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लम्हों का सफ़र

लौट जाऊँगी...   *******   कब कहाँ खो आई ख़ुद को   कब से तलाश रही हूँ ख़ुद को   बात-बात पर कभी रूठती थी   अब रूठूँ तो मनाएगा कौन   बार-बार पुकारेगा कौन   माँ की पुकार में दुलार का नाम   अब भी आँखों में ला देता नमी   ठहर गई है मन में कुछ कमी,   अब तो यूँ जैसे ...
लम्हों का सफ़र...
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  November 17, 2018, 12:23 am
रंगीली दिवाली(दिवाली पर 10 हाइकु)*******1.छबीला दीयाये रंगीली दिवालीबिखेरे छटा। 2.साँझ के दीपअँधेरे से लड़तेवीर सिपाही।3.दीये नाचतेये गुलाबी मौसमखूब सुहाते। 4.झूमती धराअमावस की रातखूब सुहाती। 5.दीप-शिखाएँजगमग चमकेदीप मालाएँ। 6.धूम धड़ाकाबेजुबान है डराचीखे पटाखा।&nbs...
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Tag :हाइकु
  November 7, 2018, 11:27 pm
चाँद की पूरनमासी...   *******चाँद तेरे रूप में अब किसको निहारूँ?   वो जो बचपन में दूर का खिलौना था   या फिर सफेद बालों वाली बुढ़िया   जो चरखे से रूई कातती रहती थी   या फिर वो साथी जिससे बतकही करते हुए   न जाने कितनी पूरनमासी की रातें बीतीं थीं   इश्क के जाने क...
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  October 24, 2018, 9:40 pm
वर्षा (ताँका)   *******   1.   वर्षा की बूँदें   उछलती-गिरती   ठौर न पाती   मौसम बरसाती   माटी को तलाशती।   2.   ओ रे बदरा   इतना क्यों बरसे   सब डरते   अन्न-पानी दूभर   मन रोए जीभर।   3.   मेघ दानव   निगल गया खेत,   आया अकाल   लहू से ल...
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  October 14, 2018, 8:39 pm
अनुभूतियाँ   *******   कुछ अनुभूतियाँ   आकाश के माथे का चुम्बन है   कुछ अनुभूतियाँ   सूरज की ऊर्जा का आलिंगन है   हर चाहना हर कामना   अद्भूत अनोखा अँसुवन है   न क्षीण न स्थाई कुछ   मगर ये भाव   सहज अनोखा बन्धन है।   - जेन्नी शबनम (8. 10. 2018)   ________________...
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  October 8, 2018, 1:06 pm
बापू (चोका)   *******   जन्म तुम्हारा   सौभाग्य है हमारा   तुमने दिया   जग को नया ज्ञान   हारे-पिछड़े   वक्त ने जो थे मारे   दुख उनका   सह न पाए तुम   तुमने किया   अहिंसात्मक जंग   तुमने कहा -   सत्य और अहिंसा   सच्चे विचार   स्वयं पर वि...
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Tag :चोका
  October 2, 2018, 5:18 pm
मीठी-सी बोली (हिन्दी दिवस पर 10 हाइकु)   *******   1.   मीठी-सी बोली   मातृभाषा हमारी   ज्यों मिश्री घुली!   2.   हिन्दी है रोती   बेबस व लाचार   बेघर होती!   3.   प्यार चाहती   अपमानित हिन्दी   दुखड़ा रोती!   4.   अंग्रेज़...
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Tag :हिन्दी दिवस
  September 14, 2018, 10:55 pm
चाँद रोज़ जलता है   *******   तूने ज़ख़्म दिया तूने कूरेदा है   अब मत कहना क़हर कैसा दिखता है।   राख में चिंगारी तूने ही दबाई   अब देख तेरा घर खुद कैसे जलता है।   तू हँसता है करके बरबादी गैरों की   गुनाह का हिसाब खुदा रखता है।   पैसे के परों से तू कब तक उड़...
