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लम्हों का सफ़र

कैसी आज़ादी पाई  (स्वतंत्रता दिवस पर 4 हाइकु)  *******  1.  मन है क़ैदी,  कैसी आज़ादी पाई?  नहीं है भायी!  2.  मन ग़ुलाम  सर्वत्र कोहराम,  देश आज़ाद!  3.  मरता बच्चा  मज़दूर किसान,  कैसी आज़ादी?  4.  हूक उठती,  अपने ही देश में  हम ग़ुलाम!  - जेन्नी शबनम (15. 8. 2017)  _______...
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Tag :हाइकु
  August 15, 2017, 5:24 pm
सँवार लूँ...  *******  मन चाहता है  एक बोरी सपनों के बीज  मन के मरुस्थल में छिड़क दूँ  मनचाहे सपने उगा  ज़िन्दगी सँवार लूँ।  - जेन्नी शबनम (9. 8. 2017) ________________________...
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Tag :
  August 9, 2017, 4:45 pm
रिश्तों की डोर  (राखी पर 10 हाइकु)  *******  1.  हो गए दूर  संबंध अनमोल  बिके जो मोल!  2.  रक्षा का वादा  याद दिलाए राखी  बहन-भाई!  3.  नाता पक्का-सा  भाई की कलाई में  सूत कच्चा-सा!  4.  पवित्र धागा  सिखाता है मर्यादा  जोड़ता नाता!  5.  अपनापन  अब भी है दिखता  र...
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Tag :हाइकु
  August 7, 2017, 8:00 pm
मुल्कों की यही रीत है...  *******  कैसा अजब सियासी खेल है, होती मात न जीत है  नफ़रत का कारोबार करना, हर मुल्कों की रीत है!  मज़हब व भूख़ पर, टिका हुआ सारा दारोमदार है  गैरों की चीख-कराह से, रचता ज़ेहादी गीत है!  ज़ेहन में हिंसा भरा, मानव बना फौलादी मशीन  दहशत की ये धुन बजाते,...
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Tag :
  July 17, 2017, 11:15 pm
मुल्कों की रीत है...  ******* कैसा अजब सियासी खेल है, होती मात न जीत है नफ़रत का कारोबार करना, हर मुल्कों की रीत है! मज़हब व भूख़ पर, टिका हुआ सारा दारोमदार है गैरों की चीख-कराह से, रचता ज़ेहादी गीत है!  ज़ेहन में हिंसा भरा, मानव बना फौलादी मशीन  दहशत की ये धुन बजाते, दानव का यह सं...
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Tag :
  July 17, 2017, 11:15 pm
उदासी...  *******  ज़बरन प्रेम ज़बरन रिश्ते  ज़बरन साँसों की आवाजाही  काश! कोई ज़बरन उदासी भी छीन ले!  - जेन्नी शबनम (7. 7. 2017)  _______________________________...
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Tag :
  July 7, 2017, 7:36 pm
ज़िद...  *******  एक मासूम सी ज़िद है -  सूरज तुम छुप जाओ  चाँद तुम जागते रहना  मेरे सपनों को आज  ज़मीं पर है उतरना!  - जेन्नी शबनम (1. 7. 2017)_________________________ ...
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Tag :प्रेम
  July 1, 2017, 11:11 pm
धरा बनी अलाव  (गर्मी के 10 हाइकु)  *******  1.  दोषी है कौन?  धरा बनी अलाव,  हमारा कर्म!  2.  आग उगल  रवि गर्व से बोला -  सब झुलसो!  3.  रोते थे वृक्ष -  'मत काटो हमको',  अब भुगतो!  4.  ये पेड़ हरे  साँसों के रखवाले  मत काटो रे!  5.  बदली सोचे -  आँखों में आँसू नहीं  बर...
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Tag :हाइकु
  June 30, 2017, 2:49 pm
फ़ौजी-किसान  (19 हाइकु)  *******  1.  कर्म पे डटा  कभी नहीं थकता  फ़ौजी-किसान!  2.  किसान हारे  ख़ुदकुशी करते,  बेबस सारे!  3.  सत्ता बेशर्म  राजनीति करती,  मरे किसान!  4.  बिकता मोल  पसीना अनमोल,  भूखा किसान!  5.  कोई न सुने  किससे कहे हाल  डरे किसान!  6.  भू...
