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Blog: पुष्पम

Blogger: Pushpendra Falgun
प्रतीकात्मक पेंटिंग : पुष्पेन्द्र फाल्गुन इन्टरनेट या टेलीविजन पर आभासी स्वरुप में हो या वास्तविक रुप में आहार अथवा खान-पान को लेकर तोता रटंत दोहराव ही दिखाई देते हैं. हम जो भी खाते या पीते हैं उसका हमारे शरीर पर वात-पित्त-कफ के स्वरुप में ही दोष उत्पन्न होता है और कु... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   4:26am 29 Jul 2019 #फाल्गुन विश्व
Blogger: Pushpendra Falgun
तस्वीर गूगल फोटोस से साभार पत्तल में भोजन से सेहत सुधरेगी और आपका आरोग्य बढ़ेगा, साथ ही लुप्त हो चुके इस व्यवसाय के जरिए अनेक लोग गृह उद्योग को आजीविका का साधन बना पाएंगे... इन्टरनेट पर इस सम्बन्ध में खूब प्रचार किया जा रहा है, यह अच्छी बात है लेकिन सही तरीके से इस बाबत न ... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   12:54pm 28 Jul 2019 #फाल्गुन विश्व
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फोटोग्राफ : अरुणेन्द्र मिश्र कुछ मित्रों ने कहा कि वर्षा ऋतु में किस तरह से प्राकृतिक जीवन शैली अपनायी जाए ताकि सपरिवार सेहतमंद रहते हुए इस मौसम में होने वाले रोगों से बचा जा सके. वैसे भी पिछली दो रात से बादल लगातार झड़ी लगाए हुए हैं.जितनी मेरी समझ है उसके अनुसार निम्न ... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   8:59am 28 Jul 2019 #फाल्गुन विश्व
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अक्सर आमजन ज्योतिषी के पास अपने आमजीवन की समस्याओं के निदान और निराकरण के लिए जाते हैं. विवाह, क्लेश, आर्थिक आभाव, व्यापार में घाटा, बेरोजगारी आदि के लिए ज्योतिषी से समाधान व उपाय पूछते हैं, मजेदार बात है कि ज्योतिषी उन्हें संतुष्ट भी करते हैं. जबकि ज्योतिष्य शास्त्र की... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   10:56am 20 Feb 2019 #
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समग्र चैतन्य - पुष्पेन्द्र फाल्गुनमित्र ने कहा, ‘समंदर कितना भी ताकतवर हो, बिना छेद की नाव को नहीं डुबो सकता है.’तो मैंने एक कहानी की कल्पना की. कहानी में नाव, नाविक और समंदर (समुद्र) मुख्य किरदार थे.एक बार सात नाविकों का दल विशेष अभियान पर समुद्र में भेजा गया. भेजने वाले क... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   10:00am 24 Sep 2017 #Pushpendra Falgun
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जिनके आँखों की नींद उड़ गयी हो, वे इस वीडियो को जरुर देखेंhttps://www.youtube.com/watch?v=XvOEOpnNrhs... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   4:02pm 12 Sep 2017 #
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समय की अदालत में इस समय एक महत्वपूर्ण मुकदमा चल रहा है. यह विचारधारा का मुकदमा है और समूचे विश्व की इस मुक़दमे के फैसले पर नजर है. लेकिन लगता है फैसला आने में अभी बहुत देर है, बहुत-बहुत देर. दोनों पक्षों के पास तर्क-वितर्क, सबूतों और गवाहों, सवालों और जवाबों के आगार हैं, जिसम... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   1:53am 10 Sep 2017 #
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यहाँ मैं दो चित्र लगा रहा हूँ और दावा कर रहा हूँ कि आप इन चित्रोंके सहारे अपने हाई ब्लड प्रेशर, शुगर को नॉर्मल कर सकते हैं। हर तरह के तनाव से मुक्त हो सकते हैं। हर अवसाद और कुंठा से उबर सकते हैं। इतना ही नहीं खुद को अटेंटिव, फोकस्ड और क्रिएटिव बना सकते हैं। शराब की लत और नश... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   3:58am 5 May 2017 #
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कविता : एक बयानतुम्हारी रसोई में वह जो बचा हुआ खाना है न! वही जिसे तुम मोहल्ले वालों की नजर बचाकर कूड़ेदान में फेंक आए हो, बस उतने ही खाने के लिए उस रोते हुए मासूम की माँ किसी शराबी के साथ फुटपाथ पर सो जाने को मजबूर है। बस उतने से ही खाने ने न जाने कितने ही चेहरों के निर्दोषपन... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   2:45pm 2 May 2017 #
