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Blog: मेरा आईना

Blogger: श्यामल सुमन
दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र यानि भारत के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यह देश संविधान से चलता है और यह सैद्धांतिक रूप से सही भी है। जिस प्रकार देश में कार्यपालिका के संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति होते हैं और व्यवहारिक प्रमुख प्रधानमंत्री। ठीक उसी तरह संविधान तो सबसे ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   2:34pm 26 Sep 2016 #
Blogger: श्यामल सुमन
अन्तर्जाल की दुनिया में प्रायः हम सब लेखन, पठन, पाठन, परस्पर प्रतिक्रिया प्रेषण और धन्यवाद ज्ञापन अपनी अपनी रुचि, समय और सुविधा के हिसाब से आपस में शब्द और संकेत के माध्यम से व्यक्त करते हैं फिर कभी कभी ऐसे पोस्ट क्यों दिखाई देते जिसमें मित्रों की सूची में शामिल कुछ मित... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   2:55am 12 Aug 2015 #
Blogger: श्यामल सुमन
शाबाश! मेरे भाई रामपाल!  कमाल कर दिखाया आपने! आज पूरा "संत-समाज"को आप पर फक्र है। धन्य हैं आपके भक्तगण जिनकी चट्टानी एकता के आगे पूरी शासन व्यवस्था लाचार दिखी। आपके इस कार्य से अपने पूर्ववर्ती संत भिण्डरावाले की याद आना स्वाभाविक है जिनको सरकारी आततायियों ने आखिर शही... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   2:32am 18 Nov 2014 #
Blogger: श्यामल सुमन
याद आती है आज से ३० साल पहले की घटना यानि सन १९८४ के अक्टूबर माह की जब मैं  पहली बार साईकिल छोड़कर मोपेड (उन दिनों सुवेगा) की सवारी करने लगा था। कितना खुश था मैं? क्या कहूँ? शुरू शुरू में जब सड़कों पर मोपेड दौड़ाता था तो लगता था कि हवा में उड़ रहा हूँ। उससे भी बड़ी बात कि चल... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   3:33pm 5 Nov 2014 #
Blogger: श्यामल सुमन
अक्सर लोग कहते हैं कि डरना बुरी बात है और यह भी कहते हैं कि एक व्यवस्थित जिन्दगी के लिए डर का होना भी जरूरी है वरना हम में से अधिकांश लोग स्वेच्छाचारी हो जाएंगे।दोनों ही स्थितियाँ सच है और इसको स्थापित करने के सबके अपने अपने तर्क भी।डर - किस बात का? हम सबने जो कुछ (सुख-सुवि... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   2:41pm 5 Nov 2014 #
Blogger: श्यामल सुमन
शुरूआती दिनों से आजतक और आगे भी पत्रकारिता जन जागरण के लिए एक पवित्र किन्तु जोखिम भरा काम रहा है। इतिहास साक्षी है कि आमलोगों की बेहतरी और उनके बीच चेतना विकसित  करने के लिए समर्पित पत्रकारों ने कितनी कुर्बानियाँ दी है। यहाँ तक कि गलत नीतियों के कारण ताकतवर सत्ताधी... Read more
clicks 293 View   Vote 0 Like   3:32pm 8 Oct 2013 #
Blogger: श्यामल सुमन
 "यह आरोप मेरी बढ़ती लोकप्रियता के कारण विरोधियों ने साजिश के तहत लगाया है" - "मुझे भारत की न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है" - आदि आदि ---पिछले २-३ दशकों से आरोपी रहनुमाओं के ऐसे खोखले बयान सुन सुनकर हम सभी आजिज हो गए हैं। जब जब न्यायालय द्वारा देशहित में कोई महत्वपूर्ण फैसल... Read more
clicks 267 View   Vote 0 Like   3:54am 25 Sep 2013 #
Blogger: श्यामल सुमन
एक सवाल से अपनी बात शुरू करना चाहता हूँ। संवैधानिक रूप से आज भारत की "राष्ट्र-भाषा" क्या है? उत्तर है - कोई भाषा नहीं। आजादी के सड़सठ साल बाद भी हमारे राष्ट्र भारत की राष्ट्रभाषा तक संविधान में  स्पष्ट नहीं है। कितना दुखद है? हाँ खुशी की भी एक बात है कि संवैधानिक रूप से भा... Read more
clicks 336 View   Vote 0 Like   3:41am 11 Sep 2013 #
Blogger: श्यामल सुमन
