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Blog: Meri Lekhni, Mere Vichar.. मेरी लेखनी, मेरे विचार..

Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
जायजएडजस्टमेंट रिश्तों को मजबूत बनाता है,खुद को बदलना रिश्तों को कब्र तक ले जाता है...एडजस्टमेंटका मतलब हमारी सोच समझ आê... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   8:42am 11 Jan 2017 #Changing Yourself
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
● दो बूँद का सागर● (01-01-2015)बेबसी अब हद से गुजरने लगी हैशब्द अब तुम तक पहुँच न पाते हैं,आँखें बेशक काबिल हैं समझाने में,उफ़ पर्दा आ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   4:32pm 1 Jan 2015 #दर्द
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
● टूटा नान (कटाक्ष कहानी) ●● काफीदेर से टकटकी बाँधे काँच की उस दीवार के पार भीतर शोकेस में रखी छोटी-2 प्लेट्स को वह घूरे जा रì... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   2:21pm 30 Dec 2014 #कहानी
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
● चुड़ैल और शादी● (गंभीर हास्य)क्या आप जानते हैं कि हमारे हिंदुस्तान में चुडैलों की एक खास किस्म होती है जिसे किसी मनुष्य के सर पर स्थिर और स्थायी रूप से सवार करवाने के लिए बाकायदा मंत्रोच्चारणों के साथ पवित्र अग्नि को साक्षी रख लगभग हर धार्मिक रीति को उत्सव के माहौल मे... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   7:35am 1 Jan 2014 #
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
● गिलहरी ●(कहानी)(1)● ज्यों ही उसने डाल से लम्बी छलांग लगायी हवा में परवाज करती सी अगले दरख़्त की आगे को झुकी लचीली टहनी की ओर तेजी से उड़ सी चली | पहुँची ही थी की धप्प से करीब पच्चीस फुट नीचे जमीन पर औंधे मुँह आ गिरी | वो जो ऐसी छलांगे यूँही खेल-खेल में लगा लिया करती थी अब काफी सम... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   9:18pm 18 Dec 2013 #
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
सूत का गट्ठर (04-09-2013) सूत पर सूत या तांत पर तांत, यूँ उलझन भरा ज्यों समूचा मकडजाल, हर तांत पर उकेरा हुआ एक नाता मेरा, समीप से दूर तलक जाती हर लकीर पर, उकेरा गया आज एक धोखा कोई, आँसुओं से धो-धो बंद पलकों तले, लिखी जा रही एक कहानी नयी, भस्म-ऐ-चिता मेरे भरोसे की, ले माथे अपने रगड़े जा र... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   7:34pm 4 Sep 2013 #दर्द
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
: ओस से भीगी एक रात :अभीउसने बोरी के नीचे से सर निकाला ही था कि कोहरे भरी अँधेरी घनेरी रात में चल रही हवाओं की सरसराहट ने फिर दुबकने पर मजबूर कर दिया | इस साल पड़ी ठण्ड ने सारे पुराने रिकॉर्ड्स तोड़ डाले हैं | हाल ही दो दिन पहले तडके उसके बगल वाले फुटपाथ से अकड़ी हुई एक लाश म... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   9:05pm 21 Jan 2013 #उठते सवाल..?
