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माँ तुझे प्रणामशत शत नमन कोटि प्रणाम माँ तुझे प्रणाम ।जब मैं  तेरी कोख में आई तूने स्पर्श से बताया था ममता का कोई मोल नहीं तूने ही सिखलाया था ।माँ तुझे प्रणाम ।थाम के मेरी उंगली तूने इस दुनिया से मिलवाया था सूरज चाँद और धरती तारे सबके गीत सुनाया था  माँ तुझे प्रणाम ।क...
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Tag :कविता
  May 14, 2017, 12:00 pm
टी-पाटकहानी-पूनम श्रीवास्तव                               छनाक की तेज आवाज हुयी और उज्ज्वला कुछ लिखते लिखते चौंक पड़ी।फिर बोली क्या हुआ?क्या टूटा ?अन्दर से डरी सहमी सी आवाज आई,“जी मेम साब वो-वो कहते-कहते वो चुप हो गयी।उज्ज्वला ने कहा—“रुक ...
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Tag :टी-पाट
  February 2, 2017, 8:57 pm
घनन घनन अब बरसो बदरवाधरती का हियरा तड़पत हैखेतिहर की अंखियां हरदमअंसुअन से अब भीगत हैं।राह निहारे पंख पसारेपाखी एकटक देखत हैंअब बरसोगे तब बरसोगेमन में आस लगावत हैं।बिन पानी सब सूना सूनाजीव सभी अब भटकत हैंदिखे पानी की एक बूंदसब पूरी जान लगावत हैं।बड़ी बेर भई बादल राजा...
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Tag :कविता
  June 30, 2016, 9:37 pm
वो अनाथ हो गया था जब उसकी उम्र आठ साल की थी।सर पर से मां-बाप दोनों का साया उठ गया।बिखर गया था उसका बचपन और वो रह गया था अकेला इस पूरी दुनिया की भीड़ में।   वो था बहुत ही गरीब परिवार का।किसी ने भी आगे बढ़ कर उसका हाथ नहीं थामा।किसी ने उसके आंसू नहीं पोंछे।पर जब लोग उस मासूम ...
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Tag :पूनम श्रीवास्तव।
  June 23, 2016, 9:50 pm
पितृ दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। आज में आपको पढ़वा रही हूं प्रदीप सौरभ की एक बहुत भावनात्मक कविता।पिता हो गये मांपिता दहा्ड़तेमेरा विद्रोह कांप जातामां शेरनी की तरह गुत्थमगुत्था करतीबच्चों को बचातीदुलरातीपुचकारतीमां की मृत्यु के बादपिता मां हो गये।पिता ...
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Tag :पिता हो गये मां
  June 19, 2016, 7:19 pm
जिसे तुम खोज रहे होवो मिला नहींअब तक शायदवक्त आगे निकल गयाऔर फ़िर तुम पीछे रह गयेतुम वक्त का इन्तजार कर रहे थे पर वक्त किसी का इन्तजार नहीं करतावो निरन्तर हर पलआगे ही आगे चलतारहता है।लाख वक्त को पकड़नेकी कोशिश कर लेंपर वो तो यूं फ़िसल जाता हैहथेली से ज्यूंबंद मुट्ठी से र...
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Tag :खोज
  June 12, 2016, 12:34 pm
जिन्दगी इक बोझ सी लगने लगती है जबजिन्दगी का रुख अपनीतरफ़ नहीं होताव्यर्थ और निरर्थकपर तभी अचानक से रुख पलट जाता हैखुशियों के कुछसंकेतों सेऔर फ़िरहम जिन्दगी सेप्रेम करने लगते हैं और चल पड़ती हैजिन्दगी खुशियों का निमन्त्रण पाकरआगे मंजिल की तरफ़एक अन्तहीन यात्रा परउल्ल...
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Tag :गीत
  May 29, 2016, 9:39 pm
खिल रही कली कलीमहक रही गली गलीचमन भी है खिला खिलाफ़िजा भी है महक रही।दिल से दिल को जोड़ दोसुरीली तान छेड़ दोप्रेम से गले मिलोहर जुबां ये कह रही।कौन जाने कल कहांहम यहां और तुम वहांपल को इस समेट लोवक्त मिलेगा फ़िर कहां।मिलेगी सबको मंजिलेंनया बनेगा आशियांकदम कदम से मिल रहेक...
