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Prakash

ये कविता केवल महिलाओं के लिए, उन्ही को समर्पित।  मानव संसाधन (Human Resources( में कार्यरत एक दोस्त ने 'महिला दिवस'पर अपने साथ कार्य करने वाली महिलाओं को साझा करने के लिए कोई कविता मांगी, कुछ तैयार था नहीं पर जो हो पाया वही उन्हें भी भेज दिया, आप को भी पढ़ा ही देते हैं:-) पर ध्यान र...
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Tag :LOVE
  March 7, 2017, 10:13 pm
हम सब न जाने कितनी ही कहानियां, अनुभव, दर्द , चिंताएं आदि लिया फिरते हैं। जिसे किसीसे बांटना चाहते हैं, बताना चाहते हैं।  पर किसे? हर बात हर किसीसे तो नहीं कही जाती न ? आप कहेंगे किसी अपने से, पर अपने-अपनों में भी नाना प्रकार के भाव निकलते हैं (क्या सोचेंगे, क्या समझेंगे, क...
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Tag :LIFE
  November 25, 2016, 9:32 pm
हर वो मकान याद है, जिसे हमने घर बनाया थादीवारों में जब बस जाए परिवार, जीवन  उसे ही घर कहते हैं न ? बड़ी बारीकी से टंटोला था, हर बार खाली करते समय कहीं कुछ रह न जायें, छूट न जाये पर फिर भी रह गया; कुछ न कुछ; नहीं बल्कि बहुत कुछसामान वगैरह तो ज्यादा नहीं पर ...
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Tag :
  September 3, 2016, 6:56 pm
अमीरी दिलों-रिश्तों में हो तो कुछ बात है कोठी-जायदादों में भला क्या रक्खा हैसम्बन्धो में बनना-बिगड़ना लगा रहता है प्यार ढूंढिए आपने आपमें ही छुपा रक्खा है फ़ोन- इंटरनेट से चले; संपर्क हेंगही हुवे  दिखावटी इस सोसियलपनेमें क्या रक्खा है राजनीति वादों ...
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  May 1, 2015, 10:07 am
गुच्छे-गुच्छा हैंयादें, इकठ्ठा रहती हैं आसमां में बादल जैसे सफ़ेद, काले, सांवले से पलकें भिगो देती हैं एक आहट भी तन्हाईयों की इन बौछारों को बरसने देता हूँ चुप-चाप ख़ामोशी से सोचता हूँ कई बार लिखूँ हर एक लम्हा हर बात पढता रहूँ उन्हें बार-बार ...
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  December 27, 2014, 2:54 pm
ये नेता है, रंग बदलेंगे कुछ चुनावों से पहले कुछ चुनावों के बाद. कभी चुनावी साथीकभी संग बदलेंगे ये नेता है, रंग बदलेंगे कुछ मौन रह कर तो कुछ बकबका कर, कुछ बस नौटंकियों सेदेश का ढंग बदलेंगे ये नेता है, रंग बदलेंगे जाति-धर्म में बांटेंगे  इतिहास नए ...
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Tag :
  April 22, 2014, 6:40 pm
Through the Viewfinder - Photographs by Adityaमालाएं हैं ये उन फूलों की प्रतिक है जोश्रद्धा के, आस्था के हर देवालयों में अर्पित  कहीं प्रार्थना तो कहीं बन दुवाएं सजता है, महकता है इन्ही से हर श्रृंगार इन्हे पहनाकर संबंध बने दिल एक हुवे परिवार ये बरसे आदर-हर्ष में ...
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  March 19, 2014, 5:05 pm
अखबार छपते ही हैं अब तो रद्दिवालों के लिए सत्यता लुप्त होती जा रही पढ़नेवालों के लिए एक वक़्त था जब हर सुबह रहता था इंतज़ार अब मंगवाते हैं आदतन; रश्म निभाने के लिए कागज़ भी बेहतर हुवा, छपाई अब रंगीन क्या बस यही काफी हे बेहतर बनाने के लिए? सम्पादकीय असर में डू...
