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Blog: दिशा

Blogger: Deepali Pant Tiwari
अली के पैर आज ज़मीन पर नहीं थे। हो भी क्यों भई आज उसका पसंदीदा त्योहार 'ईद'जो आया था। ईद आने के  एक सप्ताह पहले से ही वो कल्पनाओं की उड़ाने भरने लगता। इस बार की ईद तो और भी ख़ास थी क्योंकि उसके मामूजान जो इस ईद पर आने वाले थे। अली तो मामूजान से मिलने वाले उपहारों के बारे में सो... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   12:51pm 23 Dec 2020 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
कोयल कूके अमवा की डालीगीत गाती मधुर-मधुर मतवालीसावन के आने का संदेशा देती चहुँ ओर फैली हरियालीतीज-त्योहार की रौनक छाईधरती ने प्यारी छवि पाईरिमझिम-रिमझिम सावन की फुहारेंमौसम ने भी ली अंगड़ाईअति पावन सावन का महीनादान-व्रत का उत्तम फल दीनाबम-बम भोले के जयकारों नेसब ज... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   5:45pm 2 Dec 2020 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
मेरठ के प्रतिष्ठित अख़बार में प्रकाशित मेरी एक लघुकथागद्य-लघुकथाशीर्षक-उपदेशरमाकांत संस्कृत के अध्यापक थे। आज ही तो कक्षा में विद्यार्थियों को नीति श्लोक पढ़ा रहे थे कि 'वृत्तं यत्नेन संरक्षेत्वित्तमायाति याति च ।अक्षीणो वित्ततः क्षीणो वृत्ततस्तु हतो हतः ॥'चारि... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   9:58am 2 Feb 2020 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
नटखट, चंचल, प्यारा चाँदखेलता है लुका-छिपीबदलता है चेहरे अपनेकभी गायब हो जाताले आता रात अमावसकरें हम जतन कितनेआज फिर है आयाबन पूर्णिमा का चाँदखिलखिलाया है मेरे अँगनेस्वरचितदीपाली 'दिशा'... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   9:25am 31 Dec 2019 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
'चाँद'तो हमेशा से ही कवियों, शायरों और लेखकों का प्रिय रहा है। ना जाने कितनी उपमाएँ 'चाँद'को लेकर दी जाती रही हैं। फिल्मी गीतों में 'चाँद'का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है।* चौदहवी का चाँद हो* चाँद को क्या मालूम* चंदा देखे चंदा* चाँद छुपा बादल में* चाँद ने कुछ कहा* चाँद जैसे मु... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   9:23am 31 Dec 2019 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
अजब-सा नूर है छाया,आज सूरज की लाली मेंखिलें हैं फूल बासंती,चमन की डाली-डाली मेंविदाई दे रही कुदरत,कूकती कोयल की तानों सेमहकोगे सदा याद बनके,इस जीवन की फुलवारी मेंबीता साल अंत नहीं,आगाज़ है नए साल काजुड़े हैं कुछ नए मोती,अनुभव के पिटारे मेंआपको सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक श... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   9:18am 31 Dec 2019 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
उम्र की शाख पर खिलते हैंजन्मदिन के फूल हर सालझड़ जाता एक साल शाख सेवहीं जुड़ जाती है एक यादआँखों के आगे से गुजरता बचपनफिर पंख लगाकर यूं उड़ता यौवनचलचित्र की भांति गुज़रता हर लम्हाजैसे जी रहे हों कोई सपनाजन्मदिन की रौनकदिलाती है यह एहसासउम्र का कोई भी पड़ाव होहम हरदम रहेंग... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   1:41pm 27 Jul 2019 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
है कौन तुमको रोकता?है कौन तुमको टोकता?खोल दो तुम अपने द्वारबरसो हे मेघ! गाओ मल्हारतपती धरती, तपते वन हैंआग उगलती ये पवन हैपंछियों की सुन लो पुकारबरसो हे मेघ! गाओ मल्हारहुए सूने उपवन, सूनी गलियाँगए सूख पनघट, सूखी नदियाँभेजो बारिश की रिमझिम फुहारबरसो हे मेघ! गाओ मल्हार... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   1:39pm 27 Jul 2019 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
