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लम्हों का सफ़र

विनती...   *******   समय की शिला पर   जाने किस घड़ी लिखी   जीवन की इबारत मैंने   ताउम्र मैं व्याकुल रही   और वक़्त भी तड़प गया,   वक़्त को पकड़ने में   मेरी मांसपेशियाँ   कमज़ोर पड़ गई   दूरियाँ बढ़ती गई   और वक़्त लड़खड़ा गया।   अब मैं आँखें मू...
लम्हों का सफ़र...
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  April 18, 2018, 8:51 pm
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ...   *******   वो कहते हैं -   बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।   मेरे भी सपने थे   बेटी को पढ़ाने के   किसी राजकुमार से ब्याहने के   पर मेरे सपनों का कत्ल हुआ   मेरी दुनिया का अंत हुआ,   पढ़ने ही तो गई थी मेरी लाड़ली   खून से लथपथ सड़क पर पड़ी   ज...
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  April 12, 2018, 5:31 pm
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ...   *******   वो कहते हैं -   बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।   मेरे भी सपने थे   बेटी को पढ़ाने के   किसी राजकुमार से ब्याहने के   पर मेरे सपनों का कत्ल हुआ   मेरी दुनिया का अंत हुआ,   पढ़ने ही तो गई थी मेरी लाड़ली   खून से लथपथ सड़क पर पड़ी   ज...
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  April 12, 2018, 5:31 pm
कैक्टस...  *******  एक कैक्टस मुझमें भी पनप गया है  जिसके काँटे चुभते हैं मुझको  और लहू टपकता है  चाहती हूँ  हँसू खिलखिलाऊँ  बिन्दास उड़ती फिरूँ  पर जब भी उठती हूँ  चलती हूँ  उड़ने की चेष्टा करती हूँ  मेरे पाँव और मेरा मन  लहूलूहान हो जाता ...
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  March 31, 2018, 7:47 pm
जिद्दी मन...  *******  ये ज़िद्दी मन ज़िद करता है  जो नहीं मिलता वही चाहता है,  तारों से भी दूर  मंज़िल ढूँढता है  यायावर-सा भटकता है,  जीस्त में शामिल  जंग ही जंग  पर सुकून की बाट जोहता है,  ये मेरा ज़िद्दी मन  अल्फाज़ों का बंदी मन  ख़ामोश...
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  March 18, 2018, 10:29 pm
पायदान...  *******  सीढ़ी की पहली पायदान हूँ मैं  जिसपर चढ़कर  समय ने छलाँग मारी  और चढ़ गया आसमान पर  मैं ठिठक कर तब से खड़ी  काल चक्र को बदलते देख रही हूँ,  कोई जिरह करना नहीं चाहती  न कोई बात कहना चाहती हूँ  न हक़ की न ईमान की  न तब की न अब की।  ...
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Tag :स्त्री
  March 8, 2018, 1:39 am
मरघट  *******  रिश्तों के मरघट में चिता है नातों की  जीवन के संग्राम में दौड़ है साँसों की  कब कौन बढ़े कब कौन थमे  कोलाहल बढ़ती फ़सादों की,  ऐ उम्र! अब चली भी जाओ  बदल न पाओगी दास्ताँ जीवन की।  - जेन्नी शबनम (30. 1. 2018)  ____________________________...
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  January 30, 2018, 6:02 pm
अँधेरा...  *******  उम्र की माचिस में  ख़ुशियों की तीलियाँ  एक रोज़ सारी जल गई  डिबिया ख़ाली हो गई  आधे पायदान पर खड़ी होकर  हर रोज़ ख़ाली डिब्बी में  मैं तीलियाँ ढूँढती रही  दीये और भी जलाने होंगे  जाने क्यों सोचती रही  भ्रम में जीने की आद...
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  January 18, 2018, 11:44 pm
धरातल...  *******  ग़ैरों की दास्ताँ क्यों सुनूँ?  अपनी राह क्यों न बनाऊँ?  जो पसंद बस वही क्यों न करूँ?  दूसरों के कहे से जीवन क्यों जीऊँ?  मुमकिन है ऐसे कई सवाल कौंधते हों तुममें  मुमकिन है इनके जवाब भी हों तुम्हारे पास  जो तुम्हारी नज़रों में सटीक ...
