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Blog: Free Astrology

Blogger: bhaskar shastri
स्पष्ट कालसर्प योग के ग्रहयोग १- जन्मांग में चोथे और दसवे स्थान में राहू केतु हो तो २- जन्मांग में पांचवे और ग्यारहवे स्थान राहू केतु हो तो ३-जन्मांग में छठे और बारहवे स्थान में राहू केतु हो तो,४- जन्मांग के सातवे और पहले स्थान में राहू केतु हो,५- जन्मांग के छठे और दूसरे स्... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   7:16pm 16 Aug 2012 #
Blogger: bhaskar shastri
श्रीबगला कीलक-स्तोत्रम्.ह्लींह्लीं ह्लींकार-वाणे, रिपुदल-दलने, घोर-गम्भीर-नादे !ज्रीं ह्रीं ह्रींकार-रुपे, मुनि-गण-नमिते, सिद्धिदे, शुभ्र-देहे !भ्रों भ्रों भ्रोंकार-नादे, निखिल-रिपु-घटा-त्रोटने, लग्न-चित्ते !मातर्मातर्नमस्ते सकल-भय-हरे ! नौमि पीताम्बरे ! त्वाम् ।। १क्... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   12:11pm 7 Jun 2012 #
Blogger: bhaskar shastri
श्री यन्त्र इस यन्त्र को धन वृद्धि, धन प्राप्ति, क़र्ज़ से सम्बंधित धन पाने के लिए उपयोग में लाया जाता है | इस यन्त्र की अचल प्रतिष्ठा होती है इस यन्त्र को व्यापार वृद्धि में रखा जाता है तथा जीवन भर लक्ष्मी के लिए दुखी नहीं होना पड़ता |कुबेर यन्त्र :-इस यन्त्र की स्था... Read more
clicks 240 View   Vote 0 Like   6:52am 26 Oct 2011 #
Blogger: bhaskar shastri
देवों में प्रथम पुज्य भगवान गणपति की पुजा,साधना,आराधना,ध्यान और स्थापना जीवन के प्रत्येक शुभ कार्य में आवश्यक है,अतः अपने पुजा स्थान में गणेश जी को स्थापित करके स्तोत्र पाठ ,वंदना अवश्य करनी चाहिए !जहां गणपति स्थापित होते है वहां ऋध्दि-सिध्दि,शुभ-लाभ  अपने आप स्थाप... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   1:11pm 10 Jun 2011 #
Blogger: bhaskar shastri
अब आगे---------------------बौध्दो का शक्ति तन्त्र साहित्य भी कम महत्वपुर्ण नहीं है ! अनेकों संस्कृत ग्रन्थ इस संबन्ध में उपलब्ध है! कुछ के नाम इस प्रकार है -१-तारा कल्प,२--तारा तन्त्र,३-तारा प्रदीप,४-कल्पलता, ५-तारा कवच,६-तारा तत्व,७.तारा पंजिका,८-तारा पध्दिति,९-तारा पंचाग,१०-तारा पराज... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   4:36pm 3 Jun 2011 #
Blogger: bhaskar shastri
अब आगे--------------वाराही तंत्र में ५५ शिवोक्त तन्त्रों का नाम आता है !जिनमें ९,६४,९४९ श्लोक है,आगम तन्त्र विलास ग्रन्थ के लेखक का विश्वास है कि आज भी २०८ तन्त्र ग्रन्थ उपलब्ध है,बौध्दो के विशाल तन्त्र साहित्य में से आज संस्कृत भाषा के २ ग्रन्थ प्राप्त है ! तिब्बत में तन्त्र सा... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   4:59pm 2 Jun 2011 #
Blogger: bhaskar shastri
कोई समय था जब तंन्त्रो क विशाल साहित्य उपलब्ध था आज उसमें से बहुत कम देखने को आता है!तंन्त्र ज्ञान के अभाव के कारण जन साधारण के द्वारा  इस साहित्य के प्रति जो उपेक्षा  का भाव बरता गया,उसके अध्ययन और विकास की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया,अतःउसका विलुप्त होना स्वाभाविक ह... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   3:25pm 31 May 2011 #
Blogger: bhaskar shastri
विवाह की आयु - गोचर का गुरु जब लग्न,त्रितीय,पंचम,नवम या एकादश भाव में आता है,उस वर्ष विवाह होता है! विशेषकर लग्न अथवा सप्तम बाव मेंआने पर विवाह हो जाता है! तथापि संबध्द वर्ष में शनि की दृष्टि लग्न अथवा सप्तम भाव पर नहीं होनी चाहिए !                  &n... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   9:46am 30 May 2011 #
Blogger: bhaskar shastri
जन्म पत्रिका में योगो का अध्ययन करने के लिये निम्न बातों क विशेष ध्यान रखना चाहिए-१.लग्नेश कौन ग्रह है और कहां बैठा है?                                                                 &nb... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   12:36pm 15 May 2011 #
Blogger: bhaskar shastri
मैं भास्कर शास्त्री छत्तीसगढ का ज्योति्षविद्यार्थी हूं,एवं ज्योतिष का कार्य मे विगत पांच वर्ष से  कर रहा हूं,अगर आप को कोई समस्या है तो आप निम्न नंबर पर फोन कर सकते है! +919303037891,+919685535092,+919425527927.... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   2:43pm 14 May 2011 #
Blogger: bhaskar shastri
अष्टलक्ष्मी योग वैदिक ज्योतिष में राहु नैसर्गिक पापी ग्रह के रूप में जाना जाता है.इस ग्रह की अपनी कोई राशि नहीं है अत: जिस राशि में होता है उस राशि के स्वामी अथवा भाव के अनुसार फल देता है.राहु जब छठे भाव में स्थित होता है और केन्द्र में गुरू होता है तब यह अष्टलक्ष्मी य... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   7:07am 30 Apr 2011 #
Blogger: bhaskar shastri
जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावकेकिशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥1॥जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थलेगलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयंचका... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   7:02am 30 Apr 2011 #
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