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मनोरमा

जीवन की शैली कभी, घर घर में था योग।युग बदला अब देखिये, योग बना उद्योग।।ध्यान, धारणा भूलकर, कुछ आसन पर जोर।कसरत होता देह का, मन रहता कमजोर।।योग जरूरत आज की, करो नियम से यार।खुद से होगा प्यार तब, दुनिया से भी प्यार।।जीवन का मतलब तभी, अगर रहें नीरोग।पर मजहब से जोड़कर, व्यर्थ झ...
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  June 24, 2016, 8:59 am
भले NOSE को EAR बोलनहीं किसी को DEAR बोलशासक का है खौफ यहाँसाहस को भी FEAR बोलरिश्ते, सरकारी जनता सेदूर बहुत, पर NEAR बोलजहर उगलते, जो घर घरउस सियार को DEER बोलभूख सुमन की, तुमको क्याBEAR भर के CHEER बोलनोट - हिन्दी प्रेमियों से मुआफी की अपील के साथ ...
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  June 24, 2016, 8:52 am
प्रज्ञा नतिनी सुमन की, बरस उम्र बस चार।पर देखा तस्वीर में, दुलहन सा श्रृंगार।।बिटिया, नतिनी या बहन,  नारी सदा अनूप।आँखें हटती है नहीं, मोह लिया यह रूप।।प्रज्ञा मेरी गजल को, गाती है भरपूर।टूटे फूटे शब्द से, करती गम को दूर।।रूप मनोहर जो यहाँ, टिकते जब तब नैन।बिना चुहलबाज...
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  June 24, 2016, 8:47 am
जनता की तकलीफ पर, करता कौन विचार।आज न्याय सन्देह में, बिका हुआ अखबार।।छले गए जन जन सदा, मची हुई है लूट।बड़े लोग पाते रहे, यहाँ अधिकतम छूट।।मुद्दों पर ना बोलना, दिल को तब आघात।सुना रहे जबरन मगर, अपने मन की बात।।पक्ष विपक्षी लड़ रहे, हैं आरोप अनेक।मौसेरे भाई सभी, अन्दर अन्द...
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  June 24, 2016, 8:31 am
हड्डी टूटी पाँव की, पच्चीस दिन विश्राम।परिजन संग बीता समय, कल से होगा काम।।पढने का मौका मिला, नया लिखा कुछ रोज।खुशियाँ मिलतीं है अगर, दुख में सुख की खोज।।मिलने को आते रहे, रोज शहर के लोग।यूँ तो खर्चा भी बढ़ा, अच्छा लगा सुयोग।माता कहती थी मुझे, सुन लो एक विचार।सुजन स्वजन आ...
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  June 24, 2016, 8:28 am
अच्छे दिन की तैयारी हैया रोने की फिर बारी हैक्यों दशकों से छले गए हमनादानी या लाचारी हैवादे बदले, शासक बदलाजनता अबतक बेचारी हैकौन धरम है ऊंचा, नीचाइस पर भी मारामारी हैमानवता भी गयी रसातलयह आयोजन सरकारी हैदहशतगर्दी बढती जातीकारण घर घर बेकारी हैलूटा जिसने देश अभीतकने...
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  June 24, 2016, 8:23 am
जिन्दगी भी आपकी है जिन्दगानी आपकीमौत पे कहते जो अक्सर वो कहानी आपकीराह अपने से बनाकर जो शुरू करते सफरयाद करते लोग सदियों तक निशानी आपकीवक्त की पहचान करना वक्त पे मुश्किल जराचूकने पर कह रहे सब ये नदानी आपकीकोशिशें पुरजोर करते ढंग सबके हैं अलगआप हो जाते सफल तो बुद्धिम...
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  June 24, 2016, 8:18 am
चाहत है ऐसी दुनिया की सब हो एक समान जीकब समझेंगे इक दूजे को अपने सा इन्सान जीकहते, पढते, सुनते रहते हम सब भाई भाईमगर चमन के अमन में किसने जब तब आग लगाईआओ मिलके कर लें हम सब उनकी भी पहचान जीकब समझेंगे इक दूजे को अपने सा इन्सान जीबदल रहे हर युग में शासक पर जनता का हाल वहीजो सब...