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जीवन में हम सभी की कोई न कोई ऐसी मनोकामना जरूर होती है, जिसे हम शिद्दत से  पूरा करना चाहते हैं।  कई बार परिस्थितियों और हालात की प्रतिकूलताओं के चलते हमारी मनोकामनाएं धरी की धरी रह जाती हैं। बीतते समय के साथ इन मनोकामनाओं का अधूरा रह जाना हमें सालता है। यहाँ मनोकामन... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   2:43am 1 May 2017 #
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वह भैया है या अंकल उसे नहीं पता, बस वह इतना जानता है कि उसका जन्म दूध बेचने के लिए ही हुआ है। बाप-दादा यही करते रहे, सो उसे भी यही करना है। बाप-दादा भी यह जानते थे कि उसे यही करना है, इसीलिए जब वह सातवीं क्लास में अपने मास्साहब की कलाई काट कर घर भाग आया था, तो वे दोनों जोर से हँस... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   1:43am 26 May 2015 #
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जी, के. श्रीकुमार का यह चित्र मैंने खींचा है १). छुट्टीहे भगवान !गणित के अध्यापकछुट्टी पर होने चाहिएगणित अध्यापक आएडाँट भी पड़ीभगवान छुट्टी पर थे।२).  सिद्धांतकविता पढ़ीजरा भी समझ में नहीं आयीतब इस सिद्धांत का जन्म हुआ"पढ़ने पर जो समझ न आएवही होती है कविता।"3).  भगत सिंह... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   4:07pm 17 Oct 2014 #
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एक विशाल स्टेडियम से उस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देश भर के टेलीविज़न चैनलों पर जारी था, जिसे मैं सपने में देख रहा था। कार्यक्रम इतना भव्य था कि स्वप्न में भी मैं पलकें नहीं झपका पा रहा था। खचाखच भरे उस स्टेडियम में सुई रखने भर की भी जगह शेष न थी। विविध भाषाओं वाले इस दे... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   7:14am 14 Sep 2014 #
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थप्पड़ कुमारी दिया मिश्रा की डिजिटल पेंटिंग 'सिटी' यह उस समय की बात है जब शहरों में नए-नए कंक्रीट के जंगल उगने शुरू हुए थे। सड़क के किनारे के पेड़ इसलिए काट दिए गए थे कि उनसे कंक्रीट के तीन, पांच, सात मंजिला इमारतों की शोभा बिगड़ती थी। घरों के भीतर के पेड़ इसलिए काटे गए... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   3:38am 25 Mar 2014 #
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1. कवितेच्या गर्भातूनवेदनेला अर्थवायाशब्द शब्द गोळा केलाएका एका अक्षरासीतप तप दिस गेलायुगे युगे धुंडाळलीतेव्हा आली एक ओळजरा जरा टिचू लागेदु:ख कल्पांताची खोळओळ ओळ जुळू लागेदेही मनी उठे कळझळ लागे रोमरोमीप्राणातून सळसळवेदनांच्या ओझ्याखालीएका क्षणी निर्वाणलोकवि... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   11:20am 2 Sep 2013 #
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1. From the Embryo of poetryGave meaning to anguishesaccumulated each of the wordfor every alphabeta day became years of duodecimal Ages to seeka line emergesPullulates bit of stratum of deep struck griefline adds to linecorpus nous crop up contrivancepilus n pore showersdelight from soulunder the encumbrance of anguishesin a moment of emancipationfrom the embryo of poetryit is my rebirthEmbryo - wombDuodecimal - term used for twelve.Pullulates -  cracksCorpus - bodyNous - mind2. I'm HumanBe blessed with your godyour fear of frauddoesn't bothers meI shaped your Godand handed himcharges of destinyMy fist containsWarmth, Air, WaterPower of centuries are ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   3:14am 31 Aug 2013 #
