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Blog: निर्झर'नीर!

Blogger: NirjharNeer
तेरे जैसे कितने आये ,जाने कितने आएंगे ,दौड़ते चलते खिचड़ते , कितने ही मिल जायेंगे , राजा हो रंक सबके ,नक्श-ए-पां  रह जायेंगे । तुझसे पहले मैं यहाँ था ,बाद भी तेरे रहूँगा ,साथ रहकर भी तुम्हारे ,दूर तुमसे मैं रहूँगा ,दर्द दिल में,हैं बहुत से ,हँस के मैं सारे सहूंगा ।पूछते ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   7:01am 5 Apr 2016 #
Blogger: NirjharNeer
रख धरा पै ये कदम, औरनभ पै रख अपनी निगाहेंतुम यक़ीनन छू ही लोगेएक दिन तारों की बाहें ।।बनके जुगनू आस तेरीहर कदम रोशन करेगी हो भले काटों भरी राही तेरे जीवन की राहें।।ये कदम रुकने ना पायेंशीश भी झुकने ना पाएहो अँधेरा लाख चाहेभोर को कब रोक पाये।।तू कहीं सो जाएँ नार... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   11:15am 26 Sep 2015 #
Blogger: NirjharNeer
…………………………। अँधेरे गर ना होंगे तोये जुग्नू भी नहीं होंगेउजाले भी जरुरी है अँधेरे भी जरूरी है।अगर ये दिन जरूरी हैतो रजनी भी जरूरी हैये चंदा भी जरुरी हैये तारे भी जरूरी है।सरिता भी जरूरी है ये सागर भी जरूरी हैअगर जीवन जरूरी है तो ये जल भी जरुरी है।ये किस्तें भी... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   7:01am 26 Mar 2015 #
Blogger: NirjharNeer
............................... इस तरह भी ना कहोभले की भी, बुरी लगेमना भी इस तरह करो कि ना भी,ना सी,ना लगे !ये दौर कुछ अलग सा है यहाँ दोस्त भी फ़लक सा हैकहीं पड़ ना जायें सिलवटेंगले लगें, की ना लगें !वो गैर की सुनें भी क्यूं जिन्हें बाप की बुरी लगेबेटे इस क़दर बड़े हुए की माँ भी,माँ सी,ना ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   7:46am 19 Mar 2015 #
Blogger: NirjharNeer
२६ जनवरी २०१४ एक काव्य गोस्ठी में युवा ओज कवि प्रख्यात मिश्रा को सुनकर मैंने भीकुछ ओज लिखने की कोशिश की है,अपने शब्दों से अनुग्रहित करें।  जयचंदों की कमी नही माँ , माना मेरे देश में ।राणा और शिवाजी भी तो, बसते हैं इस देश में ।दुश्मन का सर काट-काट माँ, ढेरों-ढेर लगा दें... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   6:53am 28 Jan 2014 #
Blogger: NirjharNeer
………………………… पर्वत-पर्वत टूट रहे हैंघर-द्वारे सब छूट रहे हैंकैसे उनको इन्सां कह दूँ बेबस को जो लूट रहे हैं !खतरे में अब देश पड़ा है देश का नेता मौन खड़ा हैकुछ तो आखिर करना होगाजीना है तो मरना होगा ! इश्क-मोहब्बत की सौगातें कलियाँ-भवरों की ये बातें इन बातों का वक़्त नह... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   8:26am 28 Jul 2013 #
Blogger: NirjharNeer
बहुत दिन बाद एक कोशिश.....................................धन की खातिर लोग यहाँसुख-चैन नींद, खोते देखे ! दौलत-शौहरत पाकर भीकुछ लोग यहाँ, रोते देखे  !उल्लू जैसी हो गयी फितरतरात जगे दिन सोते देखे !   इंसानों की जात ना पूछो  मन मैला तन धोते देखे !के गैरों का गिला करूँ, जब अपने ही कांटे बोते देखे !मूल्... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   10:48am 23 Apr 2013 #
Blogger: NirjharNeer
....... जीवन के कुछ अनमोल लम्हे जो कहीं पीछे छूट गए थेकुछ बंधन जो टूट गए थे गफ़लत और नादानी में   आज फिर लौट के आये है उन्ही राहों पे ढूँढने उन यादों के टुकड़ों को यकीन था मिलने का यक़ीनन मिल भी गए कुछ बिछड़े हुए राही  कुछ दिलकश नज़ारे और यादों की महक जिसकी मदहोशी में घुली है खुश... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   11:02am 16 Oct 2012 #
Blogger: NirjharNeer
