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निर्झर'नीर!

तेरे जैसे कितने आये ,जाने कितने आएंगे ,दौड़ते चलते खिचड़ते , कितने ही मिल जायेंगे , राजा हो रंक सबके ,नक्श-ए-पां  रह जायेंगे । तुझसे पहले मैं यहाँ था ,बाद भी तेरे रहूँगा ,साथ रहकर भी तुम्हारे ,दूर तुमसे मैं रहूँगा ,दर्द दिल में,हैं बहुत से ,हँस के मैं सारे सहूंगा ।पूछते ...
निर्झर'नीर!...
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  April 5, 2016, 12:31 pm
रख धरा पै ये कदम, औरनभ पै रख अपनी निगाहेंतुम यक़ीनन छू ही लोगेएक दिन तारों की बाहें ।।बनके जुगनू आस तेरीहर कदम रोशन करेगी हो भले काटों भरी राही तेरे जीवन की राहें।।ये कदम रुकने ना पायेंशीश भी झुकने ना पाएहो अँधेरा लाख चाहेभोर को कब रोक पाये।।तू कहीं सो जाएँ नार...
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  September 26, 2015, 4:45 pm
…………………………। अँधेरे गर ना होंगे तोये जुग्नू भी नहीं होंगेउजाले भी जरुरी है अँधेरे भी जरूरी है।अगर ये दिन जरूरी हैतो रजनी भी जरूरी हैये चंदा भी जरुरी हैये तारे भी जरूरी है।सरिता भी जरूरी है ये सागर भी जरूरी हैअगर जीवन जरूरी है तो ये जल भी जरुरी है।ये किस्तें भी...
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  March 26, 2015, 12:31 pm
............................... इस तरह भी ना कहोभले की भी, बुरी लगेमना भी इस तरह करो कि ना भी,ना सी,ना लगे !ये दौर कुछ अलग सा है यहाँ दोस्त भी फ़लक सा हैकहीं पड़ ना जायें सिलवटेंगले लगें, की ना लगें !वो गैर की सुनें भी क्यूं जिन्हें बाप की बुरी लगेबेटे इस क़दर बड़े हुए की माँ भी,माँ सी,ना ...
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  March 19, 2015, 1:16 pm
२६ जनवरी २०१४ एक काव्य गोस्ठी में युवा ओज कवि प्रख्यात मिश्रा को सुनकर मैंने भीकुछ ओज लिखने की कोशिश की है,अपने शब्दों से अनुग्रहित करें।  जयचंदों की कमी नही माँ , माना मेरे देश में ।राणा और शिवाजी भी तो, बसते हैं इस देश में ।दुश्मन का सर काट-काट माँ, ढेरों-ढेर लगा दें...
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  January 28, 2014, 12:23 pm
………………………… पर्वत-पर्वत टूट रहे हैंघर-द्वारे सब छूट रहे हैंकैसे उनको इन्सां कह दूँ बेबस को जो लूट रहे हैं !खतरे में अब देश पड़ा है देश का नेता मौन खड़ा हैकुछ तो आखिर करना होगाजीना है तो मरना होगा ! इश्क-मोहब्बत की सौगातें कलियाँ-भवरों की ये बातें इन बातों का वक़्त नह...
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  July 28, 2013, 1:56 pm
बहुत दिन बाद एक कोशिश.....................................धन की खातिर लोग यहाँसुख-चैन नींद, खोते देखे ! दौलत-शौहरत पाकर भीकुछ लोग यहाँ, रोते देखे  !उल्लू जैसी हो गयी फितरतरात जगे दिन सोते देखे !   इंसानों की जात ना पूछो  मन मैला तन धोते देखे !के गैरों का गिला करूँ, जब अपने ही कांटे बोते देखे !मूल्...
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  April 23, 2013, 4:18 pm
....... जीवन के कुछ अनमोल लम्हे जो कहीं पीछे छूट गए थेकुछ बंधन जो टूट गए थे गफ़लत और नादानी में   आज फिर लौट के आये है उन्ही राहों पे ढूँढने उन यादों के टुकड़ों को यकीन था मिलने का यक़ीनन मिल भी गए कुछ बिछड़े हुए राही  कुछ दिलकश नज़ारे और यादों की महक जिसकी मदहोशी में घुली है खुश...
