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Blog: प्रेम प्रभात (लेख संग्रह)

Blogger: Roopam Sadh
अगर डार्विन के विकासवाद पर ध्यान दें या फिर खुद अपने बचपन से अब तक के सफ़र को देख लें; तो हमें ज्ञात हो सकता है कि हम अपने अनुभव के आधार पर बदलाव लाते हैं, सीखते हैं और आगे का सफ़र जारी रहता है, इस यात्रा में दिमाग हमारा सहयोगी बन जाता है। यही है परिवर्तन, जो काम का है उससे काम ल... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   3:59pm 13 Jan 2015 #विकासवाद
Blogger: Roopam Sadh
हद हो गयी मूर्खता की अब  तो....बेहोशी को सघन करने के उपाय किये जा रहे है। सारी व्यवस्थायें जो भी समाज ने जुटाई हैं, वो हैं ही इसीलिए की निद्रा और भी गहरी हो जाये। बचपन से ही विश्वास करने की शिक्षा दी जा रही है, आलोचना करने की, या प्रश्न उठाने की प्रतिभा दबाई जा रही है। तभी तो ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   5:06pm 26 Dec 2014 #
Blogger: Roopam Sadh
सभी को शायद ये ज्ञात है कि इस कायनात का हर अवयव प्रगतिशील है यानि  की उन्नयन की ओर गतिशील। डार्विन भी यही कहता है। पर बड़ी हँसी आती है ये सोच कर कि, इस भीड़ को हो क्या गया है, कहने को तो ये युवा हैं पर युवा होने का एक भी लक्षण दिखाई नहीं देता। गुलामी की ऐसी आदत गले पड़ी है कि अब ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   3:51pm 4 Jun 2014 #
Blogger: Roopam Sadh
ये मेरा स्वयं का मत है कि किसी अमुक की बात का सही अर्थ निकालने हेतु सर्वप्रथम तो उसकी वैचारिक पहचान होना जरुरी है क्योंकि बात के तो कई मतलब निकाले जा सकते हैं | और शायद कई वर्षों से जनता ये गलती करती आ रही कि वे बात के सही मायने नहीं खोज पाते और किसी के भी बारे में अपनी खुद क... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   8:30am 29 May 2011 #
Blogger: Roopam Sadh
एक सुबह जब यात्रा करते वक्त देखा की टी. सी. महोदय एक महिला से दंड-शुल्क वसूल कर रहे थे,कुसूर ये था की उस महिला ने सामान्य टिकट लेकर आरक्षित बोगी में कदम रख दिया था ,ठीक है कोई बात नहीं | उस स्टेशन से कई और लोग भी थे जो की बिना टिकट  यात्रा कर रहे थे , एक और युवक से पूछा गया तो पत... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   10:31am 28 May 2011 #भ्रष्टाचार
Blogger: Roopam Sadh
एक दिन कि बात है - जब भगवान्  काफी थका हुआ महसूस कर रहे थे  कारण ये था कि वे अब लोगों कि इक्षाओं कि पूर्ति करते-करते परेशान हो गए थे .फिर एक दिन तंग आ कर उन्होंने कुछ नया करने का सोचा.वे अपने सलाहकार से बोले -     "हे सलाहकार जी ! में अब तंग आ गया हूँ ये मानव प्रजाति मुझे पर... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   7:16am 7 Nov 2010 #मानव
Blogger: Roopam Sadh
यह बात सर्वथा सत्य है कि मानवीयता सदैव ही आगे कि ओर अग्रसर रही है,जैसे कि हम प्रारंभिक तौर पर पशु थे फिर निरंतर विकास कि ओर प्रवत्त रहे और अंततः हम इस दौर में है जब कि हम सभ्य कहलाते है .अर्थात निरंतर परिवर्तन होते रहे, यहाँ पर इस बात का विशेष ध्यान रखा जाये कि बात वैचारि... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   3:04pm 21 Aug 2010 #अहंकार
Blogger: Roopam Sadh
 आज दुनियां की  स्थति  देखते हुए एकदम ये विचार आया,कि जो कुछ हो रहा है आखिर ठीक ही तो है,  लोगों में आपस में मतभेद है,अविश्वास है ,हिंसा है तो आखिर गलत क्या हो रहा है .     क्योंकि लगभग एक बहुत ही कम प्रतिशत है जो लोग प्रेम,अहिंसा को  समझ सकते है और मानसिक रूप से भ... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   4:44pm 16 Jul 2010 #
Blogger: Roopam Sadh
