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मेरी यात्रा की कहानियाँ

बहुत दिनों के बाद कुछ प्रस्तुत कर रहा हूँ, आशा करता हूँ आपको ये रचना पसंद आएगी. चलोउठोफतह करो.हौसलें बुलंद करसीने को ज्वाला से भरमार्ग तू प्रशस्त कर.चलो,उठो,फतह करो.चेहरे पर मुस्कान लिएभीतर एक तूफ़ान भरज़ज्बे से विरोधी को परास्त कर. चलो,उठो,फतह करो.हौसलों के पंख खोलऔर...
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Tag :चुनौती
  January 12, 2016, 11:47 am
दीवार जब दीवार का जिक्र होता है तो पता नहीं क्यों मुझे मेरे गाँव की याद आ जाती है. मेरे दादा जी के समय की वो दीवार. जो हमे अनायास ही देखती, हमारी हर हरकतों को ऐसे देखती कि अभी बोल देगी हमारी सारी शरारतें अम्मा को. वो दीवार हम सब भाई बहनों को कभी कभी इतनी बेबस दिखती कि हम उससे ...
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Tag :बहन
  July 25, 2013, 6:19 pm
रंग वो कहते हैं मैं बदनाम हो गया हूँ, उनकी गली में आम हो गया हूँ. मेरा आना भी उन्हें नागवार गुजरता है, उनके दरीचे का पर्दा भी नया लगता है. छत के फूल भी अब मुरझाने लगे हैं, सीढ़ियों पर भी अब जाले लगने लगे हैं. बदल दिया है समय आने जाने का, नज़र मिलने पर भी रंग अब बदलने लगे हैं. Copyright ...
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Tag :फूल
  May 10, 2013, 5:43 pm
इत्तेफाक मेरी दिल्ली में पहली पोस्टिंग थी. कहते हैं दिल्ली दिलवालों की है. मुझे भी पहले दिन ऐसा ही लगा था जब में ऑफिस पहली बार पंहुचा. ऑफिस के हर आदमी ने मेरा दिल खोल कर स्वागत किया. उनमे से कुछ लोग मेरे ही तरफ के निकले तो, दिल को तस्सली मिली कि चलो कोई तो मिला अपनी तरफ का. सर...
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Tag :इत्तेफाक
  January 28, 2013, 4:51 pm
The Bankster Book Book Review for blogaddaThe story revolves around different places across the globe .giving the description of various places so apt and true to life. This book takes us from Angola to Cochin to Vienna to Mumbai. Each location introduces different stories with different characters weaving different plots altogether. Connecting these stories and maneuvering with multiple scenarios with various characters spanning different continents playing simultaneously, the story makes for a good read. In the first few chapters you feel like lost in several small stories but as the story takes it pace, all pieces fall into place giving you a crystal-clear  picture of a nail-biting plo...
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Tag :
  December 13, 2012, 12:27 pm
मेट्रो में लद्दाख का अनुभव लद्दाख के बारे में मुझे सबसे पहले जो याद आता है वो है बेहतरीन नज़ारा, जो सिर्फ टीवी में देखा है. लद्दाख मुझे शुरू से ही अच्छा लगता है. पर दूर इतना है पूछो मत. आज़ादी से पहले जब आज़ादी के आन्दोलन होते थे तो सबको दिल्ली में प्रदर्शन करने के लिए कहा ...
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Tag :प्लेटफार्म
  October 4, 2012, 5:54 pm
गालों पर तेरे बरसात का पानी,हवाओं से कांपते होंठ गुलाबी.नशीली आँखों का रंग आसमानी,नाक पर गुस्सा है बेमानी.सिकुड कर तेरा बैठना,जैसे फूल की हो खिलने की तैयारी. हवा के झोके ने भी ठानी,तेरे जुल्फों से करनी थी जैसे उसे मनमानी. बार-बार तेरे गैसुहों का लहराना कर आँखों पर आना, ते...
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Tag :जुल्फों
  September 11, 2012, 10:41 am
दूर रह कर भी कितने पास हो तुम,मेरी साँस की आस हो तुम.महसूस होता है जेहन तक तू,चाहता हूँ और करू महसूस तुझे.हर लेती साँस के साथ,करता हूँ जब ऑंखें बंदचेहरा नज़र आता है तेरावो मासूम अदा,अल्हड हंसी,वो जुल्फों का अँधेरा,वो गुलाबी होंठों का नशा.आज भी महसूस करता हूँ तुझे इन हवाओं म...
