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Blog: Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)

Blogger: Kusum Thakur
"हार मिली पर हार वही"है चाहत  हर बार वहीक्यों रहता ना प्यार वहीआती जाती यादों परहो अपना अधिकार वहीप्यार सदा सच  कहता हैहार मिली पर हार वहीप्यार कला है जीने कीतब जगमग संसार वहीसमझ कुसुम नैनों की भाषाप्रेम सहज हर बार वही-कुसुम ठाकुर-... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   5:13pm 3 Feb 2015 #कुसुम ठाकुर
Blogger: Kusum Thakur
 कहते हैं कन्यादान महा दान अर्थात इससे बड़ा दान नहीं होता है. बेटियों को दान में क्यों दिया जाता है यह आजतक मेरी समझ से परे है. दान में तो वस्तु दी जाती है, तो क्या बेटियाँ वस्तु हैं ? कहते हैं जो वस्तु दान में दे दी जाती है  उस पर न कोई अधिकार होता है न ही उसके बारे में सो... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   6:13am 2 Feb 2015 #
Blogger: Kusum Thakur
एक बार एक प्रसिद्ध फिल्म नेर्देशक से बातें हो रही थी और उन्होंने कहा था "एक दिन मैं बम्बई में एक फिल्म शूटिंग देख रहा था उस दिन मेरे मन में आया सिनेमा सबसे अच्छा माध्यम है लोगों तक अपने विचारों को पहुंचाने का." उसके बाद ही हमने  पुणे फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला लेने ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   10:21am 31 Dec 2014 #
Blogger: Kusum Thakur
"चलने का बहाना ढूँढ लिया"चलने की हो ख्वाहिश साथ अगर चलने का बहाना ढूंढ लिया यूं रहते थे दिल के पास मगर तसरीह का बहाना ढूंढ लियामुड़कर भी जो देखूं मुमकिन नहींआरज़ू थी जो मुद्दत से ढूंढ लियातसव्वुर में बैठे थे शिद्दत सही खलिश को छुपाना ढूंढ लिया कहने को मुझे हर ख... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   4:44pm 13 Jul 2014 #
Blogger: Kusum Thakur
"दर्द इस कदर दिया "यूँ नसीब ने तो ऐसा हमसफ़र दिया मेरी जिंदगी में ऐतवार भर दियादर्द पाया फिर भी लगता खुश नसीब हूँ जाने जादू क्या उसने ऐसा कर दियावैसे जिन्दगी में कम कहाँ है उलझनें जाते जाते भी न चैन इक पहर दियाये तो जाना हमसफ़र का भी सफ़र वहींवो हसीन पल भी सपनों में है भ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   12:55pm 12 Jun 2014 #
Blogger: Kusum Thakur
कर्म के आधार पर वर्ण बनाया गया परन्तु कालान्तर में वर्ण ही  छूआछूत भेदभाव को जन्म दिया और पराकाष्ठा पर पहुँच गया.उसी प्रकार ईश्वर ने स्त्री को मात्र शारीरिक तौर पर पुरुषों से कमजोर बनाया. उन्हें शारीरिक श्रम वाले काम से दूर रखने के लिए घर के काम काज उनके जिम्मे दिया ग... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   1:54am 8 Mar 2014 #
Blogger: Kusum Thakur
"नीम गुणों का खान"औषधीय गुणों मान  नीम गुणों का खान, कहे सब नीम गुणों का खान और मिलना भी आसान उच्च हिमालय नहीं है भाता जगह जगह मिल जाता दोषमुक्त औषधीय गुण वाला चमत्कार दिखलाता छाल पत्तियाँ फल फूल बीज के नियमित सेवन से रोगों को दूर भगाता है पर्... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   11:32am 20 Feb 2014 #
Blogger: Kusum Thakur
मन में झंझावात"दिल के तहखाने में बीता तनहा सारी रात कहती क्यों सावन हरजाई लाई है सौगातस्नेह का सागर भरा हुआ है, क्यूँ मन में अवसाद किसको बोलूँ, रूठूं कैसे,  मन में झंझावात तिल-तिल दीपक सा जलता मन, लिए स्नेह की आस गुजरी यादें, धुमिल हो गईं, इतनी रही बिसात समझूं कै... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   11:50am 13 Oct 2013 #
Blogger: Kusum Thakur