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  September 10, 2018, 7:39 pm
फ़ॉर्मूला...   *******   मत पूछो ऐसे सवाल   जिसके जवाब से तुम अपरिचित हो   तुम स्त्री-से नहीं   समझ न सकोगे   स्त्री के जवाब   तुम समझ न पाओगे   स्त्री के जवाब में   जो मुस्कुराहट है   जो आँसू है   आखिर क्यों है,   पुरूष के जीवन का गणित और विज्ञान&n...
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Tag :समाज
  September 1, 2018, 11:49 pm
कम्फर्ट ज़ोन...   *******   कम्फर्ट ज़ोन के अंदर   तमाम सुविधाओं के बीच   तमाम विडम्बनाओं के बीच   सुख का मुखौटा ओढ़े   शनै-शनै   बीत जाता है   रसहीन जीवन   हासिल होता है   महज   रोटी, कपड़ा, मकान   बेरंग मौसम   और रिश्तों की भरमार   कम्फर्ट ...
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  August 28, 2018, 11:20 pm
खिड़की स्तब्ध है...*******   खिड़की, महज़ एक खिड़की नहीं   वह एक एहसास है, संभावना है   भीतर और बाहर के बीच का भेद   वह बखूबी जानती है   इसपार छुपा हुआ संसार है   जहाँ की आवोहवा मौन है   उसपार विस्तृत संसार है   जहाँ&...
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  August 18, 2018, 11:56 pm
सिंहनाद करो...   *******   व्यर्थ लगता है   शब्दों में समेटकर   हिम्मत में लपेटकर   अपनी संवेदनाओं को   अभिव्यक्त करना,   हम जिसे अपनी आजादी कहते हैं   हम जिसे अपना अधिकार मानते हैं   सुकून से दरवाजे के भीतर   देश की दुर्व्यवस्था पर   देश और सरक...
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  August 15, 2018, 4:32 pm
अनछुई-सी नज़्म...   *******   कुछ कहो कि   सन्नाटा भाग जाए   चुप्पियों को लाज आ जाए   अँधेरों की तक़दीर में   भर दो रोशनाई से रंग   कि छप जाए रंगों भरी ग़ज़ल   और सदके में झुक जाए   मेरी अनछुई-सी नज़्म !   - जेन्नी शबनम (5. 8. 2018)______________________________...
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  August 5, 2018, 11:33 am
गुमसुम प्रकृति(प्रकृति पर 10 सेदोका)   *******   1.   अपनी व्यथा   गुमसुम प्रकृति   किससे वो कहती   बेपरवाह   कौन समझे दर्द   सब स्वयं में व्यस्त।   2.   वन, पर्वत   सूरज, नदी, पवन   सब हुए बेहाल   लड़खड़ाती   साँसें सबकी डरी   प्रकृति है ल...
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  July 27, 2018, 8:42 pm
तपता ये जीवन (10 ताँका)   *******   1.   अँजुरी भर   सुख की छाँव मिली   वह भी छूटी   बच गया है अब   तपता ये जीवन।   2.   किसे पुकारूँ   सुनसान जीवन   फैला सन्नाटा,   आवाज घुट गई   मन की मौत हुई।   3.   घरौंदा बसा   एक-एक तिनका   मुश्किल जु...
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  July 22, 2018, 8:16 pm
उनकी निशानी...  *******  आज भी रखी हैं  बहुत सहेज कर  अतीत की कुछ यादें  कुछ निशानियाँ  कुछ सामान  टेबल, कुर्सी, पलंग, बक्सा  फूल पैंट, बुशर्ट और घड़ी  टीन की पेटी   एक पुराना बैग  जिसमें कई जगह मरम्मत है  और एक डायरी  जिसमें काफ़ी कुछ है&nb...
लम्हों का सफ़र...
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  July 18, 2018, 9:01 pm
रंगरेज हमारा   *******   सुहानी संध्या   डूबने को सूरज   देखो नभ को  नारंगी रंग फैला   मानो सूरज   एक बड़ा संतरा   साँझ की वेला   दीया-बाती जलाओ   गोधूली-वेला  देवता को जगाओ,   ऋचा सुनाओ,   अपनी संस्कृति को   मत बिसराओ,   शाम होते ही जब  &nbs...
