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सोचा ना था....

कहानियों की हालत बहुत ख़राब है..किसी के सिर में दर्द है तो किसी के पीठ में...किसी को भावनाओं की ड्रिप चढ़ी हुई है तो कोई बिस्तर पर पड़ी कराह रही है। किसी की धड़कनें मद्धम है तो बाहर उसके इंतज़ार में खड़ी कहानियाँ एक-दूसरे के गले लग आँसू बहा रही हैं। सिर पीटती और ज़ोरों से ...
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Tag :
  April 14, 2019, 6:20 pm
कई दिनों से किताब पढ़ना बंद-सा था। किसी भी किताब को देखकर लगता था कि पढ़ना है पर आराम से पढ़ूँगी, बस यही सोचकर इतने दिनों से पढ़ना स्थगित सा ही था। एक रात यूँ ही पास रखी किताब के पन्ने पलटने लगी और एक-दो पन्ने पढ़ने के बाद किताब पढ़ती ही चली गयी। काम के बीच दो ही दिनों में ये...
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Tag :Raisha laalwani
  December 19, 2018, 8:35 pm
कल बातों-बातों में देश और प्रेम की बातें हुईं...मेरा मानना है कि देश की स्थिति पर चर्चा या तो बहुत गहन तरीक़े से हो सकती है या नहीं हो सकती, ऊपरी तौर पर छूकर निकल जाएँ ऐसा हो ही नहीं सकता। मुझे इस विषय पर कुछ भी लिखने से पहले ख़ुद भी कई बातों और अपने विचारों में सामंजस्य बिठा...
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Tag :
  July 26, 2018, 9:21 pm
कुछ दिनों में क्या-क्या भाव मन में आते-जाते रहे हैं ये कहना चाहूँ तो भी कह नहीं पाऊँगी शायद...वो ख़बर पढ़ते हुए दिल दहल गया...पहले लगा ज़ोर से चिल्ला पड़ूँ..फिर मन के किसी कोने से एक घुटी-सी चीख़ हीं निकल पायी...एक ओर दहशत ने क़ब्ज़ा जमाया तो दूसरी ओर ग़ुस्सा भी था। मन से इतने श...
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Tag :पतित समाज
  April 14, 2018, 5:57 pm
कल“विश्वमानसिकस्वास्थ्यदिवस”हैऔरमुझेलगता है शायद आज का दौर ऐसा है जब हर इंसान को मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। पहले की ज़िंदगी में भी परेशानियाँ कम नहीं थीं लेकिन आज के दौर में जिस तरह लोग हर छोटी बड़ी बात का प्रेशर लेते हैं वो यहीं दर्शाता है कि हम...
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Tag :मनोरोग
  October 9, 2017, 6:57 pm
कुएँमेंकुछमेंढकपरिवाररहाकरतेथे..सभीबहुतख़ुशथेचारोंओरगोलदीवारथी,पानीथाऊपरआसमानभीदिखताथागोल..बाप-दादाकेज़मानेसेसबवहींखेलतेखातेऔरआरामसेवहींज़िंदगीबितादेतेथे…लेकिनएकनयाबच्चादुनियामेंआया,उसकेमनमेंकईसवालथे..कुएँसेबाहरकीदुनियाकोलेकर..सबउसकेसवालटाल...
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Tag :वैचारिक ग़ुलामी
  September 26, 2017, 8:11 am
मैं लिखना चाहती हूँहर अहसास को,हर जज़्बात को उम्मीदों को आशाओं को ख्वाहिशों को,अरमानों को धड़कन के हर रंग को हर चाहत और उमंग कोबीती हुई हर बात को अपनी हर सुबह हर रात को हर अजनबी के अपनेपन को और परिचितों के बदले रंग को अपने हर स्वार्थ,लालच और बेईमानी को अपनी हर नादानी को ह...
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Tag :मन की बातें
  July 16, 2017, 4:56 pm
"बसचलीतोसबकेबीचहँसते-बतियातेउसेऐसालगाजैसेसारेदिनख़ूबसारीपढ़ाईकरकेघरकीओरलौटरहाहै।तभीख़यालआया-धत्वोतोस्कूलजारहाहै।"इसएकवाक्यमेंबंटीकेमनकीमनस्थितिज़ाहिरहोजातीहै,जबआपकोघरसेज़्यादाबाहरआनंदआनेलगेतोसमझिए कुछ ठीक नहीं है,कुछभावनाएँऐसीहोतींहैंजोआपअं...
