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मन का पंछी

(फोटो गूगल से साभार)कुछ लोग बिहार को बहुत ही निम्न दृष्टि से देखते हैं और गाहे बगाहे कुछ ऐसे बयान दे जाते हैं जो काफी दुखदायी होता है।  आज बिहार की वर्तमान स्थिति भले उतनी अच्छी नहीं हो लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि हमेशा ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी।  समय के साथ सब बदलता है  ...
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  September 29, 2016, 2:11 pm
(फोटो गूगल से साभार)आँख मिचौली करता बादलप्रिये, खेल रहा तेरी आँखों में अभी अभी बरसा है सावन लिपट सिमट तेरी बाहों मेंदिन रात किनारे बैठे दोनों, देख रहे यह दृश्य मनभावनमन श्रावणी हो उठा है, जाग उठा फिर वृंदावन बूँद बूँद प्रिये सजा रहा चूड़ी कंगन बिंदिया टिकुली ...
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Tag :कुछ कवितायें
  July 19, 2016, 3:20 pm
पहला शांत है पर चेतन है दूसरा अशांत हैउद्वेलित है कोशिश कर रहा  दूसरा  पहले को परेशान करने की पर पहले को गुस्सा नहीं प्यार आ रहा  दूसरे पर पता है पहले को  कि दूसरा नादान है चंचल है यही सोच कोई प्रतिक्रिया नहीं बस शांत बैठा है पहला कुछ देर बा...
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Tag :कुछ कवितायें
  May 20, 2016, 10:50 am
(फोटो गूगल से साभार)तमस में घिरते व्याकुल मन को देख रहीं अदृश्य निगाहें (मन की)दीपक लेकर चलता कोई पर नहीं खुलती हैं बंद निगाहें सृजन और विध्वंस के मध्य दो पाटी में पीसता मन मन की व्याकुलताबाँध ना पाया धरा की अपनी सीमाएँ निज मन में ही शक्ति अकूत बा...
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Tag :कुछ कवितायें
  December 26, 2015, 7:28 pm
(फोटो गूगल से साभार)हर्फ़ हर्फ़ गुजरो मेरी कविता से  और हर शब्द सोना हो जाएबस लिख दूँ रौशनी और रौशन हर इक कोना हो जाए फड़फड़ाते पन्नों को ना जाने कौन सी हवा लगी है तेरी आरजू बन मेरी कविता अरमां लिए बस उड़ने लगी हैनीला हुआ करता था कभी जो दावत, आज गुलाबी है बहके हुए ...
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Tag :कुछ कवितायें
  November 19, 2015, 8:19 pm
रात के ११.४५ बजे हैं और मोबाईल पर एक नाम फ़्लैश हो रहा है - रोहित ... कॉलिंग ।  संध्या अभी तक जाग रही है । भला मेट्रो सिटीज में रात को इतनी जल्दी कौन सोता है । कुछ सोच रही थी संध्या और और कुछ देर पहले व्हाट्स एप पे उंगलियाँ टाइम पास कर रही थी । फेसबुक पर अभी अभी एक स्टेटस डाला था...
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Tag :लघु कथा
  October 29, 2015, 9:17 pm
(फोटो गूगल से साभार)वह तमाशबीन नहीं बना रहा औरों की तरह उठा और चढ़ गया आसमां पर बन कर सूरज चमकने लगा रात भर जहाँ नाउम्मीदी पसरी थी  वहाँ नव ऊर्जा बन बहने लगा नव उत्साह लिए साँसों में बागों में महकने लगा बिना मुश्किलों से डरे चुनौतियों को हुंकार भरता  हर ...
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Tag :कुछ कवितायें
  July 28, 2015, 12:26 pm
( फोटो गूगल से साभार )  कदम दर कदम संग चलता है मेरे तुम्हारा  'आधा मन'अक्सर हाथ की आड़ी तिरछी रेखाओं में ढूंढता हूँ तुम्हारा  बाकी बचा 'आधा मन'पर हर बार पाता हूँ कुछ अलग सा हाँ, बिलकुल अलग  … जैसे कुछ कपोल अरमांऔर तल्ख़  धूप  में लिपटा एक टुकड़ाबारिश क...
