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Khuda Khair kare

अब हमर जात पात के राचर हा चरमरावत जावत हवय, चरवाहा बिन,गाय गरुवा एती ओती भागत जावत हवय, पूना अउ बंगलोर के हवा पानी मा नइ जानन का्य हवय, लैका मन किसम किसम के खिचड़ी पकावत जावत हवय, अउ उंखर खुशी के कारण उंखर दाई ददा मन घलो ऐसनेच, उत्ता धुर्रा खिचड़ी ला बने चांट चांट के खावत जावत ...
Tag :
  February 13, 2013, 9:36 am
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Tag :MERA YAR KAHE
  April 4, 2012, 5:52 pm
मैं तेरे शह्र में बिलकुल नया नया हूं अभी,तेरे वादों के हवालात में बंधा हूं अभी।चराग़ों के लिये मंज़ूर है मुझे मरना,मुकद्दर आंधियों के तेग पर रखा हूं अभी।घिरी है बदज़नी से , हुस्न की गली गोया,लुटाने इश्क़ के इमान को चला हूं अभी।बहुत डरता हूं उजालों की बेख़ुदी से मैं,तेरी यादो...
Tag :तेरे शह्र में।
  February 24, 2012, 6:39 am
मौत से ये दिल रज़ा है,और क़ातिल लापता है।वो समंदर ,मैं किनारा,उम्र भर का फ़ासला है।मैं चरागों का मुहाफ़िज़,वो हवाओं की ख़ुदा है।सब्र की जंज़ीरें मुझको,खुद हवस में मुब्तिला है।सांसें कब की थम चुकी हैं,ज़ख्मे दिल फिर भी हरा है।बेवफ़ाई की ज़मीं पर,शजरे दिल अब भी खड़ा है।चैन भी वो ले गई...
Tag :मौत से रज़ा है।
  February 3, 2012, 10:58 am
वादों की कश्ती पर सवार है दिल,हिज्र के ज़ुल्मों का शिकार है दिल्।तुमसे मिल के करार पाऊंगा,बस यही सोच बेकरार है दिल्।तुमको देकर किनारों की खुशियां,एक समंदर सा बेहिसार है दिल्।तू थी तो बिन पिये नशा सा था,तू गई जब से बेखुमार है दिल्।तेरे खातिर बना के ताजमहल,एक दरवेश का मज़ार...
Tag :ज़ुल्मों का शिकार।
  January 13, 2012, 7:54 am
हमारा घर भी जला दो जो रौशनी कम हो,हमारी झूठी मुहब्बत की बानगी कम हो।अगर ग़रीबों की करनी है सेवा, ये तभी होसकेगा जब ख़ुदा-ईश्वर की बंदगी कम हो।पड़ोसी ,दोस्ती के बीज़ गर न रोपे तो,हमारे खेतों से क्यूं फ़स्ले दुश्मनी कम हो।मिले न राधा तो सलमा से ना ग़ुरेज़ करो,कि बेवफ़ाओं की गलियों क...
Tag :कम हो
  December 4, 2011, 8:29 am
तुम मेरे दर्द की दवा भी हो,तुम मेरे ज़ख़्मों पर फ़िदा भी हो।इश्क़ का रोग ठीक होता नहीं,ये दिले नादां को पता भी हो।शह्रों की बदज़नी भी हो हासिल,गांवों की बेख़ुदी अता भी हो।पेट परदेश में भरे तो ठीक,मुल्क में कब्र इक खुदा भी हो।महलों की खुश्बू से न हो परहेज़,साथ फ़ुटपाथ की हवा भी हो।...
Tag :फ़िदा भी हो।
  November 8, 2011, 8:12 am
आशिक़ी का कोई तो पैमाना होगा,बेबसी के गीत कब तक गाना होगा।चादनी की बदज़नी स्वीकार कर ले,चंद को घर छोड़ या फिर जाना होगा।सर झुका कर हुस्न के नखरे जो झेले,दौरे-फ़रदा में वही मरदाना होगा।दिल समंदर के नशा से निकले बाहर,हुस्न की कश्ती में गर मैखाना होगा।मैं ग़ुनाहे -इश्क़ कर तो लूं...
Tag :क्या होगा।
  October 27, 2011, 8:15 am
अब इश्क़ की गली में कोई पारसा नहीं,सुख, त्याग का सफ़र कोई जानता नहीं।ये दौर है हवस का सभी अपना सोचते,रिश्तों की अहमियत से कोई वास्ता नहीं।फुटपाथ पर गरीबी ठिठुरती सी बैठी हैज़रदारे-शह्र अब किसी की सोचता नहीं।जब फ़स्ले-उम्र सूख चुकी तब वो आई है,मरते समय इलाज़ से कुछ फ़ायदा नहीं...
Tag :कोई जानता नहीं
  October 9, 2011, 8:55 am
ग़मों का ज़िन्दगी भर जो हिसाब रखता है,उसे कभी न खुशी का सवाब मिलता है।कटाना पड़ता है सर जान देनी पड़ती है,किसी वतन में तभी इन्क़लाब आता है।चराग़ों से तुम्हें गर मिलता है उजाला तो,ज़लील चांदनी की क्यूं किताब पढता है।उसे अजीज़ है गो बेवफ़ाई का बिस्तर ,मगर पास वफ़ा का वो नक़ाब रखता है।...
