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Blog: अयस्क

Blogger: अमिता नीरव
i am a blogger and now i am writing stories.... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   7:27am 25 Feb 2019 #
Blogger: अमिता नीरव
मृत्यु का सारा दर्शन चाहे वह पूर्वी हो या फिर पश्चिमी... मरने वाले की दृष्टि से ही है। उसके अपनों के लिए कोई दर्शन नहीं, कोई सांत्वना, कोई राहत नहीं...। उसे तो बस अभाव, दुख, अकेलापन सहना ही सहना है। कोई कितनी भी कोशिश कर ले, जब मन दुखी हो तो नहीं ही बहलता है। डॉ. शुद्धोधन अवस्थी ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   2:47pm 16 Jan 2018 #
Blogger: अमिता नीरव
आसमान कितना खुला और उदार है... धऱती कितनी तंग। लेकिन इसके तंग होने में धरती का क्या दोष है? धरती भी तो उतनी ही उदार और खुली हुई रही होगी न कभी? कभी... कभी... कब कभी? जब सभ्यताओँ की शुरुआत नहीं हुई थी। तो इंसानों ने ही धरती को इस कदर नर्क बना दिया है। कितना सहज जीवन हुआ करता होगा न...... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   2:03pm 4 Jan 2017 #
Blogger: अमिता नीरव
बारिश तन्मय जब ऑफिस से निकला था, तब लग नहीं रहा था कि इतनी तेज बारिश होगी। ठीक है कि बारिश के मौसम में यदि बारिश नहीं होगी तो कब होगी, लेकिन इतनी धुआँधार कि कुछ सूझ ही नहीं रहा हो, तभी तो उसे यहाँ अपनी गाड़ी खड़ी करनी पड़ी थी। बबूल के पेड़ के नीचे जिस वक्त उसने अपनी गाड़ी टिक... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   4:07am 26 Dec 2016 #
Blogger: अमिता नीरव
1साइट पर मैं अपनी इंटीरियर डेकोरेटर के साथ था। उसे बताने लाया था कि कहाँ और कैसा फर्निचर बनेगा। बजट क्या होगा, उसके साथ इंजीनियर भी था...। उस अधबने फ्लैट के ड्राईंग रूम में लगने वाली बड़ी-सी खिड़की की चौखट से हाथ टिकाकर मैं दूर देख रहा था। बारिश का मौसम अभी गया-गया ही था। उ... Read more
Blogger: अमिता नीरव
एक और दिन... जब उसकी नींद खुली तो पहला विचार उसे यही आया। उसे लगा कि आज नींद कुछ ज्यादा ही जल्दी खुल गई है, क्योंकि अभी तक अलार्म नहीं बजा है और उसे लग रहा है जैसे उसकी नींद पूरी हो गई है। उसने टेबल पर रखी घड़ी की तरफ नजर डाली... ओफ.... एक घंटा देर से उठी है। अब उसके पास किसी भी तरह ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   5:10pm 16 Sep 2016 #
Blogger: अमिता नीरव
आधे घंटे पहले सभी कैंटीन में बैठे हुए थे। घड़ी ने साढ़े चार बजाए कि लड़कियों को घर की याद आने लगी और एक-एक कर सभी अपने-अपने घरों की ओर चल दिए, यूँ भी आज इस सेशन की आखिरी क्लास थी... कल से तो पीएल लगने वाली है, हर कोई जरूरी काम से ही यहाँ आएगा, हम होस्टल वालों का तो यही ठिकाना है, तो य... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   1:18pm 1 Sep 2016 #
Blogger: अमिता नीरव
बहुत कुछ खोकर भी जिंदगी सब कुछ दे देती है, ऐसा तो नहीं है। कुसुम ने अपनी उजड़ी दुनिया को तरतीब दी, बहुत कुछ छोड़ा, बहुत कुछ त्यागा, फिर भी नहीं जीत पाई, अपनों से... हार गई और हार उसने स्वीकार कर ली। मनु ने कुसुम को अकेला छोड़ दिया... उसने खुद से ही जंग लड़ी... अभी बीच जंग में ही था... अपने... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   2:39pm 27 Jun 2016 #
Blogger: अमिता नीरव
दुःख नहीं हो तब भी सुख हो ये जरूरी तो नहीं है। मशीन को दुःख-सुख का एहसास नहीं होता। कितनी जिंदगी यूँ ही मशीन बने हुए निकल जाती है, पता ही नहीं चलता। अनु के जीवन में कोई दुःख नहीं है, लेकिन वह लगातार खुद से सवाल पूछती है कि क्या कोई सुख भी है...? खुशी के लिए तो कई मौके आते रहते है... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   12:11pm 15 Nov 2015 #
