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भूषण (मैथिली गद्य पद्य )

भाषा, बोली सब किछु मीठगर, प्रीत हमर संदेश।नमन हे पावन मिथिला देश।।जग जननी सीता केर जननी, सकल जगत मे नाम।जतय अयोध्या सँ मोहित भऽ, आयल दुल्हा राम।उगना बनिकय दौड़ल आयल, मिथिला स्वयं महेश।नमन हे पावन मिथिला देश।।स्वाभिमान सँ भरल अयाची, भेल कतेक विद्वान।विद्यापति, मंडन के...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
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  September 4, 2014, 8:30 am
रंग फागुन के चढ़लय नगरिया मेलोक गाबय जोगीरा देहरिया मेरंग फागुन के ------------भैया केँ भोरे सँ भाँगे के ताल छैआँखि देखू भौजी के तामस सँ लाल छैखसलय सड़क दुपहरिया मेरंग फागुन के ------------लाल कियो हरियर कियो छै कारीफाटल छै कुरता भीजल छै साड़ीतैयो घुमय सब बजरिया मेरंग फागुन के ------------...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
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  March 10, 2014, 7:19 am
एहि विषय केर स्वाभाविक रूप सँ दुई भाग भऽ जायत अछि। पहिल भाग -मैथिली बाल साहित्यक भाषाआ दोसर भाग -मैथिली बाल साहित्यक भबिष्य। आऊ एहि दुनु विषय पर हम अप्पन बात संक्षेप मे कही। लेकिन ताहि सँ पहिने बाल साहित्य सँ की तात्पर्य? बाल साहित्यक अर्थ की? वो साहित्य जे नेना भुटकाक ...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
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  October 8, 2013, 8:55 pm
हमर गीतनीक कहय लोकसुनियौ मीतभोगल सत्यबनेलहुँ कविता आतम कथ्यकिनको नीककिनको अधलाहहम बताहहोश मे जीबूनहि तऽ नोर पीबूश्रम जीवनकविता प्राणहरदम प्रयाससुमन-प्यास...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
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  September 21, 2013, 4:59 pm
जाति पाति के नाम पर, खूब चलल अछि राज।कहिया जागब यौ सुमन, टूटत जखन समाज?मीठगर बोली सुनिकय, मोन बढ़ल विश्वास।मिथिला डूबल पानि मे, मेटि सकल नहि प्यास।।भागि रहल युवजन सुमन, छोड़ि छाड़िकय गाम।बन्द भेल उद्योग सब, सरकारी परिणाम।।मिथिला सँ बाहर सुमन, उन्नत मैथिल लोक।ध्यान हुन...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :
  July 16, 2013, 8:29 am
बात जौं मोन के नहि केलहुँ, तऽ फेर की केलहुँ?प्रीत केर दीप नहि जरेलहुँ, तऽ फेर की केलहुँ?कतेको लोक खसैत भेटत, रोज दुनिया मेएको टा लोक नहि उठेलहुँ, तऽ फेर की केलहुँ?लगल छी जोड़ घटावे मे, हम भरि जिनगी   अपन हिसाब नहि लगेलहुँ, तऽ फेर की केलहुँ?ज्ञान, धन खूब बढ़ेलहुँ हम गाम सँ बाह...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :गज़ल
  January 19, 2013, 6:48 pm
लोक अप्पन रहय वा कि अदना रहयहुनक मन मे सदरिखन सपना रहयलोक बुझय कियै मोल मरले के बादछोड़ि देलक जे दुनिया वो गहना रहयपैघ  केँ मान दैत बात खुलिकय करूमुदा बाजू उचित जे भी कहना रहयमाय बापो तऽ जीबैत भगवान छीनाम हुनके जपू जिनक जपना रहयहो उचित आचरण छी सभा मे सुमनचाहे बैसी ओतय ...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :गज़ल
  January 14, 2013, 8:19 am
जोश तखन होयत सफल, सुमन हृदय मे होश।भेटत किछु मदहोश छथि, जागल मे बेहोश।।के किनका सँ कम एतय, अप्पन बातक मानि।सूखि रहल अछि नित सुमन, लोकक आँखिक पानि।।बूढ़ पुरानक बात के, सुमन आय की मोल?मुँह टेढ़ सुनितहि करत, जेना खेलथि ओल।।काज सुमन की ज्ञान के, जे बन्धन के मूल?अहंकार पढ़िकय ...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :दोहा
  November 17, 2012, 7:20 am