Tag :वो रखता है
  September 26, 2011, 9:32 am
इक धूप का टुकड़ा भी मेरे पास नहीं है,पर अहले जहां को कोई संत्रास नहीं है। ( अहले जहां - जहां वालों को )मंझधार से लड़ने का मज़ा कुछ और है यारो,मुरदार किनारों को ये अहसास नहीं है।कल के लिये हम पैसा जमा कर रहे हैं ख़ूब,कितनी बची है ज़िन्दगी ये आभास नहीं है।मासूम चराग़ों की ज़मानत ले च...
Tag :मेरे पास नहीं है।
  September 18, 2011, 11:28 am
हम दोनों गर साथ ज़माने को क्या,दिन हो या रात, ज़माने को क्या।आज चराग़ों और हवाओं की गर,निकली है बारात, ज़माने को क्या।बरसों हुस्न की मज़दूरी कर मैंने,पाई है ख़ैरात ,ज़माने को क्या।साहिल से डरने वाले गर लहरों,को देते हैं मात, ज़माने को क्या।कोई हुस्न कोई जाम की बाहों में,जिसकी जो औ...
Tag :ज़माने को क्या।
  September 4, 2011, 8:39 am
हर जंग का मिज़ान है हिम्मत ओ हौसला,पर इश्क़ के मकान में ताक़त का काम क्या।आवार घूमता है विरह की गली में चांद,फिर बादलों का चांदनी पर जादू चल गया।मंज़ूर है चरागे-जिगर को शरारे ग़म,महफ़िल-ए-हुस्न जलवा दिखाये तो मरहबा।पतझड़ भरे खेतों में कल आयेगी बहार,हर ज़िन्दगी के साथ है सुख दुख क...
Tag :हौसला
  August 20, 2011, 8:37 am
सावन की घटाओं से तुम काली चुनर लेना,औ ,बिजलियों से पागल आशिक का जिगर लेना।जब दिल के समन्दर को हो इच्छा मिलन की तो,तुम ग़मज़दा हर साहिल को तोड़, सफ़र लेना।गर मन के पहाड़ों पर सैलाबे-हवस छाये,तो सब्रो-वफ़ा से दिल की धरती को भर लेना।जब चांदनी बन छाओ तुम शौक़ की गलियों में,फ़ुटपाथी क़म...
Tag :सूर्य की ख़बर।
  August 12, 2011, 9:34 am
मुझसे सावन की घटा ,ये कह रही है,क्यूं विरह की आग तेरे दर खड़ी है।ऐसे मौसम में ख़फ़ा क्यूं तुझसे साजन ,तेरे ही श्रृंगार में शायद कमी है।कुछ अदा-ए-हुस्न का परचम तो फ़हरा,तुझको यौवन की इनायत तो मिली है।भीख मांगेगा रहम की,तुझसे वो, तूहुस्न की जंज़ीर ढीली क्यूं रखी है।बांध कर क्...
Tag :तेरे दर खड़ी है
  August 7, 2011, 10:26 am
मरने की उम्मीद में बस जी रहा हूं,अपनी सांसों का कफ़न खुद सी रहा हूं।तेरी आंखों के पियाले देखे जब से,मैं शराबी तो नहीं पर पी रहा हूं।जनता के आइनों से मैं ख़ौफ़ खाता ,मैं सियासी चेहरों का पानी रहा हूं।तुम तवायफ़ की गली की आंधियां, मैं,बे-मुरव्वत शौक की बस्ती रहा हूं।क्या पता इ...
Tag :जी रहा हूं।
  July 30, 2011, 10:32 pm
रात की तंग गलियों में सपने मेरे गुम रहे,उनकी यादों के बेदर्द तूफ़ां भी मद्ध्म रहे।नींद आती नहीं रात भर जागता रहता हूं,मेरी तन्हाइयों के शराफ़त भी गुमसुम रहे।ज़ख्मों का बोझ लेकर खड़ा हूं दरे-हुस्न पर,दर्द ,गम ,आंसू ,रुसवाई ही मेरे मरहम रहे।वस्ल का चांद परदेश में बैठके ले रहा,...
Tag :सपने गुम रहे।
  July 23, 2011, 9:24 pm
चांदनी का बंद क्यूं दरवाज़ा है,चांद आखिर किस वतन का राजा है।अपनी ज़ुल्फ़ों को न लहराया करो,बादलों का कारवां धबराता है।नेकी की बाहों में रातें कटती हैं ,सुबह फिर दर्दे बदी छा जाता है।मोल पानी का न जाने शहरे हुस्न,मेरे दिल का गांव अब भी प्यासा है।घर के अंदर रिश्तों का बाज़ार ...
Tag :बंद क्यूं है।
  July 16, 2011, 8:41 am
मुहब्बत तेरी मेरी कहानी के सिवा क्या है,विरह के धूप में तपती जवानी के सिवा क्या है।तुम्हारी दीद की उम्मीद में बैठा हूं तेरे दर,तुम्हारे झूठे वादों की गुलामी के सिवा क्या है।समन्दर ने किनारों की ज़मानत बेवजह ली,येइबादत-ए-बला आसमानी के सिवा क्या है।तेरी ज़ुल्फ़ों के गुलशन ...
Tag :सितम की बागवानी।
  July 9, 2011, 11:17 pm
सुख का दरवाज़ा खुला है,ग़म प्रतिक्षा कर रहा है।सूर्ख हैं फूलों के चेहरे,रंग काटों का हरा है।रात की बाहों मेंअब तक,दिन का सूरज सो रहा है।जीतना है झूठ को गर,सच से रिश्ता क्यूं रखा है।इश्क़ के जंगल में फिर इक,दिल का राही फंस चुका है।बन्दगी उनकी हवस की,सब्र क्यूं मेरा ख़ुदा है।ज...
Tag :खुला है।
  July 1, 2011, 9:31 pm
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