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क्रिएटिव कोना

     प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार और कहानीकार प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी के 90वें जन्मदिवस पर हुआ “बालवाटिका” पत्रिका का लोकार्पण                श्री प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव हिंदी के प्रतिष्ठित कहानीकार,लेखक और बालसाहित्यकार हैं।दिनांक 11म...
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Tag :प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव
  March 12, 2019, 6:03 pm
पुस्तक समीक्षा      लोक चेतना और टूटते सपनों की कवितायें                                                                                    समीक्षक  ----- कौशल पाण्डेयसमीक्ष्य पुस्तकठेंगे ...
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Tag :ठेंगे से
  February 7, 2019, 10:01 pm
“पिंकी--सुबह जल्दी उठना है जाकर सो जाओ।”“राजू इतने नजदीक से टी वी मत देखो--आंखें खराब होती हैं।”“मीना सीधे बैठ कर पढ़ो---झुक कर बैठने से कूबड़ निकल आएगा।”“तनु बेटा नल खुला रख कर ब्रश मत करो पानी बर्बाद हो रहा है।”ये या ऐसे ही ढेरों वाक्य हैं जो हर घर में,परिवार में सुबह शा...
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Tag :पहले खुद करें–फ़िर कहें बच्चों से
  October 4, 2017, 11:06 pm
यादोंकाझरोखागीतांजलि गिरवाल       बचपन की कुछ यादो में एक हैंये संजा पर्व।मम्मा, पापा सरकारी नौकरी में थे और हम जहाँ रहते थे वहां गली में और कई परिवार भी थे, जो निमाड़ी थे।उनकी बच्चियां यानि हमारी सहेलियां श्राद्ध पक्ष में ये संजा पर्व मानती थी तो हम भी साथ हो लेते ...
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Tag :लोक संस्कृति
  September 19, 2017, 9:47 pm
          स्कूलों में जाकर अक्सर अभिभावक यह शिकायत करते हैं कि उनके “बच्चे का मन पढ़ाई में लगता ही नहीं है।”या कि “मास्साब आप कैसे पढ़ाते हैं कि इसे कुछ याद ही नहीं रहता।”कभी कभी यह भी शिकायत करते हैं कि “आप इसे होमवर्क नहीं देते इसीलिये यह घर पर कुछ पढ़ता ही नहीं।”कुछ ...
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Tag :डा0 हेमन्त कुमार
  September 15, 2017, 10:54 pm
ठहरावठहरो जरा सुस्ता लोकिसी बूढ़े बरगद की छांव मेंकिसी घनी नीम की छाया मेंकिसी बँसवारी के झुरमुट मेंकिसी कुएं की जगत परया इन सबको छोड़जहां तुम्हें सकून मिल सकेवहीं सुस्ता लोआखिर इतनी लंबी यात्रा की है तुमनेअपने संघर्षमय जीवन कीतो थोड़ा सुस्ताने का हक तोबनता ही है तुम...
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Tag :ठहराव
  August 23, 2017, 11:05 pm
विश्व फोटोग्राफी दिवस आज विश्व फोटोग्राफी दिवस के मौके पर मैंने भी सोच लाओ अपने खजाने के अनमोल रत्नों की झाड पोंछ कर उनकी सफाई तो कर ही ली जाय।(वैसे अपने कैमरों की सफाई मैं दो तीन माह में कर ही लेता हूँ।)मैंने पहला कैमरा इस्तेमाल किया था पिता जी का– “कोडक”का बाक्स कैमरा...
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Tag :कैमरे.
  August 19, 2017, 10:10 pm
          आज दिनांक 31 जुलाई 2017 को प्रतिष्ठित बालसाहित्यकार श्री प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी की पहली पुण्य तिथि है।उनकी स्मृति में पिछले दिनों प्रतिष्ठित संस्था  सेवा संकल्प  द्वारा विबग्योर हाई स्कूल,गोमती नगर,लखनऊ के बच्चों के लिए एक साहित्य प्रतियोगिता का आ...
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Tag :श्र प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव स्मृति साहित्य प्रतियोगिता
  July 31, 2017, 9:35 pm
                       (यह लेख मैंने आज से लगभग 6 साल पहले लिखा था।इन 6 सालों में देश,समाज,अर्थव्यवस्था सभी कुछ में भारी बदलाव आ चुका है।यहाँ तक की हमारी अर्थव्यवस्था का केंद्र नोट भी बदले जा चुके हैं।---अगर कुछ नहीं बदला है तो वह है हमारे समाज में लड़कियों की हालत।...