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  January 7, 2018, 9:00 pm
हाइकु काव्य  (हाइकु पर 10 हाइकु) *******  1.  मन के भाव  छटा जो बिखेरते  हाइकु होते।  2.  चंद अक्षर  सम्पूर्ण गाथा गहे  हाइकु प्यारे।  3.  वृहत् सौन्दर्य  मन में घुमड़ता,  हाइकु जन्मा।  4.  हाइकु ज्ञान -  लघुता में जीवन,  सम्पूर...
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Tag :हाइकु-काव्य
  December 28, 2017, 12:20 am
यकीन...*******  हाँ मुझे यक़ीन है  एक दिन बंद दरवाज़ों से निकलेगी ज़िन्दगी  सुबह की किरणों का आवाभगत करेगी  रात की चाँदनी में नहाएगी  कोई धुन गुनगुनाएगी  सारे अल्फाजों को घर में बंद करके  सपनों की अनुभूतियों से लिपटी  मुस्कुराती हुई ज़िन्दगी  ...
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  November 16, 2017, 7:16 pm
फ्लाईओवर...  *******  एक उम्र नहीं  एक रिश्ता नहीं  कई किश्तों में  कई हिस्सों में  बीत जाता है जीवन  किसी फ़्लाइओवर के नीचे  प्लास्टिक के कनात के अंदर  एक सम्पूर्ण एहसास के साथ। गुलाब का गुच्छासस्ती किताबसस्ते खिलौने  जिनपर उनका हक होना थ...
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  November 14, 2017, 5:44 pm
दीयों की पाँत (दिवाली के 10 हाइकु)  *******  1.  तम हरता  उजियारा फैलाता  मन का दीया!  2.  जागृत हुई  रोशनी में नहाई  दिवाली-रात!  3.  साँसें बेचैन,  पटाखों को भगाओ  दीप जलाओ!  4.  पशु व पक्षी  थर-थर काँपते,  पटाखे यम!  5.  फिर स...
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Tag :हाइकु
  October 24, 2017, 9:22 pm
महाशाप...  *******  किसी ऋषि ने  जाने किस युग में  किस रोष में  दे दिया होगा  महाशाप  नियमित, अनवरत, बेशर्त  जलते रहने को  दूसरों को उजाला देने को,  बेचारा सूरज  अवश्य होत होगा निढाल  थक कर बैठने का  करता होगा प्रया...
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  October 7, 2017, 1:50 pm
कैसी ज़िन्दगी?  (10 ताँका)  *******  1.  हाल बेहाल  मन में है मलाल  कैसी ज़िन्दगी?  जहाँ धूप न छाँव  न तो अपना गाँव!  2.  ज़िन्दगी होती  हरसिंगार फूल,  रात खिलती  सुबह झर जाती,  ज़िन्दगी फूल होती!  3.  बोझिल मन  भीड़ भरा जंगल  ज़िन्दगी गुम,  है छटपटाहट  सर्वत्र ...
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  September 17, 2017, 7:21 pm
हिसाब-किताब के रिश्ते  *******  दिल की बातों में ये हिसाब-किताब के रिश्ते  परखते रहे कसौटी पर बेकाम के रिश्ते! वक़्त के छलावे में जो ज़िन्दगी ने चाह की  कतरा-कतरा बिखर गए मखमल-से ये रिश्ते!  दर्द की दीवारों पे हसीन लम्हे टँके थे  गुलाब संग काँटों के ये बेमेल-से रिश्ते!  ...
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  September 8, 2017, 11:33 pm
सूरज की पार्टी (11 बाल हाइकु)  *******  आम है आयासूरज की पार्टी मेंजश्न मनाया! 2.फलों का राजाशान से मुस्कुरातारंग बिरंगा! 3.चुभती गर्मीतरबूज़ का रसहरता गर्मी! 4.खीरा-ककड़ीलत्तर पे लटकेगर्मी के दोस्त! 5.आम व लीचीकौन हैं ज़्यादा मीठेकरते रार! 6.मुस्कुराता हैकँटीला अन...
