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प्रेम प्रभात (लेख संग्रह)

अगर डार्विन के विकासवाद पर ध्यान दें या फिर खुद अपने बचपन से अब तक के सफ़र को देख लें; तो हमें ज्ञात हो सकता है कि हम अपने अनुभव के आधार पर बदलाव लाते हैं, सीखते हैं और आगे का सफ़र जारी रहता है, इस यात्रा में दिमाग हमारा सहयोगी बन जाता है। यही है परिवर्तन, जो काम का है उससे काम ल...
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Tag :विकासवाद
  January 13, 2015, 9:29 pm
हद हो गयी मूर्खता की अब  तो....बेहोशी को सघन करने के उपाय किये जा रहे है। सारी व्यवस्थायें जो भी समाज ने जुटाई हैं, वो हैं ही इसीलिए की निद्रा और भी गहरी हो जाये। बचपन से ही विश्वास करने की शिक्षा दी जा रही है, आलोचना करने की, या प्रश्न उठाने की प्रतिभा दबाई जा रही है। तभी तो ...
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  December 26, 2014, 10:36 pm
सभी को शायद ये ज्ञात है कि इस कायनात का हर अवयव प्रगतिशील है यानि  की उन्नयन की ओर गतिशील। डार्विन भी यही कहता है। पर बड़ी हँसी आती है ये सोच कर कि, इस भीड़ को हो क्या गया है, कहने को तो ये युवा हैं पर युवा होने का एक भी लक्षण दिखाई नहीं देता। गुलामी की ऐसी आदत गले पड़ी है कि अब ...
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  June 4, 2014, 9:21 pm
ये मेरा स्वयं का मत है कि किसी अमुक की बात का सही अर्थ निकालने हेतु सर्वप्रथम तो उसकी वैचारिक पहचान होना जरुरी है क्योंकि बात के तो कई मतलब निकाले जा सकते हैं | और शायद कई वर्षों से जनता ये गलती करती आ रही कि वे बात के सही मायने नहीं खोज पाते और किसी के भी बारे में अपनी खुद क...
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  May 29, 2011, 2:00 pm
एक सुबह जब यात्रा करते वक्त देखा की टी. सी. महोदय एक महिला से दंड-शुल्क वसूल कर रहे थे,कुसूर ये था की उस महिला ने सामान्य टिकट लेकर आरक्षित बोगी में कदम रख दिया था ,ठीक है कोई बात नहीं | उस स्टेशन से कई और लोग भी थे जो की बिना टिकट  यात्रा कर रहे थे , एक और युवक से पूछा गया तो पत...
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Tag :भ्रष्टाचार
  May 28, 2011, 4:01 pm
एक दिन कि बात है - जब भगवान्  काफी थका हुआ महसूस कर रहे थे  कारण ये था कि वे अब लोगों कि इक्षाओं कि पूर्ति करते-करते परेशान हो गए थे .फिर एक दिन तंग आ कर उन्होंने कुछ नया करने का सोचा.वे अपने सलाहकार से बोले -     "हे सलाहकार जी ! में अब तंग आ गया हूँ ये मानव प्रजाति मुझे पर...
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Tag :मानव
  November 7, 2010, 12:46 pm
यह बात सर्वथा सत्य है कि मानवीयता सदैव ही आगे कि ओर अग्रसर रही है,जैसे कि हम प्रारंभिक तौर पर पशु थे फिर निरंतर विकास कि ओर प्रवत्त रहे और अंततः हम इस दौर में है जब कि हम सभ्य कहलाते है .अर्थात निरंतर परिवर्तन होते रहे, यहाँ पर इस बात का विशेष ध्यान रखा जाये कि बात वैचारि...
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Tag :अहंकार
  August 21, 2010, 8:34 pm
 आज दुनियां की  स्थति  देखते हुए एकदम ये विचार आया,कि जो कुछ हो रहा है आखिर ठीक ही तो है,  लोगों में आपस में मतभेद है,अविश्वास है ,हिंसा है तो आखिर गलत क्या हो रहा है .     क्योंकि लगभग एक बहुत ही कम प्रतिशत है जो लोग प्रेम,अहिंसा को  समझ सकते है और मानसिक रूप से भ...
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Tag :
  July 16, 2010, 10:14 pm
जीवन की सुन्दरता, विशिष्टता का एकमात्र रहस्य है उसकी अप्रत्यासित प्रकृति. जीवन अभोतिक है इसके अंतर्गत समय जैसी कोई अवधारणा नहीं होती ,हर पैमाना मानव निर्मित है कोई भी पल ,छोटे से छोटा  पैमाना अपने आप में विशिष्ट कहा जा सकता है.. जो भी लक्ष्य , मायने , अर्थ आज हम जानते है स...
