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क्रिएटिव कोना

लालटेनजली वो पूरी रातहर मौसम बेबातमेरे सपनों को रोशन करतीटकटकी लगायेकभी कभी किताबें बांचा करती।जल कर काले होते तेल का रंग मानों मेरे कल के अंधेरे खींच रहा होमैं गाहे-बगाहे जो झपकी ले लूँ हवा के साथ चर्र-चूँ कर मुझे जगाया करती थी।एक कोने में किसी बुढ़िया के ज...
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Tag :गुलमोहर
  March 7, 2017, 11:07 pm
            आजकल का दौर तीव्रता से कहानी कहने का चल रहा है. फिल्म प्रदर्शित करने की समय अवधि कम होती जा रही है. फिल्म के इस कम समय को बनाए रखने का पूरा असर फिल्म में गीतों के स्थान और संख्या पर दिखता है. गीतों के लिए स्थितियां बननी बंद हो गयी हैं. कुछ फ़िल्में तो गीत शू...
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Tag :फिल्म
  February 17, 2017, 8:39 am
पुस्तक समीक्षा पुस्तकसुविख्यात मनीषी-संवादों के आईने मेंलेखक--डा०सुनील केशव देवधरप्रकाशक--सुभांजलि प्रकाशन ;कानपुरमूल्य -तीन सौ पचास रूपये।                        मनीषियों से संवाद--एक अनवरत सिलसिला                 &...
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Tag :मनीषियों से संवाद--एक अनवरत सिलसिला कौशल पाण्डेय
  January 19, 2017, 11:12 pm
मोनिका अग्रवाल की कविताएँ 1-जीवनक्या कहूँक्या बोलूँपल दो पल जीवन पासजिस पर न्योछावरदौलत बेहिसाब।क्या पायाक्या पाओगेक्या साथ ले जाओगेक्या मिली खुशी?कैसी है ये भेड़चालक्यों चल रहे हो मिला कर इससे ताल।लूट लो सादगी का मजाकरो पुराने दिनों को यादजब खाते थे दाल रोटी ...
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Tag :नवोदित रचनाकार।
  December 4, 2016, 9:36 pm
(पिता जी के जाने के बाद से घर में एक अजीब सा खालीपन आ गया है--वक्त बेवक्त हम सभी की नजरें उन्हें ही खोजती हैं.हर वक्त लगता है की शायद कहीं गए हैं ---आ जायेंगे कुछ देर में ..लेकिन --पिता जी की रचनात्मकता तो हर समय हमारा मार्ग दर्शन करेगी .---यही सोच कर ही आज मैं उनकी एक काफी पहले प्र...
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Tag :प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव.
  November 9, 2016, 12:37 am
खेत आज बहुत विवश और उदास हैएक अजीब-सा डर उसके अस्तित्व पर कब से डोल रहा हैहरी-पीली लहराती धारियों पर अबवह ताज़गी भरी शुद्धता की धुनें नहीं गूंजती। मिट्टी उद्भ्रांत है उसके मुख से लेकर अंतर्मन तक कोरासायनिक उर्वरकों के कसैले स्वाद वाले धीमे ज़हर नेनिर्ममता से बेध डाला ह...
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Tag :कविता
  September 3, 2016, 11:15 pm
                  आज विज्ञापनों की चकाचौंध और बाजारवाद के युग में कोई पत्रिका निकालना और उसके स्तर को बरकरार रखना अपने आप में एक कठिन काम है।खासकर बच्चों की पत्रिकाओं के सन्दर्भ में यह बात ज्यादा लागू होती है।और उस स्थिति में तो और जब आपको यह पत्रिका पूरी तरह ...
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Tag :पर्यावरण
  July 9, 2016, 1:32 am
बूढ़ी नानीजैसे बारिश की घासया फ़िर वो खूबसूरत मशरूमजो बस यूं हीचुपके से प्रकट हो जाते हैंपता नहीं कहां से आते हैं या कहां जाते हैं।तंग गलियों मेंगांव के चबूतरों परबाबा आदम की हवेली मेंअब तो पान पट्टियों पर भीदिख जाती हैं ये बूढ़ी नानियां।ममता वाली मुस्कान के जाल मेंटाफ़...
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Tag :नेहा शेफ़ाली।
  June 12, 2016, 11:29 pm
(फ़ोटो:गूगल से साभार)        उसका रंग एकदम काला था।एकदम चेरी बूट पालिश की तरह।लम्बाई कुल जमा साढ़े चार फ़ीट।उमर ग्यारह साल।नाम कलुआ। वैसे तो उसका नाम था राजकुमार लेकिन उसके घर वाले उसे रजुआ कह कर बुलाते थे और जब से वह नईम मियां की साइकिल रिपेयरिंग की दूकान पर काम करने आ...