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Tag :कुछ कवितायें
  June 13, 2015, 5:41 pm
(फोटो गूगल से साभार)झुकी पलकें बड़ी ख़ामोशी से लम्हा लम्हा सहेज रही है ओस की एक बूंद आ टिकी है पलकों के कोर पर और शबनमी हो गयी आँखे बस बंद ही रहना चाहती हैं रात शतरंज की बिसात बिछाए बैठा है शह और मात के बीच अभी अभी खामोशी टूटी है कुछ गिरा है जमीं पर आ...
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Tag :कुछ कवितायें
  May 15, 2015, 10:23 am
(फोटो गूगल से साभार) तुम्हारी आँखों में सवाल हजार हैंतुम्हारे माथे की बिंदिया उनके जवाब हैं तुम बोलो ना बोलो ये बिंदिया बोल देती है तुम्हारे सारे जज्बात यूँ ही खोल देती है तुम्हारे रंज गिले शिकवे सब चुपचाप सुनती है तुम्हारी बिंदिया ही तो है जो मा...
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Tag :कुछ कवितायें
  February 25, 2015, 1:54 pm
भीगी पलकों से उनकी मुस्कुराहटें गीली हो चली खामोशी और मौन में भीगता रहा दो मनबड़ी देर तलक दिल की सारी शिकायतें सारे गिले शिकवे  बह गए कहीं रात के आसमां पर काले बादल थे बस थोड़ी देर पहले अभी चाँद उफ़क़ कर आ गया है वहाँ मुस्कुराते हुए  ...
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Tag :कुछ कवितायें
  January 9, 2015, 5:33 pm
(फोटो गूगल से साभार)कितनी ठोकरें खाई थींराह में पड़े थे जब किसी ने उठा रख दिया मंदिर मेंऔर समय बदल गया है अब  जो मारते थे ठोकरें खुद पूजने आ गएखाया था जिनसे चोट  पैरों पर मेरे 'वो'कितने फूल चढ़ा गए  !...
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Tag :कुछ कवितायें
  November 18, 2014, 2:27 pm
(फोटो गूगल से साभार)माँ तेरे यादों की हर चीज समेट कर रख दी है सहेज कर मन में जो कभी पानी तो कभी बादल बन बरस जाती हैं मन में ही मैं सहेजता हूँ उन बूंदों को मैं बहने नहीं देना चाहता उनको उन बूंदों में भीगना अच्छा लगता है माना मन रोता है कई बार त...
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Tag :माँ
  October 27, 2014, 2:58 pm
(फोटो गूगल से साभार) पिछली दीवाली पर कुछ रात उधार लिया था मैंने  केशुओं की कांति चेहरे का उजाला प्रेम के लिए प्रेम का श्रृंगार किया था तुमने और कुछ रात उधार लिया था मैंने उस रात हाथ की लकीरें राहें बनी थीं और सजे थे आशाओं के दीये उन राहों पर फिर भ...
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Tag :कुछ कवितायें
  October 24, 2014, 4:41 pm
(फोटो गूगल से साभार)सुना है एक पशु की बलि दी  मनुष्यों ने और उसके बाद मनुष्यों के भीतर का इंसान   जाग उठा  और  अंदर की पशुता मर गयी !...
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Tag :कुछ कवितायें
  October 8, 2014, 10:46 am
(फोटो गूगल से साभार)कभी कभी ठहर जाता हूँ आईने के सामने आकर मेरी प्रतिबिम्ब नहीं दिखती दिखता है कुछ औरतीन खीचीं लकीरें मेरे माथे पर और आँखों के नीचे सूनापन लिए गहरा अन्धकार कुछ और ही बोल रहा होता है इतना उदास सा चेहरा कब हुआ ऐसा !पता नहीं चला और क्यूँ !...
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Tag :कुछ कवितायें
  September 4, 2014, 3:57 pm
(फोटो गूगल से साभार)दिख जाते हैं अक्सर कई फ़कीर गंदे मैले कुचैले से कपड़े पहने राहों पर कोई गरीब कचड़ा बीनता कोई मासूम भीख मांगता गाड़ियों में गरीबी जैसे शाप बनकर मिला हो उनको जीवन में और साथ ही मिल जाते हैं कई बुद्धिजीवी लेखक अपनी किसी नई रचना ...
