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Blog: किरण की दुनिया

Blogger: kiran mishra
कोई भी खतरा विनाश में परिवर्तित हो इससे पहले मनुष्य इसे रोक सकता है ,कारण सभी आपदा मनुष्य द्वारा उत्पन्न होती है। मानवीय असफलता का परिणाम ये आपदाएं अनुचित आपदा प्रबंधन के कारण न सिर्फ अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है बल्कि समाज मे असन्तुलन व अफरा- तफरी की असामान्य ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   4:59pm 23 Apr 2021 #
Blogger: kiran mishra
मनोबुद्धयहंकारचित्तानि नाहम् न च श्रोत्र जिह्वे न च घ्राण नेत्रे न च व्योम भूमिर्न तेजॊ न वायु: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥🙏 शिव अनन्तता, अपरिमितता और सवोच्चता के परिचायक है । शिव शिवोहम् है - शुभ मंगलकारी । वो गृहस्थ है, गुरु है, आदियोगी है, आदिगुरु है, काल है तो ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   3:47am 11 Mar 2021 #
Blogger: kiran mishra
हिन्दी कविता: कोहरा - Sansar News- Online for Global Nepali: हर बार बांची जाती है कोहरे की रति गाथा जिसमे होती है महर्षि पराशर और काली की कहानी जिसे सुनकर प्रेम बन के कोहरा लिपटता है आगोश में नर्म कोहरे में खोते खुद से खुद को जोड़ते धुंध में धुआं धुआं होते अपने में जलते बुझते रचते है प्रेमी प्रे... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   7:45am 21 Nov 2020 #
Blogger: kiran mishra
न्यूटन का तीसरा नियम कहता है कि प्रत्येक क्रिया की सदैव बराबर एवं विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है । गति का तीसरा नियम पगति पर उतना ही लागू होता है जितना सामान्य गति पर । इंसान का स्प्रिंग तत्व उसे एक सीमा के बाद दबने नही देता।। प्रत्येक पिण्ड तब तक अपनी विरामावस्थ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   3:17pm 10 Sep 2020 #
Blogger: kiran mishra
प्रेम के स्पर्शमय क्षण तो नित्य अक्षय होते है वो कहां बिसरते है । दिल की कानन मे उगे ये जिंदगी की हर मुश्किल घड़ी में ठंडी बयार से मन को हरा- भरा रखते है। ये बिछड़ते तो है बिसरते नही , तभी तो काशी में बैठा फक्कड़ कहा उठता है-- कहाॅं भयो तन बिछुरै, दुरि बसये जो बास नैना ही अंतर प... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   4:40pm 27 Aug 2020 #
Blogger: kiran mishra
स्वतंत्रता का पौधा शहीदों के रक्त से फलता है ,लेकिन स्वतंत्रत हुए पौधें को स्वाधीन रहने के लिए किस तरह के हवा, पानी की जरुरत पड़ेगी ये विचार अपने आप में स्वतंत्रता के सही अर्थ को परिभाषित करने के लिए ,एक कदम साबित हो सकता है। ये विचार अगर हमने स्वतंत्रता के पूर्व ही कर लि... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   5:36pm 15 Aug 2020 #
Blogger: kiran mishra
 स्वतंत्रता का पौधा शहीदों के रक्त से फलता है ,लेकिन स्वतंत्रत हुए पौधें को स्वाधीन रहने के लिए किस तरह के हवा, पानी की जरुरत पड़ेगी ये विचार अपने आप में स्वतंत्रता के सही अर्थ को परिभाषित करने के लिए ,एक कदम साबित हो सकता है।ये विचार अगर हमने स्वतंत्रता के पूर्व ही कर ल... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   5:22pm 15 Aug 2020 #
Blogger: kiran mishra
🌻🐝रात का फक्कड़आवाज देता है पृथ्वी कोशांति का प्रकाश सिर्फ एक लहर हैजो रोष के तूफान में खो जाती है,असहाय पृथ्वीनिर्दयी आत्माओं से करती है रुदनजरा ठहरो मेरे दर्द को साझा करोबांसुरी बजाता मनुष्यओट में हो जाता हैमैं समय ,समुद्र का एक बेड़ाअपने डूबने के इंतज़ार में हूं।-------... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   12:58pm 22 Apr 2020 #
