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Mohalla Live

अभी जब मैंने गैंग्‍स ऑ‍फ वासेपुर का प्रोमो फेसबुक पर शेयर किया, तो जो अनुराग को जानते हैं, उन्‍होंने समाज में पसरी हिंसा को सिनेमा में डील करने की उनकी शैली को समझते हुए गैंग्‍स ऑफ वासेपुर देखने से जुड़े इंतजार की बेकरारी दिखायी। पर कुछ लोगों ने कहा, प्रोमो से तो घिसी प...
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Tag :आमुख
  May 24, 2012, 11:05 am
♦ राज शेखरयों कहने को तो राज शेखर सिनेमा की ताजा ताजा शख्‍सीयत हैं और तनु वेड्स मनु ने उन्‍हें बहुत खास बना दिया। पर वे दरअसल ग्रामीण संवेदना से जुड़े एक प्रतिभाशाली और विनम्र युवक हैं, जिन्‍हें लोकप्रियता ने लोगों से कटने के बजाय जुड़ने की सलाह दी। उन्‍होंने गांव का ...
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Tag :ख़बर भी नज़र भी
  May 23, 2012, 11:45 am
बात संसद में जावेद अख्‍तर के भाषण से शुरू हुई। पूरे भाषण को यहां देख, सुन और पढ़ सकते हैं : वक्‍त की छलनी में चेहरे गुम हो जाते हैं, गीत अमर रहता है। ओम जी को लगता है कि जितनी बात और मांग है, वह महज दस मिनट में रखी जा सकती थी, जिसके लिए जावेद अख्‍तर ने पंद्रह मिनट का अतिरिक्‍त ...
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Tag :ख़बर भी नज़र भी
  May 22, 2012, 11:54 am
♦ जावेद अख्‍तरपिछले दिनों जावेद अख्‍तर को राष्‍ट्रपति ने राज्‍यसभा की सदस्‍यता दी। 17 मई 2012 को जावेद साहब ने संसद में अपना पहला भाषण दिया। इस भाषण में उन्‍होंने फिल्‍मी गीत-संगीत के कॉपीराइट के मसले पर बहुत महत्‍वपूर्ण बातें कहीं। हम यहां पूरा भाषण छाप रहे हैं। साथ ही ...
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Tag :ख़बर भी नज़र भी
  May 21, 2012, 10:12 am
♦ आमिर खान…विवाह जीवन का बेहद महत्वपूर्ण अंग है। यह साझेदारी है। इस मौके पर आप अपना साथी चुनते हैं, संभवत: जीवन भर के लिए। ऐसा साथी जो आपकी मदद करे, आपका समर्थन करे। हम शादी को जिस नजर से देखते हैं, वह बहुत महत्वपूर्ण है। शादी को लेकर हमारा क्या नजरिया है, इस पर हमारा जीवन ...
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Tag :आमुख
  May 21, 2012, 7:09 am
स्‍त्रीऔर पुरुष के बीच का साहचर्य, रिश्‍ता अब भी उतना ही अनसुलझा है, जितना पहली बार मनुष्‍य की ये दो प्रजातियां एक दूसरे से परिचित हुई होंगी। हां, उस पहली मुलाकात में यह भाव अंतिम बार रहा होगा कि मेरा मुझमें कुछ नहीं जो कुछ है सो तोर। क्‍योंकि न तो तब परिवार की परिकल्‍पन...
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Tag :uncategorized
  May 20, 2012, 2:29 pm
♦ रामचंद्र गुहाआज के हिंदुस्‍तान में दो दिलचस्‍प चीजें हैं, जिन पर गौर करना चाहिए। दोनों ही चीजें एडिट पेज पर चिपकी हुई हैं और उनसे आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि अखबार कहां पर सरकार के तलुवे सहला रहा है और कहां मीडिया को लेकर सरकार की साजिश का विरोध कर रहा है। संपादकीय (लिं...
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Tag :नज़रिया
  May 19, 2012, 12:49 pm
गृहमंत्री आजकल कई तरह के गंभीर आरोपों से घिरे हुए हैं और विपक्ष की ओर उन पर इस्‍तीफे का दबाव लगातार बन रहा है। लेकिन सिर्फ एक बयान के आधार पर हिंदुस्‍तान दैनिक उनके कसीदे कैसे काढ़ रहा है, इसका नमूना है यह संपादकीय। आज के अखबार में ही यह छपा है : मॉडरेटर…गृहमंत्री पी चिद...
