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चौखट

"आओ कविता करना सीखें"आज का छंद....*हरिगीतिका* में --------विरहणी---जब भी हुआ यह भान मानव, आपको घनघोर सेतब ही बनी यह धारणा कुछ, नाचते मन मोर सेअब आ गया उद्दात सावन, गीत गा मल्हार काशिव आरती कर धार ले व्रत, प्यार से मनुहार काखुशियाँ मिली तन मोद में मन, हास है परिहास हैपर जी नहीं लगता उस...
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पवन *चंदन*
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  August 9, 2015, 3:45 pm
अत्र कुशलम् तत्रास्‍तु·         पी के शर्मावो जमाने चले गये जब लोग ख़त लिखा करते थे। डाकिया भी समाज में एक महत्‍वपूर्ण स्‍थान पाता था। लेकिन आजकल डाकिया, रुपये की कीमत भर रह गया है। कारण सब जानते हैं। अब एस एम एस आते जाते हैं। चार दिन का काम चार मिनट में होने ल...
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पवन *चंदन*
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  May 9, 2014, 8:31 pm
आंसू-आंसू पर नोट·        पी के शर्मामेरा दोस्‍त अविनाश अक्‍सर हंसता हुआ आया करता था, पर न जाने क्‍यूं आज रोता हुआ आया। मैंने ढांढस बंधाया... पूछा क्‍या हुआ ? बोला ढांढस बंधाना कांग्रेस को, मैं तो अपनी मर्जी से रो रहा हूं। आई मीन रोने की प्रैक्टिस कर रहा हूं। मैंने ...
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पवन *चंदन*
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  April 26, 2014, 6:01 am
दैनिक जन संदेश लखनऊ से प्रकाशित समाचार-पत्र में  'उलटबांसी'आदमी की कुत्‍तई... ·         पी के शर्मा                                        जानते हो ‘गीक’ किसे कहते हैं?  एक सर्वे के मुताबिक यह सब्‍द सबसे ज्‍य...
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पवन *चंदन*
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  February 4, 2014, 10:13 am
फागुन में बारिश होली पे एक बदरिया मस्‍त हो के छा गयी हैभर-भर के घट लबालब रंग ले के आ गयी हैदेवर समझ के सबको छम-छम भिगो रही हैलोग कहते हैं...... बारिश हो रही है।...
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पवन *चंदन*
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  March 29, 2013, 3:57 pm

फागुन में बारिश होली पे एक बदरिया मस्‍त हो के छा गयी हैभर-भर के घट लबालब रंग ले के आ गयी हैदेवर समझ के सबको छम-छम भिगो रही हैलोग कहते हैं...... बारिश हो रही है।...
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पवन *चंदन*
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  March 29, 2013, 3:57 pm
                                   खुल्‍ला खेल फ़र्रूखाबादी                            -पी के शर्मातुम वहां जाओ... और लौट कर दिखाओ। इसका मतलब सीधा भी है और टेढ़ा भी। धूल में लठ्ठ मारो, लग गया तो बढि़या और अगर थू..थू हो गई तो कह देंगे, हमारा ये आशय नहीं था। ये तो मीडिया ने अर्थ का अनर्थ कर दिया है। ...
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पवन *चंदन*
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  October 23, 2012, 5:15 am
दिखाई ही तो है, चलाई तो नहीं-पी के शर्मा जब हम पढ़ा करते थे तो हमसे एक निबंध लिखवाया जाता था कि ‘विज्ञान, वरदान है या अभिशाप’। हम क्‍या–क्‍या लिखते थे...इस बात पर मत जाइये। पर ये बात सच साबित हो रही है। विज्ञान होगा वरदान किसी के लिए, यहां तो अभिशाप साबित हो गया एक गुजराती सा...
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पवन *चंदन*
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  October 17, 2012, 8:20 am
मोक्ष का द्वार                      पी के शर्मा लो, कर लो गल। हमें तो पता ही नहीं था कि देवालय और शौचालय में क्‍या अंतर होता है। हां इतना अवश्‍य जानते हैं कि यदि आस्‍था न हो तो देवालय के बिना काम चल सकता है लेकिन शौचालय बिना नहीं। इससे तो मोक्ष की प्राप्‍ती होती है। जी हां...सुबह...
