एक बार भीष्म पितामह हस्तिनापुर में मुनि शम्पाक का सत्संग कर रहे थे। भीष्म ने प्रश्न किया, ‘मुनिवर, हम धनी और निर्धन, दोनों को किसी न किसी रूप में असंतुष्ट व दुखी देखते हैं। आपकी दृष्टि में जिसके पास अथाह धन है, जिस पर लक्ष्मी की कृपा है, वह दुखी और असंतुष्ट किस कारण रहता ह...
पुराणों, जैन ग्रंथों और अन्य प्राचीन साहित्य में तप की व्याख्या विभिन्न प्रकार से की गई है। कुछ साधु कई-कई दिन धूप में निरंतर खड़े रहते हैं और दावा करते हैं कि वे तपस्या कर रहे हैं। मुनियों का संथारा भी तपस्या का ही एक रूप है।भगवान श्रीकृष्ण तपस्या की व्याख्या करते हुए ...