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Tag :पुस्तक चर्चा
  December 2, 2016, 12:54 pm
कृष्ण आज क्षमा माँगते हैं हर उस माँ से,जिसका बच्चा कृष्ण बनने की ठानकर घर से निकलता है..और बनना चाहता है सिर्फ़ माखनचोर..करना चाहता है रासलीला..हरना चाहता है गोपियों के वस्त्र..तोड़ना चाहता है राह चलती गोपियों की मटकियाँ..बनाना चाहता है हर राधा को अपनी..पर नहीं मोहना चाहत...
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Tag :जन्माष्टमी
  August 26, 2016, 1:15 pm
इस फ़िल्म की कहानी काल्पनिक है..किसी भी पात्र का किसी जीवित या मृत व्यक्ति से सम्बंध मात्र संयोग है..इस तरह के जो डिस्क्लेमर फ़िल्म की शुरुआत में आते हैं लोग उसे वैसे ही नज़र अन्दाज़ कर देते हैं जैसे फ़िल्म से पहले आने वाले धूम्रपान ना करने वाले विज्ञापन को..।लोग ना तो धू...
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Tag :
  July 30, 2016, 2:06 pm
कुछ दिनों पहले रश्मि दी से कुछ किताबें पढने के लिए ले आई थी..उनमें ही एक किताब थी ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा जूठन..पता ही नहीं था क्या होगा उसमें..कैसी होगी..मैं किताबों के पहले पांच पन्ने से अनुमान लगाती हूँ कि ये कैसी होगी..शायद ये अच्छी आदत नहीं है..लेकिन जब पहले पांच प...
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Tag :ओमप्रकाश वाल्मीकि
  July 3, 2016, 2:46 pm
ज़िन्दगी में सभी ने मुझे कुछ न कुछ सिखाया है..लेकिन अगर मैं किसी की सबसे ज्यादा शुक्रगुज़ार हूँ तो वो हैं मुझे वॉइस् ट्रेनिंग देने वाले वनमाली सर..जब वहां गयी थी तो मुंह से शब्द नहीं निकलते थे..पर उन्होंने शब्दों में भाव लाना सिखाया...या कहूँ उन्होंने ही आत्मविश्वास दिलाया ...
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Tag :आवाज़
  May 19, 2016, 7:50 pm
ज़िन्दगी में सभी ने मुझे कुछ न कुछ सिखाया है..लेकिन अगर मैं किसी की सबसे ज्यादा शुक्रगुज़ार हूँ तो वो हैं मुझे वॉइस् ट्रेनिंग देने वाले वनमाली सर..जब वहां गयी थी तो मुंह से शब्द नहीं निकलते थे..पर उन्होंने शब्दों में भाव लाना सिखाया...या कहूँ उन्होंने ही आत्मविश्वास दिलाया ...
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Tag :आवाज़
  May 19, 2016, 7:50 pm
आज टीवी पर किसी कार्यक्रम का विज्ञापन आ रहा था हिंदी में...जहाँ वैज्ञानिक को वैग्यानिकलिखा था..वहीँ अदृश्यताको आद्रिश्यतालिखा था...ऐसी ग़लतियाँ अक्सर देखने मिलती है...न सिर्फ मनोरंजक चैनल्स में बल्कि न्यूज़ चैनल्स में भी..ये टाइपिंग की ग़लतियाँ तो नहीं हैं..ये हिंदी भाषा क...
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Tag :भाषा की दुर्दशा
  May 17, 2016, 7:42 pm
आज पढने के लिए कुछ नई किताबें निकालते समय “काशी का अस्सी” पर नज़र पड़ी.पिछले साल इस किताब को पढ़ा था मैंने..पर इसके बारे में कुछ लिखा नहीं था..दरअसल इसे पढने के बाद समझ ही नहीं आया कि क्या लिखूं इसके बारे में...पर आज जब दुबारा ये नज़र आई तो लगा इसके बारे में कुछ तो लिखना ही चाहिए.ए...
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Tag :काशीनाथ सिंह
  May 15, 2016, 7:58 pm
आज पढने के लिए कुछ नई किताबें निकालते समय “काशी का अस्सी” पर नज़र पड़ी.पिछले साल इस किताब को पढ़ा था मैंने..पर इसके बारे में कुछ लिखा नहीं था..दरअसल इसे पढने के बाद समझ ही नहीं आया कि क्या लिखूं इसके बारे में...पर आज जब दुबारा ये नज़र आई तो लगा इसके बारे में कुछ तो लिखना ही चाहिए.ए...
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Tag :काशीनाथ सिंह
  May 15, 2016, 7:58 pm
कल एक परिचित मोबाइल में अपनी कामवाली का मैसेज दिखा रहीं थीं,जो इंग्लिश में था..मैंने कहा "मोबाइल में ऐसी सेटिंग होती है जब फ़ोन ना लगने पर मेसेज अपने आप चला जाता है या हो सकता है आपकी कामवाली पढ़ी-लिखी हो।" ये बात उन्हें जले पर नमक जैसी लगीवो बिफरकर बोलीं-नहीं..कोई पढ़ी-ल...
