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"लड़कियों के पास लुभाने को कुछ होता भी है, मगर नौकरी न पाने वाले सामान्य युवक के पास कुछ भी नहीं होता." -ये "उच्च" विचार वरिष्ठ साहित्यकार और प्रगतिशील माने जाने वाले एक लेखक विश्वनाथ त्रिपाठी के हैं, जो उन्होंने "शुक्रवार" पत्रिका के साहित्य वार्षिकांक में प्रकट किए है...
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Tag :राजनीति
  April 4, 2013, 12:40 pm
पिछले साल दिल्ली में सामूहिक बलात्कार कांड के बाद हर तरफ महिलाओं की सुरक्षा की बात हो रही थी। लैंगिक संवेदनशीलता की मुहिम चल रही थी। इसी दौर में सिनेमा के पर्दे ने भी एक ‘इनकार’ के जरिए एक स्त्री के यौन-उत्पीड़न की परिस्थितियों की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। फि...
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Tag :राजनीति
  April 4, 2013, 12:29 pm
हाल में बराक ओबामा के लगातार दूसरी बार अमरीका के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद पश्चिमी मीडिया के साथ भारतीय मीडिया भी झूम रहा था. लेकिन अमरीकी मीडिया ने और उसके बाद वहां से प्रेरित और अनुवादित होकर भारतीय मीडिया ने भी एक खास चीज उछाली. वह थी एक समर्पित पत्नी के रूप में मि...
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Tag :राजनीति
  January 7, 2013, 9:00 pm
अभीतक हमारे जेहन में पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार की उस भारत यात्रा की यादें ताजा हैं, जब भारतीय मीडिया ने उन्हें खूबसूरती, तन पर पहने कपड़ों, गहनों और उनके पर्स तक ही समेट दिया था। इसके पहले किसी विदेशी महिला नेता के कपड़ों पर मीडिया ने ऐसी हाय-तौबा नहीं मच...
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Tag :समाज
  November 12, 2012, 1:18 pm
अभीतक हमारे जेहन में पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार की उस भारत यात्रा की यादें ताजा हैं, जब भारतीय मीडिया ने उन्हें खूबसूरती, तन पर पहने कपड़ों, गहनों और उनके पर्स तक ही समेट दिया था। इसके पहले किसी विदेशी महिला नेता के कपड़ों पर मीडिया ने ऐसी हाय-तौबा नहीं मच...
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Tag :स्त्री
  November 12, 2012, 1:18 pm
अगले लोकसभा चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। साथ ही शुरू हो चुका है, ‘कौन बनेगा प्रधानमंत्री’ मार्का सर्वेक्षणनुमा खेल। इन सर्वेक्षणों में मीडिया का वह पुराना राग भी शामिल हो गया है कि क्या लोग प्रियंका गांधी में इंदिरा गांधी की छवि देखते हैं! कांग्रेस की नैया स...
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Tag :राजनीति
  October 22, 2012, 12:48 pm
18 अगेन की यह हिंसा  "एटीन अगेन...!" बाजार में पेश यह नया उत्पाद है उन महिलाओं के लिए जो पच्चीस-तीस-पैंतीस या शायद उसके ज्यादा उम्र की हो चुकी हैं। इस उत्पाद के प्रचार के लिए दो रूपकों का इस्तेमाल हो रहा है। पूरे पन्ने के अखबारी विज्ञापन में एक पूरा खिला गुलाब और (इसके इस्त...
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Tag :राजनीति
  August 28, 2012, 7:53 pm
"एटीन अगेन...!" बाजार में पेश यह नया उत्पाद है उन महिलाओं के लिए जो पच्चीस-तीस-पैंतीस या शायद उसके ज्यादा उम्र की हो चुकी हैं। इस उत्पाद के प्रचार के लिए दो रूपकों का इस्तेमाल हो रहा है। पूरे पन्ने के अखबारी विज्ञापन में एक पूरा खिला गुलाब और (इसके इस्तेमाल के बाद) नीचे गुला...