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पवन *चंदन*
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  October 9, 2012, 6:51 am
पुराना केस पुरानी बीवीपता चला है कि एक उच्‍च पदस्‍थ मंत्री ने महिलाओं की मर्यादा में गुस्‍ताखी कर डाली है। ये कोई इतनी बड़ी बात है क्‍या..?  जो कोहराम मचा दिया जाए। महिलाओं को पहले ही कौन सा सम्‍मान का दर्जा प्राप्‍त है...?  और किसने दिया इनको इतना सम्‍मान...?  अभी तक तो किसी ...
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पवन *चंदन*
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  October 6, 2012, 6:26 am
कीमती लोग कीमती भोगएक थाली पर कितना खर्चा है..आजकल इसकी बड़ी चर्चा है। पता नहीं क्‍यों ताकते हैं लोग दूसरे की थाली में....क्‍या क्‍या भरा थाली में रखी प्‍याली में। अच्‍छी आदत तो नहीं है। मुझे भी पसंद नहीं है दूसरे की थाली में घी को देखना। वैसे तो निगोड़े डाक्‍टर ने अपनी ह...
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पवन *चंदन*
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  September 29, 2012, 9:24 am
हाथीहाथी बोला ऊंट से तुम क्या लगते हो ठूंठ सेकमर में कूबड़ कैसा है गला गली के जैसा हैदुबली पतली काया है कब से कुछ नहीं खाया हैहर कोने से सूखे हो लगता बिलकुल भूखे होकहां के हो क्या हाल है लगता पड़ा अकाल हैऊंटऐ भोंदूमल गोल मटोल मोटे तू ज्यादा मत बोलसबसे ज्यादा खाया है तू ख...
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पवन *चंदन*
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  September 11, 2012, 7:27 pm
आबादी घटायेंगे तो रिश्‍ते भी घट जायेंगे देश के भविष्य का वास्ता देकर एक नारा दिया गया था ...... दो या तीन बच्चे, होते हैं घर में अच्छे । इस पर देश वासियों ने अमल किया भी, नहीं भी । कारण कुछ भी रहे हों, तीन बच्चे... अच्छे होते तो थे.... पर घर में, सफर में नहीं । अब नारा देने वालों ने मु...
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पवन *चंदन*
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  May 12, 2012, 10:46 am
कपाल-भाती या कमाल-भाती एक हैं अण्णा हजारे, भ्रष्‍टाचार के तालाब में खूब पत्‍थर मारे। उनसे उठी लहरें अभी शांत भी नहीं हो पायीं थी कि बाबा राम देव आ गये। आ गये और इस कदर छा गये कि वर्तमान सरकार के चार मंत्री आनन फानन में अगवानी करने हवाई अड्डे पहुंच गये। वहां क्‍या हुआ, पता ...
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पवन *चंदन*
Tag :बड़ा कष्‍टकारक
  June 5, 2011, 12:27 pm
मोबाइल का दर्दबहुत लंबा हो गया जब इंतजारआ गया मैं तार पर होकर सवारखूब इज्जत थी मेरी भी शान थीमेरी ट्रिन-ट्रिन भी सुरीली तान थीथा बदन बेकार सा काला कलूटादीखता था मैं तुम्हें अच्छा अनूठामैं पधारा जब तुम्हारे द्वार परहो गया लट्टू तुम्हारे प्यार परमान में चौकी किसी ने ख...
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पवन *चंदन*
Tag :अब अंगूठा क्यों दिखाते हो उसे
  May 30, 2011, 7:22 pm
क्‍यों लगाते हैं गुलाल, होली मेंबहुत पुरानी कहानी है; राजा हिरण्‍यकशिपु ने अपनी बहन होलिका की सगाई राजस्‍थान में बाड़मेर राज्‍य के एक अतिसुंदर नौजवान राजकुमार ईलोजी से तय कर दी। राक्षस जैसे सुंदर होने चाहिए वैसे ही थे, ईलोजी। खरबूजे जैसे गाल, आम की फांक जैसी आंखें, भै...
