Hamarivani.com

किरण की दुनिया

बीते बरस बीत गए ये सोच कर की आने वाले बरस कैसे बीतेंगे थोड़ी सी ख़ुशी देकर या बेरुखी से मुह मोड़ कर फिर चल देंगे ,साथ छोड़ कर। ये क्रम यूं ही चलेगा ,ये रहा गुजर रहेंगे हमारी अंतिम घड़ी तक ।लोग बतियाना चाहते है लेकिन बाते नहीं हैं। हालांकि हम वैश्विक हो गए है लेकिन ये हो कर कोलाह...
किरण की दुनिया...
Tag :
  January 1, 2018, 12:12 pm
एक था सरवनपालकी उठाता थाजेठ की लू मेंपूस के जाड़े मेंगीत गाता थाचैता सुनाता थासरवन की पालकी मेंठहर गया एक दिनचुलबुला वसंतप्रीत कुसुंभ के संगफिर प्रेम रंगा, फागुन रंगारंग गया वसंतप्रीत कुसुंभ के संगअब पग फेरा नहींवसंत ठहरा वहीइतिहास हुआ क्रुद्धमौसम हुआ रुद्धइतिहास...
किरण की दुनिया...
Tag :
  December 29, 2017, 6:00 pm
उसकी पीठ पर बैजनी फूल बंधे थे और हाथ में सपने अभी अभी उगे पंख उसने करीने से सजा रखे थे कुछ जुगनू उसके होठों पर चिपके थे कुछ हँसी बन आसमान मेंवो एक सर्द रात थी जब हम नक्षत्रों के नीचे चल रहे थे और चाँद मेरे साथ हिम खंड के पिघलने तक मैं उसका साथ चाहता था उसे...
किरण की दुनिया...
Tag :
  December 16, 2017, 8:50 pm
पद्मावतीइतिहास की वीथिका में भटकतीक्या सोच रही हो ,खिलजी चला गया ?देह की राख से शांति के महल मत बनाओठुड्डी पर बने तुम्हारे तिल की चाहत लिएलौटता आदमखोर बांट रहा हैबाल मन को आदम वासना के विचारअब वोजिंदगी के गुजरते कारवां मेंमौत के हरकारा बन घर के आँगन में , आँगन के बहारअक...
किरण की दुनिया...
Tag :
  December 15, 2017, 11:08 am
मानव समाज जब ताम्रयुग में पहुंचता हैसंस्कृति जब ग्रामीण पृष्ठभूमि पर खडीचरखे से बनाती है सभ्यताओं के विकास के धागेजिन का छोर पकड़प्राचीन जगत की नदीघाटी सभ्यताएंनगरों की स्थापना के लिएकरती है प्रसव लिपियों कातब ग्राम और नगर के बीचएक स्वर धीरे धीरे पनपता हैजो व्यंजन ...
किरण की दुनिया...
Tag :
  December 5, 2017, 11:32 am
प्रेम की निर्जनता में उदासी हमेशा स्लेटी रंग की क्यों होती है?यही पूछा था न मैं नेऔर तुमने हस कर कहा थाबिना संकट के कुछ भी सार्थक की प्रति संभव कहां,संभव तभी हैजब मन के पथ में दूसरे की गंध भरी होशारदीय धूप का केसरिया रंग किन्हीं अक्षांशो पर खिलाना ही होता है मयूख....सच कहा ...
किरण की दुनिया...
Tag :
  October 9, 2017, 12:37 pm
प्रेम की निर्जनता में उदासी हमेशा स्लेटी रंग की क्यों होती हैयही पूछा था न मैं नेऔर तुमने हस कर कहा थाबिना संकट के कुछ भी सार्थक की प्रति संभव कहांसंभव तभी हैजब मन के पथ में दूसरे की गंध भरी होशारदीय धूप का केसरिया रंग किन्हीं अक्षांशो पर खिलाना ही होता है मयूख....सच कहा ...
किरण की दुनिया...
Tag :
  October 6, 2017, 5:07 pm
जिंदगी मौत भी एक उम्र में मालूम हुआ।मेरा होना था महज़ मेरे न होने के लिए।।स्व. कुंवर रघुवीरसिंह ने सच ही लिखा इस दुनिया में प्रत्येक चीज का मूल्य चुकाना पढता है और जो जीवन उसने दिया है उसका भी मूल्य वो मृत्यु से ले लेता है तभी तो कहा गया है जगत मिथ्या ।स्पिनोजा ने सच लिखा ...