Blogger: kiran mishra
और एक दिन जबमनुष्य ने ईश्वर को फड़पर बैठने को कहाईश्वर ठिठकामनुष्य की बिछाई बिसात देख,पहली चाल मनुष्य ने चलीविकाससारे अर्थहीन, खतरनाक मुद्देउठ खड़े हुएदूसरी चालविज्ञानह्रदय हीन हुए मनुष्यईश्वर हँसाअब आखिरी चाल उसकी थीउसने पासे फेंकेदौड़ते मनुष्यों के पैरों में उसक... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   3:23pm 30 Mar 2020 #
Blogger: kiran mishra
धरती को चूमने के हजारों तरीके हैसारी व्याख्याएं खत्म हुईदिल का ताप  बड़ामेरे दिल मे छिपे तारे नेसातो दिशाएं रोशन कीगिर जाने पर हाथ बढ़ाकर उठा देना ऐसे शख़्स का मिल जानाइस धरती की सबसे अद्भुत घटना हैकि ईश्वर को पता है ये दुनिया कैसे चलती है।-----------------------------------------Painting by william quincy... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   5:20am 20 Feb 2020 #
Blogger: kiran mishra
उस दिन गहन निस्पंद  आधी रात में अचानक टहनियों की फुनगी पर पढ़ी बदली से निकलते चांद की रोशनी उतार लाई थी, अतीत का स्वप्नअहा! कैसे तो स्वप्न थे बारम्बार बांधते थे मन के सुने द्वार पर पंखों के तोरणआज फिर मादल की थाप कानो में गूंज रही है....पलाश के फूल तारों भरे सफेद दुपट्टे पर... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   6:50am 4 Dec 2019 #
Blogger: kiran mishra
गांधी के  व्यक्तित्व को  लेखों पुस्तकों नही समेटा जा सकता है । गांधी का जीवन तो वह  महान गाथा  है जिसके द्वारा  शब्दों में ब्रह्म की शक्ति को समाहित कर उस गूढ़ मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया से लोगों का परिचय कराया और  दिखाया गया  कि विचार, वाणी, और कर्म से जो चाहे वो क... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   2:56pm 27 Nov 2019 #
Blogger: kiran mishra
लोक संस्कृति हो या वैदिक संस्कृति मानव के मन मे जब जब इच्छा उठेगी तब तब वो उसकी पूर्ति के लिए ईश्वर का आहवान करेगा आराधना का तरीका भिन्न हो सकता है जैसे पूर्णरूप से भौतिक या दिव्य आनंद से युक्त या पूर्ण आधयात्मिक।  हिन्दू धर्म में किसी भगवान को प्रसन्न करने के लिए ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   12:27pm 3 Oct 2019 #
Blogger: kiran mishra
धरा की नैसर्गिक सौन्दर्यता देख लोक की मनः भावना करोड़ो-करोड़ मुखों से पावस गीतों के रूप में फूट पड़ती है | वर्षा ऋतू में भारत के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में कजरी, हिन्दुली, चौमासा,  सावन गीत ,वन्य प्रदेशों में टप्पा, झोलइयां, मलेलबा  आदि तमाम तरह के मधुर गीतों से प्रकृति गु... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   7:51am 10 Aug 2019 #
Blogger: kiran mishra
बचपन में मालवा के बिताए सालों में मां के साथ जब भी बाज़ार जाती थी तो काकीजी के हाथ से बनी डबल लौंग सेव खाना कभी नही भूलती वो मुझे इतने पसंद थे कि उनके लिए मैं कुछ भी छोड़ सकती थी। लेकिन खाते ही जो मुंह जलता सो बस की बोलती बंद ।जबान की बोलती बंद आंखे बोलती वो भी आंसुओ की भाषा.... ... Read more
clicks 608 View   Vote 0 Like   6:22am 19 Jul 2019 #
Blogger: kiran mishra
युग--------------वायुहीन नि:श्वास के परेशून्य से उभरे जगत मेंसत असत् रज भी अस्तित्व में नहीं था,न ही उसके परे  आकाशउष्मा ने न  उत्पन्न किया था जल,न जल ने उत्पन्न किया था अन्न,न अंडज हुआ था न अकुंरन मृत्यु न अमरत्त्व ,न रात न दिनतब स्वरोदय के साथप्रकट होती हूं मैंनिर्बंध भ्रमण ... Read more