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पवन *चंदन*
Tag :होली गुलाल रंग क्‍यों
  March 18, 2011, 10:23 am
पुरालेख-तिथि-अनुसार।-पुरालेख-विषयानुसार।-हिंदी-लिंक।-हमारे-लेखक।-लेखकों सेSHUSHA HELP // UNICODE HELPपता-teamabhi@abhivyakti-hindi.orgसंस्कृतिक्यों लगाते हैं गुलाल, होली मेंपवन चंदन की इतिहास कथाबहुत पुरानी कहानी है, असुर राज हिरण्यकश्यप की बहन होलिका और पडोसी राज्य के राजकुमार इलोजी एक दूसरे को ...
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पवन *चंदन*
Tag :होली
  March 18, 2011, 10:15 am
जी हां , हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के लिए एक सकारात्‍मक कदम हिन्‍दी साहित्‍य निकेतनके साथ शिखर की ओर बढ़ चला है। विवरण जानने के लिए और अपनी राय व्‍य‍क्‍त करने के लिए यहां पर क्लिक कीजिए। जानकारी का खजाना खुलेगा। कहा जा रहा है कि यह मील का पत्‍थर बनेगा। पर मेरा मानना है कि यह मी...
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पवन *चंदन*
Tag :हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन
  March 12, 2011, 11:42 am
इस देश की माटी को, इस देश का किसान अपने पसीने से जितना भी सींचे कम है।इस देश की माटी को, इस देश का जवान अपने लहू से जितना भी सींचे कम है।इस देश की खाल को, इस देश का नेता जितना खींचे उतना ही गम है।सभी देशवासियों को गणतंत्र की शुभकामनाएं.........
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पवन *चंदन*
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  January 26, 2011, 1:49 pm
साथियों नमस्‍कार। आप सब क्राइम रिपोर्टर हैं । मेरा कहना है कि हिन्‍दी का प्रयोग न करने को देश में क्राइम घोषित कर दिया जाना चाहिए और आज मैं इस मंच से पूरा एक दशक हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के नाम करने की घोषणा करता हूं। इस एक दशक में आप देखेंगे कि हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग सबसे शक्तिशा...
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पवन *चंदन*
Tag :अविनाश वाचस्‍पति
  January 22, 2011, 7:50 pm
होनी है यहां ब्‍लागर मीट कोई कमी न रह जाए। हर तरफ नजर है मयंक जी कीदिशा निर्देशों के साथ हैं व्‍यस्‍तमस्‍त और अलमस्‍त ये सभी ठोक रहे हैं कीलजी हां, कील नहीं मील का पत्‍थर है ये दीवार पर पोस्‍टर नहीं लग रहा....पूरे विश्‍व में चमकेगाबनाएगा अपनी शान और पहचान हंसते रहो, हंसात...
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पवन *चंदन*
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  January 12, 2011, 1:44 am
जिसमें ब्‍लागश्री श्री पद्म सिंह कुछ खोज रहे हैं,जी हां यही तो है,इसी कार में सवारपांच ब्‍लागर मजेदार जा पहुंचे रूपचंद जी के द्वार मयंक जी की महिमा का खटिमा या कहें - खटीमा की महिमा हीटर की गरमाई मेंएक कविगोष्‍ठी रजाई में संपन्‍न होती रही दुनिया सोयी नहीं जगती रही सुनत...
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पवन *चंदन*
Tag :जी हां चौखट पर
  January 10, 2011, 8:49 pm
मैं उस समय बहुत दुखी होता हूं जब देश की राजधानी की लाल बत्तियों पर भिखारी मुझे खारी-खारी नजरों से देखते हैं। दूर-दूर रहते हैं। बड़ी-बड़ी कारों के काले शीशों के अंदर झांकने का प्रयास करते हैं। किसी का शीशा खुल जाता है किसी का नहीं खुलता। मैं उन शीशों को और दस या बीस का नोट ...
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पवन *चंदन*
Tag :वरना डासना की जेल देखी है?
  December 22, 2010, 5:59 am
शीतलहर के कोप का चला रात भर दौरधुंध ओढ़कर आ गयी भयाक्रांत सी भौरसूरज कोहरे में छिपा हुआ चांद सा रूपशरद ऋतु निष्‍ठुर हुई भागी डरकर धूपसूरज भी अफसर बना, है मौसम का फेरजाने की जल्दी करे और आने में देरदिन का रुतबा कम हुआ, पसर गयी है रातकाटे से कटती नहीं, वक्त-वक्त की बात...
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पवन *चंदन*
Tag :वक्त-वक्त की बात
  December 17, 2010, 3:25 pm
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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