Blogger: अमिता नीरव
बाहर बर्फ गिर रही है, सब जगह बस सफेदी ही सफेदी नजर आ रही है। सप्ताह भर में ये पूरा शहर नाप लिया है, जिसे मसूरी कहते हैं। सुरकुंडा देवी से लेकर धनोल्टी के जंगल तक... तुहिन को कोई बहुत मजा नहीं आया। बस कैंप-टी फॉल के ठंडे पानी में उसने मजा किया...। बर्फबारी के शुरुआती दिन को छोड़... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   2:39pm 2 Nov 2015 #
Blogger: अमिता नीरव
अक्सर यकीन तब डगमगाता है, जब उसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे वक्तों में यकीन शब्द से ही कोफ्त होने लगती है। मन पर नियंत्रण नहीं होता... सोचो कि सब ठीक होगा, लेकिन कोई एक सुराख हुआ करता है, जहाँ से रिसकर अँधेरा चला आता है। ठीक कैसे होगा... अभी तो इम्तेहानों की शुरुआत हुई ह... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   2:27pm 13 Aug 2015 #
Blogger: अमिता नीरव
जून निकल रहा है और मेरी बेचैनी बढ़ने लगी है। हर साल इन दिनों यही होता है। आखिरकार इन्हीं दिनों उच्च शिक्षा में तबादले जो होने होते हैं। पता नहीं मैं इतना क्यों घबराती हूँ, तबादलों से... या कि किसी भी तरह के बदलाव मुझे असहज कर देते हैं? क्या उम्र बढ़ने पर ऐसा ही होने लगता है? ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   4:15pm 29 Jan 2015 #
Blogger: अमिता नीरव
रविवार का दिन था, स्कूल की छुट्टी। सरकारी स्कूलों में यूँ भी होमवर्क-फोमवर्क जैसा कुछ हुआ नहीं करता था। इसलिए दिन भर उसके फुदकने-खेलने के लिए था। वो यूँ ही घर में उपर से नीचे और नीचे से उपर के चक्कर लगा रही थी। पता नहीं क्यों, उसके बहुत दोस्त नहीं थे। पिता सब्जी लेकर अभी-अ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   5:25pm 27 Nov 2014 #
Blogger: अमिता नीरव
दिसंबर जा रहा था..... वो गुजरते साल का एक और छोटा-सा दिन था...... गुलमोहर के पेड़ के नीचे धूप और छाह से बुने कालीन पर वो मेरे सामने बैठी थी। उसके सिर और कंधों पर धूप के चकते उभर आए थे..... मोरपंखी कुर्ते पर हरा दुपट्टा पड़ा था......कालीन की बुनावट को मुग्ध होकर देखती उस लड़की ने एकाएक स... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   10:44am 22 Sep 2014 #
Blogger: अमिता नीरव
कभी यकीन ही नहीं हुआ कि आत्मा-वात्मा जैसा कुछ हुआ करता है। जो ना बायोलॉजिकली कुछ हो ना ही सायकोलॉजीकली, उसका क्या निशान...? कहते रहे कहने वाले कि उसका इतना वजन होता है और वो होती है... होती है तो कहाँ होती है? आत्मा मरती नहीं है, शरीर मरते हैं, लेकिन जितने शरीर मरते हैं, उससे कह... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   4:37am 4 Apr 2014 #
Blogger: अमिता नीरव
‘हमारे बीच अब कुछ भी नहीं रहा...।’ – सपाट चेहरे और चुराती नज़रों से उसने संयुक्ता से कहा। अवाक् और आहत संयुक्ता की आँखों में आँसू आए तो लेकिन फिर पता नहीं कहाँ चले गए...। उसने गहरी नज़र से उसे देखा, लेकिन उसने संयुक्ता की तरफ पलट कर नहीं देखा और सामने की तरफ देखते हुए स्टीयर... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   5:01am 24 Jan 2014 #
Blogger: अमिता नीरव
माँ को हमेशा ही ये दुख रहा है कि इस लड़की का घर के किसी काम में मन नहीं लगता है। कभी उन्हें बेटी की माँ होने का सुख भी नहीं मिला। अपनी छोटी बहन की छोटी-छोटी बेटियाँ घर का काम करती और माँ को आराम देती, लेकिन उनकी बेटी घर के काम में जरा भी हाथ नहीं बँटाती थी। कोई पढ़ने-लिखने मे... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   4:51pm 10 Nov 2013 #जीवन