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Tag :हाइकु
  June 25, 2017, 8:21 am
मर गई गुड़िया...  *******  गुड़ियों के साथ खेलती थी गुड़िया  ता-ता थइया नाचती थी गुड़िया  ता ले ग म, ता ले ग म गाती थी गुड़िया  क ख ग घ पढ़ती थी गुड़िया  तितली-सी उड़ती थी गुड़िया !  ना-ना ये नही है मेरी गुड़िया  इसके तो पंख है नुचे  कोमल चेहरे पर ज़ख़्म भरे  सारे बदन स...
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Tag :स्त्री
  June 1, 2017, 3:01 pm
तहज़ीब...*******  तहज़ीब सीखते-सीखते  तमीज़ से हँसने का शऊर आ गया  तमीज़ से रोने का हुनर आ गया  नहीं आया तो  तहज़ीब और तमीज़ से  ज़िन्दगी जीना न आया।  - जेन्नी शबनम (13. 5. 2017)________________________...
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  May 13, 2017, 9:07 pm
हमारी माटी  (गाँव पर 20 हाइकु)  *******  1.  किरणें आई  खेतों को यूँ जगाए  जैसे हो माई।  2.  सूरज जागा  पेड़ पौधे मुस्काए  खिलखिलाए।  3.  झुलसा खेत  उड़ गई चिरैया  दाना न पानी।  4.  दुआ माँगता  थका हारा किसान  नभ ताकता।  5.  जादुई रूप  चहूँ ओर बिखरा  आँखों ...
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Tag :हाइकु
  May 11, 2017, 11:01 pm
सुख-दुःख जुटाया है...*******तिनका-तिनका जोड़कर  सुख-दुःख जुटाया है  सुख कभी-कभी झाँककर  अपने होने का एहसास कराता है  दुःख सोचता है  कभी तो मैं भूलूँ उसे  ज़रा देर आराम करे  मेरे मायके की  टिन वाली पेटी में  तिनका-तिनका जोड़कर  सुख-दुख जुटाया है।  - जेन्नी शबनम...
लम्हों का सफ़र...
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  April 24, 2017, 11:25 pm
एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में...*******तन्हा रहे ताउम्र अपनों की भीड़ में  एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में!  वक्त के आइने में दिखा ये तमाशा  ख़ुद को निहारा पर दिखे न भीड़ में!  एक अनदेखी ज़ंजीर से बँधा है मन  तड़पे है पर लहू रिसता नहीं पीर में!  शानों शौक़त की लम्बी फ़े...
लम्हों का सफ़र...
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  April 17, 2017, 9:04 pm
विकल्प...  *******  मेरे पास कोई विकल्प नहीं  पर मैं हर किसी का विकल्प हूँ,  कामवाली छुट्टी पर तो मैं  रसोइया छुट्टी पर तो मैं  सफाइवाली छुट्टी पर तो मैं  धोबी छुट्टी पर तो मैं  पशु को खिलानेवाला छुट्टी पर तो मैं  चौकीदार छुट्टी पर तो मैं,  इन सारे विकल्पों को निभ...
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  April 1, 2017, 8:26 pm
साथ-साथ...  *******  तुम्हारा साथ  जैसे बंजर ज़मीन में  फूल खिलना  जैसे रेगिस्तान में  जल का स्रोत फूटना!  अक्सर सोचती हूँ  तुममें कितनी ज़िन्दगी बसती है  बार-बार मुझे वापस खींच लाते हो  ज़िन्दगी में  मेरे घर मेरे बच्चे  सब से विमुख होती जा रही थी  ख़ुद का जी...
लम्हों का सफ़र...
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  March 24, 2017, 11:39 pm
नीयत और नियति...  *******  नीयत और नियति  समझ से परे है  एक झटके में  सब बदल देता है,  ज़िन्दगी अवाक्!  काँधे पर हाथ धरे  चलते-चलते  पीठ में गहरी चुभन  अनदेखे लहू का फ़व्वारा  काँधे पर का हाथ  काँपता तक नहीं,  ज़िन्दगी हत्प्रभ!  सपनों के पीछे  दौड़ते-दौड़ते  ...
लम्हों का सफ़र...
