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हरिहर झा

सद्भावना का इत्र सुगंधित इस फूल के हार मेंरिमझिम बरस रही फुहार का , आनन्द त्योहार में हार गई है रुदन-रागिनी मुस्काने झेल रहीसब के चेहरों पर हँसी की , फुलझड़ियां खेल रही किरण निकली इन्द्रधनुष सी बादल से छन छन केउजियारा लो फैल गया है गलियारे में मन के चांदनी धरती पर द...
हरिहर झा...
Tag :Uncategorized
  January 4, 2012, 8:20 am
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