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Tag :विज्ञापन
  August 28, 2012, 7:53 pm
18 अगेन की यह हिंसा  "एटीन अगेन...!"बाजार में पेश यह नया उत्पाद है उन महिलाओं के लिए जो पच्चीस-तीस-पैंतीस या शायद उसके ज्यादा उम्र की हो चुकी हैं। इस उत्पाद के प्रचार के लिए दो रूपकों का इस्तेमाल हो रहा है। पूरे पन्ने के अखबारी विज्ञापन में एक पूरा खिला गुलाब और (इसके इस्त...
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Tag :राजनीति
  August 28, 2012, 7:53 pm
कांस्टीट्यूशन क्लब में 13 अप्रैल, 2012 को "मीडिया में लैंगिक भेदभावः मिथक या हकीकत" विषय पर आयोजित सेमिनार में पढ़ा गया पर्चाएकसभ्य और विकासमान समाज अपने आगे बढ़ने के रास्ते खुद तैयार करता है, उसकी बाधाओं से निपटता है और एक तरह से किसी जड़ और सत्तावादी व्यवस्था का जनतांत्...
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Tag :राजनीति
  April 19, 2012, 5:07 pm
जेएनयू में 11 अक्तूबर, 2011 को "सरोकारों की सरमाएदारी और मीडिया" पर आयोजित सेमिनार में विषय प्रवर्तन करते हुएसाथियों,‘अगर आप सावधान नहीं हैं, तो अखबार आपके भीतर उन लोगों के खिलाफ नफरत भर देंगे जो दमन के शिकार रहे हैं और आप उन लोगों से प्यार करने लगेंगे जो दमन करते रहे हैं।’म...
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Tag :राजनीति
  January 20, 2012, 7:32 pm
राज वाल्मीकिसरोकारों की सरमाएदारी और मीडिया11 अक्तूबर, 2011स्थान- जेएनयू एसएल कमिटी रूमदिल्ली मीडिया रिसर्च एंड पब्लिकेशन सेंटर और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट की ओर से 11 अक्टूबर 2011 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज के कमिटी रूम में 'सरोकारों की सर...
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Tag :राजनीति
  January 20, 2012, 7:17 pm
आर्थिकदृष्टि से वैश्विक भूगोल पर अपनी पहचान बना चुके नोएडा में दो बहनों की दिल दहला देने वाली कहानी ने हमारे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना महानगरीय जीवन की एक ऐसी तस्वीर खींच रही है जो हमसे रुकने को और थोड़ा ठहर कर सोचने को कह रही है कि उपभोक्तावाद और महानगरीय जीव...
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Tag :समाज
  May 11, 2011, 8:12 pm
एक दूसरे मामले के बहाने ही सही, अच्छा हुआ सुप्रीम कोर्ट ने खापों के कार्यकलाप पर अपनी राय साफ कर दी। दरअसल, हमने देश के स्तर पर तो एक लोकतंत्र को चुन लिया, लेकिन अक्सर इसके भीतर अलग-अलग समाजों के नियम-कायदे के हिसाब से चलना-जीना चाहते हैं। खाप जो भी कहते-करते हैं, उसकी जड़े...
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Tag :अदालत
  April 20, 2011, 7:32 pm
अपना अपना समाजकुछसमय पहले टीवी पर साक्षात्कार के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री को यह कहते सुना कि खाप पंचायतें कुछ भी गलत नहीं कर रही हैं और वे दरअसल किसी एनजीओ या गैरसरकारी संगठन की तरह काम करती हैं। जब उनसे इन पंचायतों के कानून हाथ में लेने की घटनाओं के बारे में पूछा ...
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Tag :राजनीति
  April 15, 2011, 5:52 pm
जिसेमुख्यधारा की पत्रकारिता कहा जाता है, वह आज पूरी तरह बाजार पर निर्भर हो चुका है और खुले रूप में बाजार-व्यवस्था का पोषण करता है। वह इस पर बारीक निगाह रखता है कि समाज में जो चल रहा है, उसे कैसे उत्पाद के रूप में पेश किया जाए। वह हर चीज को बेचना जानता है। भावनाओं या संवेदन...
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Tag :स्त्री
  March 26, 2011, 8:07 pm

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  January 1, 1970, 5:30 am
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