जीवन की सुन्दरता, विशिष्टता का एकमात्र रहस्य है उसकी अप्रत्यासित प्रकृति. जीवन अभोतिक है इसके अंतर्गत समय जैसी कोई अवधारणा नहीं होती ,हर पैमाना मानव निर्मित है कोई भी पल ,छोटे से छोटा  पैमाना अपने आप में विशिष्ट कहा जा सकता है.. जो भी लक्ष्य , मायने , अर्थ आज हम जानते है स... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   11:29am 10 Jun 2010 #उत्साह
Blogger: Roopam Sadh
                        कहा जाता है की प्रेम करना चाहिए पर समझ ये नहीं आता की प्रेम कैसे किया जा सकता है , क्या कोई ऐसी विधि मौजूद है जो हमें प्रेम करना सिखा सके .हर तरफ एक ही बात रटी जाती है की हर किसी से प्रेम करना ही जीवन है , पर क्या कहने वाले खुद  जान पाते  है ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   11:25am 7 Jun 2010 #सत्य
Blogger: Roopam Sadh
   हम सभी शायद प्रेम को परिभाषित करने की नाकाम कोशिशे करते आये है, वैसे तो में भी एक निर्दोष सी कोशिश कर रहा हूँ पर कारन सिर्फ यही है की में खोज में हूँ और जो अब तक पता लगा है वो ये है की प्रेम एक ऐसा अनुभव है जो की खोजी को ही प्राप्त हो सकता है सिर्फ खोज में बने रहना ही प्... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   9:24am 16 Apr 2010 #परमात्मा
Blogger: Roopam Sadh
श्याम से कहो - पैसा कमाए मुरली तो बाद मे भी बजायी जा सकती है प्रातः काल का समय, नीला आकाश और कही दूर नदी किनारे के पास से आती हुई सुरीली बांसुरी की लय ,इस बासुरी की लय पर तो मानो सब की सब प्रकृति नाच उठी हो ,फिर इस मानब हृरदय मे तो झंकार बज ही उठेगी ,इस बासुरी की तान पर तो राधा ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   12:51pm 2 Apr 2010 #
Blogger: Roopam Sadh
   हृदय में अजीब सी  खिन्नता नजर आती है,ऐसा नहीं है कि आसपास व्यस्तता का अभाव हो ,बात तो यही है ये व्यस्तता आखिर चाह क्या रही है. शांत भाव से यदि अवलोकन किया जाये तो हम पते है , कि कोई कथनी में मगन है तो कई करनी में ......... लक्ष्यों कि भरमार है, जिन पर लक्ष्यों का अभाव है उन पर ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   12:45pm 2 Apr 2010 #व्यस्तता
Blogger: Roopam Sadh
आज जब हम बहुत व्यस्त है ,तो रोजाना की दौड़-धूप में जीवन को जीना ही भूल जाते है. चेहरों की हंसी अजनबी हो जाती है तो इसी रोज की दौड़-धूप से ही कुछ हंसी के पलों को चुराने की कोशिश है,कुछ इस तरह --एक बस पकड़ रहा है,और एक सर क्योकि स्कूटर पंचर हो गया है और अब दफ्तर जाने में देर हो रही ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   12:43pm 2 Apr 2010 #
Blogger: Roopam Sadh
 मरने से पहले एक रपट मे:नाम :- जो पसंद होउम्र :- नब्बे साल मानवीय गड़ना के अनुसारकार्य :- जीवन को पालना-पोसनाअनुभव :- लगभग जीवन भरशिकायत का संपूर्ण विवरण (अपनी जुवानी ) :- साहब वैसे तो मैं आपसे कहीं ज्यादा बुजुर्ग हूँ ,मगर चूँकि आप सरकारी अफसर है , तो मुझे साहब ही कहना पड़ेगाबा... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   12:41pm 2 Apr 2010 #जीवन
Blogger: Roopam Sadh
भाई बात कुछ इस तरह है की बहुत दिन हो गए जमाना अपनी रफ्तार में आगे बढा जा रहा है और हम हैं की लाइफ में कोई ट्विस्ट ही नहीं। ॥ कोई काम भी नहीं है और अन्दर दिल में बैठी कुंठित उर्जा जवानी में कुछ कर गुजरने के लिए कह रही है,कोई मुद्दा भी नहीं मिला की तोड़ फोड़ की जाये और लोगों की ... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   12:37pm 2 Apr 2010 #मारकाट
Blogger: Roopam Sadh
जीवन ........बड़ा रहस्यमयी ,बड़ा रोचक सबाल हैजीवन का विकाश किस-किस तरह से होता आया , प्रकिरिती अपने अंदर क्या क्या समेटे हुआ है ,ये सब जान पाना तो एक अंत हीन यात्रा होगी यह सच है की मानव जिस तरह से विकसित हुआ है वह जिस तरह से अपना संरक्षण करता आया है ,कबीले तारीफ हैपरअपने आप को ब... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   12:32pm 2 Apr 2010 #
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