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नारी का कविता ब्लॉग

तुमने कहा था मां बहुत बोलती हो तुम चपर चपर बहस करती हो. हर बात पे उठाती हो सवाल पूछती हो क्यों. टिक पाओगी ? ससुराल में ?? तब से मां बस तब से चुप रहना सीख लिया मैने प्रश्न चिह्न की जगह विराम लगाना सीख लिया हर उठते हुए सवाल पर. नहीं बोली थी मैं कुछ भी जब बहुत कम करके आंका गया था तु...
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  January 19, 2015, 11:06 am
ना जाने क्यूँ आजकल कुछ लिख नहीं पाती विचार दिमाग की दीवारो से टकरा कर वापिस लौट आते है आवाज़ें वादियों की तरह मन में गूंज के रह जाती है ऐसा क्या परिवर्तन हुआ है जो मेरे अंतर्मन को अपनी भाषा बोलने नहीं दे रहा हर रात अपने ही विचारो के साथ मैं एक संघर्ष करती हुँ उन्हें पन...
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  September 22, 2014, 8:42 pm
  इस समाज के कुछ लोग मानते हैं उसे भगवान्या फिर कोई अवतार और वह गढ़ता है कुछ कहानियाँ जिससे बना रहे यह भ्रम लोगों का नहीं जानते लोग इस समाज के कि जब वह बांच रहा होता है ज्ञान महिला उत्पीड़न के विरुद्ध किसी सभा में उसकी पत्नी कर रही होती है नाकामयाब कोशिश अपने बदन के खरो...
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  July 10, 2014, 3:47 pm
  दिवाली के बाद जब आयी सहालग की बारी हो गई डोली विदा घर से और चले गए बाराती खड़ा रहा पिता दुआरे पर बहुत देर मन सा भारी कुछ लिएदेखती रही माँ एकटक गुलाबी कुलिया चुकिया जो भरा था अब भी खाली-खाली से घर में ----सुलोचना वर्मा---- © 2008-13 सर्वाधिकार सुरक्षित! ...
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Tag :विदाई
  July 10, 2014, 3:45 pm
तुम अनन्या तुम लावण्यातुम नारी सुलभ लज्जा से आभरणातुम सहधर्मिनी तुम अर्पितातुम पूर्ण नारीश्वर गर्विता उत्तरदायित्वों की तुम निर्वाहिनीतुम ही पुरुष की चिरसंगिनीतुम सौन्दर्य बोध से परिपूर्णातुम से ही धरित्री आभरणा तुम ही स्वप्न की कोमल कामिनीतुमसे सजी है दिवा ...
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  June 14, 2014, 3:52 pm
घर से भागी हुई लड़की चल पड़ती है भीड़ में लिए अंतस में कई प्रश्न  डाल देती है संदेह की चादर अपनापन जताते हर शख्स परपाना होता है उसे अजनबी शहर में छोटा ही सही, अपना भी एक कोना रह रहकर करना होता है व्यवस्थितउसे अपना चिरमार्जित परिधान मनचलों की लोलुप नज़रों से बचने के लिए दबे पा...
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Tag :Sulochana Verma
  April 22, 2014, 12:31 pm
इस पुरुष प्रधान समाज में सदा सर्वोपरि रही बेटों की चाह उपेक्षा, ज़िल्लत, अपमान से भरी रही बेटियों की राह सदियों से संघर्षरत रहीं हम बेटियाँ कई अधिकार सहर्ष तुम दे गए कई कानून ने दिलवाए बहुत हद तक मिल गया हमें हमारी बराबरी का अधिकार जन्म लेने का अधिकार पढने का, आगे बढ़ने का ...
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Tag :beti
  February 1, 2014, 12:50 pm
हर रोज यहाँ संस्कारों को ताक पर रख कर, बलात् हीं इंसानियत की हदों को तोड़ा जाता है| नारी-शरीर को बनाकर कामुकता का खिलौना, स्त्री-अस्मिता को यहाँ हर रोज़ हीं रौंदा जाता है| कर अनदेखा विकृत-पुरुष-मानसिकता को यह समाज, लड़कियों के तंग लिबास में कारण ढूंढता नज़र आता है| मानवाध...
