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Blog: Kavi Ki Thali कवि की थाली

Blogger: Suman Kumar
लोग सुनो तुम मेरी बाते दिन अभी है पर होगी रातें रत कितना कष्ट दाई होता मानव क्या सारा जिव रोता आओ आज मिल जाएँ हम बन जाएँ दीपक मिट जाये तम ............ Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   1:26pm 9 Jul 2012 #
Blogger: Suman Kumar
लोग सुनो तुम मेरी बाते दिन अभी है पर होगी रातें रत कितना कष्ट दाई होता मानव क्या सारा जिव रोता आओ आज मिल जाएँ हम बन जाएँ दीपक मिट जाये तम ............ Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   1:26pm 9 Jul 2012 #
Blogger: Suman Kumar
तुमपेफ़िदाहोगयाहूँमैं,जैसेभौराफ़िदाहोकमलपर.मैंअपनेदिलकोकरूगां,समझानेकीकोशिशइसबातपर.मेरेबातकोदिलसमझपाता,इससेपहलेहीओलेबरसनेलगा.जुदाईभीतुमसेनहींहोसका,तेरेप्यारमेंदिलतरसनेलगा.ओलेहानिपहुचाएदिलको,इससेपहलेहीहम-तुममिलकर,दिलमेंप्यारकादीपजलायेगें,इसचमनम... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   10:06am 4 Aug 2010 #
Blogger: Suman Kumar
आज एहसास हुआ की...मुझे प्यार हो गया हैकविता से.जो सताती हैराहों में...और झूल जाती है हमारी बाहों में.न तो समय,और न ही स्थान निश्चित है,हमारी मुलकात की.फिर भी....मिल जाती है हमेशा,रेड लाईट पर.फैक्ट्री के दरवाजे परखड़ीं रहती है घंटों....हमारे इन्तजार में.गलियों में गुजरती है,हमा... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   9:45am 19 Jul 2010 #
Blogger: Suman Kumar
कल्पनाओं मेंउड़ता है कविमनआजाद पंछी की तरह.वह विचरण करता हैखुले आकाश में,इधर से उधर तक.वह पहुंचना चाहता हैअछोर आकाश के छोर तक.वह देखना चाहता हैनीले आकाश केउस पार की दूनिया.न तो वह थकता है न ही बैठता हैसुस्ताने के लिए.वह चाहता हैदो पल का आरामलेकिन...नीले आकाश के पाररंग वि... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   9:34am 19 Jul 2010 #
Blogger: Suman Kumar
मैं हार गयाऔर...जित हुई कविता कीलम्बी लड़ाई के बाद.उसके पक्ष में खड़ी थीकवियों की पूरी फ़ौज,और मैं था अकेला.जित तो उसकी होना ही था.फिर मैं.....समर्पण कर दिया खुद कोउसके सामने,और रंग गया उसकी रंगों में.हमारी लड़ाईद्वितीय विश्वयुद्धया पानीपत की नहीं,हम वैचारिक लड़ाईलड़ रहे थे.ज... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   3:29am 10 Jul 2010 #
Blogger: Suman Kumar
(1)भारत में ही नहीं.. पुरे विश्व मेंचर्चित राज्य बिहार.जहां शासन था.आधुनिक कृष्ण कावही कृष्ण जिसके मुख में बिहार ही नहींसमा सकता है, पूरा भारत भी.ट्रक ही नहीं.स्कूटर पर भीकरा सकता है भैंस को,एक शहर से दुसरे शहर तक कीलम्बी यात्रा.हाँ वही कृष्णजो उपदेशक है.आधुनिक गीता का.(2)क... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   6:58am 20 Jun 2010 #
Blogger: Suman Kumar
खो गई हैमेरी कवितापिछले दो दशको से.वह देखने में, जनपक्षीय हैकंटीला चेहरा है उसकाजो चुभता है, शोषको को.गठीला बदन,हैसियत रखता हैप्रतिरोध की.उसका रंग लाल हैवह गई थी मांगने हक़,गरीबों का.फिर वापस नहीं लौटी,आज तक.मुझे शक है प्रकाशकों के ऊपर,शायद,हत्या करवाया गया हैसुपारी दे... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   8:09am 13 Jun 2010 #
Blogger: Suman Kumar
समझनाएक नारी कोशायद........मुश्किल ही नहीं, असंभव है.नारी,आग का वह गोला हैजो जला सकती है,पूरी दुनिया.नारी,पानी का सोता हैवह बुझा सकती है,जिस्म की आग.नारी,एक तूफान हैवह मिटा सकती है,आदमी का वजूद.नारी,वरगद की छाया हैवह देती है, थके यात्री को,दो पल का आराम.नारी,एक तवा हैवह खुद जलक... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   10:58am 9 Jun 2010 #
Blogger: Suman Kumar