लम्हों का सफ़र...
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  July 10, 2018, 8:22 pm
भाव और भाषा   *******   भाषा-भाव का   आपसी नाता ऐसे   शरीर-आत्मा   पूरक होते जैसे,   भाषा व भाव   ज्यों धरती-गगन   चाँद-चाँदनी   सूरज की किरणें   फूल-खूशबू   दीया और बाती   तन व आत्मा   एक दूजे के बिना   सब अधूरे,   भाव का ज्ञान   भाव क...
लम्हों का सफ़र...
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  July 5, 2018, 9:53 pm
भाव और भाषा (चोका)   *******  भाषा-भाव का   आपसी नाता ऐसे   शरीर-आत्मा   पूरक होते जैसे,   भाषा व भाव   ज्यों धरती-गगन   चाँद-चाँदनी   सूरज की किरणें   फूल-खूशबू   दीया और बाती   तन व आत्मा   एक दूजे के बिना   सब अधूरे,   भाव का ज्ञान   भा...
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  July 5, 2018, 9:53 pm
भाव और भाषा   *******  भाषा-भाव का   आपसी नाता ऐसे   शरीर-आत्मा   पूरक होते जैसे,   भाषा व भाव   ज्यों धरती-गगन   चाँद-चाँदनी   सूरज की किरणें   फूल-खूशबू   दीया और बाती   तन व आत्मा   एक दूजे के बिना   सब अधूरे,   भाव का ज्ञान   भाव की अ...
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  July 5, 2018, 9:53 pm
परवरिश...   *******  कहीं पथरीली कहीं कँटीली  यथार्थ की जमीन बंजर होती है  जहाँ ख्वाहिशों के फूल उगाना  न सहज होता है न सरल  परन्तु फूल उगाना लाजिमी है  और उसकी खूशबू का बसना भी,  यही जीवन का नियम है  और इसी में जीवन की सुन्दरता है।  वक्त आ चुका ह...
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  June 22, 2018, 11:03 pm
प्यारी-प्यारी माँ   (माँ पर 10 हाइकु)   *******   1.   माँ की ममता   नाप सके जो कोई   नहीं क्षमता।   2.   अम्मा के बोल   होते हैं अनमोल   मत तू भूल।   3.   सब मानती   बिन कहे जानती   प्यारी-प्यारी माँ।   4.   दुआओं भरा   खजानों का भंडार   ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :मातृ दिवस
  May 13, 2018, 5:32 pm
ऐसा क्यों जीवन...   *******ये कैसा सहर है   ये कैसा सफर है   रात सा अँधेरा जीवन का सहर है   उदासी पसरा जीवन का सफर है।   सुबह से शाम बीतता रहा   जीवन का मौसम रूलाता रहा   धरती निगोडी बाँझ हो गई   आसमान जो सारी बदली पी गया।   अब तो आँसू है पीना    और सपन...
लम्हों का सफ़र...
Tag :समाज
  May 1, 2018, 6:17 pm
विनती...   *******   समय की शिला पर   जाने किस घड़ी लिखी   जीवन की इबारत मैंने   ताउम्र मैं व्याकुल रही   और वक़्त भी तड़प गया,   वक़्त को पकड़ने में   मेरी मांसपेशियाँ   कमज़ोर पड़ गई   दूरियाँ बढ़ती गई   और वक़्त लड़खड़ा गया।   अब मैं आँखें मू...
लम्हों का सफ़र...
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  April 18, 2018, 8:51 pm
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ...   *******   वो कहते हैं -   बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।   मेरे भी सपने थे   बेटी को पढ़ाने के   किसी राजकुमार से ब्याहने के   पर मेरे सपनों का कत्ल हुआ   मेरी दुनिया का अंत हुआ,   पढ़ने ही तो गई थी मेरी लाड़ली   खून से लथपथ सड़क पर पड़ी   ज...
लम्हों का सफ़र...
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  April 12, 2018, 5:31 pm
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