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Blog: किरण की दुनिया

Blogger: kiran mishra
लोक संस्कृति हो या वैदिक संस्कृति मानव के मन मे जब जब इच्छा उठेगी तब तब वो उसकी पूर्ति के लिए ईश्वर का आहवान करेगा आराधना का तरीका भिन्न हो सकता है जैसे पूर्णरूप से भौतिक या दिव्य आनंद से युक्त या पूर्ण आधयात्मिक।  हिन्दू धर्म में किसी भगवान को प्रसन्न करने के लिए ... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   12:27pm 3 Oct 2019 #
Blogger: kiran mishra
धरा की नैसर्गिक सौन्दर्यता देख लोक की मनः भावना करोड़ो-करोड़ मुखों से पावस गीतों के रूप में फूट पड़ती है | वर्षा ऋतू में भारत के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में कजरी, हिन्दुली, चौमासा,  सावन गीत ,वन्य प्रदेशों में टप्पा, झोलइयां, मलेलबा  आदि तमाम तरह के मधुर गीतों से प्रकृति गु... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   7:51am 10 Aug 2019 #
Blogger: kiran mishra
बचपन में मालवा के बिताए सालों में मां के साथ जब भी बाज़ार जाती थी तो काकीजी के हाथ से बनी डबल लौंग सेव खाना कभी नही भूलती वो मुझे इतने पसंद थे कि उनके लिए मैं कुछ भी छोड़ सकती थी। लेकिन खाते ही जो मुंह जलता सो बस की बोलती बंद ।जबान की बोलती बंद आंखे बोलती वो भी आंसुओ की भाषा.... ... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   6:22am 19 Jul 2019 #
Blogger: kiran mishra
युग--------------वायुहीन नि:श्वास के परेशून्य से उभरे जगत मेंसत असत् रज भी अस्तित्व में नहीं था,न ही उसके परे  आकाशउष्मा ने न  उत्पन्न किया था जल,न जल ने उत्पन्न किया था अन्न,न अंडज हुआ था न अकुंरन मृत्यु न अमरत्त्व ,न रात न दिनतब स्वरोदय के साथप्रकट होती हूं मैंनिर्बंध भ्रमण ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   9:28am 17 Jul 2019 #
Blogger: kiran mishra
'स्नो पियर्सर'के अमेरिकी डिस्ट्रीब्यूटर टॉम क्विन का कहना है, जलवायु परिवर्तन के बाद की स्थितियों को दिखाने वाली फिल्म नई पीढ़ी को प्रभावित करें तो शायद बहुतायत में लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हो । गॉडजिला बनाने वाले एडवड्रस का कहना है, 'गॉडजिला'जैसी फिल्म हमने ज... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   6:31am 11 Jul 2019 #
Blogger: kiran mishra
ये आवाज किसकी है राट, त्रमझड़, त्राटकणों और धरहरणो  है क्या ये ...या छोल है जो आनन्द से मुझे भर रह है क्या आप  सोकड़ की आवाज पहचानते है ? आप मे से अधिकाशत: कहेंगे कि ये क्या है ? ये प्रश्नवाचक वाक्य सिर्फ आज ही नही आने वाले कल में भी आपको परेशान करता रहेगा क्योंकी हमारे जी... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   4:07am 29 Jun 2019 #
Blogger: kiran mishra
कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुंजकोटरे वसन्विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमञ्जलिं वहन् ।विलोललोललोचनो ललामभाललग्नकःशिवेति मन्त्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ।।तो क्या शिवताण्डवस्तोत्रम्’ के १३ वें श्लोक में स्तुतिकार रावण अविरल प्रेमयुक्त तरल-सरल भावों के साथ अपने मन ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   4:18pm 8 May 2019 #
Blogger: kiran mishra
वैशाख भारतीय काल गणना के अनुसार वर्ष का दूसरा माह है। इस माह को एक पवित्र माह के रूप में माना जाता है। जिनका संबंध देव अवतारों और धार्मिक परंपराओं से है। ऐसा माना जाता है कि इस माह के शुक्ल पक्ष को अक्षय तृतीया के दिन विष्णु अवतारों नर-नारायण, परशुराम, नृसिंहऔर ह्ययग्री... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   12:04pm 7 May 2019 #