केन्द्र सरकार का तुगलकी - फरमान एकाएक २३-०५-२०१२ को पेट्रोल की कीमत ७-५४ रुपये पैसे प्रति लीटर बढ़ा दी गयी। देश के हर पेट्रोल पम्पों पर अपनी अपनी गाड़ियों के साथ रात १२ बजे तक ग्राहकों की भारी भीड़ ताकि अपने अपने संसाधन और वाहन के हिसाब से वे अधिक से अधिक पेट्रोल भराकर बढ... Read more
clicks 313 View   Vote 0 Like   3:20am 31 May 2012 #चिंतन
Blogger: श्यामल सुमन
हमारे, आपके, प्रायः सबके जीवन में जाने अनजाने कुछ शब्दों के ऐसे प्रयोग होते रहते हैं जिनके शाब्दिक अर्थ कुछ और लेकिन उनके प्रचलित अर्थ कुछ और। मजे की बात है कि शब्दार्थ से अलग (कभी कभी विपरीत भी) अर्थ ही सर्व-स्वीकार्य भी हैं। इस प्रकार के कुछ शब्दों को को समेटते हुए प्रस... Read more
clicks 268 View   Vote 0 Like   2:42am 20 Apr 2012 #चिंतन
Blogger: श्यामल सुमन
अपनेअपनेढंगसेलोगआध्यात्मिक-वैज्ञानिकतर्कोंकेआधारपरकहतेरहतेहैंकिजीवनमेंअलगअलगरंगोंकाअलगअलगप्रभावपड़ताहै।लगताहैयहकिंचितसचभीहै।तभीतो "उजलाकपड़ा"पहनेलोगोंके"कालेधन"कोनिकलवानेकेलिए "भगवाधारियों"केसाथसाथपूरेदेशमेंलोगगुस्सेसे"लालपीले"होरहेहैंऔरलगा... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   4:05pm 1 Apr 2012 #
Blogger: श्यामल सुमन
सच तो ये है कि चवन्नी से परिचय बहुत पहले हुआ और "चवनिया मुस्कान"से बहुत बाद में। आज जब याद करता हूँ अपने बचपन को तो याद आती है वो खुशी, जब गाँव का मेला देखने के लिए घर के अभिभावक द्वारा एक चवन्नी हथेली पर रख दिया जाता था "ऐश"करने के लिए। सचमुच मन बहुत खुश होता था और चेहरे पर स... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   3:05am 30 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
पिछलेदोआमचुनावोंमेंलगातारकांग्रेसकी मनमोहनसिंहजीकेनेतृत्वमेंजोड़-तोडकेसरकारक्याबन गयी, कांग्रेसकेकईनेताओंकोभ्रमहोगयाहैकिशायदउन्होंनेसदाकेलिए"दिग्विजय"करलियाहै औरबहुतेरेऐसेहैंजिनकीभाषालगातारतल्खहोतीजारहीहै।जबकिहकीकतयहहैकिअकेलेकांग्रेसकोनतो... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   3:29am 24 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
कई बर्षों का अभ्यास है कि प्रतिदिन सबेरे सबेरे उठकर कुछ पढ़ा लिखा जाय। यह समय मुझे सबसे शांत और महफूज लगता है इस दृष्टिकोण से। लेकिन जब भी कुछ पढ़ने लिखने के लिए तत्पर होता हूँ तो मुझे दो अलग अलग स्थितियों का सामनाअक्सरऔर आवश्यक रूप से करना पड़ता हैं।प्रथम -टी०वी० ... Read more
clicks 244 View   Vote 0 Like   2:10pm 21 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
दुनिया भाग रही है। हम भी भाग रहे हैं लगातार इस भागती दुनिया के पीछे। क्यों भाग रहे हैं? किसके लिए भाग रहे हैं? कुछ भी ठीक ठीक पता नहीं? लेकिन सच यही है कि भाग रहे हैं। न सोने का वक्त और न ही हँसने का। धीरे धीरे आदमी और रोबोट के अन्तर को समझना मुश्किल हो रहा है।मुस्कुराना, हँस... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   2:47am 19 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
निगमानन्द जी बिना हो हल्ला के इस "असार" संसार को छोड़ कर चले गए और छोड़ गए गंगा को उसकी उसी पीड़ाके साथ जिसके लिए उन्होंने जान दिया। इसी के साथ उनके जननी और जनक की मानसिक छटपटाहट को भी समझने की जरूरत है। निगमानन्द कब अनशन पर बैठे? कब कोमा मे गए? प्रायः सभी अनजान। उसी अस्प... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   12:08pm 17 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
