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Blog: बरिस्ता..

Blogger: baabusha
कमला झरिया न तुम आये न चैन आया न मौत आयी शब-ए-वादादिल- ए- मुज़्तर था मैं था और थीं बेताबिया मेरी अबस नादानियों पर आप अपनी नाज करते हैं अभी देखी कहाँ हैं आपने नादानियां मेरी... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   1:29pm 2 May 2012 #ग़ज़ल
Blogger: baabusha
 तू पिया से मिलकर आयी हैबस आज से नींद पराई हैदेखेगी सपने बालम केये जीवन भर का रोग सखीतोहे पगली कहेंगे लोग सखीयाद आयेंगे वादे बालम केतू लाख चले री गोरी थम थम के   पायल में हैं गीत छम छम के ... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   7:02pm 26 Apr 2012 #इक़बाल बानो
Blogger: baabusha
इक़बाल बानो दश्त ए तन्हाई में ऐ जाने जहां लरज़ा हैतेरी आवाज़ के साए तेरे होंठों के सराबदश्त ए तन्हाई में दूरी के ख़सो - खाक़ तलेखिल रहे हैं तेरे पहलू के समन और गुलाबउठ रही है कहीं क़ुरबत से तेरी सांस की आंचअपनी ख़ुशबू में सुलगती हुयी मद्धम मद्धमदूर उफ़क़ पार चमकती हुयी कत... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   1:29pm 3 Apr 2012 #फैज़ अहमद फैज़
Blogger: baabusha
शोभा गुर्टू बारह बरस हुए सैंया को देखे हंस हंस गरवा लगैबे रामा पिया मिलन को जइबे रामा.. ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   1:22pm 20 Mar 2012 #शोभा गुर्टू
Blogger: baabusha
पारुल घोष किसकी ये सदा थी, किसने मुझे पुकाराकोई मुझे बता दे क्या वो बुला रहे हैं... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   6:45am 11 Mar 2012 #पन्नालाल घोष
Blogger: baabusha
लैटिन बीट्स पर उनकी देह का एक एक अंग ऐसे थिरकता है जैसे  मूसलाधार वर्षा में पीपल का कोई  पत्ता कांपता हो . उनकी आँखों में एक स्थायी गीलापन है जो दिखता नहीं. उनकी मुद्राओं में इतनी मादकता है कि उन्हें नाचते देखते हुए आप पलक नहीं झपक सकते. उनमें बीयर की ताज़ी खुली बोतल सा उफ़ा... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   6:37pm 7 Mar 2012 #स्पैनिश
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काहे करत मोसे बरजोरी ! बार बार बरजो नाहि माने,जाओ जाओ अब छेड़ो न हंसत मो पे सब बिरज  की नारी !काहे करत बरजोरी !  ... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   12:57pm 6 Mar 2012 #होली
Blogger: baabusha
निज़ाम जब देह छोड़ने वाले थे तब उन्होंने ख़ुसरो को  कहीं दूर भेज दिया था. निज़ाम जानते थे ख़ुसरो यह पीड़ा न सह सकेंगे. सो कहीं और भेज दिया. ख़ुसरो लौटे तो देखा निज़ाम तो गए ! अब तो वो संभाले न संभले ! आंसुओं का सैलाब आ गया. खुद पर वश न रहा. पीड़ा सही न जाए.गुरु के दूसरे शिष्यों ने स... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   6:26pm 5 Mar 2012 #हज़रत निजामुद्दीन
Blogger: baabusha
डारो रे रंग डारो रे रसियाफागुन के दिन आये रेरंग कच्चो और नयो खिलाड़ीमारी पिचकारी भिगोई साड़ीरंग गयी अंग अंग सजनी, खिलन के दिन आये रे ..दुल्हन घूंघट में शरमाएरसिया नैनन बीच समायेकूक कूक कर कोयल  बोले, जोबन  के दिन आये रे .. साजन बैठा तन मन खोकरछलक रहा है रूप सरोवरप्यासी प्य... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   2:10pm 5 Mar 2012 #पंडित इंद्र
Blogger: baabusha
आज सुबह से उस्ताद जी की शहनाई सुन रहे हैं. शहनाई सुनने वाले (या न सुनने वालों ने भी ) उनकी सादादिली  के क़िस्से ज़रूर सुने होंगे . एक बात याद आयी जो कहीं पढ़ी थी.एक दिन उनकी एक शिष्या बोली , "बाबा आप ये क्या करते हैं. इतनी प्रतिष्ठा है आपकी..अब तो आपको भारत रत्न भी मिल चुका है. अब... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   3:56am 5 Mar 2012 #शहनाई