Blogger: अमिता नीरव
जाने किसका नुकसान बड़ा है, या किसका दुख बड़ा है, लेकिन लगभग पांच महीने बाद जब मैंने उसे देखा तो लगा कि शायद मैंने अपने दुख को बड़ा समझ लिया है। उस दोपहर जब मैं उससे मिला तो वह अपनी खिड़की के नीचे दीवार से पीठ लगाए बैठा था, हमेशा की तरह कमरे का दरवाजा खुला हुआ था पश्चिम की तर... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   6:06am 5 Sep 2013 #सपना
Blogger: अमिता नीरव
तू नींद की गोलियां कब से लेने लगी?अरे... मैं पूर्वा के क्लिनिक में हूं। आजकल वो खुद को ही चौंकाने लगी है। कभी रात-रात भर जाग कर निकालने में... कभी ऑफिस में पागलों की तरह काम करते हुए, जब सब चले जाते हैं और ऑफिस बंद करना होता है तब प्युन आकर कहता है, ऑफिस बंद करना है, तो कभी 60 की स्... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   12:45am 6 Apr 2013 #जीवन
Blogger: अमिता नीरव
जानता हूँ कि माँ चिंता करेगी, लेकिन ऐसी उद्विग्न मनस्थिति में कैसे माँ का सामना करूँ.... फिर भी आखिर घर तो जाना ही था। घर पहुँचा था, माँ ने एक उत्सुक नजर चेहरे पर डाली थी, मैंने नजरें झुका ली थी। जाने कैसे माँएँ जान लेती हैं कि कहाँ दर्द है और कहाँ मरहम रखना है... वो चुप रहीं। ए... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   11:12am 3 Feb 2013 #जीवन
Blogger: अमिता नीरव
उस दिन फिर दीदी मुझे चकमा देकर निकल गई। बहुत देर तक मैं उनके पीछे लगा रहा, फिर वो मेरे साथ खेलने लगीं जब मैं खेल में डूब गया तो वे धीरे से पिछले दरवाजे से निकल गई। थोड़ी देर बाद जब मैं खेल से उकता गया तो याद आया कि दीदी तो मेरे साथ ही थी। फिर घऱ भर में उन्हें ढूँढा, जब नहीं मिल... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   4:40am 6 Sep 2012 #जीवन
Blogger: अमिता नीरव
कोई वजह तो रही ही होगी, उसके इस तरह जल्दी उठ जाने की...। रात को भी देर तक नींद नहीं आई थी, जागती रही थी, देर तक.... यूँ ही करवट बदलते-बदलते... तमाम तरह के विचार, अलग-अलग दिशाओं में दौड़ते घोड़ों की तरह और वो उसमें जुती गाड़ी की तरह खिंचती ही जा रही थी। किसी भी विचार को पकड़ पाने में ... Read more
clicks 239 View   Vote 0 Like   4:02am 28 Jun 2012 #हकीकत
Blogger: अमिता नीरव
बात तो बहुत छोटी थी, लेकिन वहाँ जाकर लगी, जहाँ की जमीन कांक्रीट थी, गहरे जाकर गड़ी थी। पता नहीं किस विषय पर शुरू हुई बहस बढ़ते-बढ़ते झगड़े तक जा पहुँची और सुकेतु ने चिल्ला कर कह दिया कि – ‘तुम मेरे घर से निकल जाओ... अभी....।’ आँखें भर आई थी अश्लेषा की.... वो अवाक् थी... एक-साथ कई चीज... Read more
clicks 283 View   Vote 0 Like   8:10am 20 May 2012 #हकीकत
Blogger: अमिता नीरव
थक चुकी थीं संघर्ष करते-करते.... पता नहीं कितने अरसे से वो इसी तरह जी रही है। अब सोचें तो याद ही नहीं आता है, अब क्या करें? छोड़ दे खुद को डूबने के लिए...., क्योंकि संघर्ष करते-करते न सिर्फ थक गई है वह बल्कि अब तो ऊब भी होने लगी है। यदि छोड़ दें खुद को तो... या तो डूब जाएगी या फिर ये प... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   6:49am 25 Dec 2011 #
Blogger: अमिता नीरव
शरद की मीठी-सी शाम का मजा खराब कर रहे थे लाउड-स्पीकर पर भजन के नाम पर बज रही पैरोडी। एक तरफ घर पहुँचने की हड़बड़ी, दूसरी तरफ जाते हुए कुछ जरूरी काम निबटाने की मजबूरी और उस पर ट्रेफिक की समस्या और ये दिमाग का फ्यूज उड़ा देने वाला शोर...। घट-स्थापना का दिन और चारों ओर त्योहार क... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   4:09am 6 Oct 2011 #कहानी
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