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मनोभूमि

मास्टर साहब उसे डंडे से धो रहे थे और साथ ही एक ही वाक्य बार बार दोहरा रहे थे – बोल!! पढ़ेगा कि नहीं? वह घिघियाते हुए कहे जा रहा था – पढ़ूँगा.. पढ़ूँगा.. उसके ऐसा कहने पर मास्टर साहब प्रतिप्रश्न कर देते – पढ़ेगा? कैसे पढ़ेगा? ऐसे पढ़ेगा!! और वह डंडे की चोट से चीखते हुए ‘नहीं नहीं...
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Tag :यादें
  May 21, 2013, 10:39 am
गर्मी के दिन, स्कूल की छुट्टियाँ और नानी जी का घर. सवेरे सवेरे उत्पात शुरू हो जाता था खरबूजे को लेकर.. हमें हमेशा पूरा ही चाहिये होता था… और चावल का मांड विद हल्का सा नमक.. चूल्हे की धीमी आँच में भुने आलू का चोखा और धनिया की चटनी… रोटी को तवे पर कड़क करने की जिद… और अन्ततः दा...
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Tag :यादें
  May 19, 2013, 1:43 pm
एक समाचार चैनल ने देश में बढ़ते हुए रेप के मामलों पर चिन्ता व्यक्त करने के लिये चार होशियार लोगों को बुलाया. जिसमें दो नर थे दो नारी थी और तीसरा होशियारों का शहंशाह एंकर था.होशियारों से बेहद होशियारी से पूछा जाता है – आखिर क्या हो गया है इस समाज को? क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घ...
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Tag :यादें
  April 27, 2013, 4:07 pm
दो किनारे खामोश खड़े रहे, औरएक नदी निश्चिंत होकर बहती रही.उन किनारों ने उसे सहेज रखा था.अन्तर्मन तो सारे मनोभावों का एक संग्रह है. सहेजना हमारा काम है,और बिखेरना नियति का....
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Tag :मंथन
  April 12, 2013, 12:17 am
स्वाभाविक सी लगने वाली सत्यता कहीं भी नज़र आती है तो उसकी चीरफाड़ करने में कुछ शक्तियाँ स्वतः ही लग जाती हैं. ऐसे में एक कहानी याद हो आती है, जिसका टाइटिल राजनैतिक गलियारों से लेकर गाँव की गली तक मशहूर है – बन्दरबाँटवह कहानी कुछ ऐसी है, जिसमें दो सौभाग्यवती बिल्लियों को...
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Tag :यादें
  April 7, 2013, 1:03 pm
दूर पहाड़ों पर बर्फ की सफेद चादर बिछी थी और वह पथरीली नदी के किनारे पड़े एक बड़े से पत्थर पर अपने घुटने समेटकर बैठा था. सुबह की ताजी हवा में चिड़ियों का कलरव सुनना उसे अच्छा लग रहा था और पत्थरों से टकराती हुई जल की धार एक जीवन संगीत का निर्माण कर रही थी.उसका अन्तर्मन एक प्...
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Tag :यादें
  April 3, 2013, 12:06 pm
वह देखना चाहता था, उन आँखों में अपना प्रतिबिम्ब… लेकिन कभी वह पलकें झुका लेती तो कभी वह नज़रें नीची कर लेता… और अन्तर्मन में बुनी जा रही एक छवि कुछ अधूरी सी रह जाती. मन्दिर की घंटियाँ निरन्तर बज रही थी और वह सीढ़ियों पर बैठा उन पलकों के उठने की प्रतीक्षा कर रहा था जो एक मा...
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Tag :यादें
  March 9, 2013, 12:25 pm
आज ख्याल आया कि हमने सार्वजनिक तौर पर कभी व्यक्तिगत रूप से अपनी तस्वीरें शेयर नहीं की. कारण – तस्वीरें उतरवाने का ज्यादा शौक नहीं रहा कभी. क्योंकि हमेशा लेने की फिराक में रहता था. बचपन से शुरू करते हैं. ज्यादा तो है नहीं.. सिर्फ गिनी चुनी है.. और उसमें भी शेयर की जा सकने वाल...
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Tag :यादें
  February 4, 2013, 5:12 am
उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले ‘भावी दूल्हे’ तीस मार खाँ नहीं होते. यह जरूरी नहीं कि जो दिमाग से अच्छा है वह दिल से भी अच्छा हो. दिमाग से तो चोर उचक्के भी काफी अच्छे होते हैं.. पर्याप्त सम्मान देने के लिये उन्हें ‘शातिर’ कहकर सम्बोधित किया जाता है, जिसे सुनकर उनकी ब...
