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Laxmirangam

मजबूरियाँ.मिटा ही न देना तुम दूरियांसमझो जमाने की मजबूरियाँ ।। इतनी बढ़ाओ न नजदीकियाँ,बढ़ती रहेंगी तो खुशियाँ मिलेंगीतिनकों के सागर सी दुनियां मिलेगीझूमेंगे तन मन औ बगिया खिलेगी ।।मिलने से हँसी, नाच गाने बजेंगे,जो बिछड़े तो, विरह में 'बाजे बजेंगे',सहना जुदाई एक पर्वत ...
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  March 22, 2017, 9:15 am
अनहोनीना तुम धरा, ना मैं गगन,पर क्षितिज पाना चाहते हैंरेल की दो पटरियों को  हम मिलाना चाहते हैं।रात दिन के चक्र में,संध्याएँ ही आनंदमय हैंहम हरसमय और हर हमेशा,संध्या में रहना चाहते हैं. रेल की दो पटरियों को हम मिलाना चाहते हैंरात ही राका मिलन कोउठ रहे अनथक लहर है...
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  March 6, 2017, 10:13 am
एहसानमेरे दोस्त,तेरे बहुत एहसान हैं मुझ पर,बस एक और एहसान करना,कल सुबह मेरे घर आकरमेरी लाश ले जाना,बस एक रात औरअकेला छोड़ दो,शाँति से मरने को भीएकांत चाहिए ना.कर देना फोनउन देहदान वालों को ,और उस अंगदान के मोहन को,और बस फर्स्ट कम फर्स्ट सर्व,जो पहले आएगा ले जाएगा.यदि मोहन प...
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  March 4, 2017, 9:40 am
मालीउस दिन एक चिड़ियामेरे बगीचे में कोई बीज गिरा गई.पता तो तब चला जब बाग में सिंचाई से वह अंकुरित हो उठा ।नन्हीं कोंपलें कितनीप्यारी लग रहीं थीं,कैसे बखान करूँ शब्दों में।इसे मेरी अन्यमनस्कता कहें,या मेरा लाड़ - प्यार,बाग की सिंचाई के कारणअंकुर धीरे - धीरे बढ़ते हुएपौधा...
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  March 3, 2017, 6:51 pm
एक रात की व्यथा - कथाबहुत मुश्किल से स्नेहा ने अपना तबादला हैदराबाद करवाया था चंडीगढ़ से. पति प्रीतम पहले से ही हैदराबाद में नियुक्त थे. प्रीतम खुश था कि अब स्नेहा और बेटी आशिया भी साथ रहने हैदराबाद आ रहे हैं. आशिया उनकी इकलौती व लाड़ली बेटी थी. इसलिए उसकी सुविधा का हर ख्...
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  February 3, 2017, 12:49 pm
रूठना - मनानाअगर है ना-गवारा तो, मैं अपना दर बदल लूँगा,अगर बेहद कहो तुम तो,मैं हद से भी गुजर लूँगा।।मगर दोनों नहीं मंजूर होंगे,है पता मुझकोकिसे किस हदमें रखना हैखबर रखनी है हम सबको।।रूठना, आपका हक है,.पर कारण जानने का हमें भी हक है,आप अपना हक बरकरार रखेंऔर  हमारा हक ...
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Tag :बरकरार
  January 4, 2017, 7:34 pm
      हार का उपहारबरसों परवानों को, दीपक की लौ में जलते देखा है,शमा के चारों ओर पड़े वे ढेर पतंगे देखा है.कालेज में गोरी छोरी कोघेरे छोरों को देखा है,खुद नारी नर की ओर खिंचे,ऐसा कब किसने देखा है.उसने क्या देखा, क्या जाने,किसकी उम्मीद जताती है,कहीं, ढ़ोल के भीतर पोल न ह...
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  December 19, 2016, 7:25 pm
राघव का हश्रजूही को बचपन से ही बहुत लगाव है अपने पड़ोसी अंकल राघव से. उन्होंने जूही  के मम्मी-पापा की शादी भी एटेंड की थी. बचपन में जूही के अभिभावक बच्चों को राघव के पास छोड़ कर रात में कोई 9 बजे सारेगामा की शूटिंग देखने जाते थे. आते - आते देर रात 12 से 1230 तक हो जाते।बच्चे देखत...
