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मेरी कहानी

कार्तिक पूर्णिमा...सिर्फ दो बातों की याद दिलाती है...सुबह अंधेरे मे नदी-तालाबों मे तैरते दीयों की रोशनी और गुरुनानक जयंती मे गुरुद्वारे मे होने वाले लंगर की...ये दोनों यादें बचपन से जुड़ी हुई खास यादों का हिस्सा हैं...मुझे याद है जब मैं स्कूल मे थी तब मेरी कई पंजाबी सहेलियाँ...
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Tag :
  November 28, 2012, 3:54 pm
कुछ दिनों पहले ही मुझे अपनी एक पुरानी सहेली नेट पर मिली....और उससे एक दूसरी सहेली का नंबर मिला और उससे दूसरी का...बस इस तरह मुझे अपनी सभी सहेलियों के नम्बर मिले और उनके बारे में भी पता चला...मेरी उनसे अक्सर बातें होने लगीं और हम फिर से एक दूसरे से जुड़ गए....कुछ हफ़्तों पहले मुझ...
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Tag :भिलाई
  September 20, 2011, 3:06 pm
अभी कुछ दिनों पहले अपने हाथ के कॉर्न के लिए होम्योपथिक डॉक्टर से मिली.....ये हॉस्पिटल विले पार्ले(मुंबई)में है और वहाँ की खास बात ये है कि वो आपकी बीमारी का इलाज करने तक ही मतलब नहीं रखते...वो पहले आपके नेचर को जानते हैं...कुछ सवालों से या फिर वो आपसे ही कहते हैं कि आप अपने बा...
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Tag :डॉक्टर
  May 20, 2011, 3:14 pm
आज का दिन मेरी ज़िन्दगी का सबसे सुनहरा दिन है....आज मुझे अपनी एक बिछड़ी सहेली मिल गई...राखी सिंग चंदेल...जब मैं सारी सहेलियों से बिछड़ी थी तब ये ही एक ऐसी सहेली थी जिसने पत्र-व्यवहार काफी लबे समय तक जारी रखा....लेकिन बाद में उसकी व्यस्तता बढती गई और पत्र कम होते-होते बंद हो गए.......
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Tag :मेरी सहेली
  August 21, 2010, 9:59 am
बचपन से ही जब मुझे घर पर छोड़ कर दोनों भाई स्कूल जाया करते थे....मुझे बहुत बुरा लगता था और मैं बस इंतज़ार किया करती थी....न सिर्फ उनके आने का बल्कि जल्दी से बड़ी होकर अपने स्कूल जाने का भी....और जब वो दिन आया....मेरी ख़ुशी का तो ठिकाना ही नहीं था.......मैंने कई बच्चों को रोते हुए स्कूल ज...
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Tag :पटरियां
  June 26, 2010, 10:43 am
अपनी जीवन यात्रा लिखते-लिखते अचानक अतीत से वर्तमान में चली आई थी.....इससे बीच के कुछ वर्ष पीछे छूट गए...अब वो बार-बार मुझसे अपना स्थान मांग रहे हैं...कहते हैं," हमारे बिना तुम्हारी जीवन-यात्रा कैसे पूरी हो सकती है...?"......मुझे इनकी याद तो थी...लेकिन एक बार जब कोई अपने अतीत से वर्तम...
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Tag :मार्चपास्ट
  April 9, 2010, 5:24 pm
होली...........रंगों से भरा त्यौहार.....जिसमे किसी भी तबके में कोई अंतर नहीं होता.........हर एक बस रंगों से सराबोर होता है....लेकिन कोई-कोई अपने दोस्तों से दूर होकर केवल दूसरों को रंगों से खेलते हुए और खुशियाँ मानते हुए देखता है,कभी खुश होता है...तो कभी अपने दोस्तों को याद करके उदास.........औ...
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Tag :होली
  March 3, 2010, 3:44 pm
आजसरस्वतीपूजाथी....स्कूलके दिनों में हम सुबह जल्दी स्कूल जाकर पूजा की तैयारियां किया करते थे....सरस्वती वंदना,पूजा,प्रसाद वितरण और फिर छुट्टी हो जाया करती थी.....जब से स्कूल जाना बंद किया,घर पर ही पूजा कर लिया करती...हर साल की तरह इस साल भी सरस्वतीपूजाकी....सरस्वती पूजापर केस...
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Tag :सरस्वती पूजा
  January 20, 2010, 6:10 pm
मकर संक्रांति....पता नहीं लोगों को ये नाम सुनकर क्या याद आता है मुझे तो ये नाम सुनते साथ ही तिल की चक्की,लड्डू वगैरह याद आ जाते हैं...बचपन से ही इस दिन हम तिल-गुड आदि की बनी चीजें खाया और दान दिया करते थे..कई लोग खिचड़ी भी दान देते हैं....मम्मी बहुत ही स्वादिष्ट तिल की चक्की बनात...
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Tag :मकर संक्रांति
  January 14, 2010, 2:00 pm
आज नए साल को शुरू हुए पूरे ११दिन हो चुके हैं.......वैसे तो लोग साल के आखिरी दिनों में ही साल भर का लेखा-जोखा कर लेते हैं.....लेकिन साल के आखिरी दिन मेरे लिए व्यस्तता से भरे हुए रहे.....ऐसा नहीं है कि मैं पार्टी कि तैयारियों में लगी थी....क्यूंकि मैं नए साल की शुरुआत पार्टी से करने मे...
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Tag :पुणे...
