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Blog: बात एक अनकही सी

Blogger: veena sethi
---नदी...सरि   नदी के कई नाम हैं...'सरिता, सरी, दरिया..........' अनवरत बहता हुआ स्वच्छ पानी -नदी कहलाता है. पर आजकल के सन्दर्भ में दरिया वो भी साफ़ पानी का थोड़ा मुश्किल है. नदी बहते हुए कभी शांत तो कभी चंचल हो जाती है. अमूमन दरिया शांत बहने वाली धारा लगती है.ये अपने मूल स्थान से जब निक... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:33pm 31 May 2013 #चोटी
Blogger: veena sethi
       पेलियेटीव वार्ड:एक खामोश अन्तिम सफ़र  जीवन को एक यात्रा कहा गया है और जो समय के साथ साथ आगे बढ़ती जाती है।ये यात्रा हर व्यक्ति को करनी ही है वो चाहे या न चाहे। यह यात्रा कभीकठिनाइयों से भरी होती है तो कभी सुविधाओं की कश्ती पर तैरती है। जीवन कीये यात्रा वास्तव में सुख... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   12:01pm 27 May 2013 #अस्पताल
Blogger: veena sethi
बुराईऔरअच्छाईकेदोशब्द..'कु' और 'सु'.जीवनकेविभिन्नपहलूसिक्केकेदोपहलूकीतरहहीहोतेहैं। हरपहलूकेदोछोरहोतेहैं। जीवनकाएकपहलूख़ुशीहैतोदूसरापहलूग़महै। ऐसेहीदुनियामेंअच्छाईकेसाथबुराईभीजुडीहै, वास्तवमेंदेखाजायेतोकिसीएकपहलूकामहत्वदूसरेपहलूकेबिनाअधूराहैया... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   11:59am 15 May 2013 #बुरा
Blogger: veena sethi
माँ तुम्हारा वो एहसास  तुम मेरी माँ हो,मै ये  जानता  हूँ ; पहचानता हूँ ..  तुमने मेरा हाथ  थाम  चलना सिखलाया था। .मेरे  कदम जब डगमगाए थे;तुमने हाथ बढ़ा थामा था।जब भी कभी मै गिरा तुमने मुझे उठा मेरी सिर प्यार से सहलाया था।आज जब तुमने अपना हाथ मुझे थमाया था,तुम्हारा वही क... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   10:38am 12 May 2013 #सिर
Blogger: veena sethi
भय'भय' मन का एक आवेग है. यह मानव को कमजोर करता है. भय या दर एक नकारात्मक आवेग है. ये दिल में उत्पन्न होकर मस्तिष्क तक फ़ैल जाता है और हृदय में आशंका को जन्म देता है.आजकल एक पेय पदार्थ के उत्पाद के विज्ञापन में एक वाक्य लगभग जुबान पर चढ़ जाने वाला है, " दर के आगे जीत है ", वाक्य ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   9:26am 17 Apr 2013 #विज्ञापन
Blogger: veena sethi
अभी चलते रहना चाहता हूँ.....एक कदम और आगे आ गया हूँ मै.पगडण्डी वहीदिशा वही है.कारवां आगे बढ़ चला है;मै भी उसके साथएक और कदम आगे बढ़ा रहा हूँ.मंजिल दूर सही;पर मै जनता हूँजो मजा सफ़र में है;वह मंजिल तक पहुँचने में कहाँ.......!अभी सफ़र जारी रहेगा;ये है मुझे पता,और मै चलते रहना चाहता ह... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   12:18pm 23 Mar 2013 #मै
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एक दिन नारी के नाम 8 मार्च का दिनमहिला दिवस घोषित है,पर किसी ने ये न सोचाकेवल एक दिन हीनारी के नाम;तो क्या बाकि ३६४ दिन पर केवल पुरुष का अधिकार है.सोचना अब ये है,नारी के नामपूरे ३६५ दिन क्यों नहीं..?आखिर वह भी तो फिर भी इंसान है.आधी दुनिया कि आबादी कीउससे ही तो पहचान है.पर कित... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   1:24pm 9 Mar 2013 #आबादी
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हाइकू - 2 (1 )पुत्री  विवाह पिता के लिए  एक कड़ी परीक्षा। (2 ) बेटी का जन्म मत-पिता के लिए एक संकट।(3 )पुत्री पालन जमापूंजी का व्यर्थ जारण।(4 )शिक्षित पुत्री शादी के बाजार में ज्यादा खर्चीली।(5 )बेटे  की चाह कर दी हैं पाँच-पाँच बेटियाँ  पैदा।   ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   12:29pm 8 Mar 2013 #
