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अपनों का साथ

इस लंबी सी ख़ामोशी के बाद....ऐ-री-सखी ,बता ना मुझे किएक लंबी सी खामोशी के बादयूँ तेज़ तूफ़ान का आनाऔर मेरा यूँ चेतन विहीन हो जानाऔर सोचना कि ,क्यों हर तूफ़ान अपने बादबर्बादी का मंज़र छोड़ जाता हैदरख्त टूटे ,मकां *उजड़*और आँखों से बहते आँसूकिसकी कहानी बयाँ करते हैं |ऐ-री-सखीहृदय में ...
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  December 17, 2016, 6:58 pm
फेसबुक पर एक लेखक वर्ग ऐसा है जो हम जैसी घरेलू लेखिकाओं से बहुत डरता है क्योंकि हमारा लिखा (चाहे थोडा लिखें) तारीफ़ पाता है |ज्यादा की चाह के बिना हम अपना काम निरंतर करते रहने में विश्वास रखती हैं , इसी लिए हमारे मित्र और नए जुड़ने वाले दोस्त अपने आप से हमारे लिखे को छाप कर, व...
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Tag :फेसबुक
  August 9, 2015, 5:50 pm
नीता कोटेचा''नित्या''Neeta Kotecha की लिखी गुजरती कहानी....''बेटे की ख़्वाहिश''जिसका अनुवाद मैंने किया है उस कहानी को कनाड़ा से प्रकाशित पत्रिका ''प्रयास''में स्थान देने के लिए सरन जी का आभार****************************ये गुजराती कहानी कुछ इस तरह है ...."नही हमीद , आज हम खाना खाने नही जायेंगे. आज भी तुम वडा-...
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  May 17, 2015, 7:57 pm
‘’ये अमीरों की जमात भी बड़ी अजीब सी होती हैं |इन लोगों की हर बात आम इन्सानों से अगल ही होती है|घर के रहन सहन,उनके कपड़े,उनके घर के झगड़े,जैसे हिन्दी सीरियल में दिखाये जाते हैं उनसे एक दम अलग .....यहाँ इन घरों में कोई ऊँची आवाज़ में बात नहीं करता |दो-चार गालियाँ इंग्लिश में निकाली औ...
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Tag :खोखली अमीरी
  October 1, 2014, 11:37 pm
तेरह साल का परेश रंगमंच के हॉल की सफाई किया करता था |वहाँ रोज़ कोई ना कोई साहित्य से जुड़ा बड़े नाम का व्यक्ति आता ही रहता था |इसी के चलते परेश के दिमाग में नित-नई कहानी/कविता जन्म लेती ही रहती थी तो वो सब अपनी कॉपी में लिखता रहता था||उसने एक दो बार कोशिश की ...
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Tag :छोटी कहानी
  July 26, 2014, 9:48 pm
इन आड़ी-तिरछी लकीरों सेखींचती है ज़िंदगी एक तस्वीरएक सोचएक द्वंद्धएक लड़ाई इस बेरहम जिंदगी सेएक सोचउस खालीपन की कसककुछ तो करना हैजो अभी अधूरा हैएक जद्धोजहदउस खालीपन कीजिसके इंतज़ार मेंउम्र निकलती जा रही हैखाली से टेबल परखाली से वक़्त मेंकागज़,पेंसिल से खेलने की कलाजो ...
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  June 24, 2014, 6:47 pm
 माँ शब्द एक  पर,खुद में सम्पूर्ण माँ कैसे जान लेती है दिल की हर बात  हर जज़्बात को जीवन चक्र शैशव से यौवन तक के सफर को और आँखों में झलकते किसी के प्यार को माँ शांत, सौम्य पर दिल से धरती सी मजबूत  उसकी फुलवारी में महकते हर फूल की महक को वो कभी&nbs...
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Tag :दिल की बातें
  May 9, 2014, 10:05 pm
चहल-पहल की इस नगरी में हम तो निपट बेगाने है जपते राम नाम सदा हम उसी के दीवाने है बेगानों की इस दुनिया में सजे बाज़ार मतवालों के हैं छीन ले जो खुशियाँ सभी ऐसे दुश्मन भी  नहीं बनाने हैं भूल कर सब बैठे घर अपना ऐसे यहाँ बहुत दीवाने हैं सजा लेते चाँद तारों से...