माँ मैं तो हारी, आई शरण तुम्हारी,अब जाऊँ किधर तज शरण तुम्हारी। दर भी तुम्हारा लगे मुझको प्यारा, तजूँ मैं कैसे अब शरण तुम्हारी। माँ .........................................मन मेरा चंचल, धरूँ ध्यान कैसे,बसो मेरे मन, मैं शरण तुम्हारी।माँ..........................................जीवन की नैया मझधार में है, पार उ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   1:34am 5 Oct 2013 #
Blogger: Kusum Thakur
लोग कहते हैं कि आजकल के बच्चे बड़ों की इज्जत करना नहीं जानते खासकर शिक्षकों का गुरुजनों का। पर यह कहना गलत है। मैं भी कभी शिक्षक थी और मैंने जो महसूस किया वह इसके विपरीत है। आजकल वैसे शिक्षक ही विरले मिलते हैं जिनके लिए ये पंक्तियाँ हैं :गुरु गोबिंद दोउ खड़े काके लागू... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   5:24am 5 Sep 2013 #
Blogger: Kusum Thakur
( यह कविता मैं ने अपनी छोटी बहन के २५ वीं शादी की सालगिरह पर लिखी है.)"रजत जयंती स्वर्ण बनाओ"एक दूजे से प्यार बहुतदुनिया में दीवार बहुत किसने किसको दी तरजीहवैसे तो अधिकार बहुत लगता कम खुशियों के पल हैं पर उसमे श्रृंगार बहुत देखोगे नीचे संग में तो जीने क... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   2:11am 23 Jul 2013 #
Blogger: Kusum Thakur
(कुछ दिन कुछ पल ऐसे होते हैं जो चाहकर भी भूला नहीं जा सकता, उसी दिन की याद में मेरी यह रचना जिसे लोगों ने भुला दिया।)"चाहत तुम्हारी फिर से"चाहत तुम्हारी फिर से मुझको सजा दिया  सोई हुई थी आशा उसको जगा दियाकहने को जब नहीं थे, सोहबत नसीब थी खोजा जहाँ मैं दिल से, चेहरा दिखा ... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   3:17am 13 Jul 2013 #
Blogger: Kusum Thakur
"यूँ मुहब्बत कहूँ हो इबादत मगर"है कठिन फिर भी सच को कहोगे अगर जिंदगी का सफ़र ना सिफर हो डगर  दिल की बेताबियाँ और ऐसी तड़प  यूँ मुहब्बत कहूँ हो इबादत मगर आज कहने को जब, तुम नहीं पास में क्या है उलझन कहूँ जाने सारा नगरभाग्य रूठे हों तुमसे तो फिर क्या कहें ये इनायत कहो हमसफ... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   8:06am 30 Jun 2013 #गज़ल
Blogger: Kusum Thakur
कई दिनों से उतराखंड की आपदा से लोग जूझ रहे हैं टीवी में देख मन द्रवित हो जाता है। और तब अचानक समाचार में आया राहत बचाव कार्य में लगे हेलिकोप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उफ़…….  कैसी विडम्बना है। हे  ईश्वर ! उन सैनिकों को किस बात की सजा मिली जो सच में जान जोखिम में डालकर आपद... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   2:09pm 27 Jun 2013 #आलेख
Blogger: Kusum Thakur
"गाते रहो मुस्कुराते रहो"तुम गाते रहो मुस्कुराते रहो जिन्दगी के सफ़र में लुभाते रहो कट जाए सफ़र तो हर हाल में सुख-दुःख को गले से लगाते रहो तुम बेसहारा खुद हो मगर बेसहारों का हाथ बंटाते रहोये दुनिया है माना बहुत मतलबी दूर रहकर भी उनसे निभाते रहो लोग पाहन की पूजा भी करत... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   10:09am 24 Jun 2013 #कविता
Blogger: Kusum Thakur
"मन का भेद पपीहा खोले"जिस माली ने सींचा अबतक सुबक सुबक वह रोता हैपाल पोसकर बड़ा किया हो उसको एक दिन खोता है  धूप हवा का जो ख़याल रख पंखुड़ियाँ है नित गिनताउस उपवन में चाहत से क्या पतझड़ में कुछ होता है  नेमत उसकी है प्रकृति फिर छेड़ छाड़ क्यों है करता फूल खिले काँटों में ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   4:49am 27 Mar 2013 #ग़ज़ल
Blogger: Kusum Thakur
" आई शरण तुम्हारी "हरि मैं तो हारी, आई शरण तुम्हारी,अब जाऊँ किधर तज शरण तुम्हारी। दर भी तुम्हारा लगे मुझको प्यारा, तजूँ  कैसे अब मैं शरण तुम्हारी। हरि ..................................मन मेरा चंचल, धरूँ ध्यान कैसे,बसो मेरे मन मैं शरण तुम्हारी।  हरि ...................................जीवन की नैया मझधार में ... Read more
