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डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा के पास) गुजरात

ग़ज़लहर रोज़ न सरहद पे बेमौत मराओ अब.फिटनिश ही दिखानी है सरहद पे दिखाओ अब.कश्मीर गया कब का जम्मू भी है जाने को,आँखों पे पड़ा पर्दा बेहतर है हटाओ अब.इस योग से दुश्मन तो समझेगा भला कैसे,तुम पार्थ अगर हो तो गाँडीव उठाओ अब.रूहों को शहीदों की तकलीफ़ पहुँचती है,मुँहतोड़़ जबाबो...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 14, 2018, 6:48 pm
ग़ज़लयाद आया तो बहुत देर रुलाया उसने.कितनी आसानी से हमको है भुलाया उसने.इससे ज़्यादा कोई  क्या हमसे मुहब्बत करता,मैं जो भूखा रहा इक कौर ना खाया उसने.हाथ से उसके जो छटका था हुए टुकडे़ कई,कांच का वर्तन था भूले से गिराया उसने.आँसू बनकर के जो छलका मैं कभी आँखों से,अपनी सखिय...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 2, 2018, 11:26 am
ग़ज़लचिंता हगने के करते हैं वो हर घड़ी,पहले खाने का उपचार कुछ तो करें.भूख से मर रहे हैं यहां आज हम, हो सके सच का इक़रार कुछ तो करें.आसमां में उड़े हम को कुछ ग़म नहीं, बात कुछ तो जमी की ज़रूरी है अब,हम निराधार है आज भी देख लो, हो सके तो वो आधार कुछ तो करें. गीत महलों के गा...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  May 30, 2018, 1:16 pm
ग़ज़लमेरे लफ़्ज़ों में जान दे मौला.सबको ऊँची उड़ान दे मौला.अस्लिहे हाथ जो लिए फिरते,हाथ उनके क़ुरान दे मौला.भाईचारा ख़ुलूस बख़्श हमें,नेकियों का जहान दे मौला.घुप अँधेरों का क़हर ज़ारी है,ऱौशनी का निशान दे मौला.क़ाफ़िला राह बहुत भटके है,कोई फिर से इमाम दे मौला.रमज़ान क...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  May 17, 2018, 8:42 pm
ग़ज़लतन्हा तो बहुत पहले भी थे पर इस बार की तन्हाई तौबा.डूबेंगे यकीन लगता है तेरे प्यार  की गहराई तौबा.मैंने भी सुना है लोगों से हाथों में रची तेरे मेंहदी,अब जान ही लेकर जायेगी, गलियों की ये शहनाई तौबा.पूछो न क़यामत होती है उस दौर का मंजर क्या कहिए,हाथों को उठाकर लेते हैं...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  May 16, 2018, 3:36 pm
ग़ज़लअच्छे दिनों ने कैसे कैसे गुल खिलाये हैं.गुजरात में गुरू जी तगाड़े उठाये हैं.एक काम यही बाकी था किस्मत में हमारी,हगते हुए लोगों के भी फोटू खिचाये हैं.तुमको हलाल करने में आता तो लुत्फ़ है,पंछी हैं हम थोड़े थोड़े फड़फड़ाये हैं.खेतों में नहीं गंदगी सचिवालयों में है,म...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  May 7, 2018, 5:06 am
ग़ज़लगमों को हम तो खुशियों में ढाल देते हैं.सख़्त पत्थर से भी पानी निकाल देते हैं.जड़ों को काट वतन की बनायें वो बंजर,उगा दरख़्त हम सहरा का हाल देते हैं.बने जो काम, वो सारे बिगाड़ कर रख दें,लगा के हाथ हम अपने संभाल देते हैं.वो अलग होंगे वचन देके जो मुकरते हैं,ज़ुबां से कहते ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  May 4, 2018, 10:08 am
ग़ज़लसारी ग़लती ये सब हमारी है.पाँव पर जो कुल्हाड़ी मारी है.हाथ से तो किला गया लोगो,ताज़ जाने की अबके बारी है.द्रौपदी देश हो गया अब तो,हार बैठा उसे जुआरी है..उसकी उँगली पे नाचे है सिस्टम,कितना उस्ताद ये मदारी है. वो हवा में दबोच ले सबको,कितना शातिर ये अब शिकारी है.जो भी आये ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  May 1, 2018, 3:01 pm