Blogger: kiran mishra
आगाही कार्ब वफ़ा सब्र तमन्ना एहसासमेरे  ही  सीने  में  उतरे  हैं  ये  खंज़र सारेबशीर फ़ारूक़ी जी ने शायद हम जैसो का दिल पढ़ कर ही ये शेर कहा होगा....दो महीने की घर से बाहर व्यस्ता के चलते अव्यवस्थित घर से रूबरू होते ही सबसे पहले गर्म- ठंडी के कपड़े रखते उठते बेटी अपनी घा... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   5:25am 30 Apr 2019 #
Blogger: kiran mishra
बेजुबान लब्जझुकी डालढीठ सी लाजचीरती जब मधुर भय कोरचती अधलगी महावरतुम विवशमैं अवशबचपन में मालवा के बिताए सालों में मां के साथ जब भी बाज़ार जाती थी तो काकीजी के हाथ से बनी डबल लौंग सेव खाना कभी नही भूलती वो मुझे इतने पसंद थे कि उनके लिए मैं कुछ भी छोड़ सकती थी। लेकिन खाते ह... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   5:37am 28 Apr 2019 #
Blogger: kiran mishra
1-प्रेम 💝तेरी मेरी जुडी  हथेलियां ईश्वर का घर है 🌷ये जो अंधकार से भरा खालीपन देख रहे हो नउसी से तो निकलेंगे उल्कापिंड की भांति प्रेम पलइससे पहले कि ये तुम्हें आशा का क्षणिक आभास देकर छोड़ दे तुम्हारा साथ ,तुम्हें मिलाने होंगे इस लाल धूसर मिट्टी में आस्था के सारे वो चिन... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   2:57pm 25 Feb 2019 #
Blogger: kiran mishra
रोपा रोपे गेले रे डिंडा दंगोड़ी गुन्गु उपारे जिलिपी लगायेलाजो नहीं लगे रे डिंडा दंगोड़ी गुन्गु उपारे जिलिपी लगायेहर जोते गेले रे डिंडा दंगोड़ा एड़ी भईर तोलोंग लोसाते जायेलाजो नहीं लगे रे डिंडा दंगोड़ा एड़ी भईर तोलोंग लोसाते जाये।कितना उल्लास है इस लोकगीत मेंहल जोतते हु... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   4:01am 12 Nov 2018 #
Blogger: kiran mishra
हवा में ठंडक है शायद गांव में कांस फूला हैआज धूप का मिजाज़ किसी प्रेमिका सा है जो बार-बार छत पर आती जाती है इंतजारे इश्क में । बाहर हल्का शोर है लेकिन भीतर शून्य है। ये दिल्ली शहर है जहां अक्सर इंसान शून्य  में ही रहता है मानसिक शून्यता,वैचारिक शून्यता। सड़के भरी नहीं&nbs... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   4:07pm 29 Sep 2018 #
Blogger: kiran mishra
भूख के रूदन कोशांत कराती स्त्री रचती है गीतऔर इस तरहभूख के भय को करती है कमउदगीथ, रचिता को अन्न से कर धन्यचल पड़ता हैगुंजाते गूंजतेतमाम युद्धों, बर्बरता सेसभ्यताओं को सुरक्षितबचाने के लिएकंगूरे पर बंधा उदगीथ*अब निश्चेष्ट है लेकिन निराश नहींवो तोड़ता है छंद ,ललकारता है... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   10:14am 17 Sep 2018 #
Blogger: kiran mishra
समय के भाल पर न जाने कितनी गीत- संगीत सजे है न जाने जिंदगी ने कितने रूप धरे है ।प्रकृति की सारी थिरकन सिर्फ उसी से हैजिगर की पीर हल्की और दिल से रूह के रिश्ते पुख़्ता सिर्फ उसी से हो जाते है ।जिंदगी की जद्दोजहद, पसोपेश,अंतर्विरोध सब पर अचानक विराम लग जाता है ।कौन है वो जो पल... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   4:20am 7 Sep 2018 #
Blogger: kiran mishra
🇮🇳 🇮🇳स्वतंत्रता का आलोकहर तरफ फैला ही था किअपनी- अपनी पताका के साथअपने -अपने उदघोष हुएद्वार पर ही स्वतंत्रता ठिठक गईप्रकाश की किरणें धीरे- धीरे काट दी गईस्वतंत्रता का सूर्य खंडित होक्षत विक्षत हो गयाकुछ उत्साही जाग्रत हुएअब सत्ता के शिखरों परअवतार जन्म लेने लगेअव... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   7:51am 15 Aug 2018 #