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Tag :कहानी
  May 15, 2016, 10:50 pm
1— मोइन और राक्षसलेखिका:अनुष्का रविशंकरअंग्रेजी से अनुवाद:पूर्वा याज्ञिक कुशवाहाचित्रांकन:अनीता बालचन्द्रनमूल्य-रू085/2—अण्डमान का लड़कालेखिका:जाई व्हिटेकरअंग्रेजी से अनुवाद: पूर्वा याज्ञिक कुशवाहारमूल्य- रू090/दोनों पुस्तकों के प्रकाशक:एकलव्यई-10,शंकर नगर बी डी ए क...
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Tag :डा0हेमन्त कुमार।
  March 26, 2016, 1:51 am
   हिन्दी में बाल नाटकों की कमी हमेशा महसूस की जाती रही है।खासकर इधर के कुछ वर्षों में तो बाल नाटक कम लिखे गये या जो लिखे गये वो बाल रंगमंच से जुड़े लोगों तक पहुंचे नहीं।यह कमी उस समय और महसूस होती है जब गर्मियों में पूरे देश में बच्चों के लिये तमाम रंग संस्थाएं,रंग...
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Tag :बाल रंगमंच
  December 14, 2015, 8:30 am
    साहित्य हमेशा तमाम तरह के खतरों और विरोधाभासों के बीच लिखा जाता रहा है,और लिखा जाता रहेगा। लेकिन साहित्य तो अन्ततः साहित्य ही कहा जायेगा,उसे अभिव्यक्त करने का माध्यम भले ही बदलता जाय।इधर काफ़ी समय से साहित्य जगत में इस बात से खलबली भी मची है और लोग चिन्तित भी है...
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Tag :डा0हेमन्त कुमार।
  October 28, 2015, 11:17 pm
सूरज धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा था और बेमतलब शोर करते पीपल के पत्तों से छनकर आती उसकी किरणें सीबू के शान्त चेहरे पर पड़ने लगी थीं।उसके गालों पर दोनों ओर से बह आयी आँसू की टेढ़ी मेढ़ी लकीरें अब भी कुछ-कुछ गीली थीं।अपनी अधमुंदी पलकों से वह एकटक आँगन के उस दरवाजे को देख रही थी जो ...
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Tag :पिघला हुआ विद्रोह
  September 4, 2015, 11:39 pm
(आज दफ़्तर में बैठे बैठे आपकी बड़ी याद आयी अम्मा)चाहता हूंएक बारबस एक बार मेरे हाथहो जाएं लम्बेइतने लम्बेजो पहुंच सकें दूरनीले आसमान और तारों के बीच से झांकतेआपके पैरों तकअम्माऔर जैसे ही मैं स्पर्श करूंआपके घुटनों कोसिर्फ़ एक बार आपडांटें मुझे किबेवकूफ़ रामचरणस्पर्श प...
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Tag :कविता
  August 21, 2015, 9:56 pm
      (यह चित्र मेरे मित्र वरिष्ठ पत्रकार और उपन्यासकार भाई प्रदीप सौरभ जी ने लगभग 35 वर्ष पूर्व बनाया कर मुझे दिया था। हिन्दी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद के पुस्तकालय में मुश्किल से दो  ढाई मिनट में। संयोग देखिये आज अपनी इस नयी कहानी के साथ इसे पुब्लिश कर रहा हूं।)  &n...
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Tag :कहानी
  July 30, 2015, 9:52 pm
पुस्तक-समीक्षापत्रकारिता-प्रदीप प्रताप(मूल्यांकन)प्रधान संपादक-विष्णुत्रिपाठीप्रकाशक — कलमशिवाला रोड,कानपुर 208001मूल्य -345 रूपये     हिंदी पत्रकारिता-विशेषकर हिंदी समाचार पत्रों का जो व्यापक एवं बहुआयामीस्वरुप आज दिखाई पड़ रहा है,उसकी सशक्त बुनियाद में यद...
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Tag :पत्रकारिता-प्रदीप प्रताप
  July 20, 2015, 11:54 pm
          भारतीय चित्रकला के वर्तमान परिदृश्य को देखने पर एक बात स्पष्ट रूप से सामने आती है वो यह कि इधर कलाकारों ने भारतीय परंपरा,संस्कृति या अध्यात्म पर ज्यादा काम नहीं किया।किया भी है तो या तो कार्टून चित्रों के रूप में या किसी देवी देवता का नकारात्मक चित्र ब...