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Tag :यादें
  January 31, 2013, 2:04 pm
बहुत दिनों बाद भावनाओं में इतनी प्रबलता आयी है कि मनोभूमि पर कुछ लिखा जा सके. शाम की सुनहरी धूप में बैठकर अनुभवों को लपेटने का मजा ही कुछ और है. इस मजेदार घड़ी में कुछ ऐसे अतिरिक्त अनुभव भी मिल जाते हैं मानो हम चमत्कारों की दुनिया में मजे ले रहे हैं. सबसे बड़ा चमत्कार तो य...
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Tag :यादें
  January 27, 2013, 1:27 am
मनोभूमि बनाने से पहले मैं अधूरा सपनाबुनता था. बड़े बड़े सपने, जो अक्सर अधूरे रह जाते और मन दुःखी हो जाता. एक दिन गंगा किनारे बैठा सोच रहा था – क्या सिर्फ मेरे सपने ही अधूरे रह जाते हैं? यह प्रश्न मन में अभी उठा ही था कि बहते पानी में एक छोटी सी भँवर पैदा हो गयी… और किसी ने भी...
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Tag :यादें
  September 27, 2012, 12:07 pm
प्रधानमंत्री ने हमारी पिता वाली शैली का प्रयोग करते हुए कहा – पैसे पेड़ पर नहीं उगते..!! लेकिन उन्होंने पिता वाली शैली में जनता से यह नहीं पूछा – कि जो पैसे हमने तुम्हें कलम खरीदने को दिया था उसका क्या किया??‘समझदार’ जनता से यह पूछा जाना चाहिये कि गैस सिलिण्डर जब घर का खान...
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Tag :यादें
  September 22, 2012, 8:21 am
एक कहानी है. जिसमें एक छोटा बच्चा रो रहा होता है क्योंकि वह एक ऐसे चौराहे पर खड़ा होता है जहाँ से कई रास्ते जाते हैं. वह हैरान परेशान…. जाये तो किधर जाये? इतनें में उड़ते हुए एक चिड़िया आती है. वह उपर आसमान की तरफ़ देखता है और सोचता है कि यदि मैं भी उड़ सकता तो उपर जाकर सारे रास्तो...
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Tag :यादें
  August 24, 2012, 4:22 pm
आज बाबा भवसागर पार करके आये हैं और कीबोर्ड के पास बैठे हैं. शायद प्रवचन करने का मूड है उनका!! उनके स्वागत के लिये पुष्प तो हैं नहीं.. इस कीबोर्ड को ही उनके सिर पर समर्पित करता हूँ. हो सकता है खुश हो जायें.. भक्तजनों!! इस मनीषवा की मत सुनों, हमें भी फूल ही प्यारे लगते हैं सो वही च...
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Tag :यादें
  August 23, 2012, 7:58 am
हर रोज की भाँति शबरी अपने द्वार के सामने झाड़ू लगा रही थी, सामने के रास्ते से एक ग्रामीण गुजरा और चुटकी लेते हुए कहा – क्या रे शबरी!! इस बुढ़ापे में काहे जान देने पर तुली है? कौन है तेरा? जो तेरे यहाँ आयेगा. साफ सफाई तो तब की जाती है जब कोई अपना आ रहा होता है.शबरी मुस्कुराती है...
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Tag :यादें
  August 22, 2012, 7:48 am
सुबह सुबह पानी में घुलकर जो सुकून मिलता है वह वही जानता है जो पानी को महसूस किया हो. बाथटब में लोगों को नींद मारते देखा है, लेकिन तैरने में जो मज़ा आता है उसकी तो बात ही कुछ और है.अतीत में झाँकता हूँ तो अक्सर वह छोटा सा लड़का याद आता है जो नदी / तालाब के किनारे खड़ा लोगों को त...
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Tag :यादें
  August 21, 2012, 7:06 am
‘खोज करना’ जिज्ञासु मनुष्य का मूल स्वभाव होता है. हमने तो कई खोजी देखे हैं, जिनमें से एक आइने में नज़र आता है और दूसरा सड़कों पर कूड़े में कुछ खोजता नज़र आता है. कुछ और भी हैं जो पहली नज़र में पूर्णतः विक्षिप्त नज़र आते हैं लेकिन वे अपनी खोज से बेहद खुश नज़र आते हैं. सड़कों...