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Tag :कामवाली
  May 2, 2016, 1:44 pm
आज नवभारत में एक ख़बर पढ़ने मिली..मध्यप्रदेश के भिंड ज़िले के किशूपुरा गाँव की प्रियंका भदौरिया ने अपनी शादी के मौके पर ससुराल वालों से चढ़ावे के रूप में गहने की बजाए 10,000 पौधे लाने का संकल्प लिया।उससे भी अच्छी बात ये कि ससुराल वाले उसकी बात से सहमत हुए और अब ये पौधे मायक...
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Tag :पर्यावरण
  April 24, 2016, 2:07 pm
कुछ दिन पहले बस में स्कूल की दो लड़कियाँ मराठी स्टाइल में एक सी साड़ी औरगहने पहने स्कूल बैग के साथ चढ़ीं। सबकी नज़रें उनकी ओर थीं;अच्छीं लगरहीं थी।एक आदमी ने अगले स्टाप में चढ़ते साथ उन दोनों से कहा-"बहुत अच्छीलग रही हो दोनों"।बड़ी लड़की की ओर से कोई ख़ास प्रतिक्रिया नहीं...
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Tag :आज़ादी
  July 26, 2015, 7:20 pm
मैंने ज्यादा व्यंग्य नहीं पढ़े हैं अगर पढ़ा है तो हरिशंकर परसाई को पढ़ा है,उनसे हटकर कोई व्यंग्य पहली बार पढ़ा..और वो व्यंग्य था ज्ञान चतुर्वेदीका बारामासी. इस व्यंग्य ने पहले तो मुझे अपने नाम के कारण ही आकर्षित किया,कि ऐसी क्या कहानी हो सकती है जिसके लिए बरामासी नाम रखा गय...
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Tag :पुस्तक चर्चा
  May 9, 2015, 4:49 pm
'कृष्णकुंजी'अश्विन सांघी की लिखी एक बेहतरीन किताब है.ये कहानी है एक ऐसे सीरियल कीलर की जो खुद को कलियुग का कल्कि अवतार मानता है और पाप को मिटाने की कोशिश में एक-एक करके वैज्ञानिकों की हत्या करता जा रहा है.इस पूरी गुत्थी को सुलझाने में ये कहानी एक ऐसा मोड़ लेती है जहाँ कृष्...
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Tag :कृष्णकुंजी
  April 25, 2015, 12:43 pm
कुछ दिनों पहले पढ़ी अशोक के. बैंकरकी लिखी किताब “दशराजन” ,इस किताब ने कई पहलुओं से प्रभावित किया,जिसमें सबसे पहला है रोचक लेखन,कहानी और पात्र.अशोक के. बैंकर ने बहुत ही ख़ूबसूरती से इस पूरी कहानी को पेश किया है. इस कहानी की सबसे बड़ी खासियत है कि ये हमारे प्राचीन इतिहास का अं...
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Tag :दशराजन
  April 12, 2015, 5:00 pm
कल'विश्व युवा लेखक प्रोत्साहन दिवस’था.इस दिन अपने आसपास के युवाओं को जो पढने-लिखने  में रूचि रखते हैं उन्हें पढाई के अतिरिक्त लेखन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.इस बात से मुझे याद आया किस तरह बचपन में मुझे लेखन के लिए प्रोत्साहित किया गया था,तब मैंने इस बारे में सोच...
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Tag :विश्व युवा लेखक प्रोत्साहन दिवस’
  April 11, 2015, 4:58 pm
“किताबों से कभी गुज़रो तो यूँ किरदार मिलते हैं गए वक़्त की ड्योढ़ी में खड़े कुछ यार मिलते हैं!”बस कुछ इसी तरह कई किरदारों से मुलाक़ात हुई गुलज़ार की लिखी “ड्योढ़ी” को पढ़ते हुए. यूँ तो गुलज़ार के शब्दों को कई बार सुना है पर उन्हें पहली बार पढ़ा. ड्योढ़ी कई कहानियों का संग्रह है और ह...
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Tag :पुस्तक चर्चा
  April 9, 2015, 2:51 pm
साल की शुरुवात हुई आनंद नीलकंठन की लिखी किताब “असुर:पराजितों की गाथा”से. जैसा की नाम से ही जाहिर है ये किताब बयां करती है,असुरों की गाथा,यानि रावण की कहानी. रामायण की कहानी तो हम सभी जानते हैं,पर रावण के विषय में कितना पता है हमें,कई बार ये प्रयास हुआ भी कि रावण की कहानी कह...
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Tag :पुस्तक समीक्षा
  April 8, 2015, 5:53 pm
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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