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Tag :कविता
  May 3, 2014, 5:06 pm
उसकी आखिरी रात में साँसों का चलना और साँसों का रुकना इसी के बीच रुक-रुक के चलती जिंदगी पर वो जिंदगी की आखिरी रात सो कर नहीं बिताना चाहती वो भूल जाना चाहती है  कि वो एक औरत है एक स्त्री, एक माँ है एक बेटी और एक बहन है किसी के घर की  वो  खुद के लिए ए...
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Tag :कविता
  April 29, 2014, 7:31 pm
जानती हूँ कि मैं कोई नई बात नहीं लिख रही हूँ ....पर आज जबहल्ला बोलप्रोग्राम देखा तो एक सोच मन में उठी और उसी सोच को बस शब्द देने का प्रयास किया हैटीवी पर आने वाले कार्यक्रम, खासकर सास-बहु टाइप प्रोग्राम से अब ऊब चुकी हूँ | इन बेकार के प्रोग्राम का असल जिंदगी से कोई लेना-...
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  April 26, 2014, 8:08 pm
टिमटिमाती  रोशनियाँऔर जंगल की आग का धुआँ सड़कों से गुजरती  गाड़ियाँऔर इन सबका शोर उसके कानों में फुसफुसाता है अपने व्यवस्ता की दास्तां एक अजीब सा शोर एक अजीब सी घुटन उसकी आँखों में काँपती है और फिर एक ऊँची आवाज़ ज़ार-ज़ार खड़खड़ाती सी उसे भेदती हुई ...
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Tag :रोशनियाँ
  April 24, 2014, 7:00 pm
(ऐ-री-सखी कविता संग्रह की ही एक कविता )ऐ-री-सखीतू ही बता मैं कब तक तन्हा रहूँगी  कब! मेरे मन की चौखट पे धूप सी इस जिंदगी में कोई आएगा जिस संग मैंसाजन गीत गाऊँगी तब!बसंत के आने पर  ,मेरी जिंदगी की भौर मेंतभी तो बहार आएगीजो  मल्हार का रूप धरउस संग प्यार क...
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  April 22, 2014, 7:16 pm
आह!जिंदगी ...........पेज 58... सृजन के विविध आयाम ............उम्दा पुस्तकों से गुजरने का एहसास ही अलहदा है | यूं देखने में तो पुस्तकें निर्जीव लगती हैं,लेकिन अगर उसकी अंतरात्मा को हम समझ पाएं तो वह हमारे लिए जीवन से कहीं  बढ़कर साबित होती हैं|इस बार आपके लिए कुछ ऐसी पुस्तकों का संक...
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Tag :लेख ...कुछ खुशी के पल
  February 2, 2014, 7:32 pm
अपने नेताओं में पहले जैसी बात कहाँ बिन मांगे मिल जाए इंसाफ अब वो हालत कहाँ वक़्त के साथ साज़ बदल रहे देश में गद्दार बढ़ रहे हो रही कुर्सी की होड़ यहाँ  अब ईमान की वैसी रात कहाँ पहले जैसी बात कहाँ  राज़ की बाते राज़ रही गँवारो के हाथों हमेशा सरकार रही इस देश में अबप...
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Tag :राजनीति
  January 25, 2014, 7:14 pm
उज्जैन यात्रा के दौरान हमें  (मैं, विजय सपपत्ति और नितीश मिश्र ) चन्द्रकान्त देवतालेजी से मुलाक़ात करने का सौभाग्य मिला  | बेहद सरल स्वभाव का व्यक्तित्व लिए हुए वो हमें लेने अपनी गली के नुक्कड़ तक आए | बेहद आदर भाव से अपने घर के आँगन में बैठाया |शालीन स्वभाव और ठहरा हुआ ...
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Tag :लेख
  January 19, 2014, 7:06 pm
एक वक़्त था जब उसे किसी ना किसी ऐसे इंसान की जरूरत पड़ती थी ...जिसे वो अपने दिल की बात बता सके...किसी के साथ अपने दिल की बातें बाँट सके, पर उस वक़्त किसी ने उस का साथ नहीं दिया ...पर आज हर बात पलट हो रही है,अब यहाँ ...घर भर के लोग उसे आवाज़ देते हैं और वो अपनी दुनिया में कहीं बहुत दूर खो ...
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Tag :ये औरत
  January 11, 2014, 9:46 pm
 किसी भी लेखक के लिए वो पल सबसे बड़ा और यादगार होता है जब कोई उसकी कविता या संग्रह की तारीफ करे और ये पल ओर भी यादगार बन जाते हैं जब वो शक्स खुद फोन करके आप से आपका पता मांगे ....ये कहते हुए कि संग्रह को लेकर एक पत्र भेजना है |ऐसे ही पल मेरी जिंदगी में भी आए जब सर्दी के दिनों में...