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Tag :हाइकु
  September 1, 2017, 5:22 pm
बादल राजा (बरसात पर 10 हाइकु)  *******  1.  ओ मेघ राजा  अब तो बरस जा  भगा दे गर्मी!  2.  बदली रानी  झूम-झूम बरसी  नाचती गाती!  3.  हे वर्षा रानी  क्यों करे मनमानी  बरसा पानी!  4.  नहीं बरसा  दहाड़ता गरजा,  बादल शेर!  5.  काला बदरा  मारा-मारा फिरता  ठौर न पाता!  ...
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Tag :हाइकु
  August 27, 2017, 11:35 pm
कैसी आज़ादी पाई  (स्वतंत्रता दिवस पर 4 हाइकु)  *******  1.  मन है क़ैदी,  कैसी आज़ादी पाई?  नहीं है भायी!  2.  मन ग़ुलाम  सर्वत्र कोहराम,  देश आज़ाद!  3.  मरता बच्चा  मज़दूर किसान,  कैसी आज़ादी?  4.  हूक उठती,  अपने ही देश में  हम ग़ुलाम!  - जेन्नी शबनम (15. 8. 2017)  _______...
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Tag :हाइकु
  August 15, 2017, 5:24 pm
सँवार लूँ...  *******  मन चाहता है  एक बोरी सपनों के बीज  मन के मरुस्थल में छिड़क दूँ  मनचाहे सपने उगा  ज़िन्दगी सँवार लूँ।  - जेन्नी शबनम (9. 8. 2017) ________________________...
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  August 9, 2017, 4:45 pm
रिश्तों की डोर  (राखी पर 10 हाइकु)  *******  1.  हो गए दूर  संबंध अनमोल  बिके जो मोल!  2.  रक्षा का वादा  याद दिलाए राखी  बहन-भाई!  3.  नाता पक्का-सा  भाई की कलाई में  सूत कच्चा-सा!  4.  पवित्र धागा  सिखाता है मर्यादा  जोड़ता नाता!  5.  अपनापन  अब भी है दिखता  र...
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Tag :हाइकु
  August 7, 2017, 8:00 pm
मुल्कों की यही रीत है...  *******  कैसा अजब सियासी खेल है, होती मात न जीत है  नफ़रत का कारोबार करना, हर मुल्कों की रीत है!  मज़हब व भूख़ पर, टिका हुआ सारा दारोमदार है  गैरों की चीख-कराह से, रचता ज़ेहादी गीत है!  ज़ेहन में हिंसा भरा, मानव बना फौलादी मशीन  दहशत की ये धुन बजाते,...
लम्हों का सफ़र...
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  July 17, 2017, 11:15 pm
मुल्कों की रीत है...  ******* कैसा अजब सियासी खेल है, होती मात न जीत है नफ़रत का कारोबार करना, हर मुल्कों की रीत है! मज़हब व भूख़ पर, टिका हुआ सारा दारोमदार है गैरों की चीख-कराह से, रचता ज़ेहादी गीत है!  ज़ेहन में हिंसा भरा, मानव बना फौलादी मशीन  दहशत की ये धुन बजाते, दानव का यह सं...
लम्हों का सफ़र...
Tag :
  July 17, 2017, 11:15 pm
उदासी...  *******  ज़बरन प्रेम ज़बरन रिश्ते  ज़बरन साँसों की आवाजाही  काश! कोई ज़बरन उदासी भी छीन ले!  - जेन्नी शबनम (7. 7. 2017)  _______________________________...
लम्हों का सफ़र...
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  July 7, 2017, 7:36 pm
ज़िद...  *******  एक मासूम सी ज़िद है -  सूरज तुम छुप जाओ  चाँद तुम जागते रहना  मेरे सपनों को आज  ज़मीं पर है उतरना!  - जेन्नी शबनम (1. 7. 2017)_________________________ ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :प्रेम
  July 1, 2017, 11:11 pm
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