clicks 209 View   Vote 1 Like   3:32pm 15 Mar 2013 #कुसुम ठाकुर
Blogger: Kusum Thakur
करीब ढाई महीने से अमेरिका में हू, इन ढाई महीने में काफी कम लिख पाई हूँ। सच कहूँ तो पोते को छोड़कर कुछ करने का मन ही नहीं होता। उसके साथ एक एक पल मेरे लिए अनमोल हैं। होता है किसी और काम में लग गई तो कुछ अनमोल घड़ियाँ छूट न जाए। पर जब वह सो जाता है उस समय कुछ लिख लेती हूँ या समा... Read more
clicks 164 View   Vote 1 Like   11:26am 8 Mar 2013 #आलेख
Blogger: Kusum Thakur
करीब ढाई महीने से अमेरिका में हू, इन ढाई महीने में काफी कम लिख पाई हूँ। सच कहूँ तो पोते को छोड़कर कुछ करने का मन ही नहीं होता। उसके साथ एक एक पल मेरे लिए अनमोल हैं। होता है किसी और काम में लग गई तो कुछ अनमोल घड़ियाँ छूट न जाए। पर जब वह सो जाता है उस समय कुछ लिख लेती हूँ य... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   11:26am 8 Mar 2013 #
Blogger: Kusum Thakur
करीब ढाई महीने से अमेरिका में हू, इन ढाई महीने में काफी कम लिख पाई हूँ। सच कहूँ तो पोते को छोड़कर कुछ करने का मन ही नहीं होता। उसके साथ एक एक पल मेरे लिए अनमोल हैं। होता है किसी और काम में लग गई तो कुछ अनमोल घड़ियाँ छूट न जाए। पर जब वह सो जाता है उस समय कुछ लिख लेती हूँ या समा... Read more
clicks 241 View   Vote 1 Like   11:26am 8 Mar 2013 #आलेख
Blogger: Kusum Thakur
 बर्फ से ढके पेड़ पौधे  प्राकृतिक आपदा पर तो किसी का वश नहीं होता। परन्तु जब बच्चे या प्रिय जन साथ में न होकर हजारों मील दूर या दूसरे देश में हों तो किसी भी तरह के आपदा के आने पर चिंता होना स्वाभाविक है। अमेरिका के न्यू जर्सी में मेरा छोटा बेटा रहता है जहाँ  से मैनहैटन (न... Read more
clicks 170 View   Vote 1 Like   9:22pm 10 Feb 2013 #आलेख
Blogger: Kusum Thakur
( मेरी एक पुरानी कविता, जिसे मैं कुछ बरसों पहले अपने अमेरिका प्रवास के दौरान एक अप्रवासी भारतीय को ध्यान में रखकर लिखी थी। आज मैं अमेरिका में हूँ, अनायास ही यह कविता याद आ गई। )"मुझे आज मेरा वतन याद आया"मुझे आज मेरा वतन याद आया।ख्यालों में तो वह सदा से रहा है , मजबूरियों ने ... Read more
clicks 147 View   Vote 1 Like   1:52am 26 Jan 2013 #कविता
Blogger: Kusum Thakur
"सह सको मुमकिन नहीं" है नशा ऐसी कहो क्या सह सको मुमकिन नहींसो रहे क्यों अब तो जागो सह सको मुमकिन नहींहाथ अब कुर्सी जो आई, धुन अरजने की लगीमृग मरीचिका जो कहें , सह सको मुमकिन नहीं  सच दिखा सकते मगर आँखें वो मूंदे हैं विवसबिखर गए सपने अधूरे, सह सको मुमकिन नहीं कर(टैक्स)... Read more
clicks 138 View   Vote 1 Like   5:26pm 14 Jan 2013 #ग़ज़ल
Blogger: Kusum Thakur
 "आजादी हमें खैरात में नहीं मिली है उसके लिए हमारे देश के अनेको देश भक्तों ने जान की बाजी लगाकर देश पर मर मिटने की कसम खाई और शहीद हुए. उनके वर्षों की तपस्या और बलिदान से हमने आजादी पाई है ". झंडा के सामने यह हर वर्ष ऐसे बोला जाता है मानो हम प्रतिज्ञा कर रहे हों कि इस देश ... Read more
clicks 165 View   Vote 1 Like   7:05am 18 Aug 2012 #आलेख
Blogger: Kusum Thakur
 "आजादी हमें खैरात में नहीं मिली है उसके लिए हमारे देश के अनेको देश भक्तों ने जान की बाजी लगाकर देश पर मर मिटने की कसम खाई और शहीद हुए. उनके वर्षों की तपस्या और बलिदान से हमने आजादी पाई है ". झंडा के सामने यह हर वर्ष ऐसे बोला जाता है मानो हम प्रतिज्ञा कर रहे हों कि इस देश ... Read more
clicks 179 View   Vote 1 Like   7:05am 18 Aug 2012 #आलेख
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