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Blog: चिट्ठीजगत

Blogger: sushma singh
सुषमा सिंहग्राम स्वराज विषय पर  मेघनाथ जी से हुई बातचीत ग्राम स्वराज आज भी महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि विकेन्द्रीकरण हमें इन्सानियत का रास्ता दिखाती है जो केन्द्रीकरण फांसीवाद का। एफडीआई या वालमार्ट क्या है? केन्द्रीय कंपनी केन्द्रीय फायदे के लिए। गांव से आने ... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   9:32am 18 Oct 2012 #Special
Blogger: sushma singh
शहरों में अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा तो मिल जाती है लेकिन गांव की अस्वस्थ्यता पर भी किसी की नजर चली ही गई। हरियाणा के सोनीपत जिले में दो गांव हरसाना और राठधना को पूर्णतः स्वस्थ्य बनाने के लिए हाल ही में एक साल के पाइलट प्रोजेक्ट को अस्तित्व में लाया गया है... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   1:12pm 22 Sep 2012 #
Blogger: sushma singh
संस्थाओं के लिए दिए गए सरकारी फंड का 40 प्रतिशत उनके तंत्र के लोग ही रखते हैं बाकि 60 प्रतिशत ही संस्था तक पहुँच पाता है|लगभग दस साल पहले प्रारंभ हुई गैर सरकारी संस्था ‘नवजीवन’ सामाजिक, न्यायिक और स्वास्थ्य जैसे तीन क्षेत्रों में काम कर रही  है। सामाजिक कार्य के तौर प... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   10:40am 9 Aug 2012 #
Blogger: sushma singh
वर्ण और जाति व्यवस्था की नीव तो सैकड़ो सालो पहले ही पड़ गई थी जिसका भुगतान आज उनकी पीढ़ी कमजोर, दलित लोगों को करना पड़ रहा है। जाति व्यवस्था के नाम पर लोग अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए है। आजादी के बाद की स्थिति और भी दयनीय होती जा रही है। जाति प्रथा के खिलाफ मानव अधि... Read more
clicks 276 View   Vote 0 Like   12:33pm 6 Jul 2012 #Ngo
Blogger: sushma singh
कृषि प्रधान भारत की अर्थव्यवस्था में 60 प्रतिशत से अधिक आबादी खेती-किसानी पर ही निर्भर रहती है। भारत की इससे दयनीय स्थिति और क्या हो सकती है कि एक तरफ गरीबों के खाने के लिए  अनाज नहीं है तो दूसरी तरफ लाखों टन अनाज सरकार की ढीलाई और गोदामों में हो रही लापरवाही की वजह से खर... Read more
clicks 244 View   Vote 0 Like   9:11am 14 Jun 2012 #food
Blogger: sushma singh
रंगमंच को नया रूप देने की प्रयास की गाथा को संपादक संजीव निगम ने मंजुल भरद्वाज के "थिएटर आँफ रेलेवेंस" किताब के जरिये दुनिया के सामने लाया है | इस किताब में रंगमंच की पेचीदगी को सुलझाने के लिए कलाकार मंजुल से किये गए सवाल जवाब तो पढ़ने को मिलेंगे ही साथ ही थिएटर की इस नय... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   12:13pm 23 May 2012 #
Blogger: sushma singh
रंगमंच को नया रूप देने की प्रयास की गाथा को संपादक संजीव निगम ने मंजुल भरद्वाज के "थिएटर आँफ रेलेवेंस" किताब के जरिये दुनिया के सामने लाया है | इस किताब में रंगमंच की पेचीदगी को सुलझाने के लिए कलाकार मंजुल से किये गए सवाल जवाब तो पढ़ने को मिलेंगे ही साथ ही थिएटर की इस नय... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   12:13pm 23 May 2012 #book review
Blogger: sushma singh
MR. SANTANU MISHRAआई एम कलाम डाक्युमेंट्री बनाने वाली स्माइल फाउंडेसन राष्ट्रीय स्तर की 2002 में स्थापित विकास संस्था है। वर्तमान समय में इसकी पहुँच सीधे तौर पर 2 लाख गरीब बच्चों  और युवाओं तक है। देश के 25 राज्यों में 160 कल्याणकारी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। पहला मिशन एजुकेशन दूसरा स्ट... Read more
clicks 277 View   Vote 0 Like   8:08am 14 Apr 2012 #Ngo
Blogger: sushma singh
सुषमा सिंह/ वाराणसी गुड़ियां-गुड़ों के खेल के बारे में तो सभी को पता होगा ही। जब वह हमारे लिए बेकार हो जाते हैं या अच्छे नहीं दिखते तो हम दूसरे ले आते हैं या उन्हें बेकार समझ फेक देते हैं। अगर असल जिंदगी के साथ भी ऐसा होने लगे, तो क्या होगा? लेकिन होता है ऐसा भी। वाराणसी में ... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   10:30am 23 Mar 2012 #
Blogger: sushma singh