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
● बैसाखी.. :| (एक निस्वार्थ प्यार) ●गर है तू साथ,हर कदम बन जाऊँ तेरा,गर है तू साथ,बन जाऊँ बैसाखी तेरी,गर है तू साथ,रहती साँस साथ निभाऊँ तेरा,गर है तू साथ,हमकदम बनूँ मैं तेरा,गर है तू साथ,हमखयाल बन जियूँ संग तेरे,गर है तू साथ,बहते मोती पी जाऊँ तेरे,गर है तू साथ,वजह ख़ुशी की तेरी मै... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   8:05pm 2 Dec 2012 #चित्र बोलता है
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
● चुहिया ●सामनेवाली दीवार की जड़ में बने छोटे उबड़-खाबड़ से गोल छेद को निहारे जाना जैसे मेरी रोज़ाना की आदत बन गयी थी | जब भी दिल उदास या खिन्न होता यहीं आ बैठता था मैं | वीरान पड़े इस छेद में अभी कुछ समय से हलचल सी नजर आने लगी थी मगर क्या है असल में यह नहीं समझ पा रहा था | एक दि... Read more
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
● Mr. & Mrs. Title. ● Dear Mrs. Title,सुबहही से धड़का सा लगा हुआ था | एक अंजाना सा डर, एक सिहरन जिसने लगातार रीढ़ में सनसनी सी बनाये रखी थी | हर आहट पर दिल उछाले लिए बाहर आने को तत्पर | लग रहा था रहा था जाने अब क्या हो | क्या सच ही मैंने तुम्हें खो दिया? अभी कल रात ही तो जरा सीबात हुई | वो भी पूरे चार... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   8:30am 21 Nov 2012 #Reminiscence (संस्मरण)
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
● Mr. & Mrs. Title. ● Dear Mrs. Title,सुबहही से धड़का सा लगा हुआ था | एक अंजाना सा डर, एक सिहरन जिसने लगातार रीढ़ में सनसनी सी बनाये रखी थी | हर आहट पर दिल उछाले लिए बाहर आने को तत्पर | लग रहा था रहा था जाने अब क्या हो | क्या सच ही मैंने तुम्हें खो दिया? अभी कल रात ही तो जरा सीबात हुई | वो भी पूरे चार... Read more
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
● दरिया और बूँद ●हो परेशां तुम उस तरफ,परेशां हम भी इधर कम नहीं,फरक फ़क्त इतना है,दो आंसू उधर तुम्हारे हैं,तो दरिया यहाँ भी कम नहीं...● जोगेंद्र सिंह (Jogendra Singh) 16-11-2012... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   6:18pm 16 Nov 2012 #कविता कोष
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
खामोश कब तक?खामोश निगाहों से तकता रहूँ मैं कब तक ?आकर कब वे जुबान देंगे मेरी ख़ामोशी को ?साकत कब तक घूरता रहूँ उस दगरे को ?जिस दगरे पर जाने के तेरे निशान बने हैं..... :-(जोगेंद्र सिंह सिवायच Jogendra Singh... (2012-10-13) .... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   8:29pm 13 Oct 2012 #कविता कोष
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
रिश्ते (सवाल बहुतेरे : उतरदाता कौन?)सुबहका अख़बार यूँ तो देखने की आदत मरहूम हो चुकी थी फिर भी कभी-कभार इस कार्य को भी निबटा लिया करता हूँ | पत्नी को उठना गँवारा न था सो निद्रावती बन लुढकी पड़ी थी | मेरी आँख अख़बार पर मगर जैसे हर्फ़ परवाज किये जाते हों | गड्डमड्ड आपस में उलझे ... Read more
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
चुड़ैलन काकी (कटाक्ष)आज हमारी चुड़ैल गजब ढा गयी | जाने कब किस तरह एक दिन बगल वाले मैदान से सटे उससे परे वाले कब्रिस्तान से होकर गुजरी और थकन से बावस्ता हो सुस्ताने के लिए वहीँ बनी एक पुरानी कब्र को अपने पृष्ठ भाग से अलंकृत कर बैठीं | दरअसल ये उनके घर आने जाने का शॉर्टकट था ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   9:12pm 26 Sep 2012 #उठते सवाल..?