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प्यार का एहसास सुगंध कि तरह: My entry for the Get Published contest’ प्यार का एहसासकिसी प्रेम कहानी के बारे में बात करना तो आसान है और प्रेम को परिभाषित भी किया जा सकता है. ये सब किताबी बाते होती हैं पर जब प्यार को जी लिया जाये और उसे समझ लिया जाये तो उस पर बात करना या कहानी कहना उतना सरल नहीं रहत... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   7:47am 23 Jan 2013 #प्यार
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उसकी मुस्कान (उसकी मुस्कान )कभी शाम के धुंधलके सी;कभी भोर के उजाले सी,उसकी मुस्कान छू जाती हैमेरे मन के कोने को.कुछ पल ठहर जाती है;आँख के कोर पर,दे जाती हैमेरे होठों कोएक मीठी सी मुस्कान.(ये कविता उस प्यारी सी लड़की (दामिनी) को समर्पित है जो अपनी जान उन सोये हुए करोडो भारतीय... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   12:12pm 31 Dec 2012 #भोर
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ललक---सकारात्मक--नकारात्मक भी..."ललक " ऐसा शब्द है जो बोलने के साथ ही अपने अर्थ का एहसास करा देता है.कोई वास्तु जो मन को भाती हो और जिसे  देखते ही या उसका नाम लेते ही मन में  उसे पाने की चाहत जाग  जाये  "ललक" है.बच्चा चाँद को देखकर उसे अपने हाथों  में लेने ले लिए मचल जाया ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   1:39pm 18 Dec 2012 #हृदय
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मुक्ति...मुक्ति...मुक्तिएकछोटासाशब्दहैकिन्तुव्यापकअर्थकोसमेटेहै। धर्मानुसार 'मुक्ति' काअर्थहै 'मोक्ष' , साधारणअर्थोंमेंमुक्तिसेतात्पर्यहै 'स्वंत्रता'। अध्यात्ममें ' मुक्ति' मतलबइतनाविशालहैकीजिसेशब्दोंमेंपरिभाषितकरनामुश्किलहीनहींवरनदुरूहहै, इसेजिसनेजि... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   1:16pm 12 Dec 2012 #रास्ता
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अंत में सत्य की जीत होती है...!!ये बात बचपन से ही सुनते आये हैं, " अंत में सत्य की जीत  होती है." सदियों पुरानी यह  धारणा आज भी कायम है और इसकी उपस्थिति  देखी या महसूस की जा सकती है.वैसे तो जीवन के प्रत्येक पहलू या प्रकृति में मौजूद हर सजीव या निर्जीव वस्तु दो पहलू लिए है, एक ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   10:08am 27 Nov 2012 #बुरा
Blogger: veena sethi
जागते रहो ...!!लेकिन  कब ...???रात का डेढ़ बजा है और नींद आँखों से निकलकर सैर करने चली गई थी, तभी सोचा कि चलो उसके इंतजार में ही समय बिताया जाये,और जब तलक वह लौट के न आये कुछ पढ़ ही लिया जाये। यही सोचकर एक पत्रिका`के पन्ने पलटना आरंभ किया ही था कि रात की ख़ामोशी को तोड़ती हुई सड़क पर ग... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   1:51pm 5 Nov 2012 #नींद
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रोटी:एक यक्ष प्रश्न   एक ख्वाब देखा था         रोटी का.दुनिया ने जबआँखें खोलने का मौका दिया;तबसुलगता सा प्रश्न देखा          रोटी का.समाज के वर्गों सामैंने;आकर बदलता देखा         रोटी का.अमीर की डायनिंग टेबल परसोने की थाली में सजी रोटी;परगरीब केहाथ में है प्रश्न बिलखता       ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   8:07am 3 Oct 2012 #चक्रवात
Blogger: veena sethi
आइये आपनी मातृभाषा और राष्ट्र भाषा को याद करें ...आज फिर से 14 सितम्बर का दिन आ  है और ये दिन हमने अपनी राष्ट्र भाषा के नाम कर रखा है, हो भी क्यों न...अरे ! जब जन्मदिन, सालगिरह,अवसान दिवस, पिता दिवस ... इसी तरह के न जाने कितने ही दिवस साल भर में  हैं, उसी प्रकार से राष्ट्र भाषा के लि... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   1:28pm 14 Sep 2012 #सवाल
Blogger: veena sethi
क्यूँ  तुम...??? क्यूँ  तुम चाक करते हो मेरा सीना...?क्यूँ मेरा लहू बहाते हो...?क्यूँ  मेरे दर्द पर;रह-रह कर मुस्कराते हो.क्यूँ मेरे आँखों के आंसूतुम्हारी ओठों की हंसी बन जाते हैं...?क्यूँ मेरे ग़मतुम्हारे लिए खिलौना बन जाते हैं...?क्यूँ मेरे दिल की आह तुम्हे सुकून दे जाती है...?क्... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   12:44pm 23 Aug 2012 #हंसी