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Tag :पुनर्पाठ
  July 26, 2017, 11:03 pm
(युवा रंगकर्मी और कवयित्री गीतांजलि गिरवाल की कविताएँ लीक से एकदम अलग हट कर हैं।आज की  नारी के प्रति वो हमेशा चिंतित रहती हैं।नारी के ऊपर सदियों से पुरुष प्रधान समाज द्वारा जो अत्याचार हो रहे हैं वो उनके अन्तः को उद्वेलित करते हैं और तीक्ष्ण धारदार शब्दों का आकार ले...
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Tag :
  July 23, 2017, 10:51 pm
(युवा रंगकर्मी और कवयित्री गीतांजलि गिरवाल  की कविताओं में एक आग है।आज की  नारी के प्रति वो हमेशा चिंतित रहती हैं।नारी के ऊपर सदियों से पुरुष प्रधान समाज द्वारा जो अत्याचार हो रहे हैं वो उनके अन्तः को उद्वेलित करते हैं और तीक्ष्ण धारदार शब्दों का आकार लेकर एक कवित...
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Tag :गीतांजलि गिरवाल की कविताएं
  May 26, 2017, 11:40 pm
लालटेनजली वो पूरी रातहर मौसम बेबातमेरे सपनों को रोशन करतीटकटकी लगायेकभी कभी किताबें बांचा करती।जल कर काले होते तेल का रंग मानों मेरे कल के अंधेरे खींच रहा होमैं गाहे-बगाहे जो झपकी ले लूँ हवा के साथ चर्र-चूँ कर मुझे जगाया करती थी।एक कोने में किसी बुढ़िया के ज...
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Tag :गुलमोहर
  March 7, 2017, 11:07 pm
            आजकल का दौर तीव्रता से कहानी कहने का चल रहा है. फिल्म प्रदर्शित करने की समय अवधि कम होती जा रही है. फिल्म के इस कम समय को बनाए रखने का पूरा असर फिल्म में गीतों के स्थान और संख्या पर दिखता है. गीतों के लिए स्थितियां बननी बंद हो गयी हैं. कुछ फ़िल्में तो गीत शू...
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Tag :फिल्म
  February 17, 2017, 8:39 am
पुस्तक समीक्षा पुस्तकसुविख्यात मनीषी-संवादों के आईने मेंलेखक--डा०सुनील केशव देवधरप्रकाशक--सुभांजलि प्रकाशन ;कानपुरमूल्य -तीन सौ पचास रूपये।                        मनीषियों से संवाद--एक अनवरत सिलसिला                 &...
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Tag :मनीषियों से संवाद--एक अनवरत सिलसिला कौशल पाण्डेय
  January 19, 2017, 11:12 pm
मोनिका अग्रवाल की कविताएँ 1-जीवनक्या कहूँक्या बोलूँपल दो पल जीवन पासजिस पर न्योछावरदौलत बेहिसाब।क्या पायाक्या पाओगेक्या साथ ले जाओगेक्या मिली खुशी?कैसी है ये भेड़चालक्यों चल रहे हो मिला कर इससे ताल।लूट लो सादगी का मजाकरो पुराने दिनों को यादजब खाते थे दाल रोटी ...
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Tag :नवोदित रचनाकार।
  December 4, 2016, 9:36 pm
(पिता जी के जाने के बाद से घर में एक अजीब सा खालीपन आ गया है--वक्त बेवक्त हम सभी की नजरें उन्हें ही खोजती हैं.हर वक्त लगता है की शायद कहीं गए हैं ---आ जायेंगे कुछ देर में ..लेकिन --पिता जी की रचनात्मकता तो हर समय हमारा मार्ग दर्शन करेगी .---यही सोच कर ही आज मैं उनकी एक काफी पहले प्र...
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Tag :प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव.
  November 9, 2016, 12:37 am
खेत आज बहुत विवश और उदास हैएक अजीब-सा डर उसके अस्तित्व पर कब से डोल रहा हैहरी-पीली लहराती धारियों पर अबवह ताज़गी भरी शुद्धता की धुनें नहीं गूंजती। मिट्टी उद्भ्रांत है उसके मुख से लेकर अंतर्मन तक कोरासायनिक उर्वरकों के कसैले स्वाद वाले धीमे ज़हर नेनिर्ममता से बेध डाला ह...