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  October 16, 2012, 4:32 pm
........... अनमोल लम्हे कुछ जीवन के हमसे राहों में छूट गएहम नादाँ थे नादानी में   कुछ बंधन हमसे टूट गएमैं लौट के फिर से आया हूँ यादों के टुकड़ों को चुनने इन राहों से इन बाँहों से था य़की मुझे मिल जाने कामुरझाई कली खिल जाने का  कुछ राही बरसों बाद  मिले  कुछ वीराने आबाद मिले  कुछ ...
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  October 16, 2012, 4:32 pm

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  April 6, 2012, 12:03 pm
 .......................भीख मांग रहा है फिल्म ‘मदर इंडिया’ का जमींदार ......................उसकी आवाज़ बहुत हल्की हैउसकी बातों में बहुत तल्खी है  धूल चेहरे पे ज़मी है अब तक  उसकी आँखों में नमी है अब तकउसमें ज़ज्बात अभी बाकी हैज़ीस्त की आस अभी बाकी हैउसने रिश्तों को जिया है शायदउसने विष पान किया है श...
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  April 3, 2012, 4:38 pm
................. रोज एक हसरत को दफ़न करता हूँ  रोज आँखें ये नया ख्वाब सज़ा लेती हैं !रोज दीवार दरकती है मेरे जेहन कीरोज उम्मीदें नयी नीव ज़मा लेती है !विश्वास में विष का भी वास होता हैआस ही टूटते रिश्तों को बचा लेती है !  ना कीमत-ए-वफ़ा है ना कद्र-ए-मोहब्बतहसरतें दिल में दिए फिर भी जला ल...
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  February 22, 2012, 4:22 pm
..................   दिल के सागर में जब-जब आते हैज़ज्बातों के झंझावात तब-तब उठती हैं बेबसी और वेदना की ऊँची-ऊँची लहरेंसुनामी की तरह  जिन्हें ये कमज़र्फ आँखें चाहते हुए भी रोक नहीं पातीऔर बहा देती हैउस नमक कोजो जमा किया थावक़्त की छलनी से  दर्द को छानकरदिल की तलहटी में............................
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  February 2, 2012, 4:40 pm
एक नयी कोशिश की है .....मार्गदर्शन करें !१..............................................धनुष बनाया धर्म का, जात-पात के तीर !ब्रह्मास्त्र से कम नहीं, ये घाव करे गंभीर !घाव करे गंभीर, बचोगे कब तक प्यारे !ये सब-कुछ लेंगे लूट, करेंगे वारे-न्यारे !कह निर्झर कविराय, नींद से अब तो जागो !कुछ कर्ज शहीदों का है, उससे य...
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  December 12, 2011, 4:18 pm
.................................................. आदत सी पड़ गयी है जीने की ग़लतफ़हमी में !दिल बहल जाये, गलत क्या है ग़लतफ़हमीमें !!तारे फ़लक से तोड़ के लाया है भला कौन !प्यार में यूँ भी जिए लोग ग़लतफ़हमी में !!कहा ये किसने, गलत ग़म शराब करती है !उम्र भर पीते रहे, हम भी ग़लतफ़हमी में !!हाथ वो छोड़ भी सकता है बीच धारा में...
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  November 15, 2011, 3:29 pm
.......................................................... किसी की आँख से आंसू यूँ ही तो बह नहीं सकता !कुछ ऐसे जख्म होते है जिन्हें दिल सह नहीं सकता !!उन्हें मुझसे शिकायत है कि मैं ख़ामोश रहता हूँ !मगर कुछ लोग कहते है कि मैं चुप रह नहीं सकता !!हकीक़त है की हर बाजी अभी तक है मेरे हक में  !बड़ा ज़ालिम जमाना है अभी क...
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  October 13, 2011, 3:25 pm
संवेदना संसार: तीस साल का इतिहास......
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  October 11, 2011, 11:14 am
....................... चलो चलते है एक बार फिर वापिस लौट के वहीँ, जहाँ से दौड़े थेजानिब-ए-मंजिलराहों से बेखबर रहगुज़र से बेरब्तअकेले-अकेले.............अफसोश ! मिली जो मंजिलतो ये जाना किजिंदगी के टुकड़े तोसफ़र में ही छूट गए   इस बार चलना है धीरे-धीरे रिश्तों की डोर थामे  सफ़र की ख़ुशबू और रंगों...
