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सराय

दिल्ली को अब भी है बहादुर शाह जफर का इंतजार (पार्थिव कुमार)इतना है बदनसीब जफरदफ्न के लिए दो गज जमीन भी न मिलीकू ए यार में !आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर की ख्वाहिश थी कि मौत के बाद उन्हें अपने शहर देहली में ही दफनाया जाए। इसके लिए उन्होंने  तेरहवीं सदी के मशहूर सूफी स...
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  May 15, 2013, 12:46 pm
मजहबी भाईचारे की मिसाल है जगदेव कलांसुविधा कुमरासैयद हाशम शाह की सदाओं ने जगदेव कलां को दरवेश बना दिया है। यह देखने में भले की आम गांवों की तरह लगता हो मगर इसकी घुमावदार गलियों में अमन और भाईचारे की दरिया बहती है। हरेभरे खेतों से घिरे इस गांव की मिट्टी में सस्सी और पुन...
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  February 16, 2011, 3:10 pm
रफी के गांव में               पार्थिव कुमारआम का वह दरख्त अब नहीं रहा जिसके जिस्म पर रफी गांव छोड़ते वक्त अपना नाम खुरच गए थे। नुक्कड़ के उस कच्चे कुएं का नामोनिशान भी मिट चुका है जिसकी मुंडेर पर बैठ कर वह शरारतों की साजिशें रचा करते थे। पिछले तकरीबन 75 बरसों में कोटला सुलतान ...
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  December 22, 2010, 2:55 pm
चोपता की सादगी में है जादू सुविधा कुमरादरवाजे पर दस्तक हुई तो मैंने चेहरे से कंबल हटा कर खिड़की से झांकने की कोशिश की। बाहर अब भी अंधेरा था। बिस्तर से निकलने की इच्छा जरा भी नहीं थी मगर दरवाजा खोलना पड़ा। सर्द हवा का एक झोंका पल भर में समूचे कमरे को सिहरा गया। हाथ में थरमस ...
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  November 25, 2010, 9:01 pm
पत्थरों में बसती है जिसकी रूहपार्थिव कुमार सोलह बरस की नाजुक उमर में कृष्ण चंद्र पांडेय को पत्थरों से प्यार हो गया। समय गुजरने के साथ इस मोहब्बत ने दीवानगी की शक्ल ले ली और तकरीबन 35 साल बाद अब तो उनके खयालों और ख्वाबों में हर पल पत्थर ही बसते हैं। जमाना जिन पत्थरों को ठो...
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  October 25, 2010, 1:17 pm
जार्ज एवरेस्ट की खस्ताहाल यादगार कई बार कोई जगह यूं ही बहुत अच्छी लगने लगती है। पार्क एस्टेट के साथ मेरा लगाव भी कुछ ऐसा ही है। जब भी मसूरी या इसके आसपास से गुजरना होता है हिन्दुस्तान के पहले सर्वेयर जनरल जार्ज एवरेस्ट की इस खस्ताहाल कोठी तक जरूर जाता हूं। इसके सामने घ...
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  June 23, 2010, 1:22 pm
भुतहे खंडहरों का सच पार्थिव कुमारअरावली की गोद में बिखरे भानगढ़ के खंडहरों को भले ही भूतों का डेरा मान लिया गया हो मगर सोलहवीं सदी के इस किले की घुमावदार गलियों में कभी जिंदगी मचला करती थी। किले के अंदर करीने से बनाए गए बाजार, खूबसूरत मंदिरों, भव्य महल और तवायफों के आलीश...
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  March 28, 2010, 6:44 pm
मुगलोंकामहलबनाबच्चोंकीक्रिकेटपिचपार्थिवकुमारफारुखनगरकेरिटायर्डटीचरराजकंवरगुप्तातकरीबन 300 सालपुरानेइसकस्बेकेहरबाशिंदेकोइसकेशानदारमाजीकेबारेमेंबतादेनाचाहतेहैं।उन्हेंउम्मीदहैकिऐसाकरकेवहबादशाहफर्रुखसियरकेनामपरबसेइसकस्बेकीऐतिहासिकविरासतकोबच...
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  January 7, 2010, 11:04 pm
एक शहंशाह की उजड़ी यादेंपार्थिव कुमारदिल्ली के हाशिए पर खड़ी जार्ज पंचम की 60 फुट की कद्दावर मूर्ति उदासी और बेबसी की जीती - जागती तस्वीर है। तकरीबन 97 साल पहले इसी जगह ब्रिटेन के इस शहंशाह को हिंदुस्तान का ताज पहनाया गया था। उस दिन इस मैदान में एक लाख लोग जमा थे। लेकिन अब गा...
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  May 31, 2009, 12:42 pm
निवल देई से मेरी मुलाकात एक दिन अचानक ही हो गई। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक छोटा सा कस्बा है परीक्षितगढ़। कहते हैं कि यह अर्जुन के पोते परीक्षित की राजधानी हुआ करता था। इस कस्बे में कई ऐसी जगहें हैं जिनका संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है। ऐसी ही एक जगह है निवल देई का...
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  May 24, 2009, 2:02 pm
पानीपतपार्थिव कुमारअबू अली शाह कलंदर के इस फक्कड़ मिजाज शहर ने जिंदगी की भागमभाग में अपने जख्मों को भुला दिया है। लड़ाई दिल्ली के तख्त और ताज की मगर हर बार सीना कुचला गया पानीपत का। तकरीबन 235 साल के दरमियान हुई तीन लड़ाइयों ने इसकी तबाही में कोई कसर नहीं छोड़ी। हर दफा हजारो...
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  April 29, 2009, 6:12 pm
इतिहास की किताब जैसा एक पार्कपार्थिव कुमारमहरौली का पुरातत्व उद्यान शहर के शोरशराबे से थकी दिल्ली को अतीत के आंगन में सुकून के कुछ पल गुजारने की दावत देता है। इतिहास की किसी दिलचस्प किताब जैसा है यह पार्क। इसमें करीने से सजाई गई फूलों की क्यारियों, कीकर और बबूल के दरख...
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  April 29, 2009, 4:49 pm
सरधना का गिरजाघरपार्थिव कुमारसरधना उत्तर प्रदेश में मेरठ के नजदीक एक छोटा सा कस्बा है जिसकी सांसों में बेनजीर खूबसूरती की मलिका बेगम समरू की रूह बसती है। बेगम समरू, यानी फरजाना, यानी जेबुन्निसा जो दिल्ली के चावड़ी बाजार के एक कोठे से निकल कर दौलत, ताकत और शोहरत की बुलं...
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  April 26, 2009, 1:46 pm

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  January 1, 1970, 5:30 am
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