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Blog: कासे कहूँ?

Blogger: kase kahun
इस साल छुट्टियों में घूमने जाने का कार्यक्रम बना अलीबाग का .वही समय की कमी इसलिए ज्यादा दूर जा नहीं सकते.अचानक के प्रोग्राम में रिजर्वेशन  नहीं मिलता इसलिए कार से ही जाना तय हुआ.(वैसे भी न रिजर्वेशन की कोशिश की न ट्रेन से जाने का सोचा).बस तय हुआ की शनिवार की शाम निकलेंग... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   5:24pm 20 May 2012 #
Blogger: kase kahun
में आई इस जहाँ में बिना तुम्हारी इच्छा या मर्जी के अपनी जिजीविषा के दम पर सहा तुम्हारा हर जुल्म निशब्द पर तोड़ नहीं पाए तुम मुझे ये तुम्हारी हार थी.अपनी हार पर संवेदनाओं का मलहम लगाते तुम हंसती रही में तुम्हारी बचकानी मानसिकता पर दर्द दे कर कन्धा देने से शायद मिलता... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   6:10pm 12 Apr 2012 #आफरीन
Blogger: kase kahun
शहर की व्यस्ततम सड़क पर दिनेश की कार एक ठेले  से टकराई ओर ठेले को खींचता बूढ़ा नीचे गिर गया. ओह्ह ये बूढ़े भी न बुदबुदाते दिनेश नीचे उतरा .आस पास भीड़ जमा हो गयी थी बच निकलना नामुमकिन था मौके की नजाकत देखते उसने आवाज़ को भरसक नरम बनाते हुए कहा - बाबा माफ़ कर दो गलती हो गयी .... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   7:14pm 16 Feb 2012 #मजदूरी
Blogger: kase kahun
सुबह उठते ही याद आया आज तो मकर संक्रांति है .चलो अब से दिन थोड़े बड़े होंगे ओर इस हाड़ कपाऊ सर्दी से थोड़ी राहत मिलेगी.सबसे पहला ख्याल तो यही आया.सन्डे  की छुट्टी ढेर सारा काम ओर त्यौहार ओर सबसे बड़ी बात काम वाली बाई की छुट्टी.सब काम से निबटते दोपहर हो गयी. वैसे तो आज भी ठण... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   6:16pm 15 Jan 2012 #मकरसंक्रांति
Blogger: kase kahun
ब्लॉग जगत में आये मुझे लगभग ढाई साल हो गए है.इस समय में जो भी लिखा वो आप सभी लोगो ने सराहा.जिससे मुझे ओर लिखने की हिम्मत मिली .बीच बीच में कुछ रुकावटें भी आयी जिससे लिखना कम हुआ लेकिन लिखने का शौक ओर आपका प्रोत्साहन मुझे फिर यहाँ खींच लाया. आज में अपनी १०० वीं पोस्ट डाल रही ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   12:28pm 22 Dec 2011 #मातृत्व
Blogger: kase kahun
देर रात तक तारों संग ,खिलखिलाने को जी चाहता है.चांदनी के आँचल को खुद पर से, सरसराते गुजरते जाने को जी चाहता है. पीपल की मध्धिम परछाई से छुपते छुपाते ,खुद से बतियाने को जी चाहता है. चलते देखना तारों को ओर खुद ,ठहर जाने को जी चाहता है .रात के सन्नाटे में पायल की आहट दबाते, नदी ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   12:02pm 21 Dec 2011 #चांदनी
Blogger: kase kahun
वह  उचकती  जा  रही  थी  अपने  पंजों  पर .लहंगा  चोली  पर  फटी चुनरीबमुश्किल  सर  ढँक  पा  रही  थीहाथ    भी  तो  जल  रहे  होंगे .माँ  की  छाया  मेंछोटे  छोटे  डग  भरती ,सूख  गए  होंठों  पर  जीभ  फेरती ,माँ  मुझे  गोद  में  उठा  लोकी  इच्छा  कोसूखे  थूक  के  साथ हलक  में  उतारती .देख... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   4:55pm 11 Dec 2011 #बेबसी
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