Hamarivani.com

अभिव्यंजना

कतरा कतरा बन गिरता रहा,  मेरे वक्त का एक एक पल लम्हा   लम्हा  बन ढलता रहामेरा   हर  दिन प्रतिदिन    कुछ नए  सपने संजोए     कुछ आस  उम्मीदें बटोरे  आ गया फिर  नया वर्ष  नए अंदाज में नए आगाज में  देखते ही देखते सब कुछ बदलने  लगा जो बीत गया  वो या...
अभिव्यंजना...
Tag :
  January 6, 2017, 11:18 pm
न लाठी चली न आवाज हुई मगर नोट पर चोट करारी है सोच समझ कर खामोशी से की गई ये तैयारी हैसंभल जाओ ये  गद्दारो  जाने अब किसकी बारी है बज उठा बिगुल नव भारत का देश बदलने की तैयारी है *****महेश्वरी कनेरी ...
अभिव्यंजना...
Tag :
  November 17, 2016, 7:25 am
माँतूबोलीथी नजब बाबातेरेआएंगेढेरखिलौनेलाएंगेपरवो तोखालीहाथ लिए  तिरंगा ओढेसोएहुएहैंमाँ ! क्या हुआ है बाबा को क्यों बाहरइतनीभीड़लगीहैंजयजय सबक्योंबोलरहेहैअंदरदादीरोएरहीहैतूकाहेबेहोशपडीहैउठयेतोबतलादे माँक्याहुआहैबाबाकोतूबोलीथीनजबबाबातेरेआएंगेबिठा...
अभिव्यंजना...
Tag :
  September 24, 2016, 8:18 pm
होली पर … (कह मुकरी )  शुभ कामनाओ सहित(१)    घर घर में उल्लास जगाता         प्रेम रंग चुपके से लाता          बरबस करता रहे ढिढोली         क्या सखि साजन..?         ना सखी होली  (२)    हर फागुन में वो आजाता        प्रे...
अभिव्यंजना...
Tag :
  March 23, 2016, 4:57 pm
                       जिन्दगी यूँ ही चलती रहती  है               ( कहानी )   सर्दी हो,गर्मी हो या फिर बरसात ,देहरादून में तीनों ही मौसमों का अपना अलग ही अंदाज है और हमेशा ही अपनी विशेष पहचान बनाए रखते हैं    यहाँ के जाड़ों का तो जवाब ही नही ,रात को र...
अभिव्यंजना...
Tag :
  February 20, 2016, 7:55 am
तुम एक माँ होहर आह्ट पर काँपते हाथों सेजब भी तुम दरवाजा खोलती होगीदेख फिर सूने आँगन कोमन मसोर कर रह जाती होगीबार-बार न जाने कितनी बारतुम दरवाजे तक आती और जाती होगीउधर आस लगाए बाबा जब भी पूछ्ते,कौन है ? तुम धीरे से, कोई नही कहकामों में लग जाती होगी बुझे हुए मन से, जब भी...
अभिव्यंजना...
Tag :
  January 14, 2016, 8:26 pm
हिन्दी ने पंचम फहराया,देश मेरा उठ आगे आयाअखण्ड़ जोत जली हिन्दी की,हर अक्षर में माँ को पायासहज सरल है माँ सी हिन्दी,है मॄदुल अमृत रस खानभर आँचल में प्यार बाँटती,देती निजता की पहचाननिर्मल श्रोत है ग्यान अपार,सुगम इसका हर छंद विधानवेद पुराणों की वाणी ये ,बसा हर अक्षर में भग...
अभिव्यंजना...
Tag :
  September 14, 2015, 7:24 am
  मित्रों आज बहुत दिनो बाद ब्लांग मे आना हुआ...यहा बहुत कुछ बदला हुआ सा है ..कितनो के ब्लांग मे कोमेन्ट के लिए जगह ही नही मिली..बहुत कुछ समझ नही आया  खैर किसी तरह ये पोस्ट डाल रही हूं..आगे ्से यहां निरन्तर बनी रहुँगी,,,,  फुहार पर कुछ हायकू लेकर प्रस्तुत हूँफुहार१गाएं फु...
अभिव्यंजना...
Tag :
  July 15, 2015, 7:48 am
तेरी गोद से उतर कर,तेरी अंगली पकड़ कर मां… मैंने  चलना सीख लिया मत हो उदास, देख मैं चल सकता हूं…दुनिया के इस भीड़ के संग, भले ही मैं दौड़ नहीं पातापर, धीरे धीरे चल कर, पहुंच ही जाऊंगा वहां जहां तू मेरे लिए अकसर सपने बुना करती है ये नीला आसमान कब से मुझे, ललकार रहा हैएक बार उसे...