Blogger: veena sethi
वाक् -युद्ध वाक् -युद्ध वाक् युद्ध याने शब्दों की लड़ाई। बिना शस्त्र या अस्त्र के लड़ा जाने वाला ऐसा युद्ध जिसमें कोई भी ख़ून खराबा नहीं होता और जिसमें किसी भी तरह के युद्ध क्षेत्र की आवश्यकता नहीं होती। इस वाक् युद्ध में कोई भी आपका शत्रु या मित्र आपके सामने हो सकता ह... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   12:07pm 21 Aug 2012 #शरीर
Blogger: veena sethi
सिमटते दायरेमजहब और कौम के दायरे मेंहम सिमट गए;इन्सान की इंसानियत सेहम भटक गए.जो गलियां-ओ-कूँचे रौशन थे गुल्जारों  से;वो  इन्सान की दरिंदगी  सेवीरान हो गए.जो कहते थे;बहिश्त जमीं पे लायेंगे,वो गैरों के टुकड़ों पेनीलाम हो गए.जो फूल खिले थे;बहारों के साए तले,वो खिजां में म... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   11:29am 15 Aug 2012 #अरमान
Blogger: veena sethi
वाक् -युद्ध वाक् -युद्ध वाक् युद्ध याने शब्दों की लड़ाई। बिना शस्त्र या अस्त्र के लड़ा जाने वाला ऐसा युद्ध जिसमें कोई भी ख़ून खराबा नहीं होता और जिसमें किसी भी तरह के युद्ध क्षेत्र की आवश्यकता नहीं होती। इस वाक् युद्ध में कोई भी आपका शत्रु या मित्र आपके सामने हो सकता है... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   2:00pm 12 Aug 2012 #शरीर
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आइये मकानको घर बनायें---- "घर” और "मकान”शब्द दो हैं पर अर्थ एक ही है अर्थात ' रहने की जगह'. औरदोनों शब्दों में एक मूलभूत अंतर है.'मकान' ईंट, रेत, सीमेंट से ढाला गयाएक आकर होता है और 'घर' उसमें बसेरा करने वाले इंसानों से बनता है.दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएँ, कहीं भी रह आयें इ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   1:34pm 2 Aug 2012 #गपशप
Blogger: veena sethi
प्यारा सा-एक घर हमाराआइये मकानको घर बनायें------- "घर” और "मकान”शब्द दो हैं पर अर्थ एक ही है अर्थात ' रहने की जगह'. औरदोनों शब्दों में एक मूलभूत अंतर है.'मकान' ईंट, रेत, सीमेंट से ढाला गयाएक आकर होता है और 'घर' उसमें बसेरा करने वाले इंसानों से बनता है.दुनिया के किसी भी कोने में चले... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   1:34pm 2 Aug 2012 #गपशप
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आंसू एक बूंदआंसू की एक बूंद (चित्र _गूगल .कॉम)बूंद याने  'कतरा'. बूंद याने गोल आकृति सा दिखाई देने वाला द्रव्य. ये बूंद खून की भी हो सकती है या फिर पानी की या शराब की भी. पर एक बूंद है जो अमूल्य है ओर वो है 'आँख से टपका आंसू ' आंसू है तो पानी की एक बूंद पर ये समेटे हुए है गम और ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   9:27am 19 Jul 2012 #तलाश
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मुझे इल्जाम मत देनामै इक आवाज हूँ मै इक आवाज हूँ.जब किसी मजलूम केमुँह से निकलूँ,  मुझे इल्जाम मत देना.मै...जब किसी कीसिसकी बनआँखों से छलकूँ मुझे इल्जाम मत देना.मै...जब किसी के दर्द मेंकराह बन जाऊं,मुझे इल्जाम मत देना.मै...जब किसी के दिल सेआह बन टपकूँ, मुझे इल्जाम मत देना.मै...ज... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:18pm 12 Jul 2012 #कराह
Blogger: veena sethi
सरहदों के साए लहू से सींच रहे सरहदों के साए;बारूद में पनप रहे दुनिया के सरमाये.हर तरफ चल रही बारूद की हवाएं;गोलियों से छलनी हो रहे          इंसानों के सीने;हर तरफ दरिंदगी में पनप के                                                 लोग लगे हैं जीने.हर तरफ बरस रहे बमों के गोले;हर जिस्म पर ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   1:50pm 5 Jul 2012 #
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