उसने कहा था...

(रूसी कवि और फ़िल्मकार येव्‍गेनी येव्‍तुशेंकोकी कविताएं पढ़ते हुए इस कविता पर आना हुआ. अनुवाद वरयाम सिंह का है. येव्गेनी की और कविताएं यहांपढ़ी जा सकती हैं.)मैं नहीं चाहता हर कोई मुझे प्‍यार करेइसलिए कि संघर्ष की भावना के साथ-साथमुझमें बीज की तरह बैठा है मेरा युगश...
उसने कहा था......
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  October 19, 2014, 5:50 pm
(पांच साल की उम्र से शुरू हुए थिरकते कदम जब 94 साल में भी थिरक रहे हों तो इसे चमत्कार कहना ग़लत नहीं होगा। इस चमत्कार का नाम हैसितारा देवी! आज भी उनकी बड़ी-बड़ी आंखें वो जज़्बात बयां करती हैं जो ईश्वर की देन के बिना संभव नहीं है। एक कलाकार के रूप में जीया जीवन उनके भीतर उत्स...
उसने कहा था......
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  July 13, 2014, 12:56 am
हिंदी कथाजगत में चन्द्रधर शर्मा गुलेरी एक ऐसे कथाकार हुए जो कुछ ही कहानियां लिखकर अमर हो गए। उनकी कहानियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी अपने समय में रहीं। कथा साहित्य को गुलेरी जी ने नई दिशा और आयाम प्रदान किए। वह उच्च कोटि के निबंधकार और प्रखर समालोचक भी थे। गु...
उसने कहा था......
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  July 7, 2014, 1:34 pm
(यात्रा... रोज़मर्रा की ज़िंदगी से निकाले ख़ुद के लिए सुकून के कुछ पल। संभवत: हर व्यक्ति अपने जीवन में यात्रा तो करता ही है। आख़िर किसका मन नहीं करता फिर से नई उमंग से जीने का! कोई मन के अंतहीन आकाश में किसी परिंदे की तरह स्वच्छंद उड़ान भरता है तो कोई मन के सागर की गहराइयों ...
उसने कहा था......
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  April 18, 2014, 2:40 pm
(निरन्तर व्यस्तता के बीच पढ़ने-लिखने का क्रम लगभग टूटा रहा. किताबें तो दूर, नियम से अख़बार तक बांचने की मोहलत नहीं मिली. प्रयास था कि कुछ समय चुराकर लिखना-पढ़ना हो जाएगा पर न ऐसा समय आया, न मन:स्थिति. उम्मीद इंसान का सबसे बड़ा अस्त्र है, जो न टूटे तो सब संभव है. इस आशा के सा...
उसने कहा था......
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  February 27, 2014, 6:33 pm
('उसने कहा था'कहानी पर बनी फ़िल्म का एक पोस्टर)पांचवीं कक्षा में थी जब मुझे पहली बार ‘उसने कहा था’कहानी पढ़ने को दी गई। तब केवल यह पता था कि यह कहानी मेरे परदादा पंडित चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने लिखी है। फिर दो-तीन साल बाद दूरदर्शन पर ‘उसने कहा था’फ़िल्म देखने का अवसर मिला...
उसने कहा था......
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  February 2, 2014, 4:46 pm
(मृत्यु पर कविताएं पढ़ते हुए कवि एकांत श्रीवास्तव की यह कविता हाथ लगी. साथ में गुस्ताव क्लिम्टकी कलाकृति 'ट्री ऑफ लाइफ'.) मायावी सरोवर की तरह अदृश्‍य हो गए पिता रह गए हमपानी की खोज में भटकते पक्षी ओ मेरे आकाश पिताटूट गए हमतुम्‍हारी नीलिमा में टंकेझिलमिल तारे ...
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  January 29, 2014, 8:12 pm
(प्रिय कवि आलोक श्रीवास्तव के कविता-संग्रह 'दुख का देश और बुद्ध' से...)  बुद्ध का होना एक फूल का खिलना  है हवा में महक का बिखरना और दिशाओं में रंगों का छा जाना है बुद्ध का होना अपने भीतर होना है दुख को समझते हुए जीना पता नहीं पृथ्वी पर कितने क...
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  October 7, 2013, 2:09 pm
(नसरीन मुन्नी कबीर विदेश में पली-बढ़ीं लेकिन उनका दिल भारत के लिए धड़कता रहा। लंदन में रहकर वे भारतीय फ़िल्में देखतीं औरहिन्दी गाने सुनतीं। पढ़ाई के लिए यूरोप गईं तो वहां भी यह सिलसिला बरक़रार रहा। सिनेमा की पढ़ाई के बाद नसरीन लंदन लौट आईं। उन्हें ब्रिटिश फ़िल्म इंस...