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Tag :जूही
  December 9, 2016, 4:05 pm
नरेंद्रपिछली बार जब कादिर अपने एक दोस्त के शहर गया तो उसको संगी साथियों ने कहा, भाई अपने कालेज के चार पाँच लोग हैं यहाँ. चलो, किसी दिन सब मिलते हैं किसी जगह. सहमति बनी तो औरों से भी संपर्क किया गया. सभी को बात अच्छी लगी. तब फाईनल किया और एक शाम होटल में सब इकट्ठे होंगे.उनमें ...
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  December 7, 2016, 2:04 pm
राजेश की डाँटप्रमोद और राजेश दोनों गहरे दोस्त थे. प्रमोद छोटा था पर शादी शुदा था और राजेश बड़ा पर अनब्याहा. दोनों सोसायटी के एक ही बिल्डिंग के दो मंजिलों पर रहते थे. हालाँकि दोनों अलग अलग महकमें में काम करते थे पर कार्यस्थल साथ होने से अक्सर वे साथ ही कार्यालय जाते थे. छु...
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Tag :प्रमोद
  December 2, 2016, 10:55 pm
स्वर्णिम सुबहऐ मेरे नाजुक मनमैं कैसे तुमको समझाऊँ।।अंजुरी की खुशियाँ छोड़ सदा,अंतस में भरकर,बीते जीवन का क्रंदन,क्यों भूल गए हो तुम स्पंदन.ऐ मेरे नाजुक मनमैं कैसे तुमको समझाऊँ।।जब कोशिश होती है,गुलाबों की,हाथ बढ़ाए गुलाबों में,कुछ आँचल फंसते काँटों में,कुछ तो धीरे स...
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Tag :गुलाब
  November 30, 2016, 1:23 pm
विधाताक्यों बदनाम करो तुम उसको,उसने पूरी दुनियां रच दी है.हम सबको जीवनदान दियाहाड़ माँस से भर - भर कर.हमने तो उनको मढ़ ही दियाजैसा चाहा गढ़ भी दिया,उसने तो शिकायत की ही नहींइस पर तो हिदायत दी ही नहीं।हमने तो उनको पत्थर में भी गढ़ कर रक्खा..उसने तो केवल रक्खा है पत्थरकुछ इंसा...
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Tag :विधाता
  November 28, 2016, 6:28 pm
इंतजारकिसी ने कहा हैइंतजार का फल मीठा होता हैकोई उनसे ही पूछे किइंतजार कितना तीखा होता है।अपनापन जताते रहोअपने मत बनोअपना बनाने की कोशिश तो होगी।मंजिल की ओर बढ़ते हुएसफर में रुकने पर भीमंजिल जल्द कैसे पहुंचेयही सवाल होता हैऔर मंजिल पहुँचने परअब तो मंजिल आ ही गएकिस...
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Tag :पत्नी
  November 28, 2016, 6:14 pm
खुशी.एक लड़की मुझे कविता भेजती  है,क्या करूँ उसका मगर,होती है आधी,साथ उसके भी निवेदन भेजती है,कर दो उस कविता को पूरी,जो है आधी.भावनाओं से बँधा हूँ,पूरी तो करना है उसको,वक्त की कोई कमी हो,यूँ नहीं डरना है मुझको.शब्द देवी ने दिया भंडार भरकर,कर सका सेवा मैं रचनाकार बनकर,जब बना...
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Tag :मून
  November 28, 2016, 6:09 pm
चिड़िया, राक्षस और फरिश्ता.एक थी चिड़िया, जैसे गुड़िया,चूँ-चूँ, चीं-चीं करने वाली,गाने और फुदकने वाली,यहाँ से वहाँ, वहाँ से यहाँ,डाल-डाल, अंगना, बगिया...एक थी चिड़िया...कहीं से इक दिन राक्षस आया,चिड़िया को उसने धमकाया,बस !!! बस!!!बस!!!बस, बहुत हुआ ये गाना-वानाबंद करो अपना चिल्लानाअब ...
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  November 25, 2016, 10:59 pm
उदास न हो.पिछली बातों से क्यों  परेशां हो,बीती बातों से दिल उदास न हो,भले ही जिंदगी में कोई आस न हो, बीते कल की सड़ी भड़ास लिए,आता कल तो कभी खराब न हो।बीती बातों से दिल उदास न हो।रात काली हो, स्याह हो कितनी, एक स्वर्णिम  सुबह  तो आएगी, रात को कोसती रही तुम  जो,सुब...
