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डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा के पास) गुजरात

ग़ज़लअब तुझे याद भी नहीं करते.वक्त बर्बाद भी नहीं करते.देख मुंसिफ़ की अब तरफदारी,हम तो फ़रियाद भी नहीं करते.मेरी गर्दन पे तो रखे हैं छुरी,ज़ल्द आज़ाद भी नहीं करते.क़त्ल का देखे हैं तमाशा सब,कोई इमदाद ही नहीं करते.लोग लोगों को भून खाते हैं,दिल को नाशाद ही नहीं करते.डॉ. सुभ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  April 24, 2018, 12:13 pm
ग़ज़लकलियों को कुचलता पाँवों से, पत्थर की इबादत करता है.शैतां भी करे ना भूले से, ऐसी वो हिमाक़त करता है.औलाद ही वाले समझेंगे, औलाद का ग़म क्या होता है,ख़ामोश वो रहकर के हरदम, क़ातिल की हिमायत करता है.अब मुल्क में नाचेंगे खंजर, अब मुल्क में बरसेंगे शोले,वो कौन हमारी लाशों प...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  April 18, 2018, 1:34 pm
ग़ज़लजब से आयें हैं, वो ज़िन्दगी में.दिल ये लगता नहीं अब किसी में.मौत पानी की लिक्खी थी मेरी,मैं तो डूबा हूँ गहरी नदी में.दिल मचलता है यूँ ही नहीं ये,बात कुछ तो है उस अजनबी में.हमसे प्यासों से कोई ये पूछे,उम्र कैसे कटी तश्नगी में.अय अँधरो तुम्हीं हाथ थामो,मुझको धोखा हुआ रोश...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  April 9, 2018, 2:51 pm
ग़ज़लरात दिन अब तेरे, मैं ख़यालों में हूँ.मैं जवाबों में हूँ, मैं सवालों में हूँ.मुझको महसूस कर अय मेरे हमनशीं,उँगलियाँ बन के फिरता मैं बालों में हूँ.ज़िक्र महफिल में मेरा चले जो कभी,सुर्खि़यां बन के तेरे मैं गालों में हूँ.चाँद को चूमने की करे आरज़ूमैं समन्दर की ऊँची उछ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  April 1, 2018, 4:35 pm
ग़ज़लआँख सूरज लगा है दिखाने.छाँव की फिर लगी याद आने.हम तलबगार तेरे अभी भी,तू चली आ किसी भी बहाने.जुस्तजू एक तेरी ही थी बस,हमने चाहे कहाँ थे ख़जाने .जी रहे किस तरह ये समझ लो,सांस के चल रहे कारखाने.प्यास क्या चीज है पूछिये मत,प्यास को सिर्फ प्यासा ही जाने.हम को रोने की आदत पड़...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 31, 2018, 11:49 am
ग़ज़लबेवफ़ाई के किस्से सुनाऊँ किसे.बात दिल की है अपनी बताऊँ किसे.कौन दुनियां में अपना तलबगार है,फोन किसको करूँ मैं बुलाऊँ किसे.ग़म जो दो चार हों तो गिनाऊँ तुम्हें,सैकड़ों ग़म है अपने गिनाऊँ किसे.रूठने और मनाने के मौसम गये,किससे रूठूं मैं अब, मैं मनाऊँ किसे.शाख पर मेरी फ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 30, 2018, 12:09 pm
ग़ज़लजिनमें जान होती है वो ही डूब जाते हैं.मुर्दे बैठे साहिल पे , बात ही बनाते हैं.घंटों छांव में जिनकी ,रोज़ बात करते थे,आज भी तुम्हें जानम पेड़ वो बुलाते हैं.पास आ के ये जाना, वो महज़ छलावा है,ढोल दूर के अक्सर, दूर से सुहाते हैं.घर में रोशनी करना काम था जो दीपों का,वो ही दीप ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 20, 2018, 5:21 pm
ग़ज़ल अपनी नज़रों से यूं ना गिरा दीजिये.दूसरी जी में आये सज़ा दीजिये.छोड़िये, छोड़िये, सारे शिकवे-गिले,हो सके तो ज़रा मुस्करा दीजिये.पास हैं आज तो आप उखड़े हुए,दूर जायें तो फिर ना सदा दीजिए.  थम ना जायें कहीं आशिकी में कदम,थोड़ा थोड़ा सही हौसला दीजिये.       &n...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 20, 2018, 9:21 am