किरण की दुनिया...
Tag :
  August 31, 2017, 11:02 am
पीड़ा की नीव में दबी वासना सुखी हो उठीजब जब स्त्री करहाई ,चिल्लाईऔर इस तरह बर्बर दंड ने जन्म लिया इस पृथ्वी परहर करहाने के बाद शिकारी बढते गएपहला शिकारी कोई आदि अमानुष थाढेंकुल ने मधुर वचनों के दंड में फरेब घोलाप्रेम की रस्सी से वासना का कूंड़ भराकुइयां अब रीति थीये बु...
किरण की दुनिया...
Tag :
  August 27, 2017, 9:51 pm
स्वतंत्रता का पौधा शहीदों के रक्त से फलता है लेकिन स्वतंत्रत हुए पौधें को स्वाधीन रहने के लिए किस तरह के हवा, पानी की जरुरत पड़ेगी ये विचार अपने आप में स्वतंत्रता के सही अर्थ को परिभाषित करने के लिए एक कदम साबित हो सकता है।ये विचार अगर हमने स्वतंत्रता के पूर्व ही कर लिया...
किरण की दुनिया...
Tag :
  August 20, 2017, 4:44 pm
दुनिया की सारी चीख़ें मेरे जहान में हैजेहन में रहना कोई अच्छी बात नहींइससे मांगने का डर रहता हैइंसाफ दर्द देता हैमेरे अंदर एक चुप्पी हैजिसे सुनकरखिड़कियां खड़कती हैमैं ने एक हिमाकत कीखिड़कियां खोलने कीउसूलों ने मुझे नेस्तनाबूत कर दियाअब खंडहर भी नहींसिर्फ चौकटे बचे...
किरण की दुनिया...
Tag :
  July 24, 2017, 7:04 pm
दरवेश से होते है पत्तेयहां वहां बिचरते हुयेबेनियाज़शाखों पर लगे ये करते हैं जुहदअतीत के गुम ये यायावरनिकल आते हैकच्ची दीवारों पुराने खंडहरों सेऔर पहुंच जाते है सर्द रातों मेंदहकते आवा मेंइंतजार करते लोगो कोदेते है दिलासा और करते है गर्म रिश्तों कोइनके दिल पर जो लकी...
किरण की दुनिया...
Tag :
  July 5, 2017, 10:24 am
स्फटिक की छत कुछ देर पहले की बारिश से धुल कर किसी नायिका की हीरे की लौंग सी चमक रही है । छत के कोने पर रातरानी की डाल जैसे चूमना चाहती है उन सफेद लिहाफ को जो आधे खुले पडे है। अभी अभी हवा के हल्के झोके से लिहाफ का आंचल रातरानी ने भर दिया है। ऊपर अंबर में बड़े से बादलो के समूह स...
किरण की दुनिया...
Tag :
  July 1, 2017, 5:29 pm
इस उनींदे समय मेंशब्द जाग रहे हैवो बना रहे है रास्ताउन के विरुद्धजो जला कर देह कोसुर आत्मा से निकाल रहे हैवो ख़ामोश हो जाते हैउन चुप्पियों के विरुद्धजो उपजी हैगली गली होती हत्या के बादबहरूपिया होते है शब्द,झूठ को लेकरचढ़ाते है उस पर चमकदार मुलम्माफिर उसमें भरते है रंग ,...
किरण की दुनिया...
Tag :
  June 28, 2017, 12:35 pm
अरे सोये होते अगरअदवायन खिंची खाट परतो पड़ते निशानदिन और रात परदेखते चीरते जबअपना ही मनतब आती आवाजपरतंत्र परतंत्रदबाओ नहीं चिंगारियांराख में उनकीजो चल दिये दे केस्वतंत्र स्वप्नदया बाया छोड़हाथ में हाथ दोकरो उदघोषजनतंत्र, जनतंत्र।#किरणमिश्रा🙄खाते, खवाई, बीज ऋणगये ...
किरण की दुनिया...
Tag :
  June 8, 2017, 10:10 am
बादल उमड़ घुमड़ रहे हैखदेडी गई कौमों की स्त्रियांइंतज़ार में हैअषाढ की उमस कुछ कम पड़ेसियासत की हवा कुछ नरम पड़ेतो नसों में धंसी वक्त की कीलोंको निकाल फेका जाएवो जर्द चिनारों सेजो खौफ लेकर चली थीवो खौफ भी उनके नहींआंसुओं से तर दर्द सूख गयेलेकिन लोरियों में घुले खून की महक...