"मेरी समाज से अपील है कि औरतों की रक्षा के लिए उन्हें आजादी दे। और उनके लिए कानून न बनाकर केवल और केवल उनके सहयोगी समाज का निर्माण करने से ही इनकी की समस्या का निदान हो सकता है।" खेड़ी नारूह गांव के कामरेड सुमेर सिंह का यह कथन उनकी अपनी डायरी के पन्नों में लिखा हैं। लगभग 1500... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   8:53am 2 Feb 2012 #
Blogger: sushma singh
जब हम सोचते रहते हैं कि हमें ऐसा करना है वैसा करना है उस समय वो सोच या हमारा सपना सच हो यह जरूरी नहीं है लेकिन यदि उसके पीछे सच्ची आस्था हो तो सपने को हकीकत होने से कोई नहीं रोक सकता है। ठीक ऐसा ही हुआ दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में जब बचपन से ही सेवा भाव की इच्छा रखने वाल... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   10:57am 16 Jan 2012 #Ngo
Blogger: sushma singh
अंधे बाप के बेटों ने ये कैसा अनाचार किया | लड़ न सके वीरों से तो नारी पर अत्याचार किया || भरी सभा में खीच कर लाया भाभी का अपमान किया | चीर हरण करने की कोशिश बीच भरे दरबार किया || असहाय पड़े थे वीर योद्धा कहने को लाचार भीष्म | औरों को क्या कहे जहा भीष्म पितामह तक हुए  लाचार || द्रौ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   8:12am 13 Oct 2011 #
Blogger: sushma singh
अशिक्षा एक ऐसा कारण है जो किसी भी देश के विकास में बाधा का काम करता है। यही वजह है कि माइक्रोसाफ्ट में कार्यरत ‘जाॅन वुड’ अपनी नौकरी छोड़ सबसे पहले 2002 में नेपाल के एक छोटे से गांव में ‘रूम टू रीड’ की नींव रखी। धीरे-धीरे यह सफर बढ़ता गया और आज दुनिया के 9 देशों में यह संस्था ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   6:15am 8 Oct 2011 #
clicks 158 View   Vote 0 Like   12:29pm 26 Aug 2011 #
Blogger: sushma singh
अन्ना के आन्दोलन से देश में व्याप्त एकता को जगा दिया है .कोई फर्क नहीं पड़ता हवा का रुख क्या हो. अब क्या हमें भ्रष्टाचार मुक्त भारत मिलेगा ............... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   2:26pm 24 Aug 2011 #
Blogger: sushma singh
 चित्रकूट धाम की सुन्दर छवि उन सभी लोगों के जहन में होगी जो पहले गए हैं| लेकिन अब मन्दाकिनी नदी के किनारे की हालत यह तस्वीर बाया कर रही है| भारत की नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है | क्या कोई है जो इन्हें बचाना चाहता है ?... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   9:19am 15 Jul 2011 #
Blogger: sushma singh
सुषमा सिंह\नरसिंगपुर (मध्य प्रदेश)रोटी, कपड़े और मकान की तरह ही आज शिक्षा व्यक्ति की मूल जरुरत  बन गई है। शिक्षा  की परंपरा हमारे देश में प्राचीन काल से ही चली आ रही है। नालंदा जैसे गुरूकुल की परंपरा भी भारत में ही रही। लेकिन आज बदलती दुनिया के साथ शिक्षा में क्या बदल... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   8:55am 15 Jul 2011 #
Blogger: sushma singh
शिवा और अभिजीत तिहाड़ जेल में बंद कैदी के ये वो दो बच्चे हैं, जो अपनी नयी जिंदगी की तलाश सिस्टर सेलीन के साथ कर रहे हैं... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   9:41am 21 Jun 2011 #
Blogger: sushma singh
हम रिक्शे पर सवार होकर अपनी मंजिल तक तो पहुंच जाते हैं | लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि इन रिक्शे वालो की जिंदगी कैसे चलती है| पैसो और छोटी-छोटी बातों को लेकर आये दिन उनसे झड़पे होते तो हम रोज ही देखते हैं | उसी बीच दिन भर की मेहनत के बाद भी उन पर पुलिस के डंडे बरसते  भी ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   9:31am 21 Jun 2011 #
Blogger: sushma singh
भारत में  बाल अधिकारकर्मी के रूप में प्रख्यात कैलाष सत्यार्थी है। वैसे तो इन्हें इनके कार्यों के बतौर कितने ही राष्ट्रीय  एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। लेकिन 1980 से इन्होंने बाल अधिकार के लिए जो जंग छेड़ी है। उसके अंतर्गत वर्तमान समय में लगभग 80,000 बच्चों ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   9:48am 7 May 2011 #
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