........... अनमोल लम्हे कुछ जीवन के हमसे राहों में छूट गएहम नादाँ थे नादानी में   कुछ बंधन हमसे टूट गएमैं लौट के फिर से आया हूँ यादों के टुकड़ों को चुनने इन राहों से इन बाँहों से था य़की मुझे मिल जाने कामुरझाई कली खिल जाने का  कुछ राही बरसों बाद  मिले  कुछ वीराने आबाद मिले  कुछ ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   11:02am 16 Oct 2012 #
clicks 133 View   Vote 0 Like   6:33am 6 Apr 2012 #
Blogger: NirjharNeer
 .......................भीख मांग रहा है फिल्म ‘मदर इंडिया’ का जमींदार ......................उसकी आवाज़ बहुत हल्की हैउसकी बातों में बहुत तल्खी है  धूल चेहरे पे ज़मी है अब तक  उसकी आँखों में नमी है अब तकउसमें ज़ज्बात अभी बाकी हैज़ीस्त की आस अभी बाकी हैउसने रिश्तों को जिया है शायदउसने विष पान किया है श... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   11:08am 3 Apr 2012 #
Blogger: NirjharNeer
................. रोज एक हसरत को दफ़न करता हूँ  रोज आँखें ये नया ख्वाब सज़ा लेती हैं !रोज दीवार दरकती है मेरे जेहन कीरोज उम्मीदें नयी नीव ज़मा लेती है !विश्वास में विष का भी वास होता हैआस ही टूटते रिश्तों को बचा लेती है !  ना कीमत-ए-वफ़ा है ना कद्र-ए-मोहब्बतहसरतें दिल में दिए फिर भी जला ल... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   10:52am 22 Feb 2012 #
Blogger: NirjharNeer
..................   दिल के सागर में जब-जब आते हैज़ज्बातों के झंझावात तब-तब उठती हैं बेबसी और वेदना की ऊँची-ऊँची लहरेंसुनामी की तरह  जिन्हें ये कमज़र्फ आँखें चाहते हुए भी रोक नहीं पातीऔर बहा देती हैउस नमक कोजो जमा किया थावक़्त की छलनी से  दर्द को छानकरदिल की तलहटी में............................ Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   11:10am 2 Feb 2012 #
Blogger: NirjharNeer
.................................................. आदत सी पड़ गयी है जीने की ग़लतफ़हमी में !दिल बहल जाये, गलत क्या है ग़लतफ़हमीमें !!तारे फ़लक से तोड़ के लाया है भला कौन !प्यार में यूँ भी जिए लोग ग़लतफ़हमी में !!कहा ये किसने, गलत ग़म शराब करती है !उम्र भर पीते रहे, हम भी ग़लतफ़हमी में !!हाथ वो छोड़ भी सकता है बीच धारा में... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   9:59am 15 Nov 2011 #
Blogger: NirjharNeer
.......................................................... किसी की आँख से आंसू यूँ ही तो बह नहीं सकता !कुछ ऐसे जख्म होते है जिन्हें दिल सह नहीं सकता !!उन्हें मुझसे शिकायत है कि मैं ख़ामोश रहता हूँ !मगर कुछ लोग कहते है कि मैं चुप रह नहीं सकता !!हकीक़त है की हर बाजी अभी तक है मेरे हक में  !बड़ा ज़ालिम जमाना है अभी क... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   9:55am 13 Oct 2011 #
Blogger: NirjharNeer
संवेदना संसार: तीस साल का इतिहास...... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   5:44am 11 Oct 2011 #
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....................... चलो चलते है एक बार फिर वापिस लौट के वहीँ, जहाँ से दौड़े थेजानिब-ए-मंजिलराहों से बेखबर रहगुज़र से बेरब्तअकेले-अकेले.............अफसोश ! मिली जो मंजिलतो ये जाना किजिंदगी के टुकड़े तोसफ़र में ही छूट गए   इस बार चलना है धीरे-धीरे रिश्तों की डोर थामे  सफ़र की ख़ुशबू और रंगों... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   11:09am 12 Sep 2011 #
Blogger: NirjharNeer