ग़ज़लवो सुनामी की तरह आये है.दिल की कश्ती ये डगमगाये है.                                  मर्हम-ए-दिल जिसे समझते थे,वो ही दिल पे छुरी चलाये है.पहले देता है दावतें दिल को,बाद में फिर वो मुकर जाये है,.मैं उजालों में उसको मांगे हूँ,वो अ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 19, 2018, 7:04 pm
ग़ज़लमामला इस तरह ना सुलझेगा.मुझको उलझाके वो भी उलझेगा.नाज़ हमने उठाये हैं तेरे,हम न होंगे तो कौन पूछेगा.मेरे ऐबों को देखने वाला,आइना वो कभी न देखेगा.शीश-ए- दिल की अब तो ख़ैर नहीं,उसके हाथों से गिर के टूटेगा.आदमी मैं कोई बुरा तो नहीं,वो अकेले में ये भी सोचेगा.अब मुसाफ़िर प...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 15, 2018, 4:30 pm
ग़ज़लचार दिन की खुशियों ने उम्र भर रूलाया है.इक हसीन चेहरे ने बहुत दिल दुखाया है.रात कैसे कटती है दिन का हाल मत पूछो. बेवफ़ा से हमने ये जब से दिल लगाया है.दिल की बात होटों पे लाख हम ना आने दें,उतनी ही बयां होती जितना ही छुपाया है.उनकी सुर्ख आँखों का राज़ हमसे मत पूछो,हाथ क...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 14, 2018, 6:11 pm
ग़ज़लये उदासी मेरे दिल की नहीं जाने वाली.हाथ अब ज़िंदगी वापस नहीं आने वाली.कैसे जीते हो अकेले भला तन्हाई में,बात मत पूछो कोई मुझसे रुलाने वाली.लाश अपनी को मैं काँधे पे लिये फिरता हूँ,आग ढूँढ़े हूँ कोई उसको जलाने वाली.तल्ख़ियां ही मेरे हिस्से में मुझे दीं उसनेबात में कै...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  February 11, 2018, 10:31 pm
ग़ज़लअब पकोड़ों को बनाओ लोगो.खुद भी खाओ व खिलाओ लोगो.हाथ धर सर पे यूँ रोते क्यों हो,और सर हमको बिठाओ लोगो.सीख लो चाय बनाने का हुनर,बाद में सबको  बनाओ लोगो.आम चाहे हो बबूलों से तुम ,    होश अब यूँ ना गंवाओ लोगो.तुम अगर रोशनी के हामी हो,मिल अँधेरों को भगाओ लोगो.भेड़िये दू...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  February 3, 2018, 5:18 am
ग़ज़लऔर क्या आग लगाओगे बताओ तो सही.फिर मुझे छोड़ के जाओगे बताओ तो सही. आँसू बनकर जो उमड़ा मैं कभी आँखों में,हँस के पलकों पे छिपाओगे बताओ तो सही.हमसे बिछुड़े तो हमसा ना दुबारा पाया,दास्तां अपनी सुनाओगे बताओ तो सही.तुम सा प्यारा नहीं दुनियां में हमारा कोई,झूट सर की कसम खाओ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  February 1, 2018, 8:15 pm
ग़ज़लअश्कों को इन आँखों से बर्बाद किया जाये.उस बेवफ़ा को फिर से अब याद किया जाये.टूटे जो मकां कोई आबाद करें उसको,टूटा हुआ ये दिल ना आबाद किया जाये.सूरत ही नहीं मिलती अब तेरी किसी से भी,फिर  कैसे कहो दूजा इर्शाद किया जाये.हम लाख करें कोशिश उस शै को भुलाने की,पर मोम सा ये दि...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 29, 2018, 6:32 pm
ग़ज़लदिल का ये ज़ख़्म है गहरा नहीं भरने वाला. तेरा शैदाई ये ज़ल्दी नहीं मरने  वाला.मैं जहां भी गया यादें भी तेरी साथ रहीं,ये नशा अब न मुहब्बत का उतरने वाला.पास आये तो वो मौजों की रवानी समझे, दूर ही दूर समन्दर से गुज़रने वाला .तू परेशान बहुत है तू परेशान न हो,वो संग दिल ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 28, 2018, 7:00 pm
ग़ज़लतेरी यादें कहां तक अब भला मुझको संभालेंगी.मेरी तन्हाईयाँ लगता है मुझको मार डालेंगी.तुम्हें शिकवे बहुत थे ये कि ज़्यादा बोलता हूँ मैं,मेरी ख़ामोशियां ही अब मेरा ये दम निकालेंगी.कहां किस्मत थी मैं सोऊं तेरे ज़ानूं पे सर रखकर,समन्दर की ये ख़ाराशें मुझे ऐसे लुभालें...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 10, 2018, 10:35 pm