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  August 3, 2013, 1:39 pm
(साहित्य के पुरोधा पंडितचन्द्रधर शर्मा गुलेरी की आज 130वीं जयंती है। गुलेरी जी की रचनाओं के बारे में इतना सब लिखा, पढ़ा व सुना जा चुका है कि कुछ और कहना सूरज को दीया दिखाने समान है। दो साल पहले पैतृक घर गुलेर जाना हुआ तो मैं गुलेरी जी की निजी डायरी अपने साथ मुंबई ले आई थी। य...
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Tag :लेख/आलेख
  July 7, 2013, 2:58 pm
(प्रिय कविताओं में से एक नरेश सक्सेना की यह कविता, साथ में एडवर्ड मुंचका चित्र 'मेलनकली') जैसे चिड़ियों की उड़ान मेंशामिल होते हैं पेड़क्या कविताएं होंगी मुसीबत में हमारे साथ?जैसे युद्ध में काम आएसैनिक की वर्दी और शस्त्रों के साथख़ून में डूबी मिलती है उसके बच्चे की तस...
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Tag :कुछ और रचनाएं
  May 13, 2013, 1:19 pm
(विश्व कविता दिवस पर राइनेर मारिया रिल्के का गद्य,गणेश पाइन  की कलाकृति के साथ. अनुवाद राजी सेठ का.)"...कविता मात्र आवेग नहीं... अनुभव है। एक अच्छी कविता लिखने के लिए तुम्हें बहुत से नगर और नागरिक और वस्तुएं देखनी-जाननी चाहिए। बहुत से पशु और पक्षी... पक्षियों के उड़ने का ढब। न...
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Tag :कुछ और रचनाएं
  March 22, 2013, 12:09 am
(वे कहते हैं कि मैं अपने संगीत को बयां नहीं कर सकता, मेरा संगीत मुझे बयां करता है। आप उनका संगीत सुनते हैं तो समझ जाते हैं कि वे ऐसा क्यों कह रहे हैं। उनके हर गीत को सुनकर गाने वाले की एक छवि मन में अभरती है, यह छवि कैलाश खेर की है। कैलाश अलग हैं, अद्भुत हैं, और उनमें कुछ ऐसा ह...
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Tag :साक्षात्कार/कैलाश खेर
  February 24, 2013, 1:21 pm
संगीत के ज़रिए बहुत कुछ बदला जा सकता है- लकी अली बतौर संगीतकार मेरे सफ़र की शुरुआत साल 1996 में मेरी पहली एलबम ‘सुनो’से हुई। उस वक़्त संगीत के क्षेत्र में इतने प्रयोग नहीं होते थे जितने अब होने लगे हैं। यह अच्छा भी है क्योंकि ख़ुद को एक्सप्रेस करने की कला ज़रूरी है। लोगों ...
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Tag :लेख/आलेख
  February 12, 2013, 6:31 pm
दिल्ली में मेरी कॉलेज की एक दोस्त दूरदर्शन पर संगीत कार्यक्रम ‘अलबेला सुर मेला’की एंकरिंग करती थी।एक बार उसकी को-होस्ट शूट पर नहीं आई। शूट रोकना संभव नहीं था और उन्हें ऐसी एंकर चाहिए थी, जो अच्छी हिन्दी बोल सके और दिखने में भी ठीक-ठाक हो। मेरी दोस्त ने मुझसे एंकरिंग कर...
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Tag :फर्स्ट ब्रेक
  January 31, 2013, 2:56 pm
(मौसम बदले, न बदले... हमें उम्मीद कीकम-से-कमएक खिड़की तो खुली रखनी ही चाहिए. अशोक वाजपेयी की कविता,ऑनरी मातीसकी  कलाकृति 'द ओपन विंडो' के साथ)मौसम बदले, न बदलेहमें उम्मीद कीकम-से-कमएक खिड़की तो खुली रखनी चाहिएशायद कोई गृहिणीवसंती रेशम में लिपटीउस वृक्ष के नीचेकिसी अज्ञात...
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Tag :कुछ और रचनाएं
  January 11, 2013, 1:35 pm
फ़िल्मों में मेरी शुरुआत साल 1978 में ‘किस्सा कुर्सी का’से हुई। मैं दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल में थिएटर कर रही थी,जब निर्देशक अमृत नाहटा इस फ़िल्म का प्रस्ताव लेकर आए। उन्होंने मेरा काम देखा था, इसलिए ऑडिशन की ज़रूरत नहीं पड़ी। फ़िल्म केलिएमुझे सुबह ...