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निजाम की दरगाह सालों पहले पंकज अवस्थी की आवाज़ ने दिल में एक  सूराख  बना दिया था. मैं कब से एक सुर की तलाश में हूँ जो ये सुराख़ भर सके . तेरा ही करमतेरा ही करममेरे साथ ही चला मेरे साथ ही रुकामुझ पे रहा हर दम तेरा ही करमकहता ही नहीं.........................पत्थर में तू है समायादिल इन्सां में... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   11:59am 29 Feb 2012 #फ्यूज़न
Blogger: baabusha
ग़ुलाम अलीइक अजनबी झोंके ने जब पूछा मेरे ग़म का सबबसहरा की भीगी रेत पर मैंने लिखा आवारगीले अब तो दश्त- ए- शब की सारी वुसअतें सोने लगींअब जागना होगा हमें कब तक बता आवारगीकल रात तनहा चाँद को देखा था मैंने ख़्वाब में'मोहसिन' मुझे रास आएगी शायद सदा आवारगीये दिल ये पागल दिल मेर... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   6:15pm 27 Feb 2012 #ग़ज़ल
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शकीरा तुम्हारे लिए मैं वो सब छोड़ दूँ जो मेरा हैजो तुम मेरे साथ आओ निस्संदेह किसी कम्युनिस्ट देश की ओर चल पडूँमैं अपने नाखून कुतर दूँ कि तुम्हें चोट न पहुंचे अगर तुम इन वजहों से मेरे पास रह जाओ कि मैं अपना वज़न कम कर लूँ फुटबॉल के बारे में अपनी समझ और पैनी करूँ तो मैं यह भी क... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   2:35pm 26 Feb 2012 #शकीरा
Blogger: baabusha
एक दिन तुम सब कुछ भूल जाओगे, तब तुम्‍हारी विस्‍मृति की उंगली में मैं कौन-सी अंगूठी पहनाऊंगी कि तुम्‍हें याद आ जाए? स्‍मृति की चादर तुम हमेशा ओढ़े रखना, सुनो, बहुत जाड़ा है, विस्‍मृति की हवाएं एक बार बदन छू गईं, तो रोमछिद्र सुराख़ों की तरह हो जाएंगे. बर्फ़ के पेड़ का रंग भी ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   6:14pm 24 Feb 2012 #दादरा
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मीत के कैमरे से सुपरमून ( मार्च १९ , २०११ )हथेली में लेते ही सारे धागे आपस में उलझ गए थे. एक सुबह बहते पानी के नीचे हथेली रखी, तो लकीरें बह निकलीं. हथेलियां अब कोरे आसमान की तरह थीं. एक दिन बिना लकीर की उन हथेलियों में चाँद उगा. मेरी हथेली पर चंद्र पर्वत नहीं, 'सुपरमून' है. तब से ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   5:57pm 22 Feb 2012 #नौस्टेलजिया
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..................... और पता है, उन दिनों सतपुडा का जंगल पलाश की लपटों से झुलस रहा था . घड़ी की टिक टिक तो दीवार के ह्रदय की धड़कन है...चलती ही जाती है पर तब से वक़्त ठहर गया. ठहरा हुआ वक़्त दूर कहीं जंगल में धूनी रमाये हुए है . वैसे,फ़रवरी की किसी शाम फरीदा आपा को सुना है .............?सुनोगे ?फ़रीदा... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   2:17pm 19 Feb 2012 #फ़रीदा ख़ानम
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मुन्नी बेग़म मजबूर कर के फिर मुझे मेरे यार ले चलोउसकी गली में फिर मुझे इक बार ले चलोशायद ये मेरा वहम हो मेरा ख़याल होमुमकिन  है मेरे बाद से मेरा मलाल होपछता रहा हो फिर मुझे दर से उठा के वोबैठा हो मेरी राह में आँखें बिछा के वोउसने भी तो किया था मुझे प्यार ले चलोउसकी गली को ज... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   8:52pm 18 Feb 2012 #ग़ज़ल