ग़ज़लदूर ही दूर से लुभाते हैं.खूब अच्छा हमें बनाते हैं.मेरी स्क्रीन महक उठती है,ओन लाइन वो जब भी आते हैं.ख़ैर अपनी मनायें नींदों की,नींद मेरी जो अब चुराते हैं.जिनको दिल की दवा समझते थे,दिल वही अब मेरा दुखाते हैं.और भड़केगी आग अब दिल से,जितना ख़ामोश रह दबाते हैं.तू ग़ज़ल ब...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  April 29, 2018, 5:29 pm
ग़ज़लअब तुझे याद भी नहीं करते.वक्त बर्बाद भी नहीं करते.देख मुंसिफ़ की अब तरफदारी,हम तो फ़रियाद भी नहीं करते.मेरी गर्दन पे तो रखे हैं छुरी,ज़ल्द आज़ाद भी नहीं करते.क़त्ल का देखे हैं तमाशा सब,कोई इमदाद ही नहीं करते.लोग लोगों को भून खाते हैं,दिल को नाशाद ही नहीं करते.डॉ. सुभ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  April 24, 2018, 12:13 pm
ग़ज़लकलियों को कुचलता पाँवों से, पत्थर की इबादत करता है.शैतां भी करे ना भूले से, ऐसी वो हिमाक़त करता है.औलाद ही वाले समझेंगे, औलाद का ग़म क्या होता है,ख़ामोश वो रहकर के हरदम, क़ातिल की हिमायत करता है.अब मुल्क में नाचेंगे खंजर, अब मुल्क में बरसेंगे शोले,वो कौन हमारी लाशों प...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  April 18, 2018, 1:34 pm
ग़ज़लजब से आयें हैं, वो ज़िन्दगी में.दिल ये लगता नहीं अब किसी में.मौत पानी की लिक्खी थी मेरी,मैं तो डूबा हूँ गहरी नदी में.दिल मचलता है यूँ ही नहीं ये,बात कुछ तो है उस अजनबी में.हमसे प्यासों से कोई ये पूछे,उम्र कैसे कटी तश्नगी में.अय अँधरो तुम्हीं हाथ थामो,मुझको धोखा हुआ रोश...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  April 9, 2018, 2:51 pm
ग़ज़लरात दिन अब तेरे, मैं ख़यालों में हूँ.मैं जवाबों में हूँ, मैं सवालों में हूँ.मुझको महसूस कर अय मेरे हमनशीं,उँगलियाँ बन के फिरता मैं बालों में हूँ.ज़िक्र महफिल में मेरा चले जो कभी,सुर्खि़यां बन के तेरे मैं गालों में हूँ.चाँद को चूमने की करे आरज़ूमैं समन्दर की ऊँची उछ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  April 1, 2018, 4:35 pm
ग़ज़लआँख सूरज लगा है दिखाने.छाँव की फिर लगी याद आने.हम तलबगार तेरे अभी भी,तू चली आ किसी भी बहाने.जुस्तजू एक तेरी ही थी बस,हमने चाहे कहाँ थे ख़जाने .जी रहे किस तरह ये समझ लो,सांस के चल रहे कारखाने.प्यास क्या चीज है पूछिये मत,प्यास को सिर्फ प्यासा ही जाने.हम को रोने की आदत पड़...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 31, 2018, 11:49 am
ग़ज़लबेवफ़ाई के किस्से सुनाऊँ किसे.बात दिल की है अपनी बताऊँ किसे.कौन दुनियां में अपना तलबगार है,फोन किसको करूँ मैं बुलाऊँ किसे.ग़म जो दो चार हों तो गिनाऊँ तुम्हें,सैकड़ों ग़म है अपने गिनाऊँ किसे.रूठने और मनाने के मौसम गये,किससे रूठूं मैं अब, मैं मनाऊँ किसे.शाख पर मेरी फ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 30, 2018, 12:09 pm
ग़ज़लजिनमें जान होती है वो ही डूब जाते हैं.मुर्दे बैठे साहिल पे , बात ही बनाते हैं.घंटों छांव में जिनकी ,रोज़ बात करते थे,आज भी तुम्हें जानम पेड़ वो बुलाते हैं.पास आ के ये जाना, वो महज़ छलावा है,ढोल दूर के अक्सर, दूर से सुहाते हैं.घर में रोशनी करना काम था जो दीपों का,वो ही दीप ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 20, 2018, 5:21 pm
ग़ज़ल अपनी नज़रों से यूं ना गिरा दीजिये.दूसरी जी में आये सज़ा दीजिये.छोड़िये, छोड़िये, सारे शिकवे-गिले,हो सके तो ज़रा मुस्करा दीजिये.पास हैं आज तो आप उखड़े हुए,दूर जायें तो फिर ना सदा दीजिए.  थम ना जायें कहीं आशिकी में कदम,थोड़ा थोड़ा सही हौसला दीजिये.       &n...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 20, 2018, 9:21 am
