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प्रेमरस

प्यार की है फिर ज़रूरत दरमियाँहर तरफ हैं नफरतों की आँधियाँनफरतों में बांटकर हमको यहाँख़ुद वो पाते जा रहे हैं कुर्सियाँखुलके वो तो जी रहे हैं ज़िन्दगीनफ़रतें हैं बस हमारे दरमियाँजबसे देखा है उन्हें सजते हुएगिर रहीं हैं दिल पे मेरे बिजलियाँऔर मैं किसको बताओ क्या कहूँसबस...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :Ghazal
  July 12, 2019, 9:57 am
"लोकतंत्र कमज़ोर है, वोट खरीदे जाते है, बूथ कैप्चर किये जाते है, मतगणना मे धांधली करवाई जाती है, विधायक और सांसद खरीदे जाते है, पूंजीवादी व्यवस्था है, भ्रष्टाचार फैला हुआ है, व्यवस्था को हरगिज़ नहीं बदला जा सकता है" इत्यादि-इत्यादि.... ...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :politics
  June 24, 2019, 12:53 pm
आज के मौजूं पर अदम गोंडवी साहब की कुछ मेरी पसंदीदा ग़ज़लें: आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे अपने शाहे-वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे तालिबे शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहे आए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहे एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए चार छ: चमचे रहें माइक रहे माला रहे - अदम गोंडवी...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :poem
  May 29, 2019, 3:07 pm
महिला अधिकारों के हनन के अनेक कारण हो सकते हैं, पर मेरे हिसाब से महिलाओं में शिक्षा तथा आर्थिक सशक्तिकरण की कमी इसके प्रमुख कारण हैं और इनसे भी बड़ा एक वजह है पौरुषीय दंभ। आइये इसी पर चर्चा करते हैं।...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :Social, Tikhibat, Video, समाज
  May 27, 2019, 3:32 pm
उल्फत में इस तरह से निखर जाएंगे एक दिन हम तेरी मौहब्बत में संवर जाएंगे एक दिन एक तेरा सहारा ही बहुत है मेरे लिए वर्ना तो मोतियों से बिखर जाएंगे एक दिन हमने बना लिया है मुश्किलों को ही मंज़िल...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :
  May 23, 2019, 1:46 pm
उल्फत में इस तरह से निखर जाएंगे एक दिनहम तेरी मौहब्बत में संवर जाएंगे एक दिनएक तेरा सहारा ही बहुत है मेरे लिएवर्ना तो मोतियों से बिखर जाएंगे एक दिनहमने बना लिया है मुश्किलों को ही मंज़िलयूँ ग़म की हर गली से गुज़र जाएंगे एक दिनजिनके लिए लड़ती है उनकी माँ की दुआएँदुनिया भी ड...
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Shah Nawaz
Tag :Ghazal
  April 15, 2019, 11:36 am
कोई सरकार सिर्फ किसी पार्टी की सरकार भर नहीं होती है बल्कि जनता की प्रतिनिधि होती है और वह अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्षेत्र में काम करती है, उसी के अनुरूप जनता में उसकी जवाबदेही तय होती है और उसी जवाबदेही के अनुसार किये गए कार्यों को लेकर अगले चुनाव में सरकार से संबध...
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Shah Nawaz
Tag :राजनीति
  February 20, 2019, 10:26 am
कल फिर बुलंदशहर में दो लोगों को नफरत की इस राजनीति ने लील लिया, केवल शक के कारण बवाल हुआ, भीड़ में खुद से सज़ा देने की मानसिकता को भरा गया, जिसका हर्जाना दो लोगो को अपनी जान की कुर्बानी देकर चुकाना पड़ा।नफरत की राजनीति का मकसद यह होता है कि लोगों को आपस में दो जगह बाँट दिया ज...