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Tag :मासूम
  September 3, 2012, 1:12 pm
रुको नहीं, थको नहीं, किसी से तुम झुको नहीं.दिक्कतें हज़ार हो,मुश्किलों का पहाड़ हो.बन कर रोशनी तुम,मोड़ दो अँधेरे का मुँह. रुको नहीं, थको नहीं, किसी से तुम झुको नहीं.लोग कहेंगे, कहते रहेंगे,कुछ ना करने वाले सिर्फ बात करेंगे.धार लगा अपनी हिम्मत को,मान से लगा आग सबके अभिमान ...
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Tag :इतिहास
  May 2, 2012, 3:04 pm
मेरी दिल्ली. कहने को तो ये सबकी है. थोड़ी सी मेरी भी. अब मैं ऐसा कह सकता हूँ क्योंकि दिल्ली अब मेरी यादों में भी बस चुका है. मुझे रहते हुए वैसे तो कई साल हो गए हैं. पर आज भी वो पल याद है जब मेरी तुमसे मुलाकात हुई थी. कोई 7साल पुरानी 19जुलाई २००४ की बात है.  मैं एक छोटे से शहर से दिल...
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Tag :बर्थ डे
  January 13, 2012, 6:04 pm
मुझे याद नहीं मैंने फ़िल्में देखना कब शुरू किया, हाँ इतना जरुर याद है की देखी बहुत सी फ़िल्में हैं. पहले आज की तरह 24घंटे का चैनल नहीं हुआ करते थे.एक मात्र देखने का जरिया दूरदर्शन हुआ करता था. जोकि हफ्ते में 2बार फिल्मे देता था शनिवार और रविवार. पर हम लोगों के पास एक और भी जर...
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Tag :VCR
  December 19, 2011, 5:47 pm
अक्सर रात में जब ऑफिस से लेट घर जाता हूँ तो घर पहुच कर बड़ा अजीब लगता है. क्योंकि मेरी माता श्री को छोड़ कर सब सो चुके होते हैं. आपके पास किसी से बात करने का समय नहीं होता. सबसे बड़ी बात होती है कि कभी-कभी मेरा भतीजा जिसे रात में सुलाने के लिए नाकों चने चबाना पड़ते हैं, वो भी म...
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Tag :जद्दोजहद
  November 8, 2011, 4:46 pm
रविवार की रात का कोई 12बजा होगा, आखों से नींद कोसों दूर थी और लगता भी नहीं की जल्दी नींद आने वाली थी, क्योंकि कल मेरी मुलाकात उन लोगों से होनी थी जो आज देश में अपना एक मुकाम रखते हैं. पिछले कुछ सालों से उन्हें लगातार टीवी पर देख रहा हूँ, यदा-कदा टिप्पणी भीकरता था पर अपने दिल ...
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Tag :रघु
  November 1, 2011, 4:51 pm
11अगस्त की बात है शाम के करीब 7 बजे होंगे. बादलों ने आज महीनो से सूखी धरती को सराबोर करने की ठान रखी थी. पानी इतनी तेज बरस रहा था,मानो आज ही सारा पानी गिर जायेगा. बूंदों की आवाज़ और सड़क पर पानी का बहाव दोनों ही अच्छे लग रहे थे. मेरा भी ऑफिस खत्म हो चुका था. घर जाने का इंतज़ार था, पर ...
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Tag :दुप्पटे
  August 23, 2011, 6:27 pm
मेट्रो में आजकल भीड़ ऐसे बढ़ रही है जैसे रेलवे स्टेशन में चूहे. हर कोई मेट्रो से ही जाने की जिद करता है. दिल्ली तो छोडिये बाहर का भी कोई दिल्ली आता है तो सबसे पहले मेट्रो का ही जिक्र करता है. मेट्रो है भी शानदार नए चमचमाते डिब्बे, एसी का आनंद, कम किराया और बस से जल्दी पंहुचाने ...