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  June 18, 2016, 8:11 am
साज वही, श्रृंगार वही हैदुखियों का संसार वही हैयुग बदला कहते हैं सारेयुग का भ्रष्टाचार वही हैबेचे श्रम को तन भी बिकतेबिकने को बाजार वही हैरोटी पहले फिर ये दुनियाजीवन का आधार वही हैशासक बदले युगों युगों सेसत्ता का व्यवहार वही हैआमलोग जब हाथ मिलातेशोषण का निस्तार वही ...
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  April 17, 2016, 9:33 am
वो तेरा सपनों में आना, आकर मुझको रोज सतानामगर हकीकत में क्यूँ लगता झूठा तेरा प्यार जताना?दिल में है संदेह तुझे मैं दुश्मन या मनमीत कहूँ?तू ही बता कि इस हालत में कैसे तुझसे प्रीत करूँ?लोग प्यार में अक्सर खोते बोझ बनाकर खुद को ढोतेबात मुहब्बत की जो करते वही मुहब्बत पर क्य...
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  April 17, 2016, 9:30 am
सुख सुविधा की है कमी, पर ममता की छाँव।बदल रहे सब कुछ मगर, गाँव आज भी गाँव।।इक दूजे को मानते, अपना घर परिवार।यही खासियत गाँव की, आता दिल में प्यार।।काकी, भौजी गाँव भर, रिश्ते में सब लोग।अवसर आने पर करे, आपस में सहयोग।।बनते रिश्ते शहर में, ज्यों मुट्ठी में रेत।मिलकर जीते गा...
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  April 17, 2016, 9:14 am
सुख सुविधा की है कमी, पर ममता की छाँव।बदल रहे सब कुछ मगर, गाँव आज भी गाँव।।इक दूजे को मानते, अपना घर परिवार।यही खासियत गांव की, आता दिल में प्यार।।काकी, भौजी गांव भर, रिश्ते में सब लोग।अवसर आने पर करे, आपस में सहयोग।।बनते रिश्ते शहर में, ज्यों मुट्ठी में रेत।मिलकर जीते गा...
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  April 17, 2016, 9:14 am
जहाँ दिलों में प्यार नहीं हैफिर शब्दों में धार नहीं हैबिना तजुर्बे की बातों केअर्थो को आधार नहीं हैमंत्री, संत्री, वादे, नारेपर दिखती सरकार नहीं हैलोकतंत्र में अपने ढंग सेजीने का अधिकार नहीं हैखबरों में खुशियाँ लोगों कीदुख का पारावार नहीं हैसत्ताधारी जो कुछ करतेबि...
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  April 17, 2016, 9:12 am
होठों पे मुस्कान पर, दिल से है बेचैन।कंत विरह की वेदना, स्वतः बरसते नैन।।जंगल के भी जीव में, जगी प्यार की प्यास।फागुन में किसको नहीँ, पिया मिलन की आस।।सारे प्रेमी के लिए, है वसंत सौगात।बातें होतीं आँख से, कमरे में बरसात।।लता लिपटती पेड से, बिना किये परवाह।साजन सजनी के ह...
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  April 17, 2016, 9:08 am
शब्दों से जिसने किया, खुशी खुशी स्वीकार।क्यों उससे मिलता अभी, आधा आधा प्यार।।रीता क्यों उस रीत में, प्रीत रीत विपरीत।मीत जीत लो प्रीत से, तब जीवन संगीत।।चाहत एक सलाह की, मिल जाते भरमार।नहीं समझते प्रेम जो, वही सिखाते प्यार।।प्यारा सा मौसम अभी, मादक मन्द बयार।साजन सजनी...
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  March 12, 2016, 6:27 pm
अगर लडाई हो भाई सेशादी कर लो तन्हाई सेसमाधान निश्चित निकलेगाजरा सोच तू गहराई सेएक एक से ग्यारह बनताजुडता घर पाई पाई सेरौशन घर है पर बच्चे कोमां का प्यार मिला दाई सेकहते रोज खजाना भरतालोग मरे क्यों मंहगाई सेलाखों मंदिर मस्जिद जातेकुछ की दूरी है सांई सेहै विश्वास सुमन...
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  March 12, 2016, 6:25 pm
बदली है यूं सियासत मौसम बदल रहा हैइन्सान को ही इन्सां जैसे निगल रहा हैतकरीर गढते सारे अपने हिसाब से हीहालात उससे बदतर जैसा कि कल रहा हैजो बैठते हैं चुन के शासन के मंदिरों मेंगाली गलौज करते संसद फिसल रहा हैहाथों में ले के माचिस बातें अमन की करतेऊपर से ठीक लगता अन्दर से ज...