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Shah Nawaz
Tag :
  December 4, 2018, 11:33 am
महिला अधिकारों के हनन के अनेक कारण हो सकते हैं, पर मेरे हिसाब से महिलाओं में शिक्षा तथा आर्थिक सशक्तिकरण की कमी इसके प्रमुख कारण हैं और इनसे भी बड़ा एक वजह है पौरुषीय दंभ। आइये इसी पर चर्चा करते हैं।शिक्षा के साथ साथ महिलाओं के अधिकारों के दमन में आर्थिक सशक्तिकरण होना ...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :Tikhibat
  June 7, 2018, 10:44 am
काफी दिनों से सैफ और करीना खासे परेशान चल रहे थे और उन की परेशानी का सबब था कि देश के इकलौते होनहार बालक तैमूर को पोटी नहीं आना, कई दिनों तक पूरा घर ही नहीं बल्कि पूरा देश परेशान था और देश के न्यूज़ चैनल इस बड़े हादसे को पल-पल कवर कर रहे थे, वोह हम तक यह खबर पहुंचाते रहे कि तैमू...
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Shah Nawaz
Tag :
  April 17, 2018, 9:56 am
यह तो है कि मैं यहाँ तन्हा नहींतुझसे भी तो पर कोई रिश्ता नहींतिश्नगी तो है मयस्सर आपकीजुस्तजू दिल में मगर रखता नहींसाज़िशों से जिसकी हों ना यारियांआज कोई भी बशर मिलता नहींनफरतें इस दौर का तोहफा हुईंदिल किसी का भी यहाँ दुखता नहींबन गया है मुल्क का जो हुक्मरां ज़ालिमों...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :Ghazal
  December 20, 2017, 11:53 am
मेरी यादों में आके क्या करोगे आस दिल में जगा के क्या करोगे ज़माने का बड़ा छोटा सा दिल है सबसे मिल के मिला के क्या करोगे अगर राहों में ही वीरानियाँ हों इतनी बातें बना के क्या करोगे नफरतें और बढ़ जाएंगी दिल में ऐसी बातों में आ के क्या करोगे जो दिल नाआशना ही हो चुके हों फ़क़त रिश...
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Shah Nawaz
Tag :Ghazal
  December 15, 2017, 11:50 am
आज के मौजूं पर अदम गोंडवी साहबकी कुछ मेरी पसंदीदा ग़ज़लें:आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहेअपने शाहे-वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहेतालिबे शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहेआए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहेएक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिएचार छ: चमचे रहें मा...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :
  December 12, 2017, 2:13 pm
"लोकतंत्र कमज़ोर है, वोट खरीदे जाते है, बूथ कैप्चर किये जाते है, मतगणना मे धांधली करवाई जाती है, विधायक और सांसद खरीदे जाते है, पूंजीवादी व्यवस्था है, भ्रष्टाचार फैला हुआ है, व्यवस्था को हरगिज़ नहीं बदला जा सकता है"इत्यादि-इत्यादि.... यह सब लोकतंत्र के विरोध की कमज़ोर दलीलें ब...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :
  August 16, 2017, 3:27 pm
कट्टरता से नफ़रत, नफ़रत से हिंसा और हिंसा से बर्बादी आती है!किसी समुदाय के नाम, पहनावे या चेहरे-मोहरे को देखकर या फिर गौमाँस जैसे इल्जाम पर कट्टरपंथी तत्व लोगों को खुलेआम मार रहे हैं और ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं, जबकि उनसे कहीं बड़ी भीड़ उन बाज़ारों में या फिर ट्रेनों में म...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :Social
  August 11, 2017, 4:50 pm
डेंगू, चिकन गुनिया जैसी बीमारियों से निपटने में हमारी उदासीनता और जीवन को जोखिम में डालने की हमारी आदतों पर दैनिक जनवाणी में मेरा कटाक्ष..."हरियालीहोनेकाभीबड़ानुकसानहै, सबसेपहलानुकसानतोयहीहैकिफिरइसेबचाएरखनेकीमेहनतकरनीपड़तीहै, अबआपहीबताईएकिइसभागदौड़भरीज़िंदगीम...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :Media
  July 27, 2017, 9:32 am