अभी तक तो तुमअटकते थे बोलने से दो बोललेकिन अब अविराम झरते हैंतुम्हारे मुख से शब्दों के फूलअभी तक तो तुमलड़खड़ाते थे, गिर पड़ते थेलेकिन अब सध गए हैंतुम्हारे नन्हे कदमअभी तक तो तुमडरते थे छोड़कर जाने से मेरा आँचललेकिन अब तुमने सीख लियाबाहर की दुनिया से ताल मिलानाआत्मविश्व... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   1:38pm 27 Jul 2019 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
मत छोड़ तू उम्मीदियों का दामन,तो क्या हुआ जो अभी देहरी पर है अंधेरा।सब्र कर, तोड़ दे ये उदासियों के घेरे,उस पार, इंतजार कर रहा है, एक नया सवेरा।।सच, बहुत फर्क पड़ता है, तेरी सोच का,हो आशावाद का या निराशावाद का कोहरा।एक कठपुतली की तरह नाचता है इंसान,और बन जाता है, सोच की शतरंज का... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   6:40am 25 May 2019 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
जो कर्मठ हैं नित, योगी हैंन आत्ममुग्ध, न भोगी हैंउनको ही भुला रहे हैंहम हीरे लुटाकर, कोयले बचा रहे हैं।जिनका अंदाज फ़कीरी हैजेब में बस कुछ कौड़ी हैंउनपे उँगली उठा रहे हैंहम हीरे लुटाकर कोयले बचा रहे हैं।जो उन्मुक्त गगन के पंछी हैंछल-कपट, झूठ के प्रतिद्वंदी हैंउन्हें शत्... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   3:14am 18 Mar 2019 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
हाँ - हाँ राजा, मैंने सब सुना राजाकिन्तु है मेरा मत तुमसे भिन्नप्रजा कब है ,राजा से अभिन्नयह समय नहीं है विवाद काअब प्रश्न नहीं उन्माद काजब शत्रु करे छिपकर प्रहारन करे कोई सन्धि स्वीकारकहो कब तक हों नतमस्तक राजासुनो राजा! सुनो राजा!शांति प्रस्ताव भेजे जितनेशत्रु ने वा... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   1:20pm 8 Mar 2019 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
माँ, बहन, बेटी, बहू और पत्नीकितने ही अनगिनत नाम हैं मेरेफिर भी सोचती हूँ कि इन सब के बीचमैं कहाँ हूँ?खुद को ढूँढना और होने का अहसास दिलानाक्यों है इतना कठिन , ये जता पानाअरे कोई तो समझे ,मैं इनसे परे जाना चाहती हूँआज मैं, बस 'मैं'रहना चाहती हूँ।दीपाली पन्त तिवारी 'दिशा'... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   1:10pm 8 Mar 2019 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
जिस युग में तुलसीदास जी का जन्म हुआ था उस युग में धर्म, समाज, राजनीति आदि क्षेत्रों में पारस्परिक विभेद और वैमनस्य का बोलबाला था। धर्म के क्षेत्र में एक ओर हिंदू-मुस्लिम तथा दूसरी ओर शैव-शाक्त, वैष्णव मतों में आपसी ईर्ष्या-द्वेष बढ़ता जा रहा था। हिन्दू समाज अवर्ण-सवर्ण क... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   2:25pm 15 May 2016 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
भूल न पाएँगे ए यारों, यूँ हम तुमकोहै यकीं तुम भी, न भुला पाओगे हमकोजब-जब यादों का, हंसी कांरवाँ गुजरेगाहर एक मंजर तब, फिर से जी उठेगाचेहरे की मुसकान सब, राज़ खोल देगीहम सबके दिलों के, तार छेड़ देगीवो मस्ती के पलछिन, वो गुज़रा जमानाहम रखेंगे याद, और तुम भी न भूल जाना    ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   10:17am 31 Jul 2014 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
मन के बंद दरवाजों परआज फिर दस्तक हुई हैगम की अंधेरी रात बीतीखुशियों की सुबह हुई हैजहाँ शब्द मौन हुए थेवहाँ अब हलचल हुई हैनाउम्मीदी का डेरा हटाएक नई पहल हुई है... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   4:10am 31 May 2014 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
खुद को सौभाग्यशाली मानती हूँ कि मेरे माता पिता एक शिक्षक हैं और मैं उनकी पुत्री । छोटेपन में जब कभी भी हम मोहल्ले में सहेलियों के घर जाया करते थे या कभी बाज़ार में कोई अनजाना मिल जाता था तो अक्सर उनसे ऐसे पहचान होती थी हमारी- "अरे ये गुरुजी की बिटिया है ।"बात-बात में पता चलत... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   3:52pm 31 Jan 2014 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