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Tag :मीडिया मंडी
  May 19, 2012, 12:06 pm
मुंबई डायरी _____________उमेश पंत____सजग चेतना के पत्रकार, सिनेकर्मी। सिनेमा और समाज के खास कोनों पर नजर रहती है। मोहल्‍ला लाइव, नयी सोच और पिक्‍चर हॉल नाम के ब्‍लॉग पर लगातार लिखते हैं। फिलहाल मुंबई में हैं। उनसे mshpant@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।♦ उमेश पंतडोंगरी टु दुबई का बुक ...
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Tag :मोहल्ला मुंबई
  May 17, 2012, 2:01 am
संस्‍तुति♦ उदय प्रकाशगहरी संवेदनाएं, मानवीय सहकारिता और हरसंभव सहायता की अलक्ष्य कोशिशें इस ‘वर्चुअल-समाज’ में भी हैं। उस समाज से कहीं, (कई बार) अधिक और भावुक कर देने वाला, जिसे हम असली बाहर का ‘यथार्थ’ वाला समाज कहते हैं, लेकिन जो मीडिया, राजनीति और पूंजी की ताकतों का ...
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Tag :नज़रिया
  May 17, 2012, 1:09 am
♦ जय कौशल…अगर संदेह करना आधुनिकता का जरूरी लक्षण है, तो अब हमें रिश्तों के स्तर पर आधुनिक होने की सख्त जरूरत आन पड़ी है। खासकर जब हम खुद को एक जिम्मेदार मां-बाप, परिजन अथवा अभिभावक मानते हों। 13 मई, 2012, रविवार को ‘बाल यौन शोषण’ पर आधारित ‘सत्यमेव जयते’ के दूसरे एपिसोड से यह...
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Tag :ख़बर भी नज़र भी
  May 15, 2012, 12:21 pm
♦ अविनाशभारतीय ज्ञान परंपरा के इतिहास में चाणक्‍य एक ऐसे किरदार रहे हैं, जिनके शब्‍द जितने आ‍कर्षित करते हैं, उनकी जीवनचर्या भी उतना ही अचंभित करती है। एक मामूली हैसियत वाला आदमी मगध का तख्‍तापलट कैसे करता है और कैसे एक साम्राज्‍य को न्‍यायप्रिय छवि देने के लिए काल स...
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Tag :नज़रिया
  May 14, 2012, 11:33 am
प्रकाश के रे का खत सआदत हसन मंटो के नाम…महबूब मंटो,सलाम,मेरी तरफ से सौवें जन्मदिन की मुबारकबाद कबूल करो। हां, थोड़ी देर हो गयी। बात यह है मंटो, असल में मैं तुम्हें कोई मुबारकबाद भेजने वाला नहीं था। शायद मिट्टी के नीचे दबे तुम अब भी खुदा से बड़ा अफसानानिगार होने के अपने द...
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Tag :असहमति
  May 14, 2012, 9:42 am
इच्छा-मृत्यु की वैधता के निहितार्थ♦ विजय कुमारमार्च में ब्रिटेन के कानूनी इतिहास में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया। ब्रिटिश उच्च न्‍यायालय के एक न्‍यायाधीश ने इस दिन 57 वर्षीय निकिल्‍सन की इच्‍छा-मृत्‍यु यानी यूथनेसिया धारण करने की अपील स्वीकार कर ली। बीबीसी के अ...
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Tag :नज़रिया
  May 14, 2012, 3:25 am
फिर उस शहर में♦ ओम थानवीयह इस इतवार को जनसत्ता में छपा अनंतर है। पंजाब के बिगड़े और बदहवास हालात के दिनों में पत्रकारिता कितनी निरीह हो गयी थी लेकिन कुछ पत्रकारों ने कैसे साहस दिखाया और अपना ही नहीं अपनी बिरादरी का जमीर बचाया, ओम जी ने उसका थोड़ा वृत्तांत सुनाया है। सु...
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Tag :मीडिया मंडी
  May 14, 2012, 12:08 am
♦ आमिर खान…बच्चों के यौन शोषण की घटनाओं पर शोध के दौरान मुझे एक बड़ी सीख तब मिली, जब मैंने अपनी विशेषज्ञ डॉ अनुजा गुप्ता से पूछा कि यौन शोषण का शिकार होने के बाद भी बच्चे अपने मां-बाप से उसके बारे में बताने में कठिनाई महसूस क्यों करते हैं? उनका जवाब था, ‘क्या हम बच्चों की स...
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Tag :ख़बर भी नज़र भी
  May 14, 2012, 12:07 am
राजनीति में एक मानवीय वैमर्शिक वातावरण की दरकार♦ शशि कुमार झाराजनीति की संकल्पनाओं, संस्थाओं और आदर्शों को विभिन्न दृष्टिकोणों या विचारधाराओं में बांट कर पढ़ने-पढ़ाने, समझने और विश्लेषण करने के हमारे प्रचलित तरीके को हम अपनी-अपनी प्रतिबद्धताओं से जोड़ते रहे हैं। ...