ग़ज़लकभी जो नाता था तुझसे, वो कब का तोड़ दिया.तेरी गली तो क्या, तेरा शहर भी छोड़ दिया .क़फ़स में सांस भी लेने में दिक्कतें थी बहुत,अना ने हमको भी अंदर से फिर झिंझोड़ दिया. दिखाया अक्श जो उसको, तो ये सज़ा दी मुझे,जुनूं में हाथ से आईना, उसने फोड़ दिया.परों को काट, वो ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 2, 2018, 10:48 pm
ग़ज़लचेहरे की चमक, होटों की मुस्कान ले गया.जीने के मेरे सारे ,वो अरमान ले गया .सिगरिट, शराब, अश्क, तन्हाई, व बेकली,किन रास्तों पे मेरा, महरबान ले गया.अब लोग पूछते हैं, बताओ तो कौन था ?जो जिस्म छोड़कर, के मेरी जान ले गया.अब मेज़बां के पास, तो कुछ भी बचा नहीं,दिल की तमाम हसरतें, म...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 31, 2017, 7:54 pm
ग़ज़लघर मेरे उसने जो आना चाहा.रास्ता सबने भुलाना चाहा.और भी सर पे चढ़ गये अपने,हमने उनको जो मनाना चाहाऐब गिनवाके मेरे मुहसिन ने,दूर जाने का बहाना चाहा.तोड़ने का रहा जुनूं उसको,हमने नाता तो निभाना चाहा.एक तेरी थी तमन्ना हमको,कब भला हमने ख़ज़ाना चाहा ?हम बियांबा में भटकते...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 30, 2017, 10:57 pm
ग़ज़लहाथ में जब भी जाम लेते हैं.बेवफ़ाओं का नाम लेते हैं.हमसे रखते हैं फ़ासले अक्सर,सबका झुक झुक सलाम लेते है.तुझको रुस्वा नहीं होने देंगे,सब गुनाह अपने नाम लेते हैं.फूल से ख़ार ही लगे बेहतर,बढ़ के दामन को थाम लेते हैं.दिल लगाने का शौक है जिनकोआँसुओं का इनाम लेते हैं.डॉ. ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 29, 2017, 9:30 pm
ग़ज़लमिल जायें अगर जो राहों में झट से वो किनारा करते हैं.तस्वीर हमारी जो चुपके चुपके से निहारा करते हैं.ठंडी ठंडी रातों की चुभन उस पर ग़ज़ब की तन्हाई,यादों की रजाई पर तेरी, मुश्किल से गुज़ारा करते है.ये बात कहां वो समझेंगे, ये बात कहां वो मानेगे,हम रात को अक्सर उठ उठ कर उन...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 26, 2017, 7:05 pm
ग़ज़लमोम से फिर पिघलने लगते हैं.और अरमां मचलने लगते हैं.कौन देता है दस्तकें फिर से,दिल के दरवाज़े जलने लगते हैं.यादें जब तेरी घेर लेती हैं,घर से बाहर निकलने लगते है.और क्या तेरे ग़मगुसार करें,जाम से फिर बहलने लगते हैं.चाँद ख़्वाबों में मुस्कराता है,फिर से करवट बदलने लगत...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 21, 2017, 6:10 pm
ग़ज़लजानेमन यूँ ना दिल को दुखाया करो.ख़्वाब में ही सही आप आया करो.रूठ लो, रूठ लो, हक़ दिया ये तु्म्हें,जब मनाये तो फिर मान जाया करो.मेरे दिल की भी बतियाँ सुनो गौर से,और अपने भी दिल की सुनाया करो.राज़दां हैं तुम्हारे यकीं तो करो,राज़ अपने ना हमसे छुपाया करो.शौक़ से जान ले लो ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 16, 2017, 1:12 pm
ग़ज़लहम ग़ज़ल कह रहे हैं तुम्हारे लिये.मुस्कराओ ज़रा तुम हमारे लिये.एक हम थे जो तूफ़ान से भिड़ गये,लोग बैठे रहे सब किनारे लिये.बात क्या फिर कोई हम खरी कह गये,लोग फिरते हैं सब क्यों दुधारे लिये.हों मुबारक तुम्हें फूल की वादियाँ,क्या करेंगे इसे दिल के मारे लिये.ये अलग बात ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 15, 2017, 3:17 pm
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