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Tag :कविता
  September 3, 2016, 11:15 pm
                  आज विज्ञापनों की चकाचौंध और बाजारवाद के युग में कोई पत्रिका निकालना और उसके स्तर को बरकरार रखना अपने आप में एक कठिन काम है।खासकर बच्चों की पत्रिकाओं के सन्दर्भ में यह बात ज्यादा लागू होती है।और उस स्थिति में तो और जब आपको यह पत्रिका पूरी तरह ...
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Tag :पर्यावरण
  July 9, 2016, 1:32 am
बूढ़ी नानीजैसे बारिश की घासया फ़िर वो खूबसूरत मशरूमजो बस यूं हीचुपके से प्रकट हो जाते हैंपता नहीं कहां से आते हैं या कहां जाते हैं।तंग गलियों मेंगांव के चबूतरों परबाबा आदम की हवेली मेंअब तो पान पट्टियों पर भीदिख जाती हैं ये बूढ़ी नानियां।ममता वाली मुस्कान के जाल मेंटाफ़...
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Tag :नेहा शेफ़ाली।
  June 12, 2016, 11:29 pm
(फ़ोटो:गूगल से साभार)        उसका रंग एकदम काला था।एकदम चेरी बूट पालिश की तरह।लम्बाई कुल जमा साढ़े चार फ़ीट।उमर ग्यारह साल।नाम कलुआ। वैसे तो उसका नाम था राजकुमार लेकिन उसके घर वाले उसे रजुआ कह कर बुलाते थे और जब से वह नईम मियां की साइकिल रिपेयरिंग की दूकान पर काम करने आ...
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Tag :कहानी
  May 15, 2016, 10:50 pm
1— मोइन और राक्षसलेखिका:अनुष्का रविशंकरअंग्रेजी से अनुवाद:पूर्वा याज्ञिक कुशवाहाचित्रांकन:अनीता बालचन्द्रनमूल्य-रू085/2—अण्डमान का लड़कालेखिका:जाई व्हिटेकरअंग्रेजी से अनुवाद: पूर्वा याज्ञिक कुशवाहारमूल्य- रू090/दोनों पुस्तकों के प्रकाशक:एकलव्यई-10,शंकर नगर बी डी ए क...
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Tag :डा0हेमन्त कुमार।
  March 26, 2016, 1:51 am
   हिन्दी में बाल नाटकों की कमी हमेशा महसूस की जाती रही है।खासकर इधर के कुछ वर्षों में तो बाल नाटक कम लिखे गये या जो लिखे गये वो बाल रंगमंच से जुड़े लोगों तक पहुंचे नहीं।यह कमी उस समय और महसूस होती है जब गर्मियों में पूरे देश में बच्चों के लिये तमाम रंग संस्थाएं,रंग...
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Tag :बाल रंगमंच
  December 14, 2015, 8:30 am
    साहित्य हमेशा तमाम तरह के खतरों और विरोधाभासों के बीच लिखा जाता रहा है,और लिखा जाता रहेगा। लेकिन साहित्य तो अन्ततः साहित्य ही कहा जायेगा,उसे अभिव्यक्त करने का माध्यम भले ही बदलता जाय।इधर काफ़ी समय से साहित्य जगत में इस बात से खलबली भी मची है और लोग चिन्तित भी है...
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Tag :डा0हेमन्त कुमार।
  October 28, 2015, 11:17 pm
सूरज धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा था और बेमतलब शोर करते पीपल के पत्तों से छनकर आती उसकी किरणें सीबू के शान्त चेहरे पर पड़ने लगी थीं।उसके गालों पर दोनों ओर से बह आयी आँसू की टेढ़ी मेढ़ी लकीरें अब भी कुछ-कुछ गीली थीं।अपनी अधमुंदी पलकों से वह एकटक आँगन के उस दरवाजे को देख रही थी जो ...
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Tag :पिघला हुआ विद्रोह
  September 4, 2015, 11:39 pm
(आज दफ़्तर में बैठे बैठे आपकी बड़ी याद आयी अम्मा)चाहता हूंएक बारबस एक बार मेरे हाथहो जाएं लम्बेइतने लम्बेजो पहुंच सकें दूरनीले आसमान और तारों के बीच से झांकतेआपके पैरों तकअम्माऔर जैसे ही मैं स्पर्श करूंआपके घुटनों कोसिर्फ़ एक बार आपडांटें मुझे किबेवकूफ़ रामचरणस्पर्श प...
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Tag :कविता
  August 21, 2015, 9:56 pm
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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