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Tag :नज़रिया
  May 13, 2012, 1:29 pm
♦ पूर्ति सोहनीसिनेमा सिर्फ तकनीक से नहीं बनता। न सिर्फ पैसे से। आपके पास एक कहानी हो, तब भी आप सिनेमा के जरिये उसे कह सकें, ये जरूरी नहीं। जरूरी है वो जिद, जिसकी ओढ़नी ओढ़ कर आप चल पड़ते हैं और जैसी भी हो, एक शुरुआत कर डालते हैं। पूर्ति सोहनी ने ऐसी ही एक शुरुआत की है और जिंद...
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Tag :ख़बर भी नज़र भी
  May 13, 2012, 2:00 am
♦ आमिर खान…लड़कों अथवा पुरुषों में ऐसा क्या है, जो हमें इतना अधिक आकर्षित करता है कि हम एक समाज के रूप में सामूहिक तौर पर कन्याओं को गर्भ में ही मिटा देने पर आमादा हो गये हैं। क्या लड़के वाकई इतने खास हैं या इतना अधिक अलग हैं कि उनके सामने लड़कियों की कोई गिनती नहीं। हमने...
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Tag :ख़बर भी नज़र भी
  May 11, 2012, 11:17 am
♦ प्रकाश के रे→मेरा विश्वास है कि हिंदुस्तान में सिनेमा का वृहत भविष्य है और सरकार को इसके प्रदर्शन पर नियंत्रण रखना होगा, क्योंकि दर्शकों की रुचि पर भरोसा नहीं किया जा सकता।निदेशक, अपराधिक गुप्तचर विभाग, मई 4, 1915→सेंसर की कठोर नियमावली और कठोरता से उसके पालन को सुनिश्...
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Tag :ख़बर भी नज़र भी
  May 10, 2012, 10:48 am
जनता के पास एक ही चारा है बगावत![16 Dec 2011 | Read Comments | ]डेस्‍क♦ अदम गोंडवी की कविताएं भारतीय समाज की दुर्दांत कथाओं से हमारा परिचय कराती रही हैं। 92 में बाबरी मस्जिद के विध्‍वंस के बाद उनकी कविताएं चीख-चीख कर आतताइयों से जिंदगी की भीख मांगती रहीं... Read the full story »कौशल किशोर♦ अदम गोंडवी न...
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Tag :आमुख
  December 16, 2011, 9:19 am
डेस्‍क♦ अदम गोंडवी की कविताएं भारतीय समाज की दुर्दांत कथाओं से हमारा परिचय कराती रही हैं। जनांदोलनों में उनकी कविताएं लड़ने वालों को ताकत देती रही हैं। 92 में बाबरी मस्जिद के विध्‍वंस के बाद बड़े पैमाने पर हुए सांप्रदायिक दंगों में उनकी कविताएं चीख-चीख कर आतताइयों स...
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Tag :आमुख
  December 16, 2011, 9:07 am
डॉ आनंद पांडेय♦ मुक्ति के इस तरह के देहधर्म-केंद्रित विमर्श की विडंबना को उजागर करने के लिए सिल्क का चरित्र बहुत मौजूं है। वह प्रेम-आकर्षण से फिल्म में आती है, देह के बल पर आगे बढ़ती है, प्रतिशोध में तबाह होती है और इस्तेमाल हो जाने के अपराधबोध से मर जाती है। जहां सिल्क क...
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Tag :ख़बर भी नज़र भी
  December 16, 2011, 12:28 am
राष्‍ट्रीय सहारा♦ हिंदी सिनेमा में हिंदी पट्टी की धड़कनें नहीं सुनाई पड़ती हैं। वि बाजार में पांव जमाने के चक्कर में बॉलीवुड स्थानीय सच्चाइयों की लगातार अनदेखी कर रहा है। सवाल यह है कि क्या दर्शक भी उन्हीं फिल्मों को सिर आंखों पर नहीं ले रहे जिनमें बाजारवादी अपसंस्...
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Tag :ख़बर भी नज़र भी
  December 15, 2011, 9:36 pm
स्त्रियों के पास विकल्‍प जैसा कुछ भी नहीं होता![15 Dec 2011 | Read Comments | ]प्रकाश के रे♦ हमारे यहां ‘सिल्क’ थी, जिसके कपड़े बार-बार उतारे गये और बार-बार चखा गया उसका ‘ऊम्फ’। पुरुष के लिए यह बहुत मायने की बात नहीं थी कि वह जीवित है या मर गयी (या मारी गयी)। Read the full story »मनोज वाजपेयी♦ सिनेमा मे...
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Tag :आमुख
  December 15, 2011, 10:01 am
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