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Tag :उत्साह
  June 10, 2010, 4:59 pm
                        कहा जाता है की प्रेम करना चाहिए पर समझ ये नहीं आता की प्रेम कैसे किया जा सकता है , क्या कोई ऐसी विधि मौजूद है जो हमें प्रेम करना सिखा सके .हर तरफ एक ही बात रटी जाती है की हर किसी से प्रेम करना ही जीवन है , पर क्या कहने वाले खुद  जान पाते  है ...
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Tag :सत्य
  June 7, 2010, 4:55 pm
   हम सभी शायद प्रेम को परिभाषित करने की नाकाम कोशिशे करते आये है, वैसे तो में भी एक निर्दोष सी कोशिश कर रहा हूँ पर कारन सिर्फ यही है की में खोज में हूँ और जो अब तक पता लगा है वो ये है की प्रेम एक ऐसा अनुभव है जो की खोजी को ही प्राप्त हो सकता है सिर्फ खोज में बने रहना ही प्...
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Tag :परमात्मा
  April 16, 2010, 2:54 pm
श्याम से कहो - पैसा कमाए मुरली तो बाद मे भी बजायी जा सकती है प्रातः काल का समय, नीला आकाश और कही दूर नदी किनारे के पास से आती हुई सुरीली बांसुरी की लय ,इस बासुरी की लय पर तो मानो सब की सब प्रकृति नाच उठी हो ,फिर इस मानब हृरदय मे तो झंकार बज ही उठेगी ,इस बासुरी की तान पर तो राधा ...
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  April 2, 2010, 6:21 pm
   हृदय में अजीब सी  खिन्नता नजर आती है,ऐसा नहीं है कि आसपास व्यस्तता का अभाव हो ,बात तो यही है ये व्यस्तता आखिर चाह क्या रही है. शांत भाव से यदि अवलोकन किया जाये तो हम पते है , कि कोई कथनी में मगन है तो कई करनी में ......... लक्ष्यों कि भरमार है, जिन पर लक्ष्यों का अभाव है उन पर ...
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Tag :व्यस्तता
  April 2, 2010, 6:15 pm
आज जब हम बहुत व्यस्त है ,तो रोजाना की दौड़-धूप में जीवन को जीना ही भूल जाते है. चेहरों की हंसी अजनबी हो जाती है तो इसी रोज की दौड़-धूप से ही कुछ हंसी के पलों को चुराने की कोशिश है,कुछ इस तरह --एक बस पकड़ रहा है,और एक सर क्योकि स्कूटर पंचर हो गया है और अब दफ्तर जाने में देर हो रही ...
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Tag :
  April 2, 2010, 6:13 pm
 मरने से पहले एक रपट मे:नाम :- जो पसंद होउम्र :- नब्बे साल मानवीय गड़ना के अनुसारकार्य :- जीवन को पालना-पोसनाअनुभव :- लगभग जीवन भरशिकायत का संपूर्ण विवरण (अपनी जुवानी ) :- साहब वैसे तो मैं आपसे कहीं ज्यादा बुजुर्ग हूँ ,मगर चूँकि आप सरकारी अफसर है , तो मुझे साहब ही कहना पड़ेगाबा...
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Tag :जीवन
  April 2, 2010, 6:11 pm
भाई बात कुछ इस तरह है की बहुत दिन हो गए जमाना अपनी रफ्तार में आगे बढा जा रहा है और हम हैं की लाइफ में कोई ट्विस्ट ही नहीं। ॥ कोई काम भी नहीं है और अन्दर दिल में बैठी कुंठित उर्जा जवानी में कुछ कर गुजरने के लिए कह रही है,कोई मुद्दा भी नहीं मिला की तोड़ फोड़ की जाये और लोगों की ...
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Tag :मारकाट
  April 2, 2010, 6:07 pm
जीवन ........बड़ा रहस्यमयी ,बड़ा रोचक सबाल हैजीवन का विकाश किस-किस तरह से होता आया , प्रकिरिती अपने अंदर क्या क्या समेटे हुआ है ,ये सब जान पाना तो एक अंत हीन यात्रा होगी यह सच है की मानव जिस तरह से विकसित हुआ है वह जिस तरह से अपना संरक्षण करता आया है ,कबीले तारीफ हैपरअपने आप को ब...
प्रेम प्रभात (लेख संग्रह)...
Tag :
  April 2, 2010, 6:02 pm
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