सुबह से शाम तक की,भाग दोड़ में, भूल जाता है,अपने आप को.फैक्ट्री में काम करने वालेमजदूरों के भीड़ में,खो जाता है, उसका वजूद.फिर .......पता नहीं कब,बचपन से जवानीऔर .......जवानी से बुढ़ापातक की सफ़र,पूरा कर लेता है, आदमी.लोग सुनो तुम मेरी बाते दिन अभी है पर होगी रातें रत कितना कष्ट दाई ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   10:31am 9 Jun 2010 #
Blogger: Suman Kumar
बड़े हुए है साथ-साथ,मैं और मेरी कविता.हमारी दोस्ती आज से नहीं,बचपन से है.जब हम दोड़ते थे,गेंहू के लहलहाते खेतों में.गिल्ली डंडा खेलते थेगाँव की गलियों में,कविता होती थी मेरे साथ.शायद........हम दोनों का, हर पल का साथ,कारण बना प्यार का.हाँ.....तुम क्या जानो,कितनी नजदीक से देखा हूँ,... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   9:54am 9 Jun 2010 #
Blogger: Suman Kumar
दोस्ती की दिवार कितना कमजोर हो गया है,शायद.........इसकी जड़ में,रेत की मात्रा अधिक हैया कहा जाए,रेत की धरातल पर टिकी हैआज की दोस्ती.लोग मतलबी हो गये है,अपने मतलब साधने के लिएदोस्ती करते है,और मतलब पूरा होते हीटूट जाती है,दोस्ती.....लोग सुनो तुम मेरी बाते दिन अभी है पर होगी रात... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   9:50am 9 Jun 2010 #
Blogger: Suman Kumar
सोच नाथू राम गोड्स कीजीवित रहना महात्मा गांधी का,ठीक नहीं था, देश और खुद उनके सेहद के लिए.आज सरेआम वलात्कार की जा रही है,उनके सपनों के भारत की,भर्ष्टाचार के बुलडोजर से .मिटा दी गई है, राम राज्य की निशानी,अतिक्रमण का नाम देकर.नहीं देख सकते थे हकीकत,अपने सपनों के भारत की.सा... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   10:47am 8 Jun 2010 #
Blogger: Suman Kumar
मैं कवि नहीं हूँ,क्योंकि कोई भी गुणनहीं है हमारे अन्दरजो होता है,एक कवि में.न तो दिखने में ही कवि लगता हूँ,और कवियो वाली पोशाक भीनहीं पहनता.फिर भी न जाने क्यों?ऐसा लगता है,दिल के कोई कोने में,छुपा है.....मेरा कवि मन.जो चाहता है,मुझे कवि बनाना.उसके अन्दर दृढ इच्छा है,कठोर परिश... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   10:18am 8 Jun 2010 #
Blogger: Suman Kumar
मैं डरता हूँ,कविता से....शायद रूठ न जाए,मेरी कोई हरकतों से.अब तो इस डर ने,डरने की सीमा पार कर गई है.रात भर जागा रहता हूँऐसा न हो की,कविता...रूठ कर चली जाए,हमारे सोने के बाद.कभी पलक झपकती भीतो पुकारता हूँ,कविता-कविता......कई बार तो पूछ बैठा हूँ,अपनी माँ से,चली तो नहीं गईकविता...?कविता... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   9:10am 8 Jun 2010 #
Blogger: Suman Kumar
उड़ने की कोशिश में,नाकामयाव...... उसकी पंखो को,कुतर दी गई है,बंदिस रूपी खंजर से.चाहती थी वह,उड़ना.....अनंत तकचहकना.....अरमानो के मुडेर पर,फुदकना.....दिल की आँगन में.स्वर्ण पिंजरा को छोड़कर,उड़ने के लिएखुले आकाश में.चाहत की दरवाजे को,पार कर जाना चाहती थी,वह तितली.लोग सुनो तुम मेरी बा... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   9:01am 8 Jun 2010 #
Blogger: Suman Kumar
जब कभी आप ये फैसला नही कर पायें, कि आज कवि की थाली में कौन सी सब्ज़ी लानी है, तो फिर बात मिक्स वेज सब्जी (Mixed Vegetable) तक जा पहुंचती है. आइये आज हम मिक्स वेज सब्जी बनायें. आवश्यक सामग्री * कविता के दाने - 100 ग्राम ( एक छोटी कटोरी ) * कवि की बात - 100 ग्राम * गजल - 100 ग्राम * कहानी - 1 मीडियम आ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   5:24am 7 Jun 2010 #
Blogger: Suman Kumar
सोच कविता बोल कविता बज रहा वह ढोल कवितानदी कविता पेड़ कविताखेत का हर मेड कवितादाये कविता बाये कविताजिधर देखो उधर कविताफिर भी मई ढुं ढं ता हूँगई मेरी किधर कविता ..लोग सुनो तुम मेरी बाते दिन अभी है पर होगी रातें रत कितना कष्ट दाई होता मानव क्या सारा जिव रोता आओ आज मिल जा... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   1:53pm 13 Mar 2010 #
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