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Blog: ग़ज़लगंगा.dg

Blogger: devendra gautam
अपना इसरो कर गया कैसा करिश्मा देखना.चांद को अब देखना अपना तिरंगा देखना. चांद को खंगाल कर रख दे न थोड़ी देर मेंअपना विक्रम नींद के पहलू से निकला देखना. इक भगीरथ तप रहा है फिर हिमालय पर कहीं स्वर्ग से इकबार फिर उतरेगी गंगा देखना.हौसले की लह्र सी महसूस करना दोस्तो आसमां पर ज... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   6:23pm 15 Sep 2019
Blogger: devendra gautam
सच जहां तक छुपे, छुपाओ जी.झूठ का सिलसिला बढ़ाओ जी.भूत दिखने लगे हरेक चेहराहमको इतना तो मत डराओ जी.कौन तुमसे हिसाब मांगेगामाल मिर्जा का है उड़ाओ जी.अब समंदर की क्या जरूरत हैएक चुल्लू में डूब जाओ जीसब दुकानों का हाल खस्ता हैअपना सिक्का अभी चलाओ जी.मेज़बानों का तकाजा समझो ... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   5:35pm 7 Sep 2019
Blogger: devendra gautam
-देवेंद्र गौतमअपनी बर्बादी की हर तहरीर दे बैठे हैं हम.अहमकों के हाथ में तक़दीर दे बैठे हैं हम.अपने बाजू काटकर उसके हवाले कर चुकेजितने तरकश में पड़े थे तीर दे बैठे हैं हम.हाथ में माचिस की तीली, आंख में चिनगारियांइक सुलगते शहर की तसवीर दे बैठे हैं हम.क्या पता था चैन से सोने... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   7:50pm 3 Sep 2019
Blogger: devendra gautam
 कसेगी या न कसेगी नकेल क्या होगा.अनाड़ी हाथों में पासा है, खेल क्या होगाउड़ेल सकता है जितना उड़ेल, क्या होगा.छुछुंदरों पे चमेली का तेल, क्या होगा.तुम्हारे हाथ में पत्थर है, चला सकते होअगर उठा लिया हमने गुलेल, क्या होगा.हमें ज़मीं की तहों का ख़याल रहता हैवो पूछते हैं सित... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   10:33am 1 Sep 2019
Blogger: devendra gautam
गूंगी नगरी, बहरा राजा, झूठी ठाट और बाट.समय चटाई पर लेटा है, खड़ी है सबकी खाट.सूखी धरती पानी मांगे, दलदल मांगे धूप.दाता कहता बस रहने दो, जिसका जैसा रूप.धनवानों पर धन बरसाए, निर्धन पऱ प्रहार.यारब! तेरी दुनिया न्यारी, लीला अपरंपार.याचक से मत पूछिए दाता के हालात.अधजल गगरी छलकेग... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   6:42am 31 Aug 2019
Blogger: devendra gautam
उसे मरना है उसकी मौत को आसान होने दो.वो कुर्बानी का बकरा है उसे कुर्बान होने दो.वो वहशी है चलो माना ज़मी के बोझ जैसा हैउसे इंसां बना सकते हो तो इनसान होने दो।-देवेंद्र गौतम... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   4:34am 27 Aug 2019
Blogger: devendra gautam
मौसमों की किस कदर हमपर नवाज़िश हो रही है.रोज आंधी आ रही है, रोज बारिश हो रही है.रात-दिन सपने दिखाए जा रहे हैं हम सभी कोबैठे-बैठे आस्मां छूने की कोशिश हो रही है.शक के घेरे में पड़ोसी भी है लेकिन दरहक़ीकतघर के अंदर घर जला देने की साज़िश हो रही है.जंगलों में आजकल इनसान देखे जा ... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   11:44am 18 Aug 2019
Blogger: devendra gautam
हर तरफ वहम है गुमां है अबसारा मंजर धुआं- धुआं है अब.खत्म होने को दास्तां है अब.उनकी बातों में दम कहां है अब.कुछ बचा ही नहीं छुपाने कोराज़ जितना भी था अयां है अबमखमली सेज़ हो गई रुखसतखुश्क पत्तों का आशियां है अब.अपने सर का ख़याल रखिएगाटूटने वाला आस्मां है अब.वक़्त ने इस कद... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   5:46pm 21 Dec 2018
Blogger: devendra gautam