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Tag :गीत
  May 25, 2016, 10:33 pm
कलम चल रही जरा धीरे धीरेभाव बन रहे मगर धीरे धीरे।उम्मीदों की जिद कायम है अब भीशब्द बंध रहे हैं जरा धीरे धीरे।कसक उठ रही मन में जरा धीरे धीरेइक धुन बन रही है जरा धीरे धीरे।सबने मिलकर तरन्नुम जो छेड़ाकि गज़ल बन रही है जरा धीरे धीरे।जिन्दगी के साज बज रहे धीरे धीरेहुआ सफ़र का ...
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Tag :गज़ल
  May 16, 2016, 11:46 pm
लाला जी की पगड़ी गोलपगड़ी के अंदर था खोलपगड़ी में से निकला देखोरूपया एक पचास पैसा।हंसने लगे सभी बच्चेबजा-बजा के तालीलाला जी की पगड़ीरहती खाली-खाली।लाला जी शरम सेहो गये पानी-पानीकंजूसी की उनकीखुल गई थी कहानी।0000000000पूनम श्रीवास्तव...
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Tag :बालगीत
  September 7, 2015, 8:37 pm
दर्पण जो आज देखा वो मुंह चिढ़ा रहा थाचेहरे की झुर्रियों से बीती उम्र बता रहा था।कब कैसे कैसे वक्त सारा निकल गया थाकुछ याद कर रहा था मैं कुछ वो दिला रहा था।नटखट भोला भाला बचपन कितना अच्छा होता थाजब बाहों में मां के झूले झूला करता था।धमा चौकड़ी संग अल्हड़पन कब पीछे छूट गया थ...
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Tag :कविता।पूनम श्रीवास्तव।
  September 2, 2015, 11:12 pm
पापा जी ऐसी कुर्ती ला दोजिसमें कलफ़ लगी कालर होझिलमिल झिलमिल तारों वालीलटकी उसमें झालर हो।पहन के कुर्ती को जबमैं निकलूंगा घर से बाहरदेख के मुझको लोग कहेंगेलगता प्यारा है राजकुवंर।बैठूंगा मै फ़िर घोड़ी परसाथ चलेंगे बाजे गाजेपरी लाऊंगा परी लोक सेकहलायेगी वो घर की रानी...
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Tag :पूनम श्रीवास्तव।
  August 26, 2015, 11:19 pm
चल पड़े बाराती लेकरअपने बंदर मामाशेरवानी पहनी थी ऊपरनीचे था पाजामा।आगे आगे चले बारातीपीछे मामा जी की कारधूम धड़ाका बैण्ड बाजाबजता रहता बार बार।नाचते गाते चली बारातपहुंची बंदरिया के द्वारस्वागत हुआ सभी लोगों कापूरा हुआ उनका व्यवहार।जब आई जयमाल की बारीबंदरिया थी छो...
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Tag :बंदर जी की शादी.बाल कविता
  August 21, 2015, 9:32 pm
बात न पूछो आजादी के मस्तानों कीदीवानों की नादानों की परवानों की।जो बचपन में ही कूद पड़ेक्रान्ति की अलख जगाने मेंवो टूट पड़े थे फ़ूट पड़े थेआजाद हिन्द को करने कोजां की परवाह न की जिन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ीपल पल जीते रहे वोहरदम आजाद देश को करने को।फ़ूट पड़ी थी ज्वालाजब क्रान...
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Tag :पन्द्रह अगस्त का दिन
  August 14, 2015, 11:52 pm
चंदा मामा दिन बहुत हुएबात न तुमसे होती हैआज और कल करते करतेमुलाकात न तुमसे होती है।मां भी रोज बुलाती तुमकोदूध और भात खिलाने कोलुका छिपी खेलो बदली संगपर नाम न लेते आने का।रूठे रूठे क्यों लगते मुझसेइतना तो बतला ही दोहो गई हो गर गलती कोईतो माफ़ी मुझको दे ही दो।हंस कर बोले ...
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Tag :पूनम श्रीवास्तव।
  August 9, 2015, 8:58 pm
    कानन वन में भालू और बिल्ली की दोस्ती मशहूर  थी।दोनों हमेशा साथ रहते।भालू थोड़ा गंभीर था पर बिल्ली थी नटखट और चुलबुली। साथ ही खेलते और साथ ही स्कूल भी जाते। कभी किसी जानवर ने उन्हें लड़ते हुए नहीं देखा था।     एक दिन भालू और बिल्ली स्कूल के सामने  वाले मैदा...