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कुमारी दिया की डिजिटल पेंटिंग 'तिलिस्म' धरती अपनी धुरी पर घूमती है और सूर्य अपनी धुरी पर। धुरी पर घूमने के लिए आकार का वर्तुल होना यानी गोल होना ज़रूरी है। गोल की बजाय चौकोना-तिकोना हुआ तो धुरी लगाएंगे कहाँ! तब तो कोने परस्पर काबिलियत को लेकर ही झगड़ते रहेंगे और धुरी बे... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   5:24am 12 Apr 2013 #Vyangya
Blogger: Pushpendra Falgun
 (1) . कविता के साथ-साथहो सकता है कि अच्छी न बने कविताक्योंकि आँखों में नींद और सिर में भरा है दर्दपर स्थगित नहीं हो सकता लिखनालिखा था कभीकि जीवन की लय को पाना ही कविता हैलय तो अभी भी टूटी नहींपर सराबोर है यह कष्टों और संघर्षो सेनहीं रोकूँगा अब इन्हेंकविता में आने से.ओढ़ँ... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   8:01am 18 Dec 2012 #
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दिया मिश्रा का शीर्षक विहीन फोटोग्राफ पिता को हम चाहें न चाहें पिता हमें चाहें न चाहें वे हमारे पिता होते ही हमारे स्थायी पता हो जाते हैं।पिता की उंगलियाँ पकड़कर हमने चलना सीखा हो कि न हो पिता ही हमारी ज़िन्दगी में रास्तों की वजह बनते हैं।पिता ने गिरने से संभाला हो... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   3:24am 17 Dec 2012 #
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मेरी 11 साल की बेटी 'दिया' की डिजीटल पेंटिंग 'टीचिंग्स ऑफ़ लाइफ'सामने भयावह चुनौतियाँ हैं और कई यक्ष प्रश्न एक साथ खड़े हैं ! चारों ओर से उठे अंधड़ों ने मुझ तक आती सूर्य-किरणों का रास्ता रोक लिया है पार्श्व से सपनों के बिलखने के स्वर तेज़ होते जा रहे हैं अभी - अभी मेरे क... Read more
clicks 252 View   Vote 0 Like   11:04am 4 Dec 2012 #
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उनके लिए शौक़-ए-इज़्हार है हुनरमेरी तो ज़िन्दगी की अब्सार है हुनर कितने ही सवालात जीता हूँ, पीता हूँ मेरे लिए होता हुआ एतबार है हुनर मुकम्मल का हिस्सा तुम्हें लगता हूँमेरे हिस्से-हिस्से में यलगार है हुनर  ओट से देखने की फितरत क्यों पालें जब बेजल्व-ए-कराती दीदार है ... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   4:17am 23 Oct 2012 #
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वह शख्स जो किसी मस्जिद-मंदिर नहीं जाता दरअसल वह आदमी किसी के घर नहीं जाता मस्जिद-ओ-मंदिर में अब जो भीड़-शोर-सोंग हैमैं तो मैं अब वहाँ कोई खुदा-ईश्वर नहीं जाता   मिलाया हाथ, लगाया गले, दी तसल्लियाँ तुमनेतुम्हारे प्यार का शुक्रिया पर मेरा डर नहीं जाता बदला, ओढ़ा, रगड़ा, त... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   2:19am 15 Oct 2012 #
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आप लोगों की नजर एक कविता, शीर्षक है 'अंतस-पतंगें'परत-दर-परतउघारता हूँ अंतसउधेड़बुन के हर अंतराल परफुर्र से उड़ पड़ती है एक पतंग अवकाश के बेरंग आकाश में.पतंगों केधाराप्रवाह उड़ानों से उत्साहितटटोलता हूँ अपना मर्म मानसपाता हूँ वहाँ अटकी पड़ी असंख्य पतंगेंकहीं गु... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   4:13am 22 Nov 2011 #
Blogger: Pushpendra Falgun
यदि आप संरक्षक बनना चाहें तो कृपया अपना चेक इस पते पर संप्रेषित करें :-पुष्पेन्द्र फाल्गुनसंपादक फाल्गुन विश्वद्वारा- विश्वभारती प्रकाशन    तृतीय तल, धनवटे चम्बेर्स,    सीताबर्डी, नागपुर ४४००१२ महाराष्ट्र आप चाहें तो सीधे फाल्गुन विश्व के बैंक खाते में अपनी संरक्षक... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   1:41am 20 Oct 2011 #
Blogger: Pushpendra Falgun
जैसे दो किनारों के सहारे आगे बढ़ती है नदी किनारे न हों तो भटक जाएगी नदीकिनारे नदी के भटकाव को रोकते हैंऔर रखते हैं प्रवाहमान उसेकिनारे न हों तो दूर तक कहीं फ़ैल कर नदी ठहर जायेगी...स्वाभाविक तरीके से गतिमान रहना है तो दो की जरूरत अपरिहार्य हैदो पैर हों तो चाल स्वाभाविक ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   2:10am 10 Oct 2011 #
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