नज़र के सामने ऐसा कोई  नज़ीर  भी  था.हरेक शाह के अंदर कोई फकीर भी था.वो अपने आप में रांझा ही नहीं हीर भी था.बहुत ज़हीन था लेकिन जरा शरीर भी था.किसे बचाते किसे मारकर निकल जातेहमारे सामने प्यादा भी था वज़ीर भी था.अना के नाम पे कुर्बानियां भी थीं लेकिनहरेक हाट में बिकता ह... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   6:41pm 6 Aug 2018
Blogger: devendra gautam
मन की मैल हवा में कितना घोलोगे?कितनी नफरत फैलानी है, बोलोगे?सोचो सड़कों पर कितना कोहराम मचेगातुम तो चादर तान के घर में सो लोगे.तेरी झोली और तिजोरी भर जाएगीएक-एक कर जब हर नाव डुबो लोगे.हमें पता है फिर कोई माया रचकरदामन पर जो दाग़ लगेंगे धो लोगे.तेरी आंत के अंदर हम आ बैठे है... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   10:36am 4 Aug 2018
Blogger: devendra gautam
कहां आवाज़ देनी थी, कहां दस्तक लगा बैठे.चिता को आग देने में हथेली ही जला बैठे.मिला मौका तो वो ज़न्नत को भी दोज़ख बना बैठे.जिन्हें सूरज उगाना था, दीया तक को बुझा बैठे.अलमदारों की बस्ती में लगी थी हाट गैरत कीहमारे पास इक खोटा सा सिक्का था, चला बैठे.बदी फितरत में थी ताउम्र बदक... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   12:04pm 10 Jul 2018
Blogger: devendra gautam
जिसे ज़न्नत बनाना था उसे दोजख़ बना बैठे.चिता को आग देने में हथेली ही जला बैठे.ख़ुदा जाने ये कोई हादसा था या कि नादानीजहां सूरज उगाना था, दीया तक को बुझा बैठे।-देवेंद्र गौतम... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   8:37pm 3 Jul 2018
Blogger: devendra gautam
चार तिनकों का आशियाना हुआ,आंधियों में मेरा ठिकाना हुआ।जिसको देखे बिना करार न था,उसको देखे हुए जमाना हुआ।मरना जीना तो इस जमाने मेंं,मिलने-जुलने का इक बहाना हुआ।हर कदम मुश्किलों भरा यारबकिस मुहूरत में मैं रवाना हुआ।और दुश्वारियां न कर पैदा,बस बहुत सब्र आजमाना हुआ।भूल ... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   8:40am 11 Jun 2018
Blogger: devendra gautam
ग़म की धूप न खाओगे तो खुशियों की बरसात न होगी.दिन की कीमत क्या समझोगे जबतक काली रात न होगी.जीवन के इक मोड़ पे आकर हम फिर से मिल जाएं भी तोलब थिरकेंगे, दिल मचलेगा, पर आपस में बात न होगी.पूरी बस्ती सन्नाटे की चादर ओढ़ के लेट चुकी हैऐसे में तूफान उठे तो कुछ हैरत की बात न होगी.हम ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   12:21pm 8 Jun 2018
Blogger: devendra gautam
आखिर कहां से लाइए सब्रो-करार और.अच्छे दिनों का कौन करे इंतजार और.कुछ रहगुजर पे धूल भी पहले से कम न थीकुछ आपने उड़ा दिए गर्दो-गुबार और.बिजली किधर से दौड़ रही थी पता नहींहर तार से जुड़ा हुआ था एक तार और.शायद अभी यक़ीन का दर हो खुला हुआचक्कर लगा के देखते हैं एक बार और.हम उनकी अ... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   11:36am 7 Jun 2018
Blogger: devendra gautam
वक्त के सारे सिकंदर इक तरफ.इक तरफ सहरा, समंदर इक तरफ.इक तरफ तदबीर की बाजीगरीऔर इंसां का मुकद्दर इक तरफ.आस्मां को छू लिया इक शख्स नेरह गए सारे कलंदर  इक तरफ.इक तरफ लंबे लिफाफों का सफरपांव से छोटी है चादर इक तरफ.इक तरफ खुलती हुई नज्जारगीडूबते लम्हों का लश्कर  इक तरफ.रोज ह... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   8:00pm 5 Sep 2017
Blogger: devendra gautam