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  March 21, 2017, 11:29 pm
रेगिस्तान...*******  मुमकिन है यह उम्र  रेगिस्तान में ही चुक जाए  कोई न मिले उस जैसा  जो मेरी हथेलियों पर  चमकते सितारों वाला  आसमान उतार दे!  यह भी मुमकिन है  एक और रेगिस्तान  सदियों-सदियों से  बाँह पसारे मेरे लिए बैठा हो  जिसकी हठीली ज़मीन पर  मैं खुशबू के ढ...
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Tag :
  March 18, 2017, 7:10 pm
जागा फागुन (होली के 10 हाइकु)*******  1.  होली कहती  खेलो रंग गुलाल  भूलो मलाल!  2.  जागा फागुन  एक साल के बाद,  खिलखिलाता!  3.  सब हैं रँगे  फूल तितली भौंरे  होली के रंग!  4.  खेल तो ली है  रंग-बिरंगी होली  रँगा न मन!  5.  छुपती नहीं  होली के रंग से  मन का पीर!  ...
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Tag :होली
  March 13, 2017, 12:18 pm
हवा बसन्ती  *******  1.  हवा बसन्ती  लेकर चली आई  रंग बहार!  2.  पीली ओढ़नी  लगती है सोहणी  धरा ने ओढ़ी!  3.  पीली सरसों  मस्ती में झूम रही,  आया बसन्त!  4.  कर शृंगार  बसन्त ऋतु आई  बहार छाई!  5.  कोयल कूकी -  आओ सखी बसन्त!  साथ में नाचें!  6.  धूप सुहानी  छटा ह...
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Tag :हाइकु
  March 1, 2017, 11:09 pm
मुआ ये जाड़ा  (ठंड के हाइकु 10)*******1.  रज़ाई बोली -  जाता क्यों न जाड़ा, अब मैं थकी!  2.  फिर क्यों आया  सबको यूँ कँपाने,  मुआ ये जाड़ा!  3.  नींद से भागे रज़ाई मे दुबके  ठंडे सपने!  4.  सूरज भागा  थर-थर काँपता,  माघ का दिन!  5.  मुँह तो दिखा -  कोहरा ललकारे,  सूरज छु...
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Tag :हाइकु
  January 23, 2017, 11:12 pm
तुम भी न बस कमाल हो...  *******  धत्त!तुम भी न  बस कमाल हो!  न सोचते  न विचारते  सीधे-सीधे कह देते  जो भी मन में आए  चाहे प्रेम  या गुस्सा  और नाराज़ भी तो बिना बात ही होते हो  जबकि जानते हो  मनाना भी तुम्हें ही पड़ेगा  और ये भी कि  हमारी ज़िन्दगी का दायरा  बस तुम तक ...
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  January 16, 2017, 1:21 pm
जीवन को साकार करें...  *******  अति बुरी होती है  साँसों की हो  या संयम की  विचलन की हो  या विभोर की  प्रेम की हो  या परित्याग की  जीवन सहज है  जीवन प्रवाह है  जीवन निरंतर है  जीवन मंगल है  अतियों का त्याग कर  सीमित को अपना कर  जीवन के लय में बह कर  जीवन का सत...
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  January 1, 2017, 11:49 pm
जग में क्या रहता है  (9 माहिया)*******  1.  जीवन ये कहता है  काहे का झगड़ा  जग में क्या रहता है!  2.  तुम कहते हो ऐसे  प्रेम नहीं मुझको  फिर साथ रही कैसे!  3.  मेरा मौन न समझे  कैसे बतलाऊँ  मैं टूट रही कबसे!  4.  तुम सब कुछ जीवन में  मिल न सकूँ फिर भी  रहते मेरे मन में!...
लम्हों का सफ़र...
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  December 10, 2016, 8:16 pm
मानव नाग...   *******   सुनो   अगर सुन सको तो   ओ मानव केंचुल में छुपे नाग   डँसने की आज़ादी तो मिल गई तुम्हें   पर जीत ही जाओगे   यह भ्रम क्यों   केंचुल की ओट में छुपकर   नाग जाति का अपमान   करते हो क्यों   नाग बेवजह नहीं डँसता   पर तुम?  ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :
  November 27, 2016, 11:27 pm
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