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Musafir....(मुसाफ़िर)

‪#‎दीपिकापादुकोण‬ द्वारा अपनी आवाज देते हुए नारी स्वातंत्र्य को प्रेरित करने हेतु बनाये गए वीडियो को कई बार देखने और सुनने के बाद अभिव्यक्ति की व्यग्रता ने बिना कुछ कहे आगे बढ़ने नहीं दिया, अतः आप सब से एक प्रश्न करने का मन कर रहा है की क्या ‪#‎mybody‬‪#‎mymind‬ , ‪#‎mychoice‬&nbs...
Musafir....(मुसाफ़िर)...
Tag :लेख
  April 1, 2015, 11:17 am
तुम्हारे दिल की धड़कन को ,अगर हम सुन नहीं पाये।समझ लेना, हमारी शक़्ल में ,फिर हम नहीं आये।।*******************तुम्हारे दर्द - ए - उल्फ़त से ,नज़र जो नम न हो पायीं।वो आँखे गैर की होंगी ,ये आँसू कम  नहीं आये।।*******************मेरा अल्लाह तेरी रूह ,मेरा सजदा तेरी चाहत।मेरी हर नज़्म भी है तू ,तेरी याद...
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Tag :गीत
  February 24, 2015, 10:22 am
Musafir....(मुसाफ़िर): Kavi Shivam Mishra...
Musafir....(मुसाफ़िर)...
Tag :
  September 14, 2014, 4:09 pm
आँख के आंसू बह न सके जब,तो हम कैसे प्यार करें।ग़म के तूफां सह न सके जब,तो हम कैसे प्यार करें।।इश्क़ नहीं है इतना आसां,की जब चाहा इश्क़ किया।दिल की अपने कह न सके जब,तो हम कैसे प्यार करे।।उनकी पाक़ रूहानी शीरत,सहज सरल सौंदर्य की मूरत।तम को दूर करें जो किरणें,उन किरणों सी उनकी सू...
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Tag :
  November 17, 2013, 4:06 pm
मधुर संगीत के पीछे , वो सुन्दर साज होता है !मुहब्बत में कहाँ कब क्यूँ , कोई भी राज होता है !!कहूं कैसे क्यूँ रूठे हो , नहीं मानोगे क्या अब तुम !समर्पित हो जहाँ सब कुछ , वहाँ भला कब नाज होता है !!दीवाना क्यूँ वो कहता है , वो पागल क्यूँ समझता है !मोहब्बत कि नुमाइश क्यूँ , वो सरेआम करत...
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Tag :
  November 6, 2013, 3:39 pm
ग़मों की स्याह चादर में,  बदन लिपटा ही रहता है। ख़ुशी की पाक़ चाहत में,  मन चिपटा ही रहता है।। कहूं कैसे ये खुल के मैँ,  कि फ़ितरत क्या है इन्सां की।ज़माने की जकड़ में ये,  सदा सिमटा ही रहता है।।न तेरी है न मेरी है, कहानी सब की बस ये है।कभी अपने, कभी सबके, सुखों की कशमकश ...
Musafir....(मुसाफ़िर)...
Tag :
  October 28, 2013, 6:51 pm
हालिया अनुभवों स्व अनुदित कविता की कुछ पंक्तियाँ .....संदेह सहित है सब जग में ,संशय भय मेरे रग रग में !मन दुःख से तब भर जाता है ,अपनों के कांटे जब हों डग में !!जब सब ही हों सच्चे मन के ,मन भी सैम सुंदर हो तन के !जब झूठ फ़रेब से बचा रहूँ ,क्यूँ फिरूं ब्यथित पागल बन के !!अब मन में संशय ...
Musafir....(मुसाफ़िर)...
Tag :कविताएँ
  November 10, 2012, 1:18 pm
हालिया अनुभवों स्व अनुदित कविता की कुछ पंक्तियाँ .....संदेह सहित है सब जग में ,संशय भय मेरे रग रग में !मन दुःख से तब भर जाता है ,अपनों के कांटे जब हों डग में !!जब सब ही हों सच्चे मन के ,मन भी सैम सुंदर हो तन के !जब झूठ फ़रेब से बचा रहूँ ,क्यूँ फिरूं ब्यथित पागल बन के !!अब मन में संशय ...
Musafir....(मुसाफ़िर)...