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Tag :कुछ कवितायें
  July 28, 2014, 5:31 pm
(फोटो गूगल से साभार)छोड़ आया हूँ कुछ नगमे साहिलों पर तेरे नाम से शाम छुपा कर रख दिया है वही रेत की ढेर में कुछ पत्थर उगा आया हूँ वहाँ आस पास बस जो सावन आ जाए  झूम लेंगे तब सभी अभी तो शांत सोए हैं सब अलसाई नींद में  कश्ती पड़ी वही थकी सी हार कर  सूरज से म...
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Tag :कुछ कवितायें
  June 30, 2014, 12:10 pm
(फोटो गूगल से साभार)लम्हा लम्हा जिंदगी का कतरा कतरा जाता है अपनी बर्बादी पे कोई गीत ख़ुशी के गाता है गरीब की गरीबी मजाक नहीं है कोई  आँखों में आँसू लिए कोई राम कथा सुनाता है  टूटे फूलों से कब किसी ने पूछा हाल उसका  डाल डाल खामोश खड़ा कुछ नहीं कर पाता है  बड़ा ही म...
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  June 21, 2014, 8:46 pm
(फोटो गूगल से साभार)तेरी तस्वीर देखी है मैंने आज फिर से खुल रहे दिल के कई राज फिर से खो गयी है मेरी मुकम्मल रात कहीं जोड़ तारों को बजा रहा साज फिर से धड़कने खामोश बैठी थी तनहा अकेली धड़कनों को दे गया कोई अल्फाज फिर से आँखों में अरमानों का उत्सव है कैसा मायूसी ...
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  May 31, 2014, 5:54 pm
(फोटो गूगल से साभार)आखिर क्या मिलेगा ऐसा करने से ?आखिर क्यों, किसलिए ?ऐसे कई प्रश्न हर पल उठते हैं ज़ेहन  में प्रश्नों की एक श्रंखला अनजाने मन में ही सही बन रही होती है कहीं किसी कोने में लेकिन हम बेपरवाह से हुए नकारते रहते हैं  उसके वजूद को पर जब मन  बँध...
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Tag :कुछ कवितायें
  May 5, 2014, 1:45 pm
(फोटो गूगल से साभार)आखिर क्या मिलेगा ऐसा करने से ?आखिर क्यों, किसलिए ?ऐसे कई प्रश्न हर पल उठते हैं ज़ेहन  में प्रश्नों की एक श्रृंखला अनजाने मन में ही सही बन रही होती है कहीं किसी कोने में लेकिन हम बेपरवाह से हुए नकारते रहते हैं  उसके वजूद को पर जब मन  बँ...
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Tag :कुछ कवितायें
  May 5, 2014, 1:45 pm
 (फोटो गूगल से साभार)कि आजकल सपने कितने डरावने हो गए हैं अजीब अजीब आकृतियाँ अजीब अजीब परछाईयाँ पीछा करती हुई अक्सर और 'मैं' भागता हुआ पीछा छुड़ाता हुआ कादो कीचड़ में पैर सनते हुए और फिर भी निकलने की जद्दोजेहद अजीब सा खौफ चेहरे पर पसीनापस माथा स...
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Tag :कुछ कवितायें
  April 30, 2014, 11:45 am
(फोटो गूगल से साभार)जी करता है पैमाने में भर लूँ  जाम खाली कर दूँ अपनी पूरी शाम !अब कोई बात ना रहे कहने को कोई बादल ना उमड़े बरसने को कि काश मैं रोक पाऊँ बहते मन को दे सकूँ कोई मोड़ नया जीवन को लौटना मुश्किल जो बढ़ गया आगे बँधता हूँ, बँधता हूँ बाँध ...
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Tag :कुछ कवितायें
  April 20, 2014, 5:25 pm
(फोटो गूगल से साभार)उनकी आँखों में कई बातें हुआ करती हैं थोड़ी ही सही मुलाकातें हुआ करती हैं नींद उनको भी कहाँ आती है आँखों में ख्यालों में डूबी दो रातें हुआ करती है तन्हाई में अक्सर वो गीत गाते हैं कोई घुलती चाँदनी में इबादतें हुआ करती हैंटूट कर तारा कोई गिरता...
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  March 14, 2014, 2:19 pm
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