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Blog: अल्फाज़-ए-दिल

Blogger: गिरिजेश कुमार
 ज़िन्दगी की अनसुलझी पहेलियों के बीच खुद को तलाश करती उम्मीदें, इन उम्मीदों को पूरा करने की ख्वाहिश और इन सबके बीच अकेलेपन से जूझते इंसान का अंतर्मन। कभी-कभी हताश भी हो जाता है।अपने आसपास वह ऐसे लोगों को ढूंढता है जिसको वह अपना कह सके। जो उसे समझ सके, उसके अंतर्मन में म... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   1:47pm 4 Dec 2011 #रिश्ता
Blogger: गिरिजेश कुमार
यह सच है कि हमें हर वक्त किसी न किसी की ज़रूरत होती है। फिर चाहे वह ज़िन्दगी में गम का तूफान हो या खुशियों का मेहमान। लेकिन सवाल यह है कि ज़रूरत पूरी होने के बाद क्या हमें प्राथमिकताएँ बदल लेनी चाहिए? अपनी ज़िंदगी में हम किसे जगह देंगे और किसे नहीं यह फैसला बेशक हमारा है लेकि... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   2:15pm 26 Nov 2011 #रिश्ता
Blogger: गिरिजेश कुमार
'जनसंदेश टाइम्स' मे प्रकाशित  पहले शादी का झाँसा देकर शारीरिक सम्बन्ध बनाया जब वह गर्भवती हो गई तो शादी से इनकार कर गर्भपात का भरोसा दिलाया, गर्भपात के दौरान स्थिति बिगड़ी तो मरने के लिए सड़क पर छोड़ दिया| जी, ये कहानी है 20 वर्षीय छात्रा प्रियंका की, जिसे नहीं पता था जिससे व... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   7:11pm 9 Jul 2011 #समाज
Blogger: गिरिजेश कुमार
रिश्तों में प्यार नही, अहमियत रखता है पैसा मनुष्य जब से पृथ्वी पर आया या कहें कि मनुष्य की उत्पत्ति जब से हुई तब से आज तक उसने अपने लिए तरक्की के हर रास्ते को अपनाने की कोशिश की| आदिम काल से आज तक विज्ञान से लेकर सामाजिक क्षेत्र में जितने भी आविष्कार हुए, ये उसी जिजीविषा क... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   4:42pm 15 Jun 2011 #
Blogger: गिरिजेश कुमार
आज देश के वर्तमान सामाजिक हालात पर नजर डालें तो यहाँ हर व्यक्ति इर्ष्या, द्वेष और पूर्वाग्रह से ग्रसित पाया जाता है| सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे के प्रतीक कहे जाने वाले इस देश को ना जाने किसकी नजर लग गई कि लोग एक दूसरे का गला घोंटने पर आमादा हैं| प्यार, प्रेम और ममता क... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   8:54am 29 Apr 2011 #
Blogger: गिरिजेश कुमार
हम उस समाज में रहते हैं जो तेजी से विकसित होना चाहता है, आसमान की उंचाईयों को छूना चाहता है| सपने देखना अच्छी बात है| एक सामाजिक प्राणी होने के नाते समाज के विकास की कल्पना और उसके ढांचों को विकसित करने की महत्वाकांक्षा हमारे अंदर होनी ही चाहिए| लेकिन सवाल है कैसे? क्या प... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   7:03pm 15 Mar 2011 #
Blogger: गिरिजेश कुमार
अक्सर समाज में ऐसे लोग मिल जाते हैं जो यह कहते हुए नज़र आते हैं किहमारी जिंदगी में तो सिर्फ़ दुःख ही दुःख है| कभी भगवान को कोसते हैं तो कभी किस्मत को दोष देते हैं| हालाँकि ऐसा नहीं है कि वो झूठ बोलते हैं या दिखावे की कोशिश करते हैं| लेकिन कभी हम यह क्यों नहीं सोचते कि सामने वा... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   7:26pm 12 Mar 2011 #
Blogger: गिरिजेश कुमार
आज देश में हर तरफ़ अशांति है, खून खराबा है, भाई –भाई से लड़ रहा है, दोस्त- दोस्त से लड़ रहा है, कहीं धर्म के नाम पर हत्याएं हो रही हैं, कहीं जाति के नाम पर लोग एक दूसरे के खून के प्यासे बने हुए हैं? समाज की ऐसी स्थति क्यों है? कोई धर्म में इतना अंधा हो गया है कि उसे दूसरे के धर्म में ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   6:48pm 10 Mar 2011 #
Blogger: गिरिजेश कुमार
मानव सभ्यता के शुरुआत से ही धर्म एक ऐसा मुद्दा रहा है जिसपर हमेशा चर्चाएँ होते रहती हैं| हालांकि खुदा ने तो हमें एक धरती बख्शी थी लेकिन हमने हिंदुस्तान और पकिस्तान बनाया| उसने तो हमें इंसान बनाया था लेकिन हमने खुद को हिंदू और मुसलमान में बाँट लिया| बात जब समुदायों में श... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   6:46am 19 Jan 2011 #
Blogger: गिरिजेश कुमार
दुनिया की नज़रों में भले ही हम वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहे हों, दुनिया भले ही हमें एक महाशक्ति के रूप में देख रही हो लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे कहीं हटकर है| गरीबों का देश भारत आज भी उन्ही मजबूरियों और विवशताओं के बीच रहने को विवशहै जो आज से वर्षों पहले थी और जिस समय हमने ... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   7:07am 18 Jan 2011 #
Blogger: गिरिजेश कुमार
यह सवाल बहुत बार मन में उठा कि प्यार क्या है? आम तौर पर लोग दोस्त का मतलब यह समझ लेते हैं कि दोस्त है तो लड़का ही होगा| शायद लोग ये समझते हैं लड़कियां किसी की दोस्त नहीं बन सकती| पता नहीं क्यों लेकिन मानसिकता यही रहती है| असलियत में यह समाज कभी प्यार की कीमत नहीं जान सका| किसी ल... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   7:16am 14 Jan 2011 #
Blogger: गिरिजेश कुमार
जबभीकभीअकेलारहताहूँमनमेंबहुतसारेख्यालआतेरहतेहैं| कुछअच्छेभीकुछबुरेभी| कभीमनआहेंभरताहैकभीगुस्सेसेलालहोताहै| खासकरजबसमाजसेजुड़ेसवालहोंतोमनकरताहैज़वाबजाननेका | लेकिनकाफीप्रयासकेबावजूदभीजबजवाबनहींमिलतातोएकअजीबसीबेचैनीसेपरेशानरहताहूँ| मनकीइसअधेड़बु... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   6:48am 12 Jan 2011 #
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