Blogger: kiran mishra
रामरती (एक थी रामरती ) अपनी निर्भीकता कई पीढ़ियों में बाँट कर आखिर अपनी कोशिश में कामयाब हो ही जाती  और तैयार कर ही देती है न जाने कितनी मणिकर्णिका।दरवाजे की ओट से झांकती आंखे तो कुछ नीची निग़ाह अचानक तीखी होकर अपने लिए रास्ता बनाती है और पारे उन रास्तों को आसान बनाने का ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   4:37pm 1 Apr 2018 #
Blogger: kiran mishra
वो जहाँ हम मिलते थे खेत कितने होते थे हरे पीले और किसान कितने होते थे खुश गुड की मीठी खुशबू हवा में तैरती चिपक जाती थी हमारे चेहरे पर उसका जायका जैसे कच्ची उम्र का हमारा प्रेम खेत के बीचो बीच खड़ा वो बिजूका जिसके न जाने कितने नाम रख छोड़े थे तुमने जिसे देख कर हमारे साथ साथ ध... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   5:12am 12 Mar 2018 #
Blogger: kiran mishra
पुरुषों के नाम पत्र------------------------एक पत्र जो आप को वो पात्र बना देगा जिसकी कोशिश आप एक युग से कर रहे है....सारी दुनिया औरत के इर्द गिर्दऔरत की दुनिया चूल्हे के इर्द गिर्द।आप श्रेष्ठ है और हम हीन इस भावना से मुक्त हो...जरुरी है बेहतर समाज के लिएश्रम की परिभाषा मानवीय मूल्यों पर आ... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   6:05am 8 Mar 2018 #
Blogger: kiran mishra
एक अंतहीन रात मेंएक औरत तोडना चाहती है दुस्वप्न के जालों कोवो छाती की दर्दनाक गांठ में दबेउस शून्य को निकाल देना चाहती हैजो हर चीख के साथ बढ़ता जाता हैऔर हटाना चाहती हैइर्द गिर्द जमा डर की बीट कोवो रखना चाहती थी जिंदासत्य, न्याय, प्रेम की कहानियों को भीजो पिछली रात उसन... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   5:28pm 5 Mar 2018 #
Blogger: kiran mishra
कुछ ठेके पर उठी कविताएंअपने आप पर रश्क़ कर सकती है उनके मालिक कुछ ख़ास किस्म के होते है। दुनिया उन्हें सलाम करती है।वैसे सजदा करते उनकी भी उम्र बीत रही है।कुछ इतनी खुशकिस्मत नहींवो फुटपाथ पर ही जन्म लेकर वही मर जाती है हालाँकि मुझे ख़ुशी है कि वो उनकी तरह नहीं जिनकी रूह तक... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   2:09pm 12 Feb 2018 #
Blogger: kiran mishra
घनघोर अंधेरे में जो दिखती है,वो उम्मीद है जीवन कीहिंसक आस्थाओं के दौर में प्रार्थनाएं डूब रही हैअन्धकार के शब्द कुत्तों की तरह गुर्रातेभेड़ियों की तरह झपट रहे हैउनकी लार से बहते शब्दलोग बटोर रहे है उगलने कोजर्जर जीवन के पथ पर पीड़ा के यात्रीटिमटिमाती उम्मीद को देखते ह... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   4:24pm 30 Jan 2018 #
Blogger: kiran mishra
ले चल मुझे भुलावा दे कर मेरे नाविक धीरे-धीरेजिस निर्जन में सागर लहरी, अम्बर के कानों में गहरीनिश्चल प्रेम कथा कहती हो तज कोलाहल की अवनि रे”( जयशंकर प्रसाद) कभी कभी नाविक अकेला ही सागर पर किसी अनजाने गांव का दरवाजा खटखटा देता है💕❤🍁किसी अनजाने गाँव मेंअनजाने घर की कभी ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   11:12am 27 Jan 2018 #
Blogger: kiran mishra
बीते बरस बीत गए ये सोच कर की आने वाले बरस कैसे बीतेंगे थोड़ी सी ख़ुशी देकर या बेरुखी से मुह मोड़ कर फिर चल देंगे ,साथ छोड़ कर। ये क्रम यूं ही चलेगा ,ये रहा गुजर रहेंगे हमारी अंतिम घड़ी तक ।लोग बतियाना चाहते है लेकिन बाते नहीं हैं। हालांकि हम वैश्विक हो गए है लेकिन ये हो कर कोलाह... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   6:42am 1 Jan 2018 #
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