गामक जागरूक आ उत्साही लोकक सहयोग सँ काल्हि चैनपुर मे "गामक विकास लेल मैराथनक" सफल आ ऐतिहासिक आयोजन भेल। आय गाम मे "क्विज" प्रतियोगिताक आयोजन अछि। सचमुच एक नूतन दिशा आ प्रशंसनीय प्रयास। बधाई के पात्र छथि आयोजनकर्ता सब।आय गाम मे काली पूजाक दोसर दिन छी। आय दुनु काली घर मे ...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :
  November 14, 2012, 8:55 am
उत्साहित युवजन सुमन, ताकि रहल आयाम।भाव सभक मोनक बनल, विकसित हम्मर गाम।।चैनपुर छी गाम हमर, जिला सहरसा बीच।नेता, मंत्री जे सुमन, काज हुनक छल नीच।।देर, मुदा जागल युवा, भरल मोन मे जोश।बात खुशी के ई सुमन, बाँचल सभहक होश।।शुरू करब नहि अछि कठिन, जारी राखब काज।निश्चित फल भेटत सु...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :दोहे
  November 1, 2012, 8:24 am
विजया दशमीक दिन। गामक मूर्ति-विसर्जनक पश्चात, गामक लोक सब गजानन बाबूक दरवाजा पर जमा भेलाह। बुझियो जे आन दिनका जेकाँ एक तरह सँ चौपाले लागि गेल। एक ग्रामीणक प्रश्न छल जे आय सम्पूर्ण देश मे विजया दशमीक पर्व अनेकानेक तरीका सँ मनाओल जाऽ रहल अछि। परन्तु अपना सभहक गाम घर मे ...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
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  October 25, 2012, 7:04 am
दिन राति जतऽ देखू ततऽ जाने अनजाने प्रायः सब कियो अप्पन अप्पन विशिष्टता (अहंकार सेहो कहि सकय छी) स्थपित करय मे लागल रहय छथि। बस अवसर भेटबाक चाही। एक महिला मित्र (या मित्राणी जे कही) सँ बातचीत होइत छल। अप्पन विशिष्टताक बोध करबैत बजलीह - हम एहि कारणे अमुक संस्था छोड़ि देलह...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :
  October 13, 2012, 9:04 pm
दिन राति जतऽ देखू ततऽ जाने अनजाने प्रायः सब कियो अप्पन अप्पन विशिष्टता (अहंकार सेहो कहि सकय छी) स्थपित करय मे लागल रहय छथि। बस अवसर भेटबाक चाही। एक महिला मित्र (या मित्राणी जे कही) सँ बातचीतक होइत छल। अप्पन विशिष्टताक बोध करबैत बजलीह - हम एहि कारणे अमुक संस्था छोड़ि देल...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :
  October 13, 2012, 9:04 pm
गजानन बाबूक दरवाजा पर साँझक समय आय पुनः चौपाल सजल छल। गामक लोक सब अपना अपना काज सँ निवृत भऽ सब दिनक भाँति चौपाल मे आबि बैसल रहथि। आय गजानन बाबू समाज मे व्याप्त भ्रष्टाचार आ अन्य बुराई पर चिन्तित रहथि। भ्रष्टाचार सँ सम्पूर्ण देश मे हहाकार मचल अछि। अखबार, रेडियो, टेलीवी...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :
  October 11, 2012, 9:04 am
मँहगाई रोज बढ़ले जाऽ रहल अछि। कहियो डीजल कहियो रसोई गैस तऽ कहियो पेट्रोल। कोन दिन कोन चीजक दाम सरकार बढ़ाऽ देत कहब कठिन? लोक तबाह भऽ गेल अछि जोड़ैत जोड़ैत। हमरा तऽ कखनो काल लागैत अछि जे आदमी छोड़ि सब किछु मँहगे भऽ रहल अछि। आय गामक चौपाल पर गजानन बाबू आबितहिं निराशा-भाव ...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
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  September 20, 2012, 8:13 am
आय चौपाल मे गजानन बाबूक चेहरा किछु उखड़ल उखड़ल आ किछु गम्भीर सेहो बुझना गेल। कारण बुझबाक प्रयास केलहुँ तऽ किछु देर बाद बजलाह की कहू? जेहने अपना मिथिला मे मातृभाषा मैथिलीक दशा अछि किछु किछु ओहने हाल राज-भाषा (आयधरि संवैधानिक तौर राष्ट्र-भाषा नहि) हिन्दीक देखवा मे आबि र...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
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  September 13, 2012, 8:48 am
सब साल जेकाँ एहियो साल शिक्षक दिवस बीत गेल। एकटा आओर अघोषित छुट्टीक दिन शिक्षकगण हेतु। महान शिक्षा-शास्त्री डा० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जीक जन्म दिवस आ जिनक जीवन यात्रा एक शिक्षकक के रूप मे शुरू भेल आ देशक सर्वोच्च पद राष्ट्रपति तक पहुँचल। हुनके सम्मान मे ई शिक्षक दि...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