जो यकीं रखते नहीं घरबार में.उनकी बातें किसलिए बेकार में.दर खुला, न कोई खिड़की ही खुलीसर पटककर रह गए दीवार में.बस्तियां सूनी नज़र आने लगींआदमी गुम हो गया बाजार में.पांव ने जिस दिन जमीं को छू लियाज़िंदगी भी आ गई रफ्तार में.बांधकर रखा नहीं होता अगरहम भटक जाते किसी के प्यार ... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   7:31pm 1 Sep 2017
Blogger: devendra gautam
चाल वो चलिए किसी को शक न हो.बस मियां की दौड़ मस्जिद तक न हो.सल्तनत आराम से चलती नहींसरफिरा जबतक कोई शासक न हो.सांस लेने की इजाजत हो, भलेज़िंदगी पर हर किसी का हक न हो.खुश्क फूलों की अदावत के लिएएक पत्थर हो मगर चकमक न हो.रंग काला हो, कोई परवा नहींहाथ में उसके मगर मस्तक न हो.तब त... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   12:28pm 26 Aug 2017
Blogger: devendra gautam
हम उनकी उंगलियों में थे कब से पड़े हुए.कागज में दर्ज हो गए तो आंकड़े हुए.ऊंची इमारतों में कहीं दफ्न हो गईंवो गलियां जिनमें खेलके हम तुम बड़े हुए.मुस्किल है कोई बीच का रस्ता निकल सकेदोनों तरफ के लोग हैं जिद पर अड़े हुए.दरिया में थे तो हम सभी कश्ती की तरह थेमिट्टी के पास आ ग... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   9:22am 15 Aug 2017
Blogger: devendra gautam
दास्तां उनकी अलग, मेरी कहानी और हैमैं तो दरिया हूं मेरे अंदर रवानी और है.कौन समझेगा हमारी कैफ़ि‍यत अबके बरसकह रही है कुछ ज़बां लेकिन कहानी और है.वो अगर गूंगा नहीं होगा तो बोलेगा ज़रूरचुप लगा जाना अलग है, बेजु़बानी और है.आपने अबतक ज़मीं की तह में देखा ही नहींऔर बर्फ़ीली नद... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   8:53am 2 Oct 2016
Blogger: devendra gautam
हर घड़ी ग़म से आशनाई है.ज़िंदगी फिर भी रास आई है.आस्मां तक पहुंच नहीं लेकिनकुछ सितारों से आशनाई है.अपने दुख-दर्द बांटता कैसेउम्रभर की यही कमाई है.ख्वाब में भी नज़र नहीं आतानींद जिसने मेरी चुराई है.अब बुझाने भी वही आएगाआग जिस शख्स ने लगाई है.काफिले सब भटक रहे हैं अबरहनुम... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   8:47pm 29 Jun 2016
Blogger: devendra gautam
https://www.youtube.com/watch?v=qxhwTDI1lZQ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   11:58am 25 Jun 2016
Blogger: devendra gautam
और कुछ दूर काफिला तो चले.हम कहां हैं, हमें पता तो चले.हमसफर की तलब नहीं हमकोसाथ कदमों के रास्ता तो चले.बंद कमरे में दम निकलता हैइक जरा सांस भर हवा तो चले.हर हकीक़त बयान कर देंगेआज बातों का सिलसिला तो चले.अपनी मर्जी के सभी मालिक हैंकोई कानून-कायदा तो चले.वो अकेले कहां-कहां ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   7:54pm 10 Jun 2016
Blogger: devendra gautam
अपनी रफ़्तार दे गया है मुझेजब कोई रहनुमा मिला है मुझेवक़्त के साथ इस ज़माने मेंहर कोई भागता मिला है मुझेउससे मिलने का या बिछड़ने काकोई शिकवा न अब गिला है मुझेतजरबे हैं जो खींच लाते हैंवर्ना अब कौन पूछता है मुझेक्या बताएगा अब नजूमी भी‘अपने अंजाम का पता है मुझे’वैसी सूरत उ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   10:30am 4 May 2016
Blogger: devendra gautam
फुगाओं से निकलूं तो आहों में आऊं.कदम-दर-कदम बेपनाहों में आऊं.मैं चेहरों के जंगल में खोया हुआ हूंमैं कैसे तुम्हारी निगाहों में आऊं.कभी मैं अंधेरों की बाहें टटोलूंकभी रौशनी की पनाहों में आऊं.मैं इक सनसनीखेज़ किस्सा हूं गौयाशराफत से निकलूं गुनाहों में आऊं.अभी तक तो पगडं... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   10:19am 28 Feb 2016
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