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लम्हों का सफ़र

कड़ी   *******अतीत की एक कड़ी   मैं खुद हूँ   मन के कोने में, सबकी नज़रों से छुपाकर   अपने पिता को जीवित रखा है   जब-जब हारती हूँ   जब-जब अपमानित होती हूँ   अँधेरे में सुबकते हुए, पापा से जा लिपटती हूँ   खूब रोती हूँ, खूब गुस्सा करती हूँ   जानती हूँ पापा कही...
लम्हों का सफ़र...
Tag :यादें
  June 17, 2019, 12:12 am
यूँ ही आना यूँ ही जाना   *******   अपनी पीर छुपाकर जीना   मीठे कह के आँसू पीना   ये दस्तूर निभाऊँ कैसे   जिस्म है घायल छलनी सीना।   रिश्ते नाते निभ नहीं पाते   करें शिकायत किस की किस से   गली चौबारे खुद में सिमटे   दरख़्त हुए सब टुकड़े-टुकड़े।   मृ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :व्यथा
  June 13, 2019, 12:02 am
नहीं आता   *******   ग़ज़ल नहीं कहती   यूँ कि मुझे कहना नहीं आता   चाहती तो हूँ मगर   मन का भेद खोलना नहीं आता।   बसर तो करनी है पर   शहर की आवो हवा बेगानी लगती   रूकती हूँ समझती हूँ   पर दम भर कर रोना नहीं आता।   सफर में अब जो भी मिले   मुमकिन है मं...
लम्हों का सफ़र...
Tag :व्यथा
  June 7, 2019, 9:08 pm
नज़रबंद   *******   ज़िन्दगी मुझसे भागती रही   मैं दौड़ती रही, पीछा करती रही   एक दिन आख़िर वो पकड़ में आई   खुद ही जैसे मेरे घर में आई   भागने का सबब पूछा मैंने   झूठ बोल बहला दिया मुझे,   मैं अपनी खामी ढूँढती रही   आख़िर ऐसी क्या कमी थी   जो जिन्दगी मुझ...
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Tag :व्यथा
  June 1, 2019, 10:42 pm
अधिकार और कर्त्तव्य   *******   अधिकार है तुम्हें   कर सकते हो तुम   हर वह काम जो जायज नहीं है   पर हमें इजाजत नहीं कि   हम प्रतिरोध करें,   कर्तव्य है हमारा   सिर्फ वह बोलना   जिससे तुम खुश रहो   भले हमारी आत्मा मर जाए,   इस अधिकार और कर्तव्य को&nbs...
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Tag :
  May 1, 2019, 10:09 pm
प्रकृति (20 हाइकु)   *******   1.   प्यार मिलता   तभी खिलखिलाता   प्रकृति-शिशु।   2.   अद्भुत लीला   प्रकृति प्राण देती   संस्कृति जीती।   3.   प्रकृति हँसी   सुहावना मौसम   खिलखिलाया।   4.   धोखा पाकर   प्रकृति यूँ ठिठकी   मानो लड...
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Tag :हाइकु
  March 31, 2019, 11:03 pm
जीवन मेरा (चोका)   *******   मेरे हिस्से में   ये कैसा सफ़र है   रात और दिन   चलना जीवन है,   थक जो गए   कहीं ठौर न मिला   चलते रहे   बस चलते रहे,   कहीं न छाँव   कहीं मिला न ठाँव   बढते रहे   झुलसे मेरे पाँव,   चुभा जो काँटा   पीर सह न पाए  &...
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Tag :चोका
  March 28, 2019, 10:18 pm
परम्परा   *******     मैं उदासी नहीं चाहती थी   मैं तो खिलखिलाना चाहती थी   आजाद पंक्षियों-सा उड़ना चाहती थी   हर रोज नई धुन गुनगुनाना चाहती थी   और यह सब अनकहा भी न था   हर अरमान चादर-सा बिछा दिया था तुम्हारे सामने   तुमने सहमति भी जताई थी कि तुम साथ ...