Tag :कविताएँ
  November 10, 2012, 1:06 pm
मेरी नवीन अनुभूतियों से उपजे मेरे गीत की कुछ पंक्तियाँ......जब मैं इस दुनियां से, चला जाऊँगा..सच कहता हूँ,मैं याद बहुत आऊंगा !!जाने वालों को भला,किसने है रोका अबतक..मौत की आस में,खाया है धोखा अबतक !!कौन जाने कि मेरी,आखिरी कशिश क्या है..नहीं मालूम मुझको,मेरी परवरिश क्या है !!लोग ...
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Tag :गीत
  October 26, 2012, 12:39 pm
जीवित होना मात्र,लक्ष्य नहीं मेरा...कुछ भले जज़बात,भी तो चाहिए...हजारों बंदिशों में,जी रहा हूँ मैं अभी...मर जाने के हालात,यूँ न लाईये...ज़माना है,मेरा दुश्मन...कि दुश्मन मैं,जमाने का...कोई बतला दे,मुझको अंत...इस अनचाहे,फ़साने का...कोशिश है मेरी,अपना लें...मुझको सब,मेरे अपने...हक़ीक...
Musafir....(मुसाफ़िर)...
Tag :शेर ओ शहर
  December 20, 2011, 4:37 pm

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Musafir....(मुसाफ़िर)...
Tag :
  December 9, 2011, 12:40 am
आज अकेले दिया जलाकर,घर में उजाला कर बैठे !मन की कालिख साफ़ नहीं की,तन उजियारा कर बैठे !!आज अकेले दिया जलाकर,घर में उजाला कर बैठे !मन की कालिख साफ़ नहीं की,तन उजियारा कर बैठे !!सुबह-शाम  प्रभु नाम की माला,मस्तक तिलक लगाना यूँ....मात-पिता की सुध बिसरा के,उनको यूँ ठुकराना क्यूँ ??ख...
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Tag :भजन
  November 1, 2011, 2:47 am
आदरणीय मित्रों एवं स्नेहीजन .....                                  पिछले तीन महीनों से कुछ नहीं लिख पाया और न ही ज्यादा समय ब्लॉग पर दे पाया , इसके लिए करजोर क्षमा ! देश में उभरे हालात एवं स्थितियों को ब्यक्त करती एक कविता आप के समक्ष प्रस्तुत है ....राजनीतिक ब्यंग्यों पर लिखी मेरी मंचीय र...
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Tag :कविताएँ
  August 12, 2011, 12:41 am
बहुत सोचा , बहुत समझा ,मैं लेकिन सह नहीं पाया !बिना देखे उसे , इक दिन ,मगर मैं रह नहीं पाया !!दिखाए ख्वाब उसने ,जश्ने - ज़न्नत के , मुझे लेकिन !हक़ीकत मैं उन्हें फिर भी , कभी भी कर नहीं पाया !!पहेली बनके रह गयी है , देखो... ज़िन्दगी मेरी !कि क़िस्मत ने दगा इक बार , फिर मुझसे है फरम...
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Tag :
  May 16, 2011, 12:54 pm
मात - स्नेह - वंचन से आहत ,मात - स्नेह की अविरल चाहत ,पाले.. मन में नन्हां बालक ,तड़प रहा जीवन में नाहक !बिन माँ , बालक की जो दशा है ,आखेटक की जाल में जैसे फंसा है ,दिन - दिन रोता याद न जाती ,मात - मिलन का एक नशा है !देख विधाता ! माँ की महिमा ,तुझसे ऊपर माँ की गरिमा ,स्नेहातुर बालक पर तू द...
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  May 10, 2011, 3:38 pm
ज़ालिम ये जिंदगी , ग़मों का सैलाब लाती है !ज़ालिम ये जिंदगी , ग़मों का सैलाब लाती है !रुलाती है ज्यादा , और थोड़ा हंसाती है !कहते हैं सभी , कि खुश रहो यारों ,पर कौन बताये हमें , ये खुशी कहाँ से आती है ?बड़ी उम्मीद से , कदम हम जहाँ में रखते हैं !बड़ी उम्मीद से , कदम हम जहाँ में रखते ह...
