogger: nikhil srivastava
फोटो गूगल से साभार न मिली नींद भर जमीं, धूप भर आसमां न मिला खामोश रहे वो शायद  कि कोई दूसरा जहाँ भी होगा....न किये तकादे खुदा से, किस्मत से हिसाब न माँगा गम पी गए वो शायदकि कोई दूसरा जहाँ भी होगा... न मांगीसुबह खुशियों की, रातों से आस न मांगी पड़े रहे किनारों पे शायद कि कोई ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   8:40am 28 Sep 2012 #
Blogger: nikhil srivastava
गूगल से साभार क्यूँ हैंये मायूस सी गली गुमसुम सा चाँदहांफती सड़क पे रेंगते निशान...क्यूँ हैये तड़पती सी हवा अनजान सी  सिरहन कोसते सफ़र पे बेजुबान धडकन...क्यूँ हैं...ये चीखते से जश्न  दरकते से तख़्त सूखती नसों पे सिरफिरा वक़्त... क्यूँ हैं, ये उजड़ता सा लम्हाखटकता सा अ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   10:11am 22 Sep 2012 #
Blogger: nikhil srivastava
फोटो गूगल से साभार कौन हैं वो जो कहते हैं खुद को "झूठे"  सच का अनुगामी कौन हैं वो जो कैद हैं कई "धाराओं" मेंबनके अनुयायीकौन हैं वो जो देखते हैं हर एक "इज्म" में अपना प्रतिबिम्ब कौन हैं वोजो ठोकते हैं हर "काल" में अपनी बेसुरी तालकौन हैं वो जो करते हैंहर "कारि... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   7:20pm 29 Mar 2012 #
Blogger: nikhil srivastava
Photo: Google Dear Dravid,First of all let me clarify that I didn't doubt your talent even in the worst moments. You were impeccable! But, red cherry had started making making room between your pads and the bat easily. Your defense was not looking that rock solid (which it was known for). May be it was too old to face the new generation of fast and furious bowlers. Your shots also were not consistent. And above all, the charisma of your batting was missing. So, it was your time to say goodbye. And, let me tell you that I wanted it badly. However, you took a little more time than I had expected. I didn't want to see you hitting ground with your bat or shaking your head in d... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   3:44pm 11 Mar 2012 #
Blogger: nikhil srivastava
फोटो गूगल से साभार वो देता गुमशुदा यादें/मैं कलम में जस्ब कर लेता//वो सिरहाने तनहाइयाँ रख जाता/मैं पुरवाइयों में बहा देता//वो दिन में बेचता सपने/मैं उम्मीदें भी चुरा लेता//वो अँधेरे बेपनाह देता/मैं उन्हें रौशनी से रंग देता//वो छीन लेता नींद रातों  की/मैं किताबों से दो... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   6:07am 26 Feb 2012 #
Blogger: nikhil srivastava
फोटो गूगल से साभार जाने क्यूँ...आज याद आ रही है दफ्तर से तुम्हारे हॉस्टल की वो दौड़ वो शीशे-संगमरमर का ताजमहल, चंद पन्नों में प्यार को समेटने की वो होड़वो उम्र से आगे भागते सपने दिल से दरकती वो धड़कन...वो ऑटो की किचकिच, सड़कों पे शोर हमारी आशिकी का वो सुनहला सा दौरवो रू... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   5:51pm 15 Feb 2012 #
Blogger: nikhil srivastava
फोटो गूगल से साभार हे मतदाता महान,फिर से छिड़ चुका है चुनावी संग्राम.तुम बदल सकते हो जहान,लेकिन क्योंकि तुम वाकई हो सूबे के मतदाता नादान,इसलिए तुमसे कोई नहीं है हलकान!देखो तुम कितने हो भोले-अनजान,कि मैदान में फिर उतरे हैं प्रत्याशी अपराध के पर्याय समान!फिर से तुम्हार... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   10:53am 20 Jan 2012 #
Blogger: nikhil srivastava
फोटो महज सिम्बौलिक है. गूगल से साभार. जैसे बारिश के मौसम में जगह-जगह केंचुए निकल आते हैं वैसे ही क्रिकेट के मौसम में गली-कूचे से लेकर, रेल, बस और मेट्रो तक में "क्रिकेट के कोच" नजर आने लगते हैं. इन कोच की फेहरिस्त में वरीयता, पैमाना और अनुभव जैसा कोई मानक नहीं लागू होता. ... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   12:30pm 16 Jan 2012 #Cricket
Blogger: nikhil srivastava
फोटो महज सिम्बौलिक है. गूगल से साभार. जैसे बारिश के मौसम में जगह-जगह केंचुए निकल आते हैं वैसे ही क्रिकेट के मौसम में गली-कूचे से लेकर, रेल, बस और मेट्रो तक में "क्रिकेट के कोच"नजर आने लगते हैं. इन कोच की फेहरिस्त में वरीयता, पैमाना और अनुभव जैसा कोई मानक नहीं लागू होता. इ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   12:30pm 16 Jan 2012 #Commentary
Blogger: nikhil srivastava
फोटो महज सिम्बौलिक है. गूगल से साभार. जैसे बारिश के मौसम में जगह-जगह केंचुए निकल आते हैं वैसे ही क्रिकेट के मौसम में गली-कूचे से लेकर, रेल, बस और मेट्रो तक में "क्रिकेट के कोच" नजर आने लगते हैं. इन कोच की फेहरिस्त में वरीयता, पैमाना और अनुभव जैसा कोई मानक नहीं लागू होता. इ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   12:30pm 16 Jan 2012 #Commentary
Blogger: nikhil srivastava
मुकम्मल रौनक की चाह में रौशनी भी जाती रहीइक ख्वाब के खातिर हमने अंधेरों से दोस्ती कर ली...यादों के आशियाने में  वो आ आ के जाती रहीमायूसी के वायस हमने ज़िन्दगी अपनी कर दी... Your code goes here ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   5:05am 7 Nov 2011 #
Blogger: nikhil srivastava
फोटो- गूगल से साभार बात ख़ुशी की है. ऐसा आन्दोलन, इतनी जल्दी सकारत्मक परिणाम! गज़ब का जन समर्थन! २७ अगस्त ऐतिहासिक है! संसद सदस्यों ने अभूतपूर्व काम किया! राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर बेहतर कल के लिए सहमति बनाई, लेकिन क्या लगता है कि ये लोग संत हो गए? अचानक ये हृदय परिवर्तन... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   7:58am 30 Aug 2011 #मीडिया
Blogger: nikhil srivastava
दिल की खामोश गलियों में कोई आज भी एक आहट की आस लगाये बैठा हैकह दो उन मतवालों से कोई आज भी नफरत की बस्ती में प्यार का बाज़ार लगाये बैठा है लफ्ज़ कम हैं, और कहानियां ज्यादाएक वादा इस ज़ुबां पर ताला लगाये बैठा है******************************************हर बात बताते रहे वो हमसे रात दिन और एक दिन वो भी ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   7:59am 11 Aug 2011 #मेरी कही-अनकही
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