............चाँद माना धरा से बहुत दूर है !  चांदनी ये मगर कब कहाँ दूर है !!भटकता फिरूं में यहाँ से वहां !ऱब इन्सान से कब कहाँ दूर है !!किसी के लिए मांग मन से दुआ ! दुआ से असर कब कहाँ दूर है !!ये माना तू मुझसे बहुत दूर है !  दिल ये मगर कब कहाँ दूर है !!मिलते नहीं दो किनारे तो क्या ! बीच धारा बह... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   9:05am 10 May 2011 #
Blogger: NirjharNeer
......... हर आँगन में ख़ामोशी हैसब उजड़ा-उजड़ा लगता हैदिल में लावा पिघल रहा  मन उखड़ा-उखड़ा लगता है पथराई सी आँखें है   हर पेट में पीठ समायी है   ईमान बचा के रख्खा है मजदूर की यही कमाई है   भावहीन है हर चेहरा हर चेहरे में ऱब दिखता है   कौन यहाँ अहसास ख़रीदे ज़िस्म यहाँ पे बिकता है   आ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   12:00pm 4 May 2011 #
Blogger: NirjharNeer
.... लकीर-ए-दस्त का लिक्खा समझ आया नहीं मुझको !    तू ही मुज़रिम तू ही मुंसिफ़, गुनाह तेरा सजा मुझको !!  ये मौसम का बदलना तो, मुझे भी रास आता  है ! यूँ अपनों के बदलने का,चलन भाया नहीं मुझको !!पढ़े शाम-ओ-सहर जिसने क़सीदे शान में मेरी !वो ही अब ढूंढता है हाथ में खंजर लिए मुझको !!अगर हो मौज ... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   7:23am 24 Feb 2011 #
Blogger: NirjharNeer
................................................... तू है ज़रदिमाग तुझे क्या कहूंमेरे दर्द-ए-दिल का फ़लसफालिखी है मेरी शक्ल पेमेरे रंज-ओ-गम की दास्ताँ ना तो राहगुज़र के है नक्श-ए-पाँना ही मंजिलों की कुछ खबरमैं तो गर्द-ए-सफ़र का ग़ुबार हूँहै ये सिम्त-ए-गैबानासफ़रजो ज़हीन थे चले गएजला-जला के बस्तियांमे... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   5:54am 15 Dec 2010 #
Blogger: NirjharNeer
 .ना कर तर्क-ए-वफ़ा कांटे पे जरा तोलूँगाखरा है कौन यहाँ सारे भरम खोलूँगा !शूली पे चढ़ा दो या सर कलम कर दो सच कड़वा ही सही मैं तो सच ही बोलूँगा !सुना है शहर में आब-ओ-दाना मिलता हैभरे जो पेट, तो मै भी सड़क पे सो लूँगा !हासिल हुआ है क्या तुझे घर मेरा जलाकरमैं तो बेबस हूँ बहुत, भर के आह... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   9:57am 25 Sep 2010 #
Blogger: NirjharNeer
. वक़्त की ताल पे रक्स करता रहाअश्क पी-पी के जख्मों को भरता रहा !थोड़ा जीता रहा थोड़ा मरता रहामौत की राह में, खेल करता रहा !नट की रस्सी के जैसी है ये ज़िन्दगीनट के जैसे, में रस्सी पे चलता रहा !उसकी नज़रों ने, मेरी कसम तोड़ दी मैं तो पीने से, तौबा ही करता रहा !नफ़स चलती रही आह भरता र... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   10:07am 17 Aug 2010 #
Blogger: NirjharNeer
...............................कभी सुर्ख़ी थी इस पे भी, ज़र्द जो आज है चेहरा हर एक कतरा लहू का ज़िस्म से किसने जला डाला !ये जाति धर्म की बातें ,ये बातें है सियासत कीसियासत की इन्ही बातों ने मुल्कों को जला डाला ! कभी ना हम समझ पाए ये पेच-ओ ख़म ज़माने के ये किसने छीन ली रोटी, ये किसने घर जला डाला !य... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   10:40am 6 Jul 2010 #
Blogger: NirjharNeer
.. ख़ुद को ढूँढ़ता हूँ या खुदी को ढूँढ़ता हूँकैसी ये बेखुदी है मै किस को ढूँढ़ता हूँ !कस्तूरी हिरन जैसे मैं भी दौड़ रहा हूँ खुद से बाहर जाके ख़ुदा को ढूँढ़ता हूँ !पढ़ ना सका हूँ मैं लिखा आज तक उसकाइन हाथों की लकीरों में मुकद्दर को ढूँढ़ता हूँ !अश्कों के साथ-साथ सभी ख़्वाब बह ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   5:36am 25 May 2010 #
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