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  November 24, 2016, 8:35 pm
कम्बख्त मुँहआँख ने जो देखा उसेमुँह कह जाता है. क्या करूँ कमबख्त से, चुप रहा नहीं जाता है।वैसे ही जब कान सुनते हैं,तो यह बे-लगाम मुँहचुप नहीं रह पाताकम्बख्त बक ही जाता है।कई बार तो इसनेपिटने की सी हालत कर दी हैपता नहीं कब पिटाई हो जाए,बस अब इससे भगवान ही बचाए।जब पला बढ़...
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Tag :कान
  November 21, 2016, 3:49 pm
नन्हीं चिड़िया.बहुत अरसे बाद देखा,पिछले कुछ समय से बाग में एक नई चिड़िया ,चीं - चीं, चूँ - चूँ करती फुदक रही है,फुनगी से फुनगी.पता नहीं कब आई,कहाँ से आई,कब से फिरती है बाग में,उड़ते - उड़ते राह में यहाँ रुक गई,या बहक कर भटक कर पहुँच गई यहाँ,इतने दिनों से देखते - देखतेमहसूस कर रह...
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Tag :चीं
  November 16, 2016, 9:22 pm
सोशल मीडिया पर लोगों को लिखने का एक नया मंच मिला है. लेकिन इस मंच पर बहुत अधिक सक्रिय होने के नुकसान भी है. आप को क्या लगता है?  हम लाभ अधिक ले रहे हैं, या बस नुकसान झेल रहे हैं? ...................... अनूषा जैन.सोशल मीडिया पर नफा या नुकसान... मूलतः यही सवाल है.पहले यह समझें सोशल मीडिया किस...
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  November 11, 2016, 12:12 pm
मत बाँधो मुझको बंधन में.पहले तो मान नहीं पाऊँ,फिर उनको तोड़ नहीं पाऊँ,जो बाँध रहे वो तोड़ चले मैं फिर भी बँधा ही रह जाऊँ.मत जकड़ो मुझको बंधन में.ये खून के रिश्ते और ही है,पानी के सदृश होते हैं,अक्सर मतलब के होते हैंमतलब की बात न होने पर,पानी सा अदृश्य होते हैं।मतलब क्या मुझ...
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  November 8, 2016, 6:29 pm
ववूबबबबब,बगहजदज  जदगहबीबहगटवे दिनबहुत याद आते हैं वे दिन,नदिया के तीरघाट की सीढ़ियों पर बैठे,पांव से नीर को छलछलाते हुए,हाथ, तुम्हारे बालों से खेलते हुए,मीठी - मीठी तुकी बेतुकी बातें करते हुए,दिन दोपहर और शामें बिताना, वो दिन बहुत याद आते हैं.तुम्हारी गर्दन परमेरी उँ...
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  November 7, 2016, 9:36 pm
                            मर्यादा पुरुषोत्तम.                                रावण ने सीता को हरकर,                                जो किया, किया.                                लेकिन तुम थे - सियाराम,                   ...
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  October 27, 2016, 8:55 pm
अनुवादअनुवाद का शाब्दिक अर्थ –किसी कही हुई बात को (उसी तरह) पुनः कहा जाना – को अनुवादमाना जा सकता है. “उसी तरह” - के बहुत मतलब निकाले जा सकते हैं. पहला हूबहू..कहना... यह नकल करना कहा जाता है. दूसरा तथ्य को रखते हुए उसे अन्य शब्दों में कहना.. इसे कुछ लोग –टिप्पणी भी कहते हैं.. इसे...
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Tag :अनुवादक
  October 15, 2016, 2:54 pm
एक कविता रमा चक्रवर्ती भाभीजी की.... माँ गर्भ मे पल रहे, शिशु के स्पंदन से पुलकित होती मैं माँ हूँ. प्रसव वेदना तड़पती,मृत्यु से जूझती,फिर भी संतान - आगमन का अभिनंदन करती मैं माँ हूँ. शिशु का प्रथम क्रंदन सुनअपनी पूर्णता पर इतराती,मैं माँ हूँ वक्ष के अमृत-धार से अप...
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Tag :रमा चक्रवर्ती
  September 29, 2016, 10:13 pm
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