clicks 852 View   Vote 0 Like   9:28am 17 Jul 2019 #
Blogger: kiran mishra
'स्नो पियर्सर'के अमेरिकी डिस्ट्रीब्यूटर टॉम क्विन का कहना है, जलवायु परिवर्तन के बाद की स्थितियों को दिखाने वाली फिल्म नई पीढ़ी को प्रभावित करें तो शायद बहुतायत में लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हो । गॉडजिला बनाने वाले एडवड्रस का कहना है, 'गॉडजिला'जैसी फिल्म हमने ज... Read more
clicks 329 View   Vote 0 Like   6:31am 11 Jul 2019 #
Blogger: kiran mishra
ये आवाज किसकी है राट, त्रमझड़, त्राटकणों और धरहरणो  है क्या ये ...या छोल है जो आनन्द से मुझे भर रह है क्या आप  सोकड़ की आवाज पहचानते है ? आप मे से अधिकाशत: कहेंगे कि ये क्या है ? ये प्रश्नवाचक वाक्य सिर्फ आज ही नही आने वाले कल में भी आपको परेशान करता रहेगा क्योंकी हमारे जी... Read more
clicks 378 View   Vote 0 Like   4:07am 29 Jun 2019 #
Blogger: kiran mishra
कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुंजकोटरे वसन्विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमञ्जलिं वहन् ।विलोललोललोचनो ललामभाललग्नकःशिवेति मन्त्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ।।तो क्या शिवताण्डवस्तोत्रम्’ के १३ वें श्लोक में स्तुतिकार रावण अविरल प्रेमयुक्त तरल-सरल भावों के साथ अपने मन ... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   4:18pm 8 May 2019 #
Blogger: kiran mishra
वैशाख भारतीय काल गणना के अनुसार वर्ष का दूसरा माह है। इस माह को एक पवित्र माह के रूप में माना जाता है। जिनका संबंध देव अवतारों और धार्मिक परंपराओं से है। ऐसा माना जाता है कि इस माह के शुक्ल पक्ष को अक्षय तृतीया के दिन विष्णु अवतारों नर-नारायण, परशुराम, नृसिंहऔर ह्ययग्री... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   12:04pm 7 May 2019 #
Blogger: kiran mishra
आगाही कार्ब वफ़ा सब्र तमन्ना एहसासमेरे  ही  सीने  में  उतरे  हैं  ये  खंज़र सारेबशीर फ़ारूक़ी जी ने शायद हम जैसो का दिल पढ़ कर ही ये शेर कहा होगा....दो महीने की घर से बाहर व्यस्ता के चलते अव्यवस्थित घर से रूबरू होते ही सबसे पहले गर्म- ठंडी के कपड़े रखते उठते बेटी अपनी घा... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   5:25am 30 Apr 2019 #
Blogger: kiran mishra
बेजुबान लब्जझुकी डालढीठ सी लाजचीरती जब मधुर भय कोरचती अधलगी महावरतुम विवशमैं अवशबचपन में मालवा के बिताए सालों में मां के साथ जब भी बाज़ार जाती थी तो काकीजी के हाथ से बनी डबल लौंग सेव खाना कभी नही भूलती वो मुझे इतने पसंद थे कि उनके लिए मैं कुछ भी छोड़ सकती थी। लेकिन खाते ह... Read more
clicks 284 View   Vote 0 Like   5:37am 28 Apr 2019 #
Blogger: kiran mishra
1-प्रेम 💝तेरी मेरी जुडी  हथेलियां ईश्वर का घर है 🌷ये जो अंधकार से भरा खालीपन देख रहे हो नउसी से तो निकलेंगे उल्कापिंड की भांति प्रेम पलइससे पहले कि ये तुम्हें आशा का क्षणिक आभास देकर छोड़ दे तुम्हारा साथ ,तुम्हें मिलाने होंगे इस लाल धूसर मिट्टी में आस्था के सारे वो चिन... Read more
clicks 389 View   Vote 0 Like   2:57pm 25 Feb 2019 #
Blogger: kiran mishra
रोपा रोपे गेले रे डिंडा दंगोड़ी गुन्गु उपारे जिलिपी लगायेलाजो नहीं लगे रे डिंडा दंगोड़ी गुन्गु उपारे जिलिपी लगायेहर जोते गेले रे डिंडा दंगोड़ा एड़ी भईर तोलोंग लोसाते जायेलाजो नहीं लगे रे डिंडा दंगोड़ा एड़ी भईर तोलोंग लोसाते जाये।कितना उल्लास है इस लोकगीत मेंहल जोतते हु... Read more
clicks 351 View   Vote 0 Like   4:01am 12 Nov 2018 #
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