अभिव्यंजना...
Tag :
  May 9, 2015, 10:34 pm
                      यादों के कुछ अनमोल सफर      सफेद धोती ,कुर्ता सिर पर गाधी टोपी, गले में मफलर, गेहुँआ रंग,चमकती आँखें, चेहरे में निश्छल सी हँसी,चाल में गजब की फुर्ती और बातों में अपनापन ऐसे व्यक्तित्व से जब मैं पहली बार मिली मेरा मन श्रद्धा से नतमस्तक ह...
अभिव्यंजना...
Tag :
  March 28, 2015, 7:15 pm
फागुन पर कुछ हाइकु आप की नजर   रंग बिखराखिला मन आँगनआया फागुनआया फागुनझूमे है कण कणधरती मगनढोल मृदंगबाजे है घर घरनाचे अम्बरलिखी हैपातीउर रंग भिगोयेकब आओगे********     ...
अभिव्यंजना...
Tag :
  February 23, 2015, 5:39 pm
           पाखी की पंखुरी  (कहानी)    जैसे ही मैंने डोरबैल पर अपनी अँगुली रखी ट्रिनन ट्रिनन कर वो इतनी जोर से चीखी जैसे किसी ने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया हो । ।मैने झट से हाथ हटा लिया , तभी अंदर से धीमी सी आवाज सुनाई दी, ‘आरहे हैं….. ‘मैं थोड़ी सी सतर्क हो कर खडी़ ह...
अभिव्यंजना...
Tag :
  February 1, 2015, 5:40 pm
स्वागत नववर्ष पन्ने पलटते गएदिन बदलता रहातारीखें बदलने लगीऔर साल बदल गयाबीता वर्ष यादें बन गईकुछ खट्टी ,कुछ मीठीहर पल इतिहास बनज़हन में सिमटने लगेफिर नई- नई बातनई सी शुरुवातआशाएं पनपने लगीमन गुनगुनाने लगास्वप्न बुनते रहे उम्मीदें बढ़ने लगीखिलने लगा मन सारा का स...
अभिव्यंजना...
Tag :
  December 31, 2014, 9:12 pm
माँ के माथे की बिन्दीगोल बड़ी सी बिन्दीकान्ति बन,माथे परखिलती है बिन्दीमाँ के माथे की बिन्दीसजाती सवाँरतीपहचान बनाती बिन्दीमान सम्मान आस्था है बिन्दीशीतल सहज सरलकुछ कहती सी बिन्दीमाँ के माथे की बिन्दीथकान मिटा,उर्जा बन मुस्काती बिन्दीपावन पवित्र सतित्व की सा...
अभिव्यंजना...
Tag :
  December 23, 2014, 7:18 pm
      गाय माता    (भुजंगप्रयात छन्द )  गले से लगा बाँटते प्यार देखाजुबा मौन है बोलते भाव देखायही भक्ति आस्था यही धर्म मानायही प्रीत प्यारी यही छाँव जानाबड़े प्यार से दूध माँ तू पिलातीतभी गाय माता सदा तू कहातीदही दूध तेरा सभी को लुभावेअभागा वही है इसे जो न प...
अभिव्यंजना...
Tag :
  November 10, 2014, 9:16 pm
 अटूट बंधनकल रात भर आसमान रोता रहाधरती के कंधे पर सिर रख कर इतना फूट फूट कर रोया कि धरती का तन मन सब भीग गयापेड़ पौधे और पत्ते भीइसके साक्षी बनेउसके दर्द का एक एक कतराकभी पेडो़ं से कभी पत्तों में से टप-टप धरती पर गिरता रहाधरती भी जतन से उन्हें समेटती रही,सहेजती रहीऔर....
अभिव्यंजना...
Tag :
  September 19, 2014, 12:10 pm
                   पीपल (छन्द - गीतिका)      ऐतिहासिक वृक्ष पीपल, मौन वर्षो से खड़ेपारहे आश्रय सभी है ,गोद में छोटे बड़े मौन साधक तुम, हे तरुवर , श्रृष्टि का वरदान होहे सकल जग प्राणदाता, सद् गुणों की खान होहो घरोहर पूर्वजों का ,...
अभिव्यंजना...