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Tag :स्त्री
  March 24, 2019, 5:16 pm
रंगों की होली (10 हाइकु)   *******   1.   रंगो की होली   गाँठ मन की खोली   प्रीत बरसी।   2.   पावन होली   मन है सतरंगी   सूरत भोली।   3.   रंगों की झोली   आसमान ने फेंकी   धरती रँगी।   4.   हवा में घुले   रंग भरे जज़्बात   होली के साथ।  &nb...
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Tag :होली
  March 21, 2019, 11:01 pm
स्वीकार   *******   मैं अपने आप से मिलना नहीं चाहती   जानती हूँ खुद से मिलूँगी तो   जी नहीं पाऊँगी   जीवित रहने के लिए   मैंने उन सभी अनुबंधों को स्वीकार किया है   जिसे मेरा मन नहीं स्वीकारता है   विकल्प दो ही थे मेरे पास -   जीवित रहूँ या   खुद से म...
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Tag :
  March 19, 2019, 11:08 pm
पानी और स्त्री  *******   बचपन में पढ़ा -   पानी होता है रंगहीन गंधहीन   जिसे जहाँ रखा उस साँचे में ढला    खूब गर्म किया भाप बन उड़ गया   खूब ठंडा किया बर्फ बन जम गया   पानी के साथ उगता है जीवन   पनपती हैं सभ्यताएँ   पानी गर हुआ लुप्त   संसार भ...
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Tag :प्रकृति
  March 8, 2019, 5:19 pm
आँख (आँख पर 20 हाइकु)   *******   1.   पट खोलती   दुनिया निहारती   आँखें झरोखा।   2.   आँखों की भाषा   गर समझ सको   मन को जानो।   3.   गहरी झील   आँखों में है बसती   उतरो जरा।   4.   आँखों का नाता   जोड़ता है गहरा   मन से नाता।   5.   आ...
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Tag :हाइकु
  February 19, 2019, 11:53 pm
बसन्त   *******   मेरा जीवन मेरा बंधु   फिर भी निभ नहीं पाता बंधुत्व   किसकी चाकरी करता नित दिन   छुट गया मेरा निजत्व   आस उल्लास दोनों बिछुड़े   हाय ! जीवन का ये कैसा बसंत ! - जेन्नी शबनम (12. 2. 2019)______________________________ ...
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Tag :बसन्त ऋतु
  February 12, 2019, 10:10 pm
काला जादू...   *******   जब भी, दिल खोल कर हँसती हूँ   जब भी, दिल खोल कर जीती हूँ   जब भी, मोहब्बत के आगोश में साँसें भरती हूँ   जब भी, संसार की सुन्दरता को, दामन में समेटती हूँ   न जाने कब, मैं खुद को नजर लगा देती हूँ   मुझे मेरी ही नजर लग जाती है   हँसना, जीना, अच...
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Tag :ज़िन्दगी
  February 2, 2019, 2:21 pm
वक़्त (चोका)   *******   वक्त की गति   करती निर्धारित   मन की दशा   हो मन प्रफुल्लित   वक़्त भागता   सूर्य की किरणों-सा   मनमौजी-सा   पकड़ में न आता   मन में पीर   अगर बस जाए   बीतता नहीं   वक़्त थम-सा जाता   जैसे जमा हो   हिमालय पे हिम  &n...
लम्हों का सफ़र...
Tag :चोका
  January 28, 2019, 10:54 pm
प्रजातंत्र...   *******   मुझपर इल्जाम है उनकी ही तरह   जो कहते हैं कि   देश के माहौल से डर लगता है   हाँ ! मैं मानती हूँ मुझे भी अब डर लगता है   सिर्फ अपने लिए नहीं   अपनों के लिए डर लगता है।   उन्हें मेरे कहे पर आपत्ति है   उनके कहे पर आपत्ति है   वे कह...
लम्हों का सफ़र...
Tag :चिंता
  January 26, 2019, 11:19 pm
फ़रिश्ता      *******   सुनती हूँ कि कोई फ़रिश्ता है   जो सब का हाल जानता है   पर मेरा?   ना-ना मेरा नहीं है वह   मुझे नहीं जानता वह   पर तुम?   तुम मुझे जानते हो   जीने का हौसला देते हो   जाने किस जन्म में तुम मेरे कौन थे   जो अब मेरे फ़रिश्ता हो!   - ज...