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उनकी आवाज़ अनगढ़ सी है. इस आवाज़ का कच्चापन सोंधा सा लगता है.नाहिद अख्तर को सुनते हुए याद आ रही हैं बस नाहिद अख्तर.ज़िंदा रहे तो क्या है जो मर जाएँ हम तो क्या                                              जहां तेरा नक्श- ए- क़दम देखते हैं ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   3:43pm 16 Feb 2012 #नाहिद अख्तर
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व्हिटनी ह्यूज़टन के गीत  मैं अपनी खुरदुरी आवाज़ में हमेशा गुनगुनाती रही हूँ. सुबह Times  Now से उनके इंतकाल की खबर मिली तो मन उदास हो गया. उनकी रूह को चैन आये. आमीन.जानती हूँ अर्सा हुआमगर मुझे कुछ कहना हैपता है नवम्बर के उस सर्द दिन के बादमैं फिर पहले जैसी नहीं रही. हमें लगा हम... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   6:55am 12 Feb 2012 #श्रद्धांजलि
Blogger: baabusha
इधर कई दिनों से नींद पूरी नहीं हुयी. कोई बहुत परेशानी भी नहीं है नींद न होने से . एक दिन तो ऐसी गहरी नींद में जाना ही है कि  ज़िन्दगी भर के रतजगे का हिसाब बराबर कर ही लेंगे. अ-निद्रा  को हम  किसी  बीमारी की तरह नहीं लेते . कई बार सोते हुए भी जागना चलता रहा है. कभी कभी आँख खोल के भ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   3:40am 8 Feb 2012 #हर्षदीप कौर
Blogger: baabusha
पसंदीदा पेंटिंग ( आर्टिस्ट नामालूम )मेरी बालकनी में वसंत की हलकी पीली सुबह जिब्रान के अल-मुस्तफा की याद लेकर आयी है. 'द प्रोफेट' फिर खुली हुयी है . पंडित भीमसेन जोशी और मन्ना डे की जुगलबंदी सुबह से लगातार चल रही है. केतकी गुलाब जूही चम्पक बन फूले..झुलना  में  बैठ  आज  पी  के  ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   8:37am 28 Jan 2012 #द प्रोफेट
Blogger: baabusha
सुशोभित सक्तावत की क्लिक एक रोज़ तुम्हारी छाती में दफ़न हो गया दुर्मद 'ईगल'जरछार उल्काएं भुजा में सिर रख सो गयीं पर विषमताओं और रहस्य की देवी जब तुमसे मिलने पहुंची ओ खम्भात ,सलीके से लिफ़ाफे में मोड़ कर लौटा दी तुमने उसकी बेचैनी !अक्सर एक कथा के पीछे कई कथाएँ छुपी होती ह... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   6:54pm 21 Jan 2012 #यानी
Blogger: baabusha
कड़क ब्लैक लेमन टी,तकिये के पास पड़ी हरे-सफ़ेद कवर में लिपटी शिम्बोर्स्का और ग़ुलाम अली की आवाज़ !जनवरी की सुबह ऐसा बेड रेस्ट नसीब वालों के हिस्से ..इश्क में जीना नसीब वालों के हिस्से..इश्क में मरना नसीब वालों के हिस्से ....थू थू थू थू..... खुदा खैर करे नसीब वालों को बुरी बला से बचा... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   7:30am 18 Jan 2012 #ग़ज़ल
Blogger: baabusha
ये शीशे के सपने, ये रिश्तों के धागे..किसे क्या ख़बर है कहाँ टूट जाएँ..मुहब्बत के दरिया में तिनके वफ़ा केन जाने ये किस मोड़ पर डूब जाएँअजब दिल की वादी,अजब दिल की बस्तीहर एक मोड़ मौसम नई ख़्वाहिशों कालगाए हैं हमने भी सपनों के पौधेमगर क्या भरोसा यहाँ बारिशों कामुरादों की मंज़िल के... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   1:58pm 16 Jan 2012 #जगजीत सिंह
Blogger: baabusha
हारमोनियम की मद्‍धम आवाज़ और तबले की थाप का साथ देती हुई तालियाँ.....और फिर रफ़्ता-रफ़्ता कानों से होते हुए मन पे एक जादू सा तारी हो जाता है.... उस्ताद नुसरत फतेह अली ख़ाँ और..... हुसैन शाह का कलाम... बीच में युवा राहत का आलाप........................ Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   7:30pm 15 Jan 2012 #राहत फतेह अली खान
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