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Tag :फर्स्ट ब्रेक
  December 25, 2012, 2:29 pm
मैं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली में थिएटर कर रहा था। शेखर कपूर अपनी फ़िल्म ‘बैंडिट क्वीन’की कास्टिंग के लिए वहांआए हुए थे। उन्होंने मेरा नाटक ‘ख़ूबसूरत बहू’देखकर मुझे मिलने के लिए बुलाया। उस वक़्त शेखर ने कुछ नहीं कहा। तिग्मांगु धूलिया उनके असिस्टेंट थे।तिग...
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Tag :फर्स्ट ब्रेक
  December 16, 2012, 2:06 pm
बचपन में जब भी कोई अच्छा गाना सुनती तो मेरी आंखों में आंसू आ जाते थे। घर में संगीत का माहौल था,मैंने छोटी उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था। कॉलेज के दिनों में ‘सुर-सिंगार’प्रतियोगिता में संगीतकार जयदेव ने मुझे गाते हुए सुना। उन्हें बहुत अच्छा लगा कि एक पारसी लड़की, जिसकी...
उसने कहा था......
Tag :फर्स्ट ब्रेक/पीनाज़ मसानी
  December 9, 2012, 9:20 am
बचपन में जब भी कोई अच्छा गाना सुनती तो मेरी आंखों में आंसू आ जाते थे। घर में संगीत का माहौल था,मैंने छोटी उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था। कॉलेज के दिनों में ‘सुर-सिंगार’प्रतियोगिता में संगीतकार जयदेव ने मुझे गाते हुए सुना। उन्हें बहुत अच्छा लगा कि एक पारसी लड़की, जिसकी...
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  December 9, 2012, 9:20 am
पंजाब से कॉलेज की पढ़ाई पूरी करके मैं मुंबई आई और यहां ‘स्टारडस्ट एकेडमी’में एक्टिंग के कोर्स में दाख़िला लिया। कोर्स के बाद लोगों से मिलने-जुलने का सिलसिला शुरू हुआ। उस वक़्त मैं जितने भी लोगों से मिली, सब यही कहते कि तुम हमारी फ़िल्म कर रही हो। मुझे लगा कि मुझे एक-सा...
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Tag :फर्स्ट ब्रेक/दिव्या दत्ता
  December 2, 2012, 1:28 pm
(मुंबई के पॉश इलाकेवर्सोवा में समंदर किनारे बनी एक इमारत की छठी मंज़िल पर हूं। दरवाज़े की घंटी बजाने पर रिस्पॉन्स नहीं मिलता,घंटी ख़राब है या शायद बिजली नहीं है। दो-तीन बार कोशिश करने के बाद दीप्ति नवल को फ़ोन मिलाती हूं। ख़ुद दीप्ति आकर दरवाज़ा खोलती हैं। काली टी-शर्...
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Tag :दीप्ति नवल
  November 28, 2012, 12:49 pm
मैं राष्ट्रीय स्तर पर स्विमिंग चैम्पियन रही थी। फिर 1976 में मैंने ‘मिस इंडिया’का ख़िताब जीता। मैं 16 साल की थी जब राज कपूर ने मुझे फ़िल्म ‘हिना’में काम करने का ऑफर दिया। लेकिन वो फ़िल्म मैं नहीं कर पाई। मेरी शुरुआत श्याम बेनेगलकी फ़िल्म ‘जुनून’ से हुई। शशि कपूर के बेटे न...
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Tag :फर्स्ट ब्रेक/नफ़ीसा अली
  November 25, 2012, 11:20 am
अपना फर्स्ट ब्रेक मैं उस गाने को कहूंगा जिस गाने से मुझे फिल्म उद्योग में अच्छी पहचान मिली। ए.आर.रहमान ने मुझे ‘साथिया’फ़िल्म में ‘ओ हमदम सुनियो रे’गाने का मौक़ा दिया था। हालांकि, मैं इससे पहले भी कुछ गीत गा चुका था। पार्श्वगायिका पूर्णिमा ने मुझे साल 1992 में एक कॉलेज प...
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Tag :फर्स्ट ब्रेक/कुणाल गांजावाला
  November 23, 2012, 2:37 pm
आज़ादी, स्वतंत्रता, फ्रीडम... कानों में इन शब्दों के पड़ते ही एक सुखद, प्यारा-सा अहसास मन को हर्षाने लगता है। ये शब्द उस अनुभूति को परिलक्षित करते हैं जो संसार के हर इंसान को प्यारी है। क्या है यह आज़ादी, क्यों है यह इतनी प्रिय हर किसी को?और आज़ादी में भी अगर हम ख़ासकर औरतो...
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Tag :लेख/आलेख
  November 17, 2012, 10:40 am
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