Tag :
  August 19, 2014, 7:17 pm
कतरा कतरा बन जि़न्दगी गिरती रहीसमेट उन्हें,मै यादों में सहेजती रहीअनमना मन मुझसेक्या मांगे,पता नहींपर हर घड़ी धूप सी मैं ढलती रही रात, उदासी की चादरउढा़ने को आतुर बहुतपर मैं तो चाँद में ही अपनी खुशी तलाशती रहीऔर चाँदनी सी खिलखिलाती रही********महेश्वरी कनेरी...
अभिव्यंजना...
Tag :
  June 26, 2014, 10:57 am
कुछ नई सी बात है आज सुरमई प्रभात हैउम्मीद नहीं विश्वास हैएक अच्छी शुरुवात हैएक पग आगे बढ़ाकोटि पग भी बढ़ चलेहाथों से हाथ मिलेदिलों के तार जुड़ते चलेये भी जज्बात हैएक अच्छी शुरुवात है……….जैसे छिप गया हो तमकिरणों की बौछार सेनवल कोंपलें खिल उठींबसंत की पुकार सेये प्रकॄतिक...
अभिव्यंजना...
Tag :
  June 11, 2014, 12:07 pm
 इंसान का कद इंसान का कद आज इतना ऊँचा हो गयाकि इंसानियत उसमें अब दिखती नहींदिल इतना छोटा होगया कि भावनाएं उसमें अब टिक पाती नहींजिन्दगी कागज़ के फूलों सीसजी संवरी दिखती तो हैपर प्रेम, प्यार और संवेदनाओ की वहाँ खुशबू नहींचकाचौंध भरी दुनिया की इस भीड़ में इतना आगे ...
अभिव्यंजना...
Tag :
  May 28, 2014, 7:41 pm
गौरैयामाँ ! आँगनमेंअपनेअबक्योंनहींआतीगौरैयाशामसवेरेचींचींकरतीअबक्योंनहींगातीगौरैयाफुदक- फुदककरचुग्गाचुगतीपासजाओतोउड़जातीकभीखिड़की, कभीमुंडेरपरअबक्योंनहींदिखतीगौरैयामाँबतलादोमुझकोकहाँखोगई गौरैया ?विकासकेइसदौरमें,बेटा !मानवनेदेखास्वार्थसुनेराका...
अभिव्यंजना...
Tag :
  May 14, 2014, 6:01 pm
दीवार आसमां  में कोई सरहद नहींफिर धरती को क्यों बाँटा हैये तो हम और तुम हैं ,जिन्होंनेदिलों को भी दीवार से पाटा हैकहीं नफ़्रत की तो कहीं अहं कीआओ इस दीवार को गिरा कर देखेंकि दिल कितना बड़ा होता है *****महेश्वरी कनेरी...
अभिव्यंजना...
Tag :
  May 3, 2014, 9:33 pm
चुनावभरे नहीं थे पिछले घावलो फिर आगया चुनावमुद्दों की मलहम लेकर घर-घर बाँट रहे हैंफिर नए साजिश कीक्या ये सोच रहे हैं ?धर्म मज़हब की लेकर आड़ करते नित नए खिलवाड़ फिर शह-मात की बारी हैसियासी जंग की तैयारी हैआरोप प्रत्यारोप काभयंकर गोला बारी हैविकास की उम्मीद लिएपरिवर्तन ...
अभिव्यंजना...
Tag :
  April 25, 2014, 8:00 pm
                 “कह- मुकरी”एक बहुत ही पुरातन और लुप्तप्राय: काव्य विधा है! हज़रत अमीर खुसरो द्वारा   विकसित इस विधा पर भारतेंदु हरिश्चंद्र ने भी स्तरीय काव्य-सृजन किया है.. "कह-मुकरी" अर्थात ’कह कर मुकर ...
अभिव्यंजना...
Tag :
  April 20, 2014, 11:11 am
      झुक कर आसमां जब  धरतीकेकंधेपरसररखदेताहै  हौलेसेतबधरतीथपथपाकर  उसेथामलेतीहैअनोखा मिलन… पहाड़ोंकीगोदसेनिकल चट्टानोंकोचीर,बेसुध  सीनदी दौड़तीहुईसागरकीबांहोमें सिमटजातीहै अनोखाप्रेम…….भोरकीकिरणोंकेआतेहीकलियाँखिलउठतींहैंफ...
अभिव्यंजना...
Tag :
  April 11, 2014, 8:08 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3652) कुल पोस्ट (163595)