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Tag :व्यक्तित्व
  July 13, 2015, 12:28 am
यह लेख मैंने 2011 में हिन्दी के प्रतिष्ठित अखबार "जनसन्देश टाइम्स"की कवर स्टोरी के रूप में  लिखा था। आज पितृ दिवस के उपलक्ष्य में इसे पुनः प्रकाशित कर रहा हूं।पिता होने का मतलब----- पिता स्वर्गः पिता धर्मः पिता हि परमम तपः।पितृ प्रतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्व देवताः॥  &...
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Tag :फ़ादर्स डे।बदलते चेहरे के समय आज का पिता।
  June 21, 2015, 1:49 pm
पुस्तक-लू लू ली सनक(बाल कहानी संग्रह)लेखक-दिविक रमेशचित्र-अतुल वर्धनप्रकाशक-नेशनल बुक ट्रस्ट,इंडियानेहरू भवन,5,इंस्टीट्युशनल एरिया,फ़ेज-2वसंत कुंज,नई दिल्ली-110070संस्करण-2014 मूल्य-रू075/मात्र।        हिन्दी में बाल साहित्य लिखा तो खूब जा रहा है,प्रकाशित भी हो रहा है।लेक...
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Tag :पुस्तक समीक्षा
  June 10, 2015, 12:39 am
“नया तमाशा नयी कहानी”(बाल नाटक)—डा0हेमन्त कुमार(मंद बुद्धि बच्चों के मनोभावों को आप तक पहुंचाने की एक कोशिश)मैं आज आपके सामने अपने लगभग पूरे हो चुके बाल नाटक “नया तमाशा नयी कहानी”के दो दृश्य प्रकाशित कर रहा हूं।आपकी प्रतिक्रियाएं मुझे नाटक को सुधारने/घटाने /बढ़ाने मे ...
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Tag :नया तमाशा नयी कहानी
  May 25, 2015, 10:56 pm
नाथ सदा तुम साथ  मेरे बस  बिनती यही है हमें ना बिसरइहो।तुम बिन सिय आधार कहां, निज सिय को चरन सदा बइठइहो।।छोड़ अवधपुर निर्जन वन में दरसन को यह मन है रोता,कैसे होगे मम रघुराई बस हर पल हिय में यही है होता,अवध से त्यागे निज सिय को प्रभु हिय से सिय को नाहिं हटइहो।नाथ सदा तुम ...
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Tag :राजेश्वर मधुकर।
  May 8, 2015, 8:46 pm
            एक ठो हमारे मित्र हैं।नाम है पंडित राजीव मिश्र।बहुत नामचीन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के रंगबाज।जब देखो तब रंग बाजी—सुबह—दोपहर-शाम रंगबाजी हम उनको बहुत समझाते हैं कि भैया हर वक्त की रंगबाजी अच्छी नहीं तो बोलेंगे कुछ नहीं मुस्कुरा भर देंगे। पर उनकी वही का...
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Tag :पेण्टिंग
  May 6, 2015, 9:17 pm
माता को पुत्र कैसे निर्जन में छोड़ आये, बिनती हमारी नाथ ऐसा ना कीजै।चैदह बरस दिन कांटों में बीता है, फिर घूमें वन वन प्रभु ऐसा ना कीजै।।ऐसा विधाता खेल कैसे तू खेलता है, इतना निठुर हिया कैसे हो जाता है,फूलों में रहने वाली काटों में सोये, कहते हुए हिय कांप नहीं जाता है,नन्ह...
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Tag :सीता का त्याग.राजेश्वर मधुकर।
  May 4, 2015, 6:35 pm
आदरणीय नेता जी,सादर चरण स्पर्श।मैंने अपने पिछले पत्र में आप से कुछ बातों का अनुरोध किया था।आशा है आप उन बातों पर तो विचार करेंगे ही। साथ में मैं अपने मित्रों और भाई बन्धुओं की कुछ और बातें भी आज आपके सामने रख रहा हूं। चुनाव जीतने पर आप इन बातों पर भी ध्यान दीजियेगा।v  ...
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Tag :नेता जी
  April 16, 2014, 10:18 pm
------------ भोर रात से यहां शोर शुरु हो जाता है. पास के मस्जिद से आती अजान की आवाज़, गुरुद्वारे में बजता हुआ लाउड स्पीकर, किसी न किसी त्योहार में मंदिरों में बजते फिल्मी गाने, देर राततक तबेलों में ग्वालों का कीर्तन... फिर सरकारी नलों पर पानी के लिये औरतों के झगड़े, बर्तनों की उठा-पट...
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Tag :जयश्री रॉय।
  April 6, 2014, 10:10 am
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