लम्हों का सफ़र...
Tag :प्रेम
  January 20, 2019, 12:15 am
अंतर्मन (15 क्षणिकाएँ)   *******   1.   मेरे अंतर्मन में पड़ी हैं   ढेरों अनकही कविताएँ   तुम मिलो कभी   तो फुर्सत में सुनाऊँ तुम्हें।   2.   हजारों सवाल हैं मेरे अंतर्मन में   जिनके जवाब तुम्हारे पास है   तुम आओ गर कभी   फुर्सत में जवाब बताना।   ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :प्रेम
  January 9, 2019, 11:35 pm
हे नव वर्ष (नव वर्ष पर 5 हाइकु)   *******   1.   हे नव वर्ष   आखिर आ ही गए,   पर जल्दी क्यों?   2.   उम्मीद जगी -   अच्छे दिन आएँगे   नव वर्ष में।   3.   मन से करो   इस्तकबाल करो   नव वर्ष का।   4.   पिछला साल   भूलना नहीं कभी,   मिली जो सीख।  &nb...
लम्हों का सफ़र...
Tag :हाइकु
  January 8, 2019, 10:44 pm
वृद्ध जीवन *******   1.   उम्र की साँझ   बेहद डरावनी   टूटती आस।   2.   अटकी साँस   बुढापे की थकान   मन बेहाल।   3.   वृद्ध की कथा   कोई न सुने व्यथा   घर है भरा।   4.   दवा की भीड़   वृद्ध मन अकेला   टूटता नीड़।   5.   अकेलापन   सब...
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Tag :हाइकु
  December 30, 2018, 12:19 am
बातें      *******रात के अँधेरे में   मैं ढेरों बातें करती हूँ   जानती हूँ मेरे साथ   तुम कहीं नहीं थे   तुम कभी नहीं थे   पर सोचती रहती हूँ   तुम सुन रहे हो   और खुद से बातें करती हूँ।   - जेन्नी शबनम (25. 12. 2018)   ______________________________...
लम्हों का सफ़र...
Tag :प्रेम
  December 25, 2018, 1:40 pm
दुःख (10 हाइकु)   *******1.   दुःख का पारासातवें आसमाँ पे   मन झुलसा !   2.   दुःख का लड्डु   रोज-रोज यूँ खाना   बड़ा ही भारी !   3.   दुःख की नदी   बेखटके दौड़ती   बे रोक-टोक !   4.   साथी है दुःख   साथ है हरदम   छूटे न दम !   5.   दुःख की वेला   ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :हाइकु
  December 19, 2018, 12:31 pm
अर्थ ढूँढ़ता (10 हाइकु)   *******   1.   मन सोचता -   जीवन है क्या ?   अर्थ ढूँढता।   2.   बसंत आया   रिश्तों में रंग भरा   मिठास लाया।   3.   याद-चाशनी   सुख की है मिठाई   मन को भायी।   4.   फिक्र व चिन्ता   बना गए दुश्मन,   रोगी है काया। ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :हाइकु
  December 5, 2018, 7:20 pm
रूठना   *******   जब भी रूठी   खो देने के भय से   खुद ही मान गई   रूठने की आदत तो   बिदाई में ही   खोइँचा से निकाल   नईहर छोड़ आई।   - जेन्नी शबनम (22. 11. 18)   _______________________ ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :
  November 22, 2018, 10:46 pm
लौट जाऊँगी...   *******   कब कहाँ खो आई ख़ुद को   कब से तलाश रही हूँ ख़ुद को   बात-बात पर कभी रूठती थी   अब रूठूँ तो मनाएगा कौन   बार-बार पुकारेगा कौन   माँ की पुकार में दुलार का नाम   अब भी आँखों में ला देता नमी   ठहर गई है मन में कुछ कमी,   अब तो यूँ जैसे ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :
  November 17, 2018, 12:23 am
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