एक सपना हुआ है पूराजो कब से था अधूराआज मेरे अल्फाज़ों को एक नाम मिल गयावर्षों पहले हुए आगाज़ को अंजाम मिल गयाअब तो यह सिलसिला चलता ही रहेगामंजिल की तरफ़ कारवाँ बढ़ता ही चलेगाकुछ और नई कोंपलें फूटेंगी, मस्तिष्क की जमीं परले कल्पनाओं की उड़ानें, पहुँचेंगी दूर, कहीं क्षितिज प... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   11:04am 16 Nov 2013 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
सुडौल बनावट अक्षरों की,वैज्ञानिकता से जो भरी ।ब्राह्‌मीलिपि से है जन्मी,हिन्दी की लिपि देवनागरी ॥सहज, सरल और सुंदर,शब्दों का अथाह समुंदर ।खींचे शब्दों के चित्रहिन्दी भाषा है विचित्ररस, छंद, या अलंकारसाहित्य में इनकी भरमारभावनाओं का ज्वार-भाटाप्रकट करे हिन्दी भाषा... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   7:54am 15 Sep 2013 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
कश्मीर हो या कन्याकुमारीसभी जगह ले जाती रेलहिंदू-मुस्लिम, सिख-ईसाईसभी धर्मों का करती मेलबच्चा बूढ़ा और जवानकोई ज़मींदार कोई किसानकरते हैं सब इसकी सवारीसबको प्यारी रेल हमारीरेल से सबकी दोस्ती हैयही देश को जोड़ती हैइसमें सफ़र करे हिंदुस्तानरेल हमारे देश की शान... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   2:19pm 2 Sep 2013 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
दोस्तों कुछ लोग होते हैं बड़े ही विचित्रहर शुक्रवार को बदले सिनेमाहॉल में जैसे चलचित्रइसी कारण तो सभी कहें इनको बरसाती मेढकआते ही मुसीबतों की वर्षा करते दोस्तों संग बैठकअक्सर ये सच्ची दोस्ती का राग अलापते हैंइसी के नाम पर अपना काम निकालते हैंरंग बदलना इनकी फितरत म... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:53pm 22 Aug 2013 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
इस धागे में बँधा है प्यार अपारबहन की भाई के लिए दुआएँ हज़ारअपनों के लिए सुरक्षा का विश्‍वासहमेशा करीब बने रहने का अहसासयह डोर सुदूर भी दिल के तारों को जोड़ देती हैहमारी ज़िन्दगी में दूरियों को पाट नित नए मोड़ देती हैखोल देती है भावनाओं के बंद द्‍वारहटाए उपजी हुई द्‍व... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   11:27am 22 Aug 2013 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
पलखों के बंद झरोखों सेबहुत से ख़्वाब देखे थे मैंनेआकाश पर टिमटिमाते अनगिनततारों की तरह सुनहरे, सुंदर,रुपहले, झिलमिलाते ख़्वाबइस डर से कभी न उठाई पलखेंकहीं माँग न ले कोई इनका हिसाबघुटने की आदत हो गई है इन ख़्वाबों कोअब ये नहीं पुकारतेलेकिन ये भी सच है कि अपनी खामोशियो... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   6:52am 21 Jul 2013 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
बदलाव की बयार भली लग रही हैजो न थे तैयार उन्हें खल रही हैअक्सर भूल जाते हैं पायदानों पर चढ़ने वालेतरक्की की पहली सीढ़ी नीचे से ही चढ़ी हैबोए थे जो बीज कभी एक उम्र पहलेउसकी फसल आज पक कर  खड़ी हैहो रहे हैं पस्त अब हौंसले दुश्मनों केउम्मीद की किरण ए दिशा दिख रही है... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   2:15pm 20 Jul 2013 #
Blogger: Deepali Pant Tiwari
देर ही से सही हर एक ख्वाब सच होता हैसच ही तो है कर्मों का हिसाब यहीं होता हैयूँ तो ग़मों के दौर में कई बार एतबार टूटा मेराये अब जाना इंतजार का फल भी मीठा होता हैकोई कितना ही समझे कि वो खुदा हो गया हैए दिशा सबके चेहरे का नकाब यहीं हटता है... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   11:36am 18 Jul 2013 #
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