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सुभांश

द्वारपाल बन माता कीआज्ञा को पूरा करनेडट गया वो निडर अकेला शिव जी हो गए क्रोधितजब उनका मार्ग हुआ अवरुद्ध क्रोधित हो गए  पुत्र से वो हुआ देवताओं से भयंकर युद्ध शिव थे परमपिता जग केपर उसके संग माँ की शक्ति थी उसे हरा न पाए कोई कोई भी न युक्ति थी पुत्र ने बोला परमपिता आप ...
सुभांश...
Tag :कलम
  April 29, 2011, 12:07 am
वो बूढ़ा और बिन व्याही बेटी ....टर टर करते हो हे मेढक क्या वर्षा आने वाली है दीवारों पर चिंटी की कतारेक्या वर्षा आने वाली है दुबक गए हो बिल में मूषकों क्या वर्षा आने वाली है सूरज बादल में ठनी हुई है क्या वर्षा आने वाली है बूढी नज़रों से वो बूढ़ा अपने प्यारे  खेत को देख...
सुभांश...
Tag :कलम
  April 26, 2011, 8:30 pm
निशब्द हूँ तेरे लिए माँ !धरती आकाश बादल क्या हैं माँ तुने ही तो मुझे बताया था नज़र न लग जाए मुझको काजल तुने ही मुझे लगाया था कविता लेख ग़ज़ल क्या है शब्द तुने मुझे सिखाया था धुप न लग जाए मुझको आँचल में तुने मुझे छुपाया था दोस्त गुरु भगवन क्या हैं माँ तुने मुझे समझाया...
सुभांश...
Tag :कलम
  April 26, 2011, 8:27 pm
तू शक्ति है इस जग में इसे कोई झुठला न पायेगातेरे बिन मरना सिख लिया था तू अमृत लेकर क्यों आई इस  स्वप्नों के निश्चल जगत से तू क्यों आकर उसे जगाई मन कोमल था पर शब्द तो थेजिससे शोले बरसते थे क्रांति ला सकते थे वो नवयुवको में साहस भरते थे मौन रहे पर फिर भी लेखक मन में बस ...
सुभांश...
Tag :कलम
  April 26, 2011, 8:22 pm
दुष्ट अगर है जीवन साथी ....अधमरा है वो रणविजय कर के वो लौटा है निर्दोषों के रक्त से लथपत उसके कटार उसे धिक्कारते हैं है  सेना घबराई सीये फिर से हमें सताएगा हमको आड़ में लेकर निर्बलों को वो तरपायेगा दौर के  आई उसकी  जीवनसंगिनी उसके आँखों का  वो तारा  है किया जघन्य कृत...
सुभांश...
Tag :कलम
  April 26, 2011, 8:16 pm
कागा और कोयलकागा है उन्मुक्त वो उड़ता कर्कश बोली रोज़ सुनाता है कोयल बोले मीठी बोली उसको ही पूजा जाता है पर अपने लालों का पोषण कोयल  क्यों नहीं कर पाता है बोझ समझकर अपने बच्चों को                                                      वो निर्दयता से ठुकराता है कागा है कर्कश तो भी उसके ला...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 8:14 pm
कुर्बान होंगे हमारे ये शब्द माँ !तू हमारा स्वाभिमान है तू कुर्बानी नहीं देगी माँ होगी तेरी जीत सदा कुर्बान होंगे हमारे ये  शब्द कुछ मोती बन जायेंगे तेरे आशीर्वाद से बुलायेंगे कुछ लुटेरों को लोभ का उनका करेंगे वध कुछ बनेंगे कटार  होंगे कृष्ण के शंखनाद से नवयुवको...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 8:13 pm
ये बादल हमें सिखाते हैं ...दो बादल  हैं बौराए से टकरा टकराकर वो गरज़ते हैं कुछ  अमृत वो छुपाये थे जो बूंदे बन बरसते हैं बच्चे हैं कुछ  अलसाए से घर से वो अब   निकलते हैं अर्धनिद्रा में कुछ सोये  थे वो बादल  को धिक्कारते हैं धान को रोपे कुछ रोये थे वो   ईश -कृपा  स्वीकारत...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 8:08 pm
तू बस याद रखना इसे ....... भूलना नहींवो कहते हैं न की कल पीछा नहीं छोडती तो वो कल ही थी जिसे  निशांत   भूल कर आ गया था ज़माने के दस्तूर जो थे और उसके  घर के संस्कार किसी ने याद दिला दिया और फिर वो आज बन गयी वो जीने लगा और मरने लगा उसका वजूद या फिर बदलने लगा उस ईश की कृपा से जीन...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 8:05 pm
मेरा चन्द्रमा तो विलक्षण हैवो  चकोर है तकता है रस्ता चाँद का जो ना आ पाएगी कभी मिलने फिर भी आवाज़ लगाता है बादल उसे समझाते हैं उसके रूठे मन को बहलाते हैं वो है परियों के शहर की तू व्यर्थ का शोर मचाता है उसने चाँद को बोल दियातेरे लिए दुआएं भेजी थी नज़र न लग जाए तुझको ...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 8:02 pm