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Tag :नारी
  January 9, 2014, 2:50 pm
 शक्ति के उपासक हैं ये लोग यहाँ स्कंदमाता की पूजा होती है गणेश कार्तिक को भोग लगता है और अशोक सुंदरी फुट फुट रोती है चंदन नही, रक्त भरे हाथों सेदेवी का शृंगार करते हैंगर्भ की कन्याओं का जोवंश के नाम संहार करते हैंअचरज होता है क्यूँ शक्ति के नाम परनौ दिनो का उपवास होता है...
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Tag :.कविता .
  October 10, 2013, 9:34 pm
क्यूँ पुतले को फूँककरखुशी मनाई जाएक्यूँ एक रावण के अंत काजश्न मनाया जाए कितने ही रावण विचर रहे यहाँ, वहाँ, और उस तरफक्यूँ ना उन्हे मुखौटों से पहलेबाहर लाया जाएइस साल दशहरे में नयी रस्म निभाई जाएराम जैसे कई धनुर्धरो कीसभा बुलाई जाएहर रावण को पंक्तिबद्ध करसज़ा सुनाई ज...
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Tag :Sulochana Verma
  September 21, 2013, 4:00 pm
 माँ, ये नाम है एक अंतहीन विस्तार काजीवन का, और जीवन के अवतार काचेहरे की झुर्रियों से टपकतीगरिमा का नाम है माँज़िंदगी की हर तारीख मेंपंचांग सी है माँकभी सोचा है माँ के उच्चारण मेंचंद्रबिन्दु क्यूं लगा हैमाँ  की गोद में सर रखकर वो शीतलता मिलती हैजो किसी वातानुकूलित कमर...
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Tag :माँ
  August 17, 2013, 5:30 pm
वो आज की सीता हैअपना वर पाने कोअब भी स्वय्म्वर रचाती हैवन में ही नहीरण में भी साथ निभाती हैअपनी सीमाएँ खुद तय करती हैलाँघेघी जो लक्ष्मण की रेखा हैपरख है उसे ऋषि और रावण कीपर दुर्घटना को किसने देखा हैरावण का पुष्पक सीता को ले उड़ालोगो का जमघट मूक रहा खड़ा लक्ष्मण को अपन...
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Tag :nari
  June 10, 2013, 3:18 pm
 HEREHERE...
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  June 10, 2013, 7:23 am
विधवातुम्हारे अवशान कोकुछ ही वक़्त बीता हैतुम जा बसे होउस नीले नभ के पारइंद्रधनुषी रंगो मे नहाकरमुझे फिर से आकर्षितकरने को तैयारउस रोज़ चौखट पर मेरा हाथ थाहर तरफ चूड़ियो के टूटने का शोर थाझुंझला उठती थी मैं जब तुमबार बार उन्हे खनकाया करते थेआज उनके टूटने का बेहद ही ...
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  June 8, 2013, 9:45 am
रौंदोगे कब तक नारी का तुम  सम्मान ?कब तक समझोगे तुम उसको एक सामान।रखोगे तुम कब तक उससे एक ही नाता?कब समझोगे उसे बहन बेटी या माता।क्यों भूल जाते होजननी है वह तुम्हारीऔर सहचरी ,जीवन में भरती उजियारी।नारी है शक्ति न समझो  उसे क्षीण तुम।दुर्गा है, मानो मत उसको दींन-हीन त...
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Tag :डॉ. पूनम गुप्त
  March 23, 2013, 3:16 pm
वो एक नही जो बे-आबरू हुईक्या हम सबकी रूह बेज़ार नहींवो जो लुटी सर-ए-बाज़ार आजक्या वो इज्ज़त की हक़दार नहींकितने ही दुर्शाशन खड़ेपर कोई रखवाला गोपाल नहींकहा छुप्पे तुम आज क्रिशनक्यों किया ध्रोपधि पे आज उपकार नहींलुटते, मरते सब देख रहेकर रहे सियासत इस पर भीये कैसा हो गय...