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Tag :यादें
  August 17, 2012, 5:17 pm
वेदान्त दर्शन की पुस्तक बगल में दबाये वे उस रास्ते से निकल रहे थे कि उनकी नज़र उस पर पड़ी. वह एक वेश्या की बेटी थी, जिसके तन पर पर्याप्त कपड़े नहीं थे. पर्याप्त अवलोकन कर लेने के बाद वे धीरे से मुस्कुराये और मन्दिर की तरफ चल पड़े थे.शाम होने को थी, उनके कदम तेजी से वापस घर की...
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Tag :यादें
  August 10, 2012, 11:54 pm
व्यापार कोई बुरी चीज नहीं है, यही तो उन चंद कलाओं में से के है जिनके बल बूते पर परिवार चलता है, समाज चलता है और पूरा देश चलता है. व्यापार न हो तो जीने के कोई मायने रहेंगे क्या? इन्सान दिन भर बैठा मक्खियाँ मारेगा या फिर ज्यादा एक्सपर्ट हो गया तो चिड़ीमार बन जायेगा. पुरातन यु...
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Tag :यादें
  August 7, 2012, 2:24 pm
इस तस्वीर में आपको कुछ अलग भले ही न दिखे लेकिन यह कुछ अलग जरूर कहना चाहती है. इस तस्वीर में आपकी तरफ देख रहा शक्स आपको कुछ बताना चाह रहा है.मैं इस वक्त दारागंज, इलाहाबाद के एक मन्दिर “नागवासुकी” की सीढ़ियों से नीचे उतरकर गंगा नदी के किनारे कुछ मछुआरों के साथ बैठा हूँ. सूर...
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Tag :यादें
  July 1, 2012, 5:59 pm
भिखारियों को आपने देखा ही होगा. उनके व्यवहार से भलीभाँति परिचित भी होंगे. सड़क पर पसरा भिखारी भी आजकल गुस्सा करने लगा है यह बोलकर कि मुझे भिखारी समझ रखा है क्या? अठन्नी देते हुए शरम नहीं आती?उस बेवकूफ को जरा सी भी समझ होती तो वह कुछ ही दिनों में लखपति हो गया होता अगर वह गुस...
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Tag :यादें
  June 18, 2012, 2:11 pm
वह ट्रेन में बैठ चुका था, प्लेटफॉर्म का शोर उस दरवाजे तक ही सीमित था जहाँ से डिब्बे का तापमान शरीर को राहत देना प्रारम्भ किया था. वह अकेला रहना चाहता था इसलिए उसने साइड लोवर वाली सीट चुनी थी और वह चुपचाप एकवर्णीय शीशे के उस पार निहार रहा था. उसे आश्चर्य हो रहा था कि इतनी च...
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Tag :यादें
  June 14, 2012, 5:01 pm
सम्बन्धों की मिठास और उसके बीच छिपे प्यार, आदर, समर्पण व विश्वास जैसी चीजों को सीधे प्रकृति से जोड़ देना हिन्दू धर्म की पहचान रही है. प्रकृति द्वारा हमें दी गई अमूल्य संपदा को हमने मानवीय रिश्तों के अनुसार प्रयोग में लाया है, कभी जरूरत से ज्यादा दोहन करने का प्रयास नहीं...
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Tag :यादें
  June 11, 2012, 1:13 pm
४६ बरस हो गये, एक फिल्म बनी थी “तीसरी कसम”. नई पीढ़ी ने अपनी पुरानी पीढ़ी को समझते हुए वह फिल्म देखी. विज्ञान की एक कहावत है – “ज्ञान (Knowledge) समान रहता है अभियांत्रिकी (टेक्नालॉजी) जरूरत के हिसाब से बदलती रहती है.”पुराने लोगों के पास ज्ञान बहुत था, तकनीक की शायद उन्हें ज्यादा...
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Tag :यादें
  June 9, 2012, 7:35 pm
यह एक खेल है जिसकी खोज एक विशेष उद्देश्य से की गयी थी. उन बच्चों के लिए यह सिर्फ एक खेल था, जिनकी हवेली में कुछ साल पहले बँटवारा हुआ था जिस पर गाँव के ही एक दबंग आदमी का कब्जा था. वह जाते जाते ऐसी गणित कर गया उस हवेली में.. कि आज तक उस गणित की पहेली हवेली वाले सुलझा ही नहीं पाये....
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Tag :यादें
  June 4, 2012, 2:32 pm
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