  January 11, 2010, 4:34 pm
बचपन में रेत के घरौंदे तो हम सभी ने बनायें हैं ...वो सुनहरी..गीली रेत का गुम्बदनुमा घर बनाकर उसके भीतर हाथों से सुरंगें बनाना.....मैं और मेरी सहेली भी यूँ ही खेला करते थे...ये सुरंगें जब पूरी हो जातीं और दोनों के हांथ मिल जाते तो.......हमारी खुशी का कोई ठिकाना ही रहता था....किसी के ह...
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Tag :घरौंदा
  November 23, 2009, 6:54 pm
पापाजी....बचपन में कितनी ही बार इनकी गोद में खेली...वे मुझे कई नामों से बुलाते...गुडिया,नन्ही राजकुमारी...और भी जाने क्या-क्या...?...पापाजी मुझे भाइयों से ज्यादा प्यार करते....पहली बार उनके साथ ही स्कूल गई...मुझे याद है..एक दिन मैंने उनके साथ सामान सप्लाई करने के लिए जाने की जिद की थ...
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Tag :पापाजी
  August 27, 2009, 4:44 pm
पिछले कुछ दिनों से "स्वाइन फ्लू"के डर ने सभी को यूँ घेरा था...कि कोई भी बिना किसी जरूरी काम के बाहर नही निकलना चाहता....लेकिन इसे भुला कर सभी ने बड़े उत्साह से"स्वतंत्रता दिवस"मनाया....मैं भी अपनी"हाऊसिंग सोसायटी"के द्वारा आयोजित समारोह में शामिल हुई...लहराते हुए तिरंगे को दे...
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Tag :स्वतंत्रता
  August 16, 2009, 1:13 pm
पिछले महीने से मैंने ट्यूशन पढाना शुरू किया....बच्चों के नखरे-बहाने देखकर मजा भी आता है...गुस्सा भी...उन्हें पढाते हुए मुझे भी अपने ट्यूशन के पहले दिन की याद आती है......ये सभी तो फ़िर भी पहले दिन अच्छी तरह से पढने आ गए थे......जब मैं पहले दिन ट्यूशन पढने गई थी....वो दिन तो आज भी नही भूल...
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Tag :पहला अनुभव
  August 6, 2009, 6:32 pm
स्कूल दूर होने की वज़ह से हमें कई सालों तक रिक्शे की रोज़ सवारी का मौका मिला.इन ८-९ वर्षों में हमने कई रिक्शे बदले....इस वज़ह से हमें सारे रिक्शेवाले भइया का नाम तो याद नही है,लेकिन २ रिक्शावाले भइया हमें हमेशा याद रहेंगे....एक अपने नाम की वजह से और एक अपने अनोखे रिक्शे की वज...
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Tag :दुकालू भाई
  July 3, 2009, 6:38 pm
आज सुबह एक दोस्तों के ग्रुप को देखी.....हँसी-मजाक करते हुए,एक दुसरे की खिंचाई करते हुए....मुझे भी अपने स्कूल के वो दिन याद आ गए,जब हम सभी सहेलियों का ग्रुप इसी तरह की मस्ती करता था.हमारी क्लास डे शिफ्ट होने के कारण हमारा अधिकांश समय स्कूल में सहेलियों के साथ ही बीतता था....घर ...
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Tag :अकेलापन
  June 6, 2009, 3:25 pm
माँ....एक ऐसा शब्द जिसे बच्चा सबसे पहले कहता है.मेरी माँ...जिन्हें मैंने हर वक्त अपने साथ पाया....मुश्किल पलों में सहेली के रूप में,जीवन की कठिन राहों में मार्गदर्शक के रूप में,अकेलेपन में सहारे के रूप में....पहली बार मम्मी को छोड़ कर कही गई तो वो था मेरे स्कूल का पहला दिन....उसके ...
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Tag :माँ
  June 1, 2009, 4:51 pm
आज अचानक अपने स्कूल का पहला दिन याद आ गया.छोटी होने के कारण कई फायदे तो थे लेकिन नुकसान भी था...मुझे घर पर सारे दिन अपने भाइयों के स्कूल से घर आने का इंतजार करना पड़ता था,इस बोरियत को मिटाने के लिए मम्मी मुझे अक्षर ज्ञान और लिखना सिखाते थे......इसी वजह से मैं स्कूल जाने से पहले ...
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Tag :गाना और सहेलियां
  May 28, 2009, 6:22 pm
कल मार्केट में एक भेल(मुर्रे में कुछ चटपटी चीजें मिलकर बनाई जाती है/गुपचुप की दूर की बहन)वाले को देख कर अचानक अपने स्कूल के सामने खड़े होने वाले भेल वाले बाबा की याद आ गई.......हमारे भेलवाले बाबा हम लड़कियों को "भवानी" कहकर बुलाते थे......उनका वो गाना"जो खायेगा हमारी भेल,कभी होग...
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Tag :बाबा स्कूल
  May 22, 2009, 11:52 am
पिछली बार मैंने अपने इतिहास के टीचर के बारे मैं लिखा था और आज मैं अपनी संस्कृत की टीचर के बारे मैं लिखना चाहती हूँ;वैसे ये करीब-करीब एक ही तरह की बात होगी लेकिन फ़िर भी....हम घर में बचपन से ही मंत्रों का जाप किया करते थे और हर रविवार हम यज्ञ करने गायत्री मन्दिर भी जाया करते थ...
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Tag :यज्ञ
  May 12, 2009, 1:59 pm
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