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  March 12, 2016, 6:21 pm
इक मुझपे उपकार करोदुश्मन सा व्यवहार करोदुनिया समझे अलग हुएपर चुपके से प्यार करोप्यार समझ के हर्ष हुआपाने को संघर्ष हुआनहीँ मिला तो कोशिश करप्यार मिला उत्कर्ष हुआहरदम तुझको याद करूँखुशियों को आबाद करूंतुम मूरत बन पत्थर कीतुमसे नित फरियाद करूंऊबड-खाबड, समतल हैसोना ...
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  March 12, 2016, 6:19 pm
सबसे पहले देश है, फिर है गाँव समाज।देशभक्ति सिखला रहे, द्रोही बनकर आज।।कहने को करते सभी, संविधान का मान।देशभक्त फिर क्यों भला, तोडे रोज विधान।।सत्ता और विपक्ष का, इक दूजे पे कोप।रोज परस्पर थोपते, साजिश का आरोप।।सबके अपने तर्क हैं, देशभक्ति की आह।मगर हकीकत है यही, आमलोग ...
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  March 12, 2016, 6:15 pm
प्यार कैसे हुआ ये समझ ना सका, प्यार तुमसे मैं करने लगा रात दिन।डूब जाऊं समन्दर में ये डर नहीं, तेरी आँखों से डरने लगा रात दिन।।कान की बालियाँ गेसुओं की तरह, खेलती तेरे चेहरे से, जलता हूँ मैं।नाक में एक नथिया गजब ढा दिया, सच कहूँ तुझपे मरने लगा रात दिन।।रंग बिंदिया का जैसा ...
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  February 16, 2016, 8:22 am
सूर्य लता में ज्यों छिपा, छनकर आती धूप।उसी तरह इस जुल्फ में, तेरा अनुपम रूप।।प्रेम दिवस है सामने, सजा हुआ बाजार।सातों दिन में बांटते, अलग अलग उपहार।।हरदिन हरपल प्रेम का, दिवस बना क्यों खास।पावन सा जो प्रेम है, उसका यह उपहास।।हार भली कि हार भला, करते रहो विचार।एक हार में ...
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  February 16, 2016, 8:17 am
कुछ ऐसा भी गांव नगर होजहाँ हवा में नहीँ जहर होहो बातें जब जब नजरों सेनजरों में ना दोष नजर होभले महल पर है मकान हीझोपडियां हो, लेकिन घर होझुके नहीं हर दर पे जा केदुनिया में ऐसा भी सर होदुनिया कब ऐसी होगी जबबढने का सबको अवसर होजीवन चलता है रिश्तों सेक्यों रिश्तों से हरदम ड...
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  February 16, 2016, 8:12 am
स्वीकार भी अनूठा इन्कार है अनूठानजरों से मुस्कुराना वो प्यार है अनूठाजीने को लोग जीते आंसू गमों का पीतेदूरी है फिर भी मुझ पे अधिकार है अनूठासपनों में रोज आना आकर मुझे सतानादुनिया से हट के तेरा इजहार है अनूठामिल के धमाल करना मेरा खयाल रखनामेरी भूल पे भी प्यारा व्यवहा...
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  February 16, 2016, 8:09 am
देखता हूँ  चाँद लेकिन  चाँदनी मिलती नहींयूं तो सांसें चल रहीं पर जिन्दगी मिलती नहींखूबसूरत फूल दफ्तर से घरों तक हैं सजेकागजों के फूल में वो ताजगी मिलती नहींजिनके घर रौशन दिखे हैं बात उनसे कर जरासच यही कि उनके दिल में रौशनी मिलती नहींलोग करते हैं इबादत मजहबी तकरीर ...
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  February 3, 2016, 7:24 pm
कभी संघर्ष जीवन तो मुहब्बत के फसाने भीहजारों जूझ कर जीते कई करते बहाने भीसभी रंगों के मिलने से ही रौशन जिन्दगी होतीसमझकर वक्त को चलते वही पाते ठिकाने भीमजा है रूठने में भी अगर प्रियतम मनाये तोरहीं मजबूरियाँ जो भी अगर वो खुद सुनाये तोजहाँ किचकिच लगे मीठी मुहब्बत के फस...
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  February 3, 2016, 7:18 pm
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