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  September 12, 2011, 4:39 pm
............चाँद माना धरा से बहुत दूर है !  चांदनी ये मगर कब कहाँ दूर है !!भटकता फिरूं में यहाँ से वहां !ऱब इन्सान से कब कहाँ दूर है !!किसी के लिए मांग मन से दुआ ! दुआ से असर कब कहाँ दूर है !!ये माना तू मुझसे बहुत दूर है !  दिल ये मगर कब कहाँ दूर है !!मिलते नहीं दो किनारे तो क्या ! बीच धारा बह...
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  May 10, 2011, 2:35 pm
......... हर आँगन में ख़ामोशी हैसब उजड़ा-उजड़ा लगता हैदिल में लावा पिघल रहा  मन उखड़ा-उखड़ा लगता है पथराई सी आँखें है   हर पेट में पीठ समायी है   ईमान बचा के रख्खा है मजदूर की यही कमाई है   भावहीन है हर चेहरा हर चेहरे में ऱब दिखता है   कौन यहाँ अहसास ख़रीदे ज़िस्म यहाँ पे बिकता है   आ...
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  May 4, 2011, 5:30 pm
.... लकीर-ए-दस्त का लिक्खा समझ आया नहीं मुझको !    तू ही मुज़रिम तू ही मुंसिफ़, गुनाह तेरा सजा मुझको !!  ये मौसम का बदलना तो, मुझे भी रास आता  है ! यूँ अपनों के बदलने का,चलन भाया नहीं मुझको !!पढ़े शाम-ओ-सहर जिसने क़सीदे शान में मेरी !वो ही अब ढूंढता है हाथ में खंजर लिए मुझको !!अगर हो मौज ...
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  February 24, 2011, 12:53 pm
................................................... तू है ज़रदिमाग तुझे क्या कहूंमेरे दर्द-ए-दिल का फ़लसफालिखी है मेरी शक्ल पेमेरे रंज-ओ-गम की दास्ताँ ना तो राहगुज़र के है नक्श-ए-पाँना ही मंजिलों की कुछ खबरमैं तो गर्द-ए-सफ़र का ग़ुबार हूँहै ये सिम्त-ए-गैबानासफ़रजो ज़हीन थे चले गएजला-जला के बस्तियांमे...
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  December 15, 2010, 11:24 am
 .ना कर तर्क-ए-वफ़ा कांटे पे जरा तोलूँगाखरा है कौन यहाँ सारे भरम खोलूँगा !शूली पे चढ़ा दो या सर कलम कर दो सच कड़वा ही सही मैं तो सच ही बोलूँगा !सुना है शहर में आब-ओ-दाना मिलता हैभरे जो पेट, तो मै भी सड़क पे सो लूँगा !हासिल हुआ है क्या तुझे घर मेरा जलाकरमैं तो बेबस हूँ बहुत, भर के आह...
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  September 25, 2010, 3:27 pm
. वक़्त की ताल पे रक्स करता रहाअश्क पी-पी के जख्मों को भरता रहा !थोड़ा जीता रहा थोड़ा मरता रहामौत की राह में, खेल करता रहा !नट की रस्सी के जैसी है ये ज़िन्दगीनट के जैसे, में रस्सी पे चलता रहा !उसकी नज़रों ने, मेरी कसम तोड़ दी मैं तो पीने से, तौबा ही करता रहा !नफ़स चलती रही आह भरता र...
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  August 17, 2010, 3:37 pm
...............................कभी सुर्ख़ी थी इस पे भी, ज़र्द जो आज है चेहरा हर एक कतरा लहू का ज़िस्म से किसने जला डाला !ये जाति धर्म की बातें ,ये बातें है सियासत कीसियासत की इन्ही बातों ने मुल्कों को जला डाला ! कभी ना हम समझ पाए ये पेच-ओ ख़म ज़माने के ये किसने छीन ली रोटी, ये किसने घर जला डाला !य...
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  July 6, 2010, 4:10 pm
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