उधर से चिलमन सरकता दिखाई देता हैइधर नशेमन फिसलता दिखाई देता हैतुझे पता क्या तेरे फैसले की कीमत हैमेरा वजूद बदलता दिखाई देता हैउमड़-उमड़ के जो आते हैं मेघ आँगन मेंफटा सा आँचल तरसता दिखाई देता हैकई रातों से भूखा सो रहा था जो बच्चाआज फिर माँ से उलझता दिखाई देता हैझूठे वादो...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :Ghazal
  June 7, 2016, 3:54 pm
कहो कब तलक यूँ सताते रहोगे  कहाँ तक हमें आज़माते रहोगे  सवालों पे मेरे बताओ ज़रा तुम  यूँ कब तक निगाहें झुकाते रहोगे  हमें यूँ सताने को आख़ीर कब तक  रक़ीबों से रिश्ते निभाते रहोगे  वो ग़म जो उठाएँ हैं सीने पे तुमने  बताओ कहाँ तक छुपाते रहोगे  -शाहनवाज़ सिद्दीकी...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :Ghazal
  May 25, 2016, 11:14 am
हज़ारों साज़िशें कम हैं सियासत की अदावत कीहर इक चेहरे के ऊपर से नकाबों को हटाता चलकभी सच को हरा पाई हैं क्या शैतान की चालें?पकड़ ले आइना हाथों में बस उनको दिखाता चलकरो कुछ काम ऐसे भी अदावत 'इश्क़'हो जाएंरहे इंसानियत ज़िंदा, मुहब्बत को निभाता चलभले कैसा समाँ हो यह, बदल के रहने ...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :Ghazal
  February 23, 2016, 10:12 am
यह हमारा हिन्दोस्तां है, जहाँ मज़हब दोस्ती का सबब है, जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग साथ रहते हैं, खाते हैं, पढ़ते हैं और साथ ही अपनी-अपनी पूजा भी कर लेते हैं....हज़ारों साज़िशें कमतर हैं दुश्मनी के लिएमेरे वतन में तो 'मज़हब'हैं दोस्ती के लिए- शाहनवाज़ 'साहिल'...
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Shah Nawaz
Tag :Gazal
  February 8, 2016, 12:26 pm
हज़ारों साज़िशें कमतर हैं दुश्मनी के लिएमेरे वतन में तो 'मज़हब'हैं दोस्ती के लिए- शाहनवाज़ 'साहिल'...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :Gazal
  February 8, 2016, 12:26 pm
सियाचिन ग्लैशियर में हिमस्खलन से हुई हमारे जवानों शहादत की खबर ग़मगीन कर गई! देश की हिफाज़त की ख़ातिर सरहदों पर लड़ने वाले हमारे जवानों की जज़्बे और शहादत को सलाम...हम यूँ आज़ादियों की हर इक जद में हैंक्योंकि क़ुर्बानियाँ उनके मक़सद में हैउन जवानों का कर्ज़ा चुकाएंगे कब?जो ह...
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Shah Nawaz
Tag :Gazal
  February 5, 2016, 10:19 am
यूँ ना देखो दुनियाभर में तब्सिरा हो जाएगाफ़क़्त बस बैठे-बिठाए मसअला हो जाएगाहोंट हिलते ही नहीं हैं आप हो जब सामनेआप ही कोशिश करो तो हौसला हो जाएगारेत पर बच्चे की मेहनत लहरों से टकरा गईपर 'घरौंदा'टुटा तो वो ग़मज़दा हो जाएगादिल अभी महफूज़ है महफ़िल के कारोबार सेआप गर चाहेंगे त...
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Shah Nawaz
Tag :
  February 3, 2016, 11:40 am
गणतंत्र दिवस पर आप सभी को ढेरों शुभकामनाएँ!हर दिल लुभा रहा है, यह आशियाँ हमाराहर शय से दिलनशी है, यह बागबाँ हमाराहर रंग-ओ-खुशबुओं से हर सूं सजा हुआ हैगुलशन सा खिल रहा है, हिन्दोस्ताँ हमाराहो ताज-क़ुतुब-साँची, गांधी-अशोक-बुद्धासारे जहाँ में रौशन हर इक निशाँ हमाराहिंदू हो ...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :Ghazal
  January 26, 2016, 1:39 pm
जब भी तेरा ज़िक्र महफिल में हुआमिलने का दिल में बहाना आ गयाउसने जो देखा हमें बेसाख़्तामायूसी को मुस्कराना आ गयाआप क्यों बैठे हैं ऐसे ग़मज़दामिलने-जुलने का ज़माना आ गयाउसने जो महफ़िल में की गुस्ताखियाँहर इक को बातें बनाना आ गयाहम ज़रा सा नर्म लहज़ा क्या हुएदुनिया को आँखे दिख...
प्रेमरस...
Shah Nawaz
Tag :ग़ज़ल
  January 22, 2016, 10:17 am
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