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  December 23, 2012, 11:48 am
देख के आज नवरात्री का जशन आत्मा मेरी कर रही प्रश्न ये कैसा कन्या पूजन है ये कैसा देवी का आदर जब खुद अपने हाथो से हम कर रहे नन्ही कन्यायो का संहार क्या उन्हें नहीं जीने का अधिकार देवी की जय करने वालो तुम कैसे अब चुप बैठे हो मरते लुट ते देवी के रूपों को कैसे देखे हो है धि...
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  October 30, 2012, 11:15 am

देख के आज नवरात्री का जशन आत्मा मेरी कर रही प्रश्न ये कैसा कन्या पूजन है ये कैसा देवी का आदर जब खुद अपने हाथो से हम कर रहे नन्ही कन्यायो का संहार क्या उन्हें नहीं जीने का अधिकार देवी की जय करने वालो तुम कैसे अब चुप बैठे हो मरते लुट ते देवी के रूपों को कैसे देखे हो है धि...
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  October 30, 2012, 11:15 am
देख के आज नवरात्री का जशनआत्मा मेरी कर रही प्रश्नये कैसा कन्या पूजन हैये कैसा देवी का आदरजब खुद अपने हाथो से हमकर रहे नन्ही कन्यायो का संहारक्या उन्हें नहीं जीने का अधिकारदेवी की जय करने वालोतुम कैसे अब चुप बैठे होमरते लुट ते देवी के रूपों को कैसे देखे होहै धिक्कार ऐस...
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  October 30, 2012, 11:15 am
© 2008-13 सर्वाधिकार सुरक्षित!अभी पिछले हीं दिन अखबार में छपी एक खबर में पढ़ा था बारहवीं की एक छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मुख्य नामजद अपराधी प्रशांत कुमार झा तीन बहनों का भाई है, उसकी बहन के बयान से शर्मिंदगी साफ़ झलक रही थी और छोटी बहन तो समझ भी नहीं पा रही उसके भा...
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  August 3, 2012, 10:32 am
अब भी कोहनिया जलती हैं अब भी नमक कम ज्यादा होता हैं पर अब बच्चो का थाली फेकना और पति का चिलाना बस वहीँ होता हैं जहां एक माँ और पत्नी नहीं एक औरत खाना बनाती हैं हमारे घर में ऐसी क़ोई औरत खाना नहीं बनाती माँ , बेटी , पत्नी और बहू बनाती हैं जो औरत नहीं हैं उनको औरत ना कहे और कहीं ...
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  April 19, 2012, 8:43 pm
Apni ummeed ka.....© 2008-13 सर्वाधिकार सुरक्षित!bahut hi sundar gazal hai ...mujhko vishwaas hai ki aap sabhi ko achhi or man ko sukoon milega....zaroor suniyega...dhanywaad.......
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  April 14, 2012, 6:27 pm
Ye zaroori nahi har baat......© 2008-13 सर्वाधिकार सुरक्षितaap sab se request hai ki mere blog SoundCloud per post ki hui is nayi gazal ka anand uthayein....mujhko aap sab ka besabri se intzaar rahega...mein chahungi ki aap sab apne amulya samay se kuch pal nikaal kar or kuch shabd avashy likh kar mera hounsla badhayein .....dhanywaad.......
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  April 8, 2012, 11:43 pm
Wo mahakta hua sa......  © 2008-13 सर्वाधिकार सुरक्षित!aapse prarthna hai ki mera likha ye geet aap sunein or apni raaye vyakt karien....dhanywaad.......
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  April 6, 2012, 8:23 pm
दस्तक ब्लॉग पर एक कविता देखी कविता का शीर्षक नहीं हैं शायद ऐसी कविताओं का शीर्षक होता ही ना हो , कविता ईशा की हैं क्या क्या नहीं कह रही हैं . मुझे बहुत कुछ सुनाई दिया आप को भी दिया हो तो कमेन्ट मे बताये . ईशा भी जानना चाहती होगी .क्या कोई नाम भी दिया जा सकता हैं इस कविता को ??? न...
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  March 28, 2012, 8:48 pm
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