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  February 2, 2014, 5:32 pm
कवितायेँ जो लिख देते हैं तुम पे चलते- फिरते,सोते- जागते पड़ी रहती हैं, अक्सर डायरी- नोटपैड के पन्नों पेकुछ मोबाइलिया बनी त्वरित संदेशों में,  कुछ कहीं किताबों के बीच अकेली, गुमसुम  तो कुछ अस्त-व्यस्त, बेसहाराकुछ तो बस खो ही गयी, उन्हें याद कर पान भी मुश्किल ...
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Tag :
  December 9, 2013, 9:58 pm
पल्लवी और अजय की अभी - अभी कुछ महीनो पहले ही शादी हुई थी।  संयुक्त परिवार में सास- ससुर, भाई-भाभी और उनके बच्चों के बीच वो खुद को ढालने कि कोशिश कर रही थी। कुछ दिनों से अजय की तबियत ठीक नही थी। कई डॉक्टरों  को दिखाने पर भी कुछ ख़ास फर्क नहीं हो रहा था। शहरों में दूर ...
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  December 1, 2013, 12:13 pm
शिक्षा का यूँ तो हम सबको अधिकार मिला है कहीं मुफ्त पुस्तकें- बस्ता, कहीं आहार मिला है कहीं दिखावी दाखिले, कहीं कागज पर स्कूल कहीं साइकिल, कहीं लैपटॉप,ये कैसा सिलसिला है शिक्षा प्रोत्साहन के क्या बस अब यही रह गए तरीके एक अध्यापक, विषय अनेक, क्या पढ़ लें, क्य...
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  September 18, 2013, 10:00 pm
बड़े- बुज़ुर्ग कह गए सब्र का फल मीठा होता है यही सोच कर, कल्पनाओं में  एक पौधा लगाया हमने भी, सब्र का नियमित सिंचित कर रहे पानी से गाढ़ी क्यारियां बना दी है; कहीं पानी बह न जाए पर्याप्त खाद;जरुरी कीटनाशकसब उपयोग करते रहे हैंकाफी रख - रखाव करना पड़ता है कार्...
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  September 8, 2013, 8:24 pm
कहीं तन पे नहीं कपडे, कहीं कपड़ों में खुला तन  है पहला निर्धन कहलाता दूजे पे हावी फैशन है भिक्षुक ये भी, भिक्षुक वो भी है ये देवालयों के बाहर, और वो अन्दर ये मांगता भीख, देता दुवाएँ वो प्रार्थनाओं में रखता दान-धन है है दोनों बेसहारा, दीन ये धन से, वो ...
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Tag :
  September 2, 2013, 7:40 pm
मेरे वड़ोदरा (गुजरात के मित्रों में एक तकिया कलाम खूब प्रचलित हुवा "Touch है". इसका उपयोग किसी भी बात के वजनदार होने पर, किसी खुशनुमा हादसे के वर्णन पर, किसी अनोखे अनुभव आदि पर प्रचलित हुवा । मतलब शायद यही था की बात दिल को छु गई।  बस यही से इस तकिया कलम को उठाया, कुछ मित्रो के Tou...
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Tag :
  August 13, 2013, 10:59 pm
मन में सैलाब बहता- उफनता रहा है धैर्य ना जाने क्यूँ फिर पनपता रहा है सोचा जहाँ कहीं भी बस, ठहर जाने को वक़्त अचानक सिकुड़ता- सरकता रहा है करेंगे इबादत पर ना मोहब्बत किसी से मौसम ख्यालों का दिनों-दिन बदलता रहा है     परेशानियाँ आती जाती रही यूँही निरंतर जीवन हर बार बि...
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Tag :LIFE
  May 25, 2013, 4:24 pm
CKD से दुनिया मुड़ी अब CCD की ओर कटिंग नहीं मिलती यहाँ, पॉकेट कटती है Sure बातें जो गप भी कहलाई, यहाँ बनी वो Gossipचुक्कड़-ग्लास बने Mug, चुस्की कहलाये है Sip अड्डेबाजी जो कहलाती थी, यहाँ बनी NetworkSocial, Professional, कहीं Virtual सम्पर्क अंग्रेजीपना यहाँ हरतरफ बातों में छलकता है चीनी का चम्मच पहले, अब...
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Tag :LIFE
  March 31, 2013, 7:17 pm
Autumn in Ladakh - Image Courtesy: Harshal Jariwalaउदास रहते हैं अक्सर कभी आप किसीसे तो कभी कोई आपसे रूठना, मनाना चिढना, कभी चिल्लानाबेवजह का गुस्साखुद ही में झुँझलाना यही उदासी फिर निराशा बन जाती है  ये होता है हरदम कि जहाँ प्यार गहरा हो सम्बन्ध हो भावुक,मेल-जोल  गहरा हो आशाएं और अपेक्षाएं इस प...
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Tag :LIFE
  March 24, 2013, 8:00 pm
Frank हो गया है, Selfish हो गया है, प्यार आजकल बड़ा Practical हो गया है... ना Dependence किसी पे; ना ही Expectation की बातें,Pairing का है जमाना, Bluetooth जम गया है...प्यार आजकल बड़ा Practical हो गया है... Flirting है कहीं ये;  कहीं Intimate मस्ती, तो कहीं बस Bills चुकाने का;  Resource हो गया है... प्यार आजकल बड़ा Practical हो गया है... एक, दो, तीन, नया Affair ...
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Tag :LOVE
  February 11, 2013, 7:43 pm
Courtesy: Harshal JariwalaCourtesy: Harshal Jariwalaपेड़ चल रहे हैं कभी भागे जा रहे हैं दूर कोरे मैदानों में,खेतों में कहीं तैयार फसल तो कहीं लंबी मेड़ें मानो किसीने मैदानी चित्रकारी की हो तभी नज़र आया  बैलों के साथ खेत जोतता किसान याद दिला गया की हमारा देश कृषिप्रधान है कुछ पहाड़ भी आये-गये बड़ी ...
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Tag :LIFE
  February 2, 2013, 9:20 pm
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Prakash...
Tag :
  January 14, 2013, 7:23 am
धागे ख्यालों के, उलझे-उलझे से कई गाँठें भी बन चुकी है इनमें कुछ जानेंकुछ अनजानें सुलझाते- सुलझाते गाँठें  क्रोध की, नफरतों की रुढियों की, भ्रांतियों की अजीबोगरीब आस्थाओं की सुलझानें का हर प्रयास और उलझनें जैसा है एक नुकीली सुई सी हमेशा चुभती है जिसे सिर्फ महसूस कि...
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Tag :
  January 6, 2013, 10:59 pm
Photo by : Jinit Soniकभी बातें होती थी रोजाना अब आहटें सालाना कि न बदले हैं हम, न बदला है तू शायद पर कितना बदल गया है ज़माना कि लम्हा वो ठहर गया होता थोडा जी लेते और ज्यादा क्या होता ?माहोल कुछ और ही होता इस आज में न इस तरह होता जिक्र न पड़ता बतियाना कभी बातें होती थी रोजाना... ...
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Tag :LOVE
  December 29, 2012, 6:37 pm
चलो फिर नये से शुरू करते हैं एक शहर नया, एक बस्ती नयी एक मकान नया सा चुनते हैं कि नयी बस्ती- मकान में बातें पुरानी करते हैं।  चलो फिर नये से शुरू करते हैं...नय़े चेहरे, नये लोगों में साथ नया सा ढूंढते हैं उन लम्हों में खुद को यादों से बचाया करते हैं।  चलो फिर नये से शुरू ...
Prakash...
Tag :LIFE
  November 12, 2012, 9:49 am
A Painting by Raja Ravi Verma नूर आज फिर चेहका होगा सुबह थोड़ी सी अलसाई होगी किरणें पर्दों की जालियों से छनकर तुम्हे छुकर थोडा इतराई होगी गुनगुना रही होगी तुम वो गीत वो थोड़े हमारे सेख्यालों के शीतल पानी से अलमस्त नहायी होगी  वो भीनी जुल्फें तुम्हारी उलझी ज़िन्दगी सी हमें ही सोचत...
Prakash...
Tag :LOVE
  October 17, 2012, 8:06 pm
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