ग़ज़लवो सुनामी की तरह आये है.दिल की कश्ती ये डगमगाये है.                                  मर्हम-ए-दिल जिसे समझते थे,वो ही दिल पे छुरी चलाये है.पहले देता है दावतें दिल को,बाद में फिर वो मुकर जाये है,.मैं उजालों में उसको मांगे हूँ,वो अ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 19, 2018, 7:04 pm
ग़ज़लमामला इस तरह ना सुलझेगा.मुझको उलझाके वो भी उलझेगा.नाज़ हमने उठाये हैं तेरे,हम न होंगे तो कौन पूछेगा.मेरे ऐबों को देखने वाला,आइना वो कभी न देखेगा.शीश-ए- दिल की अब तो ख़ैर नहीं,उसके हाथों से गिर के टूटेगा.आदमी मैं कोई बुरा तो नहीं,वो अकेले में ये भी सोचेगा.अब मुसाफ़िर प...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 15, 2018, 4:30 pm
ग़ज़लचार दिन की खुशियों ने उम्र भर रूलाया है.इक हसीन चेहरे ने बहुत दिल दुखाया है.रात कैसे कटती है दिन का हाल मत पूछो. बेवफ़ा से हमने ये जब से दिल लगाया है.दिल की बात होटों पे लाख हम ना आने दें,उतनी ही बयां होती जितना ही छुपाया है.उनकी सुर्ख आँखों का राज़ हमसे मत पूछो,हाथ क...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 14, 2018, 6:11 pm
ग़ज़लये उदासी मेरे दिल की नहीं जाने वाली.हाथ अब ज़िंदगी वापस नहीं आने वाली.कैसे जीते हो अकेले भला तन्हाई में,बात मत पूछो कोई मुझसे रुलाने वाली.लाश अपनी को मैं काँधे पे लिये फिरता हूँ,आग ढूँढ़े हूँ कोई उसको जलाने वाली.तल्ख़ियां ही मेरे हिस्से में मुझे दीं उसनेबात में कै...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  February 11, 2018, 10:31 pm
ग़ज़लअब पकोड़ों को बनाओ लोगो.खुद भी खाओ व खिलाओ लोगो.हाथ धर सर पे यूँ रोते क्यों हो,और सर हमको बिठाओ लोगो.सीख लो चाय बनाने का हुनर,बाद में सबको  बनाओ लोगो.आम चाहे हो बबूलों से तुम ,    होश अब यूँ ना गंवाओ लोगो.तुम अगर रोशनी के हामी हो,मिल अँधेरों को भगाओ लोगो.भेड़िये दू...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  February 3, 2018, 5:18 am
ग़ज़लऔर क्या आग लगाओगे बताओ तो सही.फिर मुझे छोड़ के जाओगे बताओ तो सही. आँसू बनकर जो उमड़ा मैं कभी आँखों में,हँस के पलकों पे छिपाओगे बताओ तो सही.हमसे बिछुड़े तो हमसा ना दुबारा पाया,दास्तां अपनी सुनाओगे बताओ तो सही.तुम सा प्यारा नहीं दुनियां में हमारा कोई,झूट सर की कसम खाओ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  February 1, 2018, 8:15 pm
ग़ज़लअश्कों को इन आँखों से बर्बाद किया जाये.उस बेवफ़ा को फिर से अब याद किया जाये.टूटे जो मकां कोई आबाद करें उसको,टूटा हुआ ये दिल ना आबाद किया जाये.सूरत ही नहीं मिलती अब तेरी किसी से भी,फिर  कैसे कहो दूजा इर्शाद किया जाये.हम लाख करें कोशिश उस शै को भुलाने की,पर मोम सा ये दि...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 29, 2018, 6:32 pm
ग़ज़लदिल का ये ज़ख़्म है गहरा नहीं भरने वाला. तेरा शैदाई ये ज़ल्दी नहीं मरने  वाला.मैं जहां भी गया यादें भी तेरी साथ रहीं,ये नशा अब न मुहब्बत का उतरने वाला.पास आये तो वो मौजों की रवानी समझे, दूर ही दूर समन्दर से गुज़रने वाला .तू परेशान बहुत है तू परेशान न हो,वो संग दिल ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 28, 2018, 7:00 pm
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