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
ख्वाहिशें : (प्यारी सी जुगलबंदी)एक SMS:ख्वाबों खयालों की रातें हैं, कहनी सुननी उनसे कई बातें हैं...Nayika:आज की मुलाकात बस इतनी...कर लेना बातें चाहे का जितनी...Nayika:अच्छी नहीं होती है जिद इतनी...देखो हमें है तुमसे प्रीत कितनी...:)(note * dil par naa len)...:DJogi:जो ये नोट हटे...और बात सच्ची गर निकले दिल से...त... Read more
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
● बड़ी हवेली ●(1)     अपने पुराने स्टडी रूम की खिडकी तले लगी टेबल से मैंने सर उठाकर सामने वाली दीवार पर टंगी बत्तीस साल पुरानी घंटा-घडी को देखा | कुछ ग्यारह बजकर पच्चीस मिनट का समय दिखा रही थी | सैकंड का पतला कांटा नदारद था घंटे का छोटा सलामत और मिनट वाला अपनी उम्र के साथ उम्... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   8:34pm 29 Aug 2012 #सामाजिक विडम्बना
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
● ढेर हूँ मैं मिटटी से बना●(1)ढेर हूँ मैं मिटटी से बना,भूल मुझे, मेरी भूल को वजह बना,छोड़ बिखरता, परवाज यहाँ-वहाँ,चल दिए उठकर तुम जाने किस राह?(2)है मोह तुम्हें अब भी इसे जानता हूँ,खयाल अपना रखने को कहकर,चल देने का खयाल क्यों निकाल न पाते हो,ऐ हमसफ़र मेरे, चल देने का खयाल ही फिर,... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   7:55am 29 Aug 2012 #कविता कोष
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
दोष किसे दें?दोष किसे दें ऐ मेरे हमसफ़र,जब साया ही साथ छोड़ने लगे,तो अंधेरों को दोष कोई कैसे दे.....? :'(● जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh.... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   7:03pm 25 Aug 2012 #कविता कोष
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
बहरे लोगकहते तो सब बातें हैं ये अश्क,मगर सुना है आज,बहरे कुछ ज्यादा ही होने लगे हैं संसार में........ :'(● जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh.... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   7:02pm 25 Aug 2012 #कविता कोष
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
अश्कों की जुबानअश्कों की जुबान कहाँ होती है दोस्त,ख्वाब टूटें तो टूटें चाहे,बेजुबान उन्हें बह जाना होता है.........● जोगेंद्र सिंह Jogendra Singh .... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   7:01pm 25 Aug 2012 #कविता कोष
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
जिंदगी और बता, तेरा इरादा क्या है?जिंदगी और बता, तेरा इरादा क्या है...? ...(A songs line)कुछ नहीं बस क़त्ल इरादों का किये जाना है... (Jogi)Kiske iradon ka katal karna hai janab...? (एक दोस्त)अपने ही इरादों का होगा और किसी का क्या करना है जी... (Jogi)Koi khanjar wanjar hai ya...? (एक दोस्त)क्या जरुरत...? सपने हमेशा बिना खंजर ही क़त्ल किये जाते ... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   7:00pm 25 Aug 2012 #उभरती सोच
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
विध्वंस● विध्वंस दूर से हमेशा खूबसूरत ही दिखाई देता है...... फिर चाहे वह परमाणु विस्फोट हो या कोई ज्यलामुखी या फिर और किसी तरह का......... वो जीवन में रिश्तों के नाश-रूप में भी नजर आ सकता है...... जबकि लोग समझते हैं कि जो हमने किया अच्छा ही किया....... शायद देखना भूल जाते हैं कि वे पास नही... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   6:58pm 25 Aug 2012 #उठते सवाल..?
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
तटस्थ आँखेंतटस्थ,कोने में,विलग दुनिया से,खड़ी अकेली,दुनिया को निहारती आँखें.....जोगी....... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   7:09pm 23 Aug 2012 #कविता कोष
Blogger: Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
जज़्बा-ऐ-दिलजज़्बा-ऐ-दिल की कुछ ना कहो ऐ दोस्त......मेरे दिल के जखम हैं कुछ इस कदर कि.......न सहते होता है और न भरते होता है........ ............(जोगी) .... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   12:40pm 19 Aug 2012 #कविता कोष
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