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  September 6, 2012, 8:42 am
गामक बाते अद्भुत होइत अछि। एका पर एक लोक आ प्रतिभा। एहने प्रतिभावान व्यक्तित्व मे सँ एक छथि धनेश्वर जी। यथा नाम तथा गुण। खूब टाका पैसावला करोड़पति लोक। एहि धनक अर्जन मे हुनक कृपणताक अर्थात् कंजूसीक बहुत योगदान। आयधरि ज्ञात अज्ञात कंजूसीक जतेक धारा वा विधा देखबा मे आ...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :हास्य-व्यंग्य
  August 30, 2012, 9:28 am
यौ ककरा की, कखन कहबय, कनेटा सोचियो मन मेजेबय कठियारी आ हँसबय, कनेटा सोचियो मन मेकहब आभार अछि भारी, ग्रहण कियै मुँह पर लागलकि हँसिकय दुख प्रगट करबय, कनेटा सोचियो मन मेस्वजन दुख मे अगर कानय, तखन की मोल सम्पति केकि टाका सँग अहाँ जरबय, कनेटा सोचियो मन मेएखन सम्बन्ध परिवारक, ज...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :ग़ज़ल
  July 4, 2012, 8:40 pm
यौ ककरा की, कखन कहबय, कनी टासोचियो मन मेजेबय कठियारी, आ हँसबय, कनी टा सोचियो मन मे कहब आभार भेल  भारी, ग्रहण अछि मुँह पर लागल कि हँसिकय दुख प्रगट करबय, कनी टा सोचियो मन मे स्वजन दुख मे अगर कानय, तखन की मोल सम्पति के कि टाका सँग अहाँ जरबय, कनी टा सोचियो मन मे एखन सम्बन्...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :ग़ज़ल
  July 4, 2012, 8:40 pm
बात कहय मे नीक छल, बेटा गेल विदेश।मुदा सत्य ई बात छी, असगर बहुत कलेश।।विश्व-ग्राम केर व्यूह मे, टूटि रहल परिवार।बिसरि गेल धीया-पुता, दादी केर दुलार।।हेरा गेल अछि भावना, आपस के विश्वास।भाव बसूला के बनल, भोगि रहल संत्रास।।शिक्षित केलहुँ कष्ट मे, पूजि पूजि भगवान।जखन जरूर...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :दोहा
  May 27, 2012, 9:19 am
गीत लिखलहुँ आयतक जे, भावना के सँग मेताहि कारण अछि सुमन के, रंग श्यामल रंग मेजे एखन तक भोगि चुकलहुँ, गीत आ कविता लिखलकिछु समाजिक व्यंग्य दोहा, किछ गज़ल के ढंग मेयाद आबय खूब एखनहुँ, कष्ट नेनपन के सोझाँ नौकरी तऽ नीक भेटल, पर फँसल छी जंग मेछोट सन जिनगी कोनाकय, हो सफल नित सोचलहुँ...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :ग़ज़ल
  May 23, 2012, 8:31 pm
मन सुरभित छल आस मिलन के, प्यास नयन मे तृषित नयन केबाजल हिरदय धक धक धक धक, सुनितहिं धुन पायल छन छन केदशा पूर्व के पहिल मिलन सँ, कहब कठिन ई सब जानय छीसाल एक, पल एक लगय छल, बढ़ल कुतुहल छन छन मन केकोना बात शुरू करबय हम, सोचि सोचिकय मन थाकल छलभेटल छल हमरा नहि तखनहुँ, समाधान की, एहि उ...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :ग़ज़ल
  May 18, 2012, 12:55 pm
धिया-पुता देखिकय बुलन्द भऽ गेलहुँलड्डू नहि जिलेबी कलाकन्द भऽ गेलहुँकेहेन सहज मुख पर मुस्कान छैछन मे झगड़ा छनहि मिलान छैतीरथ बेरागन लोक करय छथिधिया-पुता सद्यः सोझाँ भगवान छैहँसी खुशी देखिकय बुलन्द भऽ गेलहुँलड्डू नहि जिलेबी कलाकन्द भऽ गेलहुँबनि कियो इन्जन रेल चलाब...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :गीत
  May 10, 2012, 7:07 pm
मीठगर बोली हम जनय छीतैयो तीतगर बात करय छीजौं साहित्य समाजक दर्पणपाँती मे दर्पण देखबय छीमिथिला के गुणगान बहुत भेल जे आजुक हालात, लिखयछीभजन बहुत मिथिला मे लिखलअछि पाथर, भगवान देखय छीरोटी पहिने या सुन्दरतासभहक सोझाँ प्रश्न रखय छीभूख, अशिक्षा, बेकारी सँगसाल साल हम बाढ़...
भूषण (मैथिली गद्य पद्य )...
Tag :ग़ज़ल
  May 9, 2012, 7:55 am
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