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Blog: उड़ते एहसास...

Blogger: Kavita Prasad
Young shoots grow by absorbing nutrients from the earth, In a same way the child are nurtured by her mother  and this journey begins from our day of conception. Yes, today I would like to share my views about Motherhood and Pregnancy. We all are thankful to God and also our child/children that they gave us this opportunity and experience to be one with nature and became a part of HIS creation. Each day of pregnancy is beautiful and has come up with new challenges. The initial two trimesters are known to be happy period and they are competitively less risky. Off course, there are many physical changes, but most of the mothers are worried about their “Stretch Marks”. I also applied 2-... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   7:05am 14 May 2015 #
Blogger: Kavita Prasad
इस करवा चौथ पर बहुत कुछ कहना चाहती थी उनसे पर... दिल की बात आँखों तक ही रह गयी आप सब से बांटना चाहती हूँ शायद पसंद आये...वो रौनक तेरे चेहरे की, वो नज़ाकत तेरे लफ़्ज़ों की,तमन्नाओं और आरज़ूओं में डूबी तेरे फ़लसफ़े की,कशिश है तेरे जज़्बातों की...वो आँखों में सादगी,वो बातों में आग सी... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   7:21pm 17 Oct 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
साथियों, आज सुबह एक और घटना ने हतोत्साहित कर दिया उत्तर प्रदेश के लखीम पुर खेरी जिले में, निम्नवर्गीय ४५ वर्ष की महिला या और अच्छे से कहूं तो दलित महिला को चंद्वापुर गावं में नग्न करके घुमाया गयाराम प्यारी और उसके पति अपनी तलाकशुदा बेटी जयंती के साथ उत्तर प्रदेश में रह... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   4:20pm 11 Oct 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
अभी हाल ही में एक मित्र के ब्लॉग पर विकलांगता से जुड़े मुद्दे के बारे में पढ़ा था| वह उनके विवाह से सम्बंधित था| पोस्ट पढ़कर मन काफी आहात हुआ, लगा की जैसे यह समाज उनके प्रति कितना निष्ठुर हो गया है| हम सब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रूप से समाज के बारे में जब भी सोचते  ह... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   4:09pm 11 Sep 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
खिड़की में उगता गुलाबों सा वो चेहरा,आँखों से ज़हन  में उतरता किताबों सा वो चेहरा,नूरे-ए-चश्म  है हिजाबों सा वो चेहरा,मेरा कातिल, मेरा दुश्मन... बेदर्द है वो चेहरा!!!रौनक-ए-इल्म सा पशेमा है वो चेहरा,नर्गिस-ए- बाग सा संजीदा है वो चेहरा,फितरत-ए-कैफ़ सा दीवाना है वो चेहरा,म... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   4:49am 9 Sep 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
यह नाम हिंदी पाठकों  और साहित्य प्रेमियों के लिए नया नहीं है| यह इंटरनेट पर क्रांतिकारी रूप से उभरती हुई, स्वयंसेवी परियोजना है, जिसका उद्देश्य विश्व के अमूल्य काव्य साहित्य को संग्रहित करना, उसे जन-जन तक पहुँचाना और हिंदी साहित्य को इंटरनेट पर समुचित स्थान&... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   5:21am 12 Jul 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
प्रिय पाठकों,आप सब परेशान हो रहे होंगे की मैं कहाँ व्यस्त हूँ इनदिनों,काफी प्रियजनों ने अनुमान भी लगा लिया होगा... माता जी का स्वर्गवास हो गया है! पिछले महीने १९ मई को उनका जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष समाप्त हुआ, और जीत उनकी ही हुई!!! आप सब सोच रहे होंगे कि जीवन स्वरुप ध... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   10:56am 23 Jun 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
साथियों, आज मैं आप के साथ गौतम के जीवन में घटित, अपनी सबसे पसंदीदा घटना बांटना चाहती हूँ| मैं गौतम बुद्ध को प्रायः गौतम या सिद्धार्थ कह कर ही संबोधित करती हूँ|    सदधर्म मार्ग की प्राप्ति के दूसरे ही दिन, गौतम ने गाँव के सारे बच्चों को मिलने बुलाया! सभी बच्... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   9:09pm 8 May 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
विज्ञापन के यह शब्द माँ ने मुझसे उस प्रश्न के जवाब मैं दिए थे, जब दूसरे ओपरेशन के बाद वह ठीक होकर अपने कमरे मैं आ गयी थीं| मेरी दोनों हथेलियों  ही गर्माहट और आँखों की नमी की ठंडक एक माँ का मन  शायद पढ़ चुका था| आँखों में ख़ुशी के आंसू, माँ की घटित तकलीफ ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   12:29am 1 May 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
कल शाम मेरी अज़ीज़ ने मुझे एक रचना मेल की, बाकि कुछ नहीं कहा उसने... सिर्फ लिखा था "कविता पढो ज़रा" :] मुझे बिलकुल उम्मीद नहीं थी कि उसके बाकि गुणों में से एक कविता लेखन भी है| जैसे-जैसे पढ़ती गयी, मेरी मुस्कान उसके आसुओं से सिकुड़ती जा रही थी, कुछ वक़्त  पहले उसने कुछ दर्द बँटा... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   5:12am 19 Apr 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
"हम वर्ल्ड कप जीत जाये", "हमारा भारत जीत गया", "भारत की विजय गाथा", "टीम इंडिया ने भारत को गौरान्वित किया"... यह सब और इनके जैसे सैकड़ो हेड लेंस ने, हमें गौरान्वित किया, हमें हर्षौल्लाहित किया, हममे से कई लोग रो भी पड़े थे, खूब नाचे-गाये और हर भारतीय ने अपने-अपने तरीके से अपना उत्स... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   11:39am 8 Apr 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
दोस्तों, हमारी ज़िन्दगी में हम कई रिश्तों को एक साथ जीते हैं... माँ और बेटी का रिश्ता, पिता और उनके ना होने पर भी उन्हें जीने का रिश्ता| दादी का दुलार, दादा की उँगलियों के बीच अपने आपको सबसे सुरक्षित महसूस करने का रिश्ता| चाचा और बुआ का मुझे गोद मैं उठाने के लिए अपने सब अज़ीज़ ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   9:26am 31 Mