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Blog: अभिव्यंजना

Blogger: Maheshwari Kaneri
मनहरण धनाक्षरी   में ...देश भक्ति गीत    तन मन प्राण वारूँ  वंदन नमन करूँ  ,  गाऊँ यशोगान सदा   मातृ भूमि के लिए .. पावन मातृ भूमि ये ,  वीरोंऔर शहीदों  की  जन्मे राम कृष्ण यहाँ हाथ सुचक्र लिए ,  ये बेमिशाल देश हैसंस्कृति भी विशेष हैं , पूजते पत्थर यहा... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   7:47am 7 Feb 2019 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
 नस्कार मित्रो। नव वर्षा की शुभकामनाओं के साथ मै सर्दी का एक तौहफा लेकर आई  हूँ   सर्दी ने ढाया सितमठिठुरती काँपती ऊँगलियाँ   माने  नहीं छूने को कलमकैसे लिख दूँ अब कविता मैंअजब  सर्दी ने ढाया सितमशब्द मेरे ठिठुरे पड़े हैं भाव सभी शुन्य से  हुए हैंकंठ से स्... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   12:37pm 11 Jan 2018 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
रे मन धीरज रख ज़रा ,समय बड़ा बलवान. मिलना हो मिल जाएगा,बात यही तू मान |                      पढ़ना लिखना आगया ,कहते हो विद्वान ,राग द्वेष मन में बसा .कैसा है ये ज्ञान |तितली बोली फूल से ,दिन मेरे दो चार ,जी भर के जी लूँ ज़रा बाँटू,रंग हजार |श्वेत वस्त्र धार... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   7:56am 10 Aug 2017 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
                वो शाम .....     हरे भरे लहलहाते गेहूँ के खेत ,उन खेतों के बीच थोड़ी सी चौड़ी पगडंडीनुमा कच्ची सड़क जो मुझे गाँव की याद दिला रही थी | इस खुबसूरत सी जगह जिसे बंजारावाला नाम से जाना जाता है |     ये जगह मेरे लिए एकदम नयी थी घर ढूढने में मुझे परेशानी ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   5:04pm 3 Aug 2017 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
फूलों से मुस्काता उद्यान होप्रेम का जहाँ मधु रस पान होन मज़हब की कही बात हो धर्म हर इंसान का इंसान हो लिख दूँ लहू से वो गीत अमरजिस पर माँ तुझे अभिमान हो हर हाथ में फहराएं पंचम तेराहर तरफ़ तेरा ही यश गान हो             जय हिंद         म कनेरी... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   8:17am 1 Jul 2017 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
कतरा कतरा बन गिरता रहा,  मेरे वक्त का एक एक पल लम्हा   लम्हा  बन ढलता रहामेरा   हर  दिन प्रतिदिन    कुछ नए  सपने संजोए     कुछ आस  उम्मीदें बटोरे  आ गया फिर  नया वर्ष  नए अंदाज में नए आगाज में  देखते ही देखते सब कुछ बदलने  लगा जो बीत गया  वो या... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   5:48pm 6 Jan 2017 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
न लाठी चली न आवाज हुई मगर नोट पर चोट करारी है सोच समझ कर खामोशी से की गई ये तैयारी हैसंभल जाओ ये  गद्दारो  जाने अब किसकी बारी है बज उठा बिगुल नव भारत का देश बदलने की तैयारी है *****महेश्वरी कनेरी ... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   1:55am 17 Nov 2016 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
माँतूबोलीथी नजब बाबातेरेआएंगेढेरखिलौनेलाएंगेपरवो तोखालीहाथ लिए  तिरंगा ओढेसोएहुएहैंमाँ ! क्या हुआ है बाबा को क्यों बाहरइतनीभीड़लगीहैंजयजय सबक्योंबोलरहेहैअंदरदादीरोएरहीहैतूकाहेबेहोशपडीहैउठयेतोबतलादे माँक्याहुआहैबाबाकोतूबोलीथीनजबबाबातेरेआएंगेबिठा... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   2:48pm 24 Sep 2016 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
होली पर … (कह मुकरी )  शुभ कामनाओ सहित(१)    घर घर में उल्लास जगाता         प्रेम रंग चुपके से लाता          बरबस करता रहे ढिढोली         क्या सखि साजन..?         ना सखी होली  (२)    हर फागुन में वो आजाता        प्रे... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   11:27am 23 Mar 2016 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
                       जिन्दगी यूँ ही चलती रहती  है               ( कहानी )   सर्दी हो,गर्मी हो या फिर बरसात ,देहरादून में तीनों ही मौसमों का अपना अलग ही अंदाज है और हमेशा ही अपनी विशेष पहचान बनाए रखते हैं    यहाँ के जाड़ों का तो जवाब ही नही ,रात को र... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   2:25am 20 Feb 2016 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
तुम एक माँ होहर आह्ट पर काँपते हाथों सेजब भी तुम दरवाजा खोलती होगीदेख फिर सूने आँगन कोमन मसोर कर रह जाती होगीबार-बार न जाने कितनी बारतुम दरवाजे तक आती और जाती होगीउधर आस लगाए बाबा जब भी पूछ्ते,कौन है ? तुम धीरे से, कोई नही कहकामों में लग जाती होगी बुझे हुए मन से, जब भी... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   2:56pm 14 Jan 2016 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
हिन्दी ने पंचम फहराया,देश मेरा उठ आगे आयाअखण्ड़ जोत जली हिन्दी की,हर अक्षर में माँ को पायासहज सरल है माँ सी हिन्दी,है मॄदुल अमृत रस खानभर आँचल में प्यार बाँटती,देती निजता की पहचाननिर्मल श्रोत है ग्यान अपार,सुगम इसका हर छंद विधानवेद पुराणों की वाणी ये ,बसा हर अक्षर में भग... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   1:54am 14 Sep 2015 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
  मित्रों आज बहुत दिनो बाद ब्लांग मे आना हुआ...यहा बहुत कुछ बदला हुआ सा है ..कितनो के ब्लांग मे कोमेन्ट के लिए जगह ही नही मिली..बहुत कुछ समझ नही आया  खैर किसी तरह ये पोस्ट डाल रही हूं..आगे ्से यहां निरन्तर बनी रहुँगी,,,,  फुहार पर कुछ हायकू लेकर प्रस्तुत हूँफुहार१गाएं फु... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   2:18am 15 Jul 2015 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
तेरी गोद से उतर कर,तेरी अंगली पकड़ कर मां… मैंने  चलना सीख लिया मत हो उदास, देख मैं चल सकता हूं…दुनिया के इस भीड़ के संग, भले ही मैं दौड़ नहीं पातापर, धीरे धीरे चल कर, पहुंच ही जाऊंगा वहां जहां तू मेरे लिए अकसर सपने बुना करती है ये नीला आसमान कब से मुझे, ललकार रहा हैएक बार उसे... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   5:04pm 9 May 2015 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
                      यादों के कुछ अनमोल सफर      सफेद धोती ,कुर्ता सिर पर गाधी टोपी, गले में मफलर, गेहुँआ रंग,चमकती आँखें, चेहरे में निश्छल सी हँसी,चाल में गजब की फुर्ती और बातों में अपनापन ऐसे व्यक्तित्व से जब मैं पहली बार मिली मेरा मन श्रद्धा से नतमस्तक ह... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   1:45pm 28 Mar 2015 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
फागुन पर कुछ हाइकु आप की नजर   रंग बिखराखिला मन आँगनआया फागुनआया फागुनझूमे है कण कणधरती मगनढोल मृदंगबाजे है घर घरनाचे अम्बरलिखी हैपातीउर रंग भिगोयेकब आओगे********     ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   12:09pm 23 Feb 2015 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
           पाखी की पंखुरी  (कहानी)    जैसे ही मैंने डोरबैल पर अपनी अँगुली रखी ट्रिनन ट्रिनन कर वो इतनी जोर से चीखी जैसे किसी ने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया हो । ।मैने झट से हाथ हटा लिया , तभी अंदर से धीमी सी आवाज सुनाई दी, ‘आरहे हैं….. ‘मैं थोड़ी सी सतर्क हो कर खडी़ ह... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   12:10pm 1 Feb 2015 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
स्वागत नववर्ष पन्ने पलटते गएदिन बदलता रहातारीखें बदलने लगीऔर साल बदल गयाबीता वर्ष यादें बन गईकुछ खट्टी ,कुछ मीठीहर पल इतिहास बनज़हन में सिमटने लगेफिर नई- नई बातनई सी शुरुवातआशाएं पनपने लगीमन गुनगुनाने लगास्वप्न बुनते रहे उम्मीदें बढ़ने लगीखिलने लगा मन सारा का स... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   3:42pm 31 Dec 2014 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
माँ के माथे की बिन्दीगोल बड़ी सी बिन्दीकान्ति बन,माथे परखिलती है बिन्दीमाँ के माथे की बिन्दीसजाती सवाँरतीपहचान बनाती बिन्दीमान सम्मान आस्था है बिन्दीशीतल सहज सरलकुछ कहती सी बिन्दीमाँ के माथे की बिन्दीथकान मिटा,उर्जा बन मुस्काती बिन्दीपावन पवित्र सतित्व की सा... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   1:48pm 23 Dec 2014 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
      गाय माता    (भुजंगप्रयात छन्द )  गले से लगा बाँटते प्यार देखाजुबा मौन है बोलते भाव देखायही भक्ति आस्था यही धर्म मानायही प्रीत प्यारी यही छाँव जानाबड़े प्यार से दूध माँ तू पिलातीतभी गाय माता सदा तू कहातीदही दूध तेरा सभी को लुभावेअभागा वही है इसे जो न प... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   3:46pm 10 Nov 2014 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
 अटूट बंधनकल रात भर आसमान रोता रहाधरती के कंधे पर सिर रख कर इतना फूट फूट कर रोया कि धरती का तन मन सब भीग गयापेड़ पौधे और पत्ते भीइसके साक्षी बनेउसके दर्द का एक एक कतराकभी पेडो़ं से कभी पत्तों में से टप-टप धरती पर गिरता रहाधरती भी जतन से उन्हें समेटती रही,सहेजती रहीऔर.... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   6:40am 19 Sep 2014 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
                   पीपल (छन्द - गीतिका)      ऐतिहासिक वृक्ष पीपल, मौन वर्षो से खड़ेपारहे आश्रय सभी है ,गोद में छोटे बड़े मौन साधक तुम, हे तरुवर , श्रृष्टि का वरदान होहे सकल जग प्राणदाता, सद् गुणों की खान होहो घरोहर पूर्वजों का ,... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   1:47pm 19 Aug 2014 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
कतरा कतरा बन जि़न्दगी गिरती रहीसमेट उन्हें,मै यादों में सहेजती रहीअनमना मन मुझसेक्या मांगे,पता नहींपर हर घड़ी धूप सी मैं ढलती रही रात, उदासी की चादरउढा़ने को आतुर बहुतपर मैं तो चाँद में ही अपनी खुशी तलाशती रहीऔर चाँदनी सी खिलखिलाती रही********महेश्वरी कनेरी... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   5:27am 26 Jun 2014 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
कुछ नई सी बात है आज सुरमई प्रभात हैउम्मीद नहीं विश्वास हैएक अच्छी शुरुवात हैएक पग आगे बढ़ाकोटि पग भी बढ़ चलेहाथों से हाथ मिलेदिलों के तार जुड़ते चलेये भी जज्बात हैएक अच्छी शुरुवात है……….जैसे छिप गया हो तमकिरणों की बौछार सेनवल कोंपलें खिल उठींबसंत की पुकार सेये प्रकॄतिक... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   6:37am 11 Jun 2014 #
Blogger: Maheshwari Kaneri
 इंसान का कद इंसान का कद आज इतना ऊँचा हो गयाकि इंसानियत उसमें अब दिखती नहींदिल इतना छोटा होगया कि भावनाएं उसमें अब टिक पाती नहींजिन्दगी कागज़ के फूलों सीसजी संवरी दिखती तो हैपर प्रेम, प्यार और संवेदनाओ की वहाँ खुशबू नहींचकाचौंध भरी दुनिया की इस भीड़ में इतना आगे ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   2:11pm 28 May 2014 #
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