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Tag :
  May 8, 2011, 7:08 am
आस लगी है दिल में मेरे , प्रिय तुम वापस आओगे !प्रीत मेरे तुम , मीत तेरा मैं ,मुझको गले लगाओगे !जब से मुझ से दूर गए तुम ,एक पल चैन नहीं पाया !रोया हूँ , मैं तड़पा  हूँ मैं ,विरह ने खूब है तरसाया ! छोड़ दिया जग सारा मैंने ,प्रिय तुम तो अपनाओगे !भूली बिसरी यादें सारी ,ले तुम वापस आ...
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Tag :
  May 6, 2011, 10:06 am
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Musafir....(मुसाफ़िर)...
Tag :
  May 6, 2011, 9:44 am
                अब जब चारों ओर ओसामा और ओबामा के चर्चे चल ही रहे हैं तो आखिर मैं अपने आप को कब तक रोक पाता , अतः मैंने भी सोचा चलो कुछ तो लिख ही सकते हैं इन दो महानुभाओं के बारे में !               दरअसल जब से ओसामा बिन लादेन की मौत की खबर आयी है तभी से अलग अलग वर्...
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  May 5, 2011, 1:06 am
दीवानों की महफ़िल में ,देखो हम भी आ ही गए ! ग़म भी हुआ हम हंसना भूले ,आखिर धोखा खा ही गए !!प्रथम दिवस के प्रथम मिलन की ,याद हमें जब आती है !रोम रोम में लहर ख़ुशी की , मस्ती मन में छाती है !!साथ जियेंगे, साथ मरेंगे , जीते जी हम जुदा  न होंगे !दुश्मन हो चाहे सारा ज़माना , शीश प्...
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  May 4, 2011, 5:20 am
ई बार इलेक्सन क प्रकोप ,फैलल बा कोने कोने में !उत्तर प्रदेश से दिल्ली तक ,मिलि गयल सुहागा सोने में !जे मरा रहेन पुरखा सर्गे से ,मुहर लई के आइ गएँन !कोउ दस नाएंन, कोउ बीस नाएंन , कोउ पूरा सतक लगाई गएँन !कुछ काम धाम कइके घर क ,हमहूँ सोचा असनान करी !ई चुनाव पावन पर्व अहै ,चली क...
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  May 3, 2011, 2:05 am
सहनशील , सृजनशील.....संघर्षशील नारी की , दुःख भरी दास्ताँ !हो कोई भी रूप ,सिर्फ धूप ही धूप !हैं सभी अपने ....पर नहीं किसी को वास्ता !नारी की दुःख भरी दास्ताँ !!कभी परिवार के लिए, कभी समाज के लिए !कभी कल के लिए... ..तो कभी आज के लिए ! करती आयी है त्याग ,सहती आयी है आग !चलती है , रु...
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  April 30, 2011, 11:30 pm
बस...बस !! अब मैं बोलूँगा  नहीं रोकूंगा खुद को डरूँगा नहीं , लडूंगा !अब अपनी बंद आँखें खोलूँगा ! हर्ज नहीं ग़र मारा जाऊंगा  चुप रहकर , रोज-रोज-मरने से तो बेहतर है ! किसी को मरते देख ,किसी को मारते देख ,आत्मचित्त , स्वार्थपूरित नेत्र अब मैं खोलूँगा , अब मैं बोलूँगा !अपरा...
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Tag :
  April 29, 2011, 4:15 am
रात अकेली नहीं होती ,होते हैं ढेरों ख्वाब अकेला होता है गर कोई ,तो आदमी !उजाले में चमक नहीं होती ,चमकते हैं तारे डूबता है गर कोई , तो आदमी !झूठ , झूठा नहीं होता , होते है ढेरों सच झूठा होता है गर कोई ,तो आदमी !भाव बहते नहीं हैं ,होता है ठहराव बहता है गर कोई ,तो आदमी ! ...
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Tag :
  April 22, 2011, 5:53 am
             मैंने ऐसा महसूस किया है की जब कभी भी हम किसी परेशानी में रहते हैं तो कोई न कोई हमें उस परेशानी से निकालने के लिए आ ही जाता है ! कभी किसी दोस्त के रूप में , तो कभी कभी किन्ही अन्य रूपों में ! दरअसल आज कल जीवन इतना संघर्ष मय हो गया है की बिना किसी के साथ जीवन जी ...
Musafir....(मुसाफ़िर)...
Tag :
  April 21, 2011, 3:31 am
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