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Blog: Prakash

Blogger: prakash jain
इन दिनों जब कोई हाल पूछता है, चुभता है, क्यों ये सवाल पूछता है झूठ ही कह भी दो,कुशलता चाहे लगता है मानो, 'क्यों है'पूछता है ऑनलाइन हर कोईखुशहाल ही दिखा, झाँका ज़िन्दगी में हर शख्स झुझता है मैं मेरे 'मैं'में रहूँ, तुम अपने 'मैं'में रहो, बुलबुला 'हम'का उछ... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   11:32am 22 Jun 2019 #LIFE
Blogger: prakash jain
ये कविता केवल महिलाओं के लिए, उन्ही को समर्पित।  मानव संसाधन (Human Resources( में कार्यरत एक दोस्त ने 'महिला दिवस'पर अपने साथ कार्य करने वाली महिलाओं को साझा करने के लिए कोई कविता मांगी, कुछ तैयार था नहीं पर जो हो पाया वही उन्हें भी भेज दिया, आप को भी पढ़ा ही देते हैं:-) पर ध्यान र... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   4:43pm 7 Mar 2017 #LOVE
Blogger: prakash jain
हम सब न जाने कितनी ही कहानियां, अनुभव, दर्द , चिंताएं आदि लिया फिरते हैं। जिसे किसीसे बांटना चाहते हैं, बताना चाहते हैं।  पर किसे? हर बात हर किसीसे तो नहीं कही जाती न ? आप कहेंगे किसी अपने से, पर अपने-अपनों में भी नाना प्रकार के भाव निकलते हैं (क्या सोचेंगे, क्या समझेंगे, क... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   4:02pm 25 Nov 2016 #LIFE
Blogger: prakash jain
हर वो मकान याद है, जिसे हमने घर बनाया थादीवारों में जब बस जाए परिवार, जीवन  उसे ही घर कहते हैं न ? बड़ी बारीकी से टंटोला था, हर बार खाली करते समय कहीं कुछ रह न जायें, छूट न जाये पर फिर भी रह गया; कुछ न कुछ; नहीं बल्कि बहुत कुछसामान वगैरह तो ज्यादा नहीं पर ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   1:26pm 3 Sep 2016 #
Blogger: prakash jain
अमीरी दिलों-रिश्तों में हो तो कुछ बात है कोठी-जायदादों में भला क्या रक्खा हैसम्बन्धो में बनना-बिगड़ना लगा रहता है प्यार ढूंढिए आपने आपमें ही छुपा रक्खा है फ़ोन- इंटरनेट से चले; संपर्क हेंगही हुवे  दिखावटी इस सोसियलपनेमें क्या रक्खा है राजनीति वादों ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   4:37am 1 May 2015 #
Blogger: prakash jain
गुच्छे-गुच्छा हैंयादें, इकठ्ठा रहती हैं आसमां में बादल जैसे सफ़ेद, काले, सांवले से पलकें भिगो देती हैं एक आहट भी तन्हाईयों की इन बौछारों को बरसने देता हूँ चुप-चाप ख़ामोशी से सोचता हूँ कई बार लिखूँ हर एक लम्हा हर बात पढता रहूँ उन्हें बार-बार ... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   9:24am 27 Dec 2014 #
Blogger: prakash jain
ये नेता है, रंग बदलेंगे कुछ चुनावों से पहले कुछ चुनावों के बाद. कभी चुनावी साथीकभी संग बदलेंगे ये नेता है, रंग बदलेंगे कुछ मौन रह कर तो कुछ बकबका कर, कुछ बस नौटंकियों सेदेश का ढंग बदलेंगे ये नेता है, रंग बदलेंगे जाति-धर्म में बांटेंगे  इतिहास नए ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   1:10pm 22 Apr 2014 #
Blogger: prakash jain
Through the Viewfinder - Photographs by Adityaमालाएं हैं ये उन फूलों की प्रतिक है जोश्रद्धा के, आस्था के हर देवालयों में अर्पित  कहीं प्रार्थना तो कहीं बन दुवाएं सजता है, महकता है इन्ही से हर श्रृंगार इन्हे पहनाकर संबंध बने दिल एक हुवे परिवार ये बरसे आदर-हर्ष में ... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   11:35am 19 Mar 2014 #
Blogger: prakash jain
अखबार छपते ही हैं अब तो रद्दिवालों के लिए सत्यता लुप्त होती जा रही पढ़नेवालों के लिए एक वक़्त था जब हर सुबह रहता था इंतज़ार अब मंगवाते हैं आदतन; रश्म निभाने के लिए कागज़ भी बेहतर हुवा, छपाई अब रंगीन क्या बस यही काफी हे बेहतर बनाने के लिए? सम्पादकीय असर में डू... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   12:02pm 2 Feb 2014 #
Blogger: prakash jain
कवितायेँ जो लिख देते हैं तुम पे चलते- फिरते,सोते- जागते पड़ी रहती हैं, अक्सर डायरी- नोटपैड के पन्नों पेकुछ मोबाइलिया बनी त्वरित संदेशों में,  कुछ कहीं किताबों के बीच अकेली, गुमसुम  तो कुछ अस्त-व्यस्त, बेसहाराकुछ तो बस खो ही गयी, उन्हें याद कर पान भी मुश्किल ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   4:28pm 9 Dec 2013 #
Blogger: prakash jain
पल्लवी और अजय की अभी - अभी कुछ महीनो पहले ही शादी हुई थी।  संयुक्त परिवार में सास- ससुर, भाई-भाभी और उनके बच्चों के बीच वो खुद को ढालने कि कोशिश कर रही थी। कुछ दिनों से अजय की तबियत ठीक नही थी। कई डॉक्टरों  को दिखाने पर भी कुछ ख़ास फर्क नहीं हो रहा था। शहरों में दूर ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   6:43am 1 Dec 2013 #
Blogger: prakash jain
शिक्षा का यूँ तो हम सबको अधिकार मिला है कहीं मुफ्त पुस्तकें- बस्ता, कहीं आहार मिला है कहीं दिखावी दाखिले, कहीं कागज पर स्कूल कहीं साइकिल, कहीं लैपटॉप,ये कैसा सिलसिला है शिक्षा प्रोत्साहन के क्या बस अब यही रह गए तरीके एक अध्यापक, विषय अनेक, क्या पढ़ लें, क्य... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   4:30pm 18 Sep 2013 #
Blogger: prakash jain
बड़े- बुज़ुर्ग कह गए सब्र का फल मीठा होता है यही सोच कर, कल्पनाओं में  एक पौधा लगाया हमने भी, सब्र का नियमित सिंचित कर रहे पानी से गाढ़ी क्यारियां बना दी है; कहीं पानी बह न जाए पर्याप्त खाद;जरुरी कीटनाशकसब उपयोग करते रहे हैंकाफी रख - रखाव करना पड़ता है कार्... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   2:54pm 8 Sep 2013 #
Blogger: prakash jain
कहीं तन पे नहीं कपडे, कहीं कपड़ों में खुला तन  है पहला निर्धन कहलाता दूजे पे हावी फैशन है भिक्षुक ये भी, भिक्षुक वो भी है ये देवालयों के बाहर, और वो अन्दर ये मांगता भीख, देता दुवाएँ वो प्रार्थनाओं में रखता दान-धन है है दोनों बेसहारा, दीन ये धन से, वो ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   2:10pm 2 Sep 2013 #
Blogger: prakash jain
मेरे वड़ोदरा (गुजरात के मित्रों में एक तकिया कलाम खूब प्रचलित हुवा "Touch है". इसका उपयोग किसी भी बात के वजनदार होने पर, किसी खुशनुमा हादसे के वर्णन पर, किसी अनोखे अनुभव आदि पर प्रचलित हुवा । मतलब शायद यही था की बात दिल को छु गई।  बस यही से इस तकिया कलम को उठाया, कुछ मित्रो के Tou... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   5:29pm 13 Aug 2013 #
Blogger: prakash jain
मन में सैलाब बहता- उफनता रहा है धैर्य ना जाने क्यूँ फिर पनपता रहा है सोचा जहाँ कहीं भी बस, ठहर जाने को वक़्त अचानक सिकुड़ता- सरकता रहा है करेंगे इबादत पर ना मोहब्बत किसी से मौसम ख्यालों का दिनों-दिन बदलता रहा है     परेशानियाँ आती जाती रही यूँही निरंतर जीवन हर बार बि... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   10:54am 25 May 2013 #LIFE
Blogger: prakash jain
CKD से दुनिया मुड़ी अब CCD की ओर कटिंग नहीं मिलती यहाँ, पॉकेट कटती है Sure बातें जो गप भी कहलाई, यहाँ बनी वो Gossipचुक्कड़-ग्लास बने Mug, चुस्की कहलाये है Sip अड्डेबाजी जो कहलाती थी, यहाँ बनी NetworkSocial, Professional, कहीं Virtual सम्पर्क अंग्रेजीपना यहाँ हरतरफ बातों में छलकता है चीनी का चम्मच पहले, अब... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   1:47pm 31 Mar 2013 #LIFE
Blogger: prakash jain
Autumn in Ladakh - Image Courtesy: Harshal Jariwalaउदास रहते हैं अक्सर कभी आप किसीसे तो कभी कोई आपसे रूठना, मनाना चिढना, कभी चिल्लानाबेवजह का गुस्साखुद ही में झुँझलाना यही उदासी फिर निराशा बन जाती है  ये होता है हरदम कि जहाँ प्यार गहरा हो सम्बन्ध हो भावुक,मेल-जोल  गहरा हो आशाएं और अपेक्षाएं इस प... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   2:30pm 24 Mar 2013 #LIFE
Blogger: prakash jain
Frank हो गया है, Selfish हो गया है, प्यार आजकल बड़ा Practical हो गया है... ना Dependence किसी पे; ना ही Expectation की बातें,Pairing का है जमाना, Bluetooth जम गया है...प्यार आजकल बड़ा Practical हो गया है... Flirting है कहीं ये;  कहीं Intimate मस्ती, तो कहीं बस Bills चुकाने का;  Resource हो गया है... प्यार आजकल बड़ा Practical हो गया है... एक, दो, तीन, नया Affair ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   2:13pm 11 Feb 2013 #LOVE
Blogger: prakash jain
Courtesy: Harshal JariwalaCourtesy: Harshal Jariwalaपेड़ चल रहे हैं कभी भागे जा रहे हैं दूर कोरे मैदानों में,खेतों में कहीं तैयार फसल तो कहीं लंबी मेड़ें मानो किसीने मैदानी चित्रकारी की हो तभी नज़र आया  बैलों के साथ खेत जोतता किसान याद दिला गया की हमारा देश कृषिप्रधान है कुछ पहाड़ भी आये-गये बड़ी ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   3:50pm 2 Feb 2013 #LIFE
clicks 130 View   Vote 0 Like   1:53am 14 Jan 2013 #
Blogger: prakash jain
धागे ख्यालों के, उलझे-उलझे से कई गाँठें भी बन चुकी है इनमें कुछ जानेंकुछ अनजानें सुलझाते- सुलझाते गाँठें  क्रोध की, नफरतों की रुढियों की, भ्रांतियों की अजीबोगरीब आस्थाओं की सुलझानें का हर प्रयास और उलझनें जैसा है एक नुकीली सुई सी हमेशा चुभती है जिसे सिर्फ महसूस कि... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   5:29pm 6 Jan 2013 #
Blogger: prakash jain
Photo by : Jinit Soniकभी बातें होती थी रोजाना अब आहटें सालाना कि न बदले हैं हम, न बदला है तू शायद पर कितना बदल गया है ज़माना कि लम्हा वो ठहर गया होता थोडा जी लेते और ज्यादा क्या होता ?माहोल कुछ और ही होता इस आज में न इस तरह होता जिक्र न पड़ता बतियाना कभी बातें होती थी रोजाना... ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   1:07pm 29 Dec 2012 #LOVE
Blogger: prakash jain
चलो फिर नये से शुरू करते हैं एक शहर नया, एक बस्ती नयी एक मकान नया सा चुनते हैं कि नयी बस्ती- मकान में बातें पुरानी करते हैं।  चलो फिर नये से शुरू करते हैं...नय़े चेहरे, नये लोगों में साथ नया सा ढूंढते हैं उन लम्हों में खुद को यादों से बचाया करते हैं।  चलो फिर नये से शुरू ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   4:19am 12 Nov 2012 #LIFE
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