पानी और प्रशासन का स्वाभाव एक सा है, जिसका प्रवाह हमेशा ऊपर से नीचे की ओर होता है। अन्ना के तथाकथित सफल अभियान के बाद आजकल भारत में आम पीड़ित लोगों के साथ साथ भ्रष्टाचारी भी "भ्रष्टाचारविरोधीआन्दोलन"में सक्रिय भूमिका अदा करते हुए दिखाई पड़ने लगे हैं। प्रत्यक्षतः आम ... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   3:01am 15 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
जबसेकलमघिसने"सारी"- अबतोकहनाहोगा"कीबोर्ड"घिसनेकारोगलगाहै, सबेरे५बजेउठजाताहूँ।ठीकउसीसमय"पत्नी- कृपा"सेवोचैनलखुलजाताहैजहाँरामदेवबाबायोगासनकीबातपूरेजोशमेंबतारहे होतेहैं।टी०वी०को"फुलवाल्यूम"केसाथखोलाजाताहैताकिवोदूसरकमरेमेंभीकामकरेंतोउन्हेंसुननेमें... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   2:05pm 14 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
जबसेकलमघिसने"सारी" - अबतोकहनाहोगा"कीबोर्ड" घिसनेकारोगलगाहै, सबेरे५बजेउठजाताहूँ।ठीकउसीसमय"पत्नी- कृपा"सेवोचैनलखुलजाताहैजहाँरामदेवबाबायोगासनकीबातपूरेजोशमेंबतारहे होतेहैं।टी०वी०को"फुलवाल्यूम"केसाथखोलाजाताहैताकिवोदूसरकमरेमेंभीकामकरेंतोउन्हेंसुननेमे... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   2:05pm 14 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
एकदिनअचानकडोलीऔरअर्थीकीमुलाकातआमनेसामनेहोगयी।एकओरसेडोलीमेंनयीदुल्हनसवारतो दूसरीओरसेकिसीकीअर्थी।आमनासामनाहोनेपरअर्थीनेडोलीसेपूछा - बहनक्याहालचालहै? धीरधीरेबातचीतकाक्रमआगेबढ़ा।कुछ हीदेरमेंडोलीअपनेरूप-रंगपरइतरानेलगीऔरजोशमेंकुछकटुवचनबोलगयी।डो... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   1:17pm 13 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
देशकेकिसीभागमेंचुनावकीघोषणाहुईकिनहींविभिन्नराजनैतिकदलोंकीप्रचारगाड़ियोंकेकानफोड़ूस्पीकरसेएकहीआवाजआतीहै - हमारीपार्टीकोवोटदो - हम "विकासकीगंगा" बहादेंगे।यहदीगरबातहैकिगंगाकोस्वच्छकरनेकीयोजनाज्योंकीत्योंपड़ीहैलेकिनइसयोजनाकेनामपरकितनोकी "व्यक्ति... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   1:09am 12 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
बचपनसेहीसुनतेपढ़तेआयाहूँकिभारत"जगत-गुरु"है।सभ्यता, संसकृति, ज्ञान, विज्ञानकेप्रकाशवितरणकेसाथसाथगणितकेशून्यसेलेकरनौतककेअंकोंकाजन्मदाताभारतहीतोहै।कमोवेशयहीस्थितिआजकलभीहै।हमेंआजभी"जगत-गुरु"होनेकागौरवहै।मेरीबातोंसेआपसहमतहोसकतेहैं, असहमतहोसकतेहैं, ... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   3:27am 11 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
शेरकीशादीमेंचूहेकोदेखकरहाथीनेपूछा - "भाईतुमइसशादीमेंकिसहैसियतसेआयेहो?" चूहाबोला, " जिसशेरकीशादीहोरहीहै, वहमेराछोटाभाईहै।" हाथीकामुँहखुलाकाखुलारहगया, बोला, "शेरऔरतुम्हाराछोटाभाई?" चूहा - "क्याकहूँ? शादीकेपहलेमैंभीशेरहीथा।" यहतोहुईमजाककीबात, लेकिनपुरानेसमयस... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   12:25am 10 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
मैंसोचताहूँकिमैंसोचसकताहूँऔरयहभीसोचताहूँकिआखिर क्यों सोचताहूँ? सिर्फसोचनेसेतोकोईकामअंजाम तक नहीं पहुंचेगा, कुछनकुछकरनाही पड़ता है।साथहीयहभीसचहैकिबिनासोचेकोईकामढ़ंगसे कियाभीतो नहीं जासकता।फिरसोचमेंपड़जाताहूँकिक्याकियाजाय? बिनाकर्मकेसोचनेकाकोईअर... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   1:29am 9 Jun 2011 #
Blogger: श्यामल सुमन
कहनेकोतोसाँसेंचलतींहैंयात्रा-क्रमभीप्रतिपलबढ़ताजाताहै।मैंनेतोदेखासौबर्षोंमेंमुश्किलसेकोईएकदिवसजीपाताहै।।अचानक आज अपने जिन्दगी के दिनों का मोटे तौर पर हिसाब करने लगा। कहते हैं कि साहित्यवैयक्तिकअनुभूतिकीनिर्वैयक्तिकप्रस्तुतिहैऔर आज उसी व्यक्तिगत अ... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   2:31am 8 Jun 2011 #
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