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Tag :राजीव चौक
  August 5, 2011, 7:45 pm
कौन हूँ मैं,जानता नहीं हूँ,अँधेरे गर्भ से निकला,महीनों तक पला,नाल से किसी से था जुड़ा,क्यों हुई उत्पत्ति मेरी,अंजान था मैं,बेखबर जब प्रकाश ने छुआ मुझे,ऑंखें हुई छुईमुई,जुदा कर दिया नाल से मुझे,फिर भी अंजान रहा बरसों तक,कौन हूँ मैं ?अ,म,ब से गुनगुनाता हुआ,अपनी ही आवाज़ से खुश ...
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Tag :तनहा
  July 5, 2011, 3:01 pm
ये दिल्ली है मेरी जान ! जानते हो क्यूँ ? क्योंकि यहां दिल वालों की मंडली रहती है । हर कोई दिल देने और दिल लेने में लगा हुआ है । कमी है बस तो एक कि टाइम नहीं है किसी के पास और अगर है तो फिर खूब सारा फिर  तक जब तक आप उससे उब नहीं जाते आप उसे छोड़ नहीं सकते । मगर दिल्ली में सब कुछ तेज ...
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Tag :कॉमनवेल्थ
  June 15, 2011, 1:34 pm
मेट्रो अपने एक तरह की माया नगरी है जहां हर कोई कलाकार है और वही उसका निर्देशक है. हर रोज एक नई फिल्म लिखी जाती है और उस पर काम होता है । जिसमे मेट्रो एक बड़ा ही महत्वपूर्ण रोल निभाता है । क्योंकि मेट्रो प्यार की नई फ़सल वालों के लिए सबसे अच्छे अड्डे बनते जा रहे हैं । कन्धों...
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Tag :प्रोफाइल
  May 27, 2011, 3:50 pm
मेट्रो में अब रोज सफर होता है, जो हर रोज इंग्लिश के सफर में बदलता है । क्योंकि हर कोई एक ही मेट्रो में जाना चाहता है क्योंकि उसे सबसे पहले जाना है और ऑफिस में शायद बॉस की डांट से बचना है । इसमें पुरुष तो पुरुष महिलाएं भी पीछे नहीं है ।  वो भी भाग-भाग कर पुरुषों से कंधे से कंध...
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Tag :भाग-भाग
  May 5, 2011, 1:13 pm
जागती ऑंखें बताती हैं...कोई सोया नहीं रातभर, याद करता रहा तारे गिन, वो रातभर।बिस्तर की सिलवटें कहती हैं...कोई सोया नहीं रातभर, गिनते रहे करवटों का बदलना, वो रातभर । किताबों में रखे गुलाब बताते है...कोई सोया नहीं रात भर,  मुरझाये फूलों से पाते रहे खुश्बू का अहसास, वो रात भर । ख...
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Tag :आवाज़
  April 12, 2011, 6:45 pm
उलझी हुई डोर सी लगती है कभी,हर सुलझती गाँठ से उलझती है जिंदगी. क्या कहू तुझे ऐ जिंदगी, हर पल समझता हूँ तुझे फ़ना जिंदगी. बहुत कुछ सीखा है तुझसे,गिर कर उठना, फिर चलना है जिंदगी. जब सोचा बहुत हुआ अब और नहीं, हिम्मत करके लड़ना है जिंदगी. मुक्कदर में लिखा है मिलेगा, ना मिले गर तो...
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Tag :साहसी
  March 29, 2011, 3:26 pm
मेरे और मेरे भतीजे अरनव के बीच ऐसा होता है, तो सोचा सब चीजों को शब्दों के रूप में आपके सपने प्रस्तुत कर दूँ । आशा करता हूँ मेरा ये प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।               मासूम बचपन चंचल आँखों के नए सपने, हर रोज खिलौनों से खेले ।अपनी हर बातको मनवाती, तेरी ये मासूम ऑंखें ।हर सवा...
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Tag :खिलौनों
  February 18, 2011, 5:47 pm
कहते हैं बड़े-बड़े शहर कभी नहीं सोते पर मैं कहता हूँ वो जागते हैं आपने सपने पूरा करने के लिये । क्योंकि वो हर समय अपनी धुन में रहते हैं । और सब के सब अपने सपने को पूरा करने के जुगाड में लगे रहते हैं । इसलिये घर में लोग कम हो रहे हैं और रोड पर बढ़ रहे हैं जाने किसकी तलाश में भट...
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Tag :लाल बत्ती
  February 8, 2011, 6:02 pm
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