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Tag :बाल कहानी।पूनम श्रीवास्तव।
  July 22, 2015, 1:17 am
तुम धीरे-धीरे आनातुम चुपके –चुपकेतुमछइयां छइयां आनाना धूप लगे डर जाना ।तुम बन के चंचल हिरनीवन वन में कुलांचे भरनामत अंखिया तुम बंद करनाशिकारी बन कर रहना ।कुछ पांव तले गड़ जायेना फ़िकर कोई तुम करनातुम आगे- आगे चलनाना पीछे मुड़ते रहना।तुम अपना पँख फैलानाबन आजाद परिन्दाच...
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Tag :गीत
  July 16, 2015, 10:41 pm
                  फ़िलहाल कुछ महीने बीते हो गये इस घटना को।पर मेरे मानस पटल पर वो घटना आज भी अंकित है।जब जब वो वाकया याद आता है दिल में एक बेचैनी सी उठती है।                            जैसा कि नव रात्रि के दिनों में घर घर में देवी ...
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Tag :लघुकथा
  July 2, 2015, 11:42 pm
तुम याद बहुत आती हो मांतुम याद बहुत आती हो मां---।बचपन में तुम थपकी दे करमुझको रोज सुलाती मांअब नींद नहीं आने परतेरी याद बहुत आती है मां।पग-पग पर तेरी उंगली थाम केचलना हमने सीखा था मांथक जाते थे जब चलते चलतेआंचल की छांव बिठाती थी मां।तन पर कोई घाव लगे जबझट मलहम बन जाती थी ...
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Tag :पूनम श्रीवास्तव।
  May 10, 2015, 11:16 pm
(फ़ोटो-गूगल से साभार)अरे मजदूर, अरे मजदूरतुम्हीं से है दुनिया का नूरफ़िर क्यों तुम इतने मजबूर।अपने हाथों के गट्ठों सेरचते तुम हो सबका बसेरापर हाय तुम्हें सोने को तो बसमिला एक है खुला आसमांअरे मजदूर, अरे मजदूर।तुम हो क्यों इतने मजबू्र।बारिश,धूप कड़ी सर्दी मेंतन पर वही पु...
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Tag :कविता
  May 1, 2015, 2:07 pm
                                 सभी पुस्तकों का प्राप्ति स्थलरजनी प्रकाशनरजनी विला,डिबाई-202393मोबाइल—09412653980,0574-265101www.rajanishiksha.com         श्रीमती रजनी सिंह के कहानी संग्रह “विहंगावलोकन”एवं “मुड़ते हुये मोड़”एवं यात्रा वृत्तांत “आओ चलें सैर करें”तथा एक क...
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Tag :प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव।
  November 17, 2014, 9:55 am
काली कोट में लाल गुलाब,चाचा तुमको करते याद,बाल दिवस हम संग मनायें,बस इतनी सुन लो फ़रियाद।बचपन क्यों अब रूठा रहता,हर बच्चा क्यों रोता रहता,आओ चाचा नेहरू आओ,सारे जहां को तुम बतलाओ।खेल खिलौने साथ छीन कर,क्यूं सब हमें रुलाते हैं,भारी बस्तों और किताबों,में हमको उलझाते हैं।क...
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Tag :चाचा नेहरू
  November 13, 2014, 9:46 pm
उन्हें शक है हम उनके राज़दां बन गये हैंउन्हें देख कर बेजुबां बन गये हैं।नहीं है खबर क्या उन्हें आज यारोंकल क्या थे हम आज क्या बन गये हैं।नहीं याद उनको वो तन्हाई के दिनइकरारे महफ़िल और इसरार के दिन।छोटा सा नाटक किया था उन्होंनेछुपाने को इक राजे महफ़िल भी मुझसे।उन्हें डर थ...
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Tag :पूनम श्रीवास्तव।
  November 3, 2014, 9:30 am
मां शब्द ही अवर्णनीय,अतुलनीय है।उनके बारे में लिखना किसी के लिये सम्भ्व नहीं है।दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि उनके लिये लिखना सागर की एक बूंद की तरह होगा।       आज मातृ दिवस पर मैं अपनी एक कविता पुनः प्रकाशित कर रही हूं। मांमां सिर्फ़ शब्द नहींपूरी दुनिया प...
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Tag :प्यारी मां
  May 11, 2014, 11:30 am
बिल्ली ने ये मन में ठानाचूहों को है सबक सिखानाखेल चुके घण्टी का खेलअब मुझको है शंख बजाना।बहुत विचार किया मौसी नेशुरू किया फ़िर गाना गानाजंगल के सारे जीवों कोलगी सिखाने ढोल बजाना।चूहों को भी शौक लगा फ़िरक्यूं ना सीखें हम भी गानाभूल गये मौसी का गुस्सालगे सीखने ढोल बजाना...
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Tag :बालगीत
  May 3, 2014, 10:26 am
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