किरण की दुनिया...
Tag :
  May 26, 2017, 10:16 am
जीवन के खंड खंड से निकले शब्दकविता बन उतरे कागजों परतो कभी मन के प्रान्तर में भटकते रहेलेकिन एकांत अखंड ही रहाआमंत्रण देतासंभावनाओं के पंख लगेअब अधिष्ठाती हूँ मैंफिर कोलाहल हुआ'मैं'खंडिततो कौन उपस्थित थाऊर्जाकैसी उर्जासम्बन्धकैसा सम्बन्धसारी ध्वनियाँ थरथरा करग...
किरण की दुनिया...
Tag :
  May 15, 2017, 5:19 pm
हुंअबंद करो चीख पुकारये लोकतंत्र हैऔर वो स्वतंत्रउन्हें खाने पीने चाटने स्वाद लेने कीपूरी आजादी हैसुन्दर स्वाद रुचिनुसारअपना मनपसंद मालपड़ोस, दफ्तर, बाज़ार, गलियों सेउठा लेनाउनका मूलभूत अधिकार हैउन्हें पसंद हैताजा गुलाबी गोस्तअगर जावा न भी हो तोभूण या एक दो तीन....ब...
किरण की दुनिया...
Tag :
  May 9, 2017, 3:47 pm
हर काबिल हर कातिल तक अपनी महक अपना हरापन फैलाते वसंत स्वागत है तुम्हारा....मधुमास लिखी धरती पर देख रही हूँ एक कवि बो रहा है सपनों के बीज । किसके सपने है महाकवि मैं पूछती हूं और ग्रीक देवता नहीं अपोलो नहीं.. बोल पड़ा चतुरी चमार । ये कैसा मेल महाप्राण ? कोई मेल नहीं कोई समानता न...
किरण की दुनिया...
Tag :
  April 24, 2017, 10:30 am
सारे दरवाजे बंद करघनघोर अँधेरे में बैठा वोनिराश हताश थादरारों से जीवन ने प्रवेश कियाखोल दी खिड़की, जीवन कीवो स्त्री थीजो रिक्त हुये में भरती रही उजालेऔर बदल गई अँधेरे के जीवाश्म मेंमेरी ये पंक्तियां स्त्री की स्थिति स्पष्ट करने के लिए काफी है । समय बहुत बदला है उसकी प...
किरण की दुनिया...
Tag :
  April 12, 2017, 7:32 pm
प्यारी  जिंदगीकहनो को तुम हमारी हो लेकिन पल-पल लहरो की तरह आती जाती तुम्हारी हर लहर पर अलग-अलग नाम लिखा है और इस कदर लिखा है कि कभी-कभी लगता है तुम सचमुच में हमारी ही हो या किसी और की।सुनो जिंदगी कुछ सपाट रहों पर हमारे कदमों के निशा होते है कभी सपाट रास्तों से पगडंडियों ...
किरण की दुनिया...
Tag :
  April 10, 2017, 10:44 pm
हम भारतीयों की चेतना शक्ति जहां से प्रभावित होती है वो क्या है ? ये एक बड़ा प्रश्न है क्या वो हमारा धर्म यानी हिंदू धर्म है मतलब हमारे वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत और शायद हद तक हमारा लोक जीवन वो लोक जीवन जिसका भाव भिन्न पूजा पद्धति ,भिन्न जीवन विधि होने पर भी परस्पर ...
किरण की दुनिया...
Tag :
  April 9, 2017, 9:21 pm
दिन सबका शुभ होमंगलकारी हो...
किरण की दुनिया...
Tag :
  April 7, 2017, 9:31 am
सबका दिन शुभ होसबके कष्ट दूर हों....
किरण की दुनिया...
Tag :
  April 7, 2017, 9:28 am
प्यारी  जिंदगीकहनो को तुम हमारी हो लेकिन पल-पल लहरो की तरह आती जाती तुम्हारी हर लहर पर अलग-अलग नाम लिखा है और इस कदर लिखा है कि कभी-कभी लगता है तुम सचमुच में हमारी ही हो या किसी और की।सुनो जिंदगी कुछ सपाट रहों पर हमारे कदमों के निशा होते है कभी सपाट रास्तों से पगडंडियों ...
किरण की दुनिया...
Tag :
  April 3, 2017, 10:35 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3719) कुल पोस्ट (172930)