आज तू वो कलम उठा ......एक था निशांत | हर बात में आ जाता था अपने ज़ज्बातों को लेकर पर अल्हड था थोडा उसे विजय ने बहुत समझाया ,तू ज़ज्बात में मत बह | ऐसा नहीं होता है रे !तू धीर बन |यहाँ तेरे ज़ज्बातों से उथल पुथल मच जायेगी | धीर बन और बदले मेंआने वाले ज़ज्बातों को समझा कर रे !| वि...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 7:59 pm
अब इंतज़ार नहीं करेगी माँ एक कविता माँ के लिए अब इंतज़ार नहीं करेगी माँ ...................................................................................अब इंतज़ार नहीं करेगी माँ ..सपनो से ही सही ये यथार्थ होगा चिराग जो जला है अन्यासवो कल स्वयं ही चरितार्थ होगा जब मैं नहीं था तो सपने भीउसने ही बनायीं थी सपनो के साथ ...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 7:54 pm
वक़्त ने ललकारा है फिर कलम धरोएक सपना था आया  अन्यास वो प्रभु का प्रताप था उसने समझा यथार्थ  था पर वो  कल का उसके परमार्थ था भटका था कुछ दूर राह में अनजानी कुछ तस्वीर थी बेगानों की महफ़िल या दिलवालों की भीड़ थी जीवन पथ मेंसाक्षी बनाया उस स्वप्न के अंजानो को जीवनसा...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 7:54 pm
विषैले शब्द रक्त में दिन प्रतिदिन उनके धमनियों में बहते हैंजगत के दावानल में सर्प सम विपत्ति से डसे   हुए कुछ मरे हुए ,कुछ डरे हुए ये मानवों के संतापो को हरते हैं  विषैले शब्द रक्त में दिन प्रतिदिन उनके धमनियों में बहते हैं एक अमृत  कलश है  ये  विष व्याप्त  मन मंदि...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 7:48 pm
चलो थाम लो उस बूढ़े का हाथचलो थाम लो  उस बूढ़े का  हाथ जो बैठा है निराशा के अंधकूप में सब कुछ झोंक चूका है जीवन के शाम और धुप में बढ़ो ,झिझको नहीं वीर उसे नींद से जगाओ उसके बल का प्रतिरूप वो आइना  उसे दिखाओकि  वो अपने चेहरे को भी भूल गया है वो बूढ़ा नहीं है बूढी  सोच मे...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 7:46 pm
लौटा दे न मेरे भगवनबहुत दिनों के पश्चात भाग्य से जा पहुंचा एक विद्यालय मेंमन आनंदित और परफुल्लित थाजैसे जा पहुंचा मैं शिवालय मेंस्मृत हो गए मुझे मेरे गुरुजनऔर सुनहरे उनके प्रियवचनमन में आयीं भूली बिसरी बातेंकुछ खट्टी कुछ मीठी यादेंयाद आ गया वो आखिरी घंटावो घंटी ...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 7:41 pm
ग्रीष्म ऋतू को नमनग्रीष्म ऋतू को नमन ..................................ग्रीष्म ऋतू काहो गया है आगमनमंज़र लग गए है अब आम के वृक्षों परआकृष्ट करते है सबको झूम झूम झूम के सब दे रहेइस प्राकृतिक सौन्दर्य कोअपना नमन अपना नमनपक्षी भौरें उड़ रहे हैमस्ती मेंये स्वंतंत्र उड़ान है  उस ईश की ...
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Tag :कलम
  April 26, 2011, 7:39 pm
समझो अपनी ताक़तदेखो चुनाव फिर आया हैकुछ लोगों का मन ललचाया हैघूमते हैं जो खद्दर पहनकरदेते हैं हमें धोखा भोला समझ करहर बार हमें निचा दिखाते हैंपर हम क्यूँ इतने मजबूर हैंजो इन्हें ही मत दे आते हैंजीतकर मंत्री बन जानाफिर अपनी शक्ल न दिखलानाये इनकी फितरत हैतरह तरह के व...
सुभांश...
Tag :कलम
  April 26, 2011, 7:37 pm
दोस्तएक सपना था कुछ तरंगे थीमेरी भी कुछ अभिलाषा थीतब तुम मुझे मिलेजब चारो ओर निराशा थीतुमने मुझे चलना सिखायालरना सिखाया मुस्कुराना सिखायामेरे जीवन पथ में तुने फूलों का सेज सजायाकभी तुने मुझे संभाला कभी मैंने तेरा साथ निभायाकारवां यह ज़िन्दगी का युहीं चलता रहाहम...
सुभांश...
Tag :कलम
  April 26, 2011, 7:33 pm
नया सवेराआया कल  शाम वो एक बीज  लेकर  उस  सोये हुए विश्वास के पास और चला गया फिर बीजों को बांटने साथ में थे उसके खुशियाँऔर  खुशियाँ भी जो देख रहे थे अपनेऔर वो उन्हें पर वो कुछ न बोले चला गयाउस बीज में ही साड़ी  खुशियाँ देकर अपनी और उसका न बोलनाही खुशियाँ दे गया ढल गय...
सुभांश...
Tag :कलम
  April 26, 2011, 7:32 pm
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