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  January 4, 2014, 10:23 pm
पूरा साल कैसे बीत गया ....ये पता ही नहीं चला |सोचा था इस 2013 में बहुत कुछ लिखूँगी ...पर चाह कर भी कामयाब नहीं हुई |बहुत कुछ तो  क्या....मैं अपने मन का लिख भी नहीं पाई | ब्लॉग को पढ़ना और ब्लॉग पर लिखना लगभग बंद है|जीवन की कुछ बंदिशे इतनी रही कि पढ़ने और लिखने का वक़्त ही नहीं मिला |इधर कु...
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  December 27, 2013, 11:51 pm
हम गुलमोहर के रचनाकरअपनी खुशियों में करना चाहते हैंआपको शामिल .....चाहते हैं आपकी शुभकामनाएँआपकी गरिमामय उपस्थिति आप सबका प्रदीप्त सान्निध्य।तो आएँगे न ...जरूर आइएगा इंतज़ार करेंगे हम सब....... 30 कवियों की प्रतिनिधि कविताओं के संग्रह "गुलमोहर"का विमोचन सान्निध्य : लीलाधर म...
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  November 13, 2013, 6:45 pm
हमारे बुज़ुर्ग लोग कहते हैं कि बेटी धान की खेती की तरह होती है |वह परायाधन या किसी दूसरे की अमानत भी कहलाती है |अपने हिस्से की धूप और छाँव को सहती हुई ये बच्चियाँ ना जाने कब बडी हो कर किसी ओर घर की शोभा बन कर अपने माँ-बाबा की दहलीज़ को छोड़ , दूसरे घर को कितनी सरलता से अपना मान ल...
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  October 19, 2013, 3:13 pm
राम तेरे देश में.......(पूरी कविता पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे)राम तेरे देश मेंक्यों मची हुई है लूट ?सत्य अहिंसा छोड़कर,डाल रहे हैं सब फूटहर जगह लुट रही है नारी,हो रही अस्मतों की लूट.........
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  October 5, 2013, 8:58 pm
 आज की पोस्ट में मैं आप से पहले अपने सम्मान की कुछ तस्वीर साँझा करुँगी और उसके बाद उदयपुर जो मैंने अपनी नज़र से देखा ...एक भ्रमण और एक सोच के साथ कि मैं इस सफर में कुछ भी सोच कर नहीं चली  थी ...बस एक सम्मान लेने की बात थी जो कि मुझे मिलना था और मुझे उसे लेकर वापिस आ जाना था पर न...
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Tag :कला और संस्कृति का सम्मान समारोह
  September 19, 2013, 10:40 pm
फिसलता सिंदूर सारे रंग सारी रोशनियाँ,सारे मौसम और अंश-अंश तुम्हारा बिखर गया इन दंगो की मार में मेरी मांग से ही क्यों तुम्हारा दिया सिंदूर फिसल गया ||************************दंगे गुलमोहर के कुछ ऊपर से फिर ऊपर से कुछ ऊपर,जहाँ से आज की सांझ बहुत रुलाती है खंड-खंड टूटता हुआ आदमी आदमी को ही क...
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Tag :दमन और साजिश
  September 9, 2013, 10:15 pm
 राधा  और कृष्ण का प्रेम ...जहाँ एक ओर राधा अपने प्रेम भावनाओं में बह रही है ...अपने मन के भाव को कृष्ण के साथ बाँट रही है...वहीँ दूसरी ओर वो अपने मन और कृष्ण को ये समझाने में असमर्थ है कि वो उनके जाने पर कितनी दुखी है ...प्रेम और जुदाई के भाव को लेकर लिखी गई रचना ....... मंद मंद ...
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Tag :कविता
  August 27, 2013, 6:20 pm
एक तरंग, एक लहरएक संसार,एक ख़याल कमज़ोर क्षण,ताकतवर इंसानखुद  से मुक्त होने का हैदोहराव |एक जिंदगी, एक अजमाइशएक गुरु,एक शिक्षा  एक शत्रु,एक भूलहै  नज़र भर काधोखा जरुर |एक राम,एक श्यामएक बुद्ध, एक ज्ञान एक उपेक्षा, एक अपेक्षासूत्र-दर-सूत्र होता हैखुद पर विश्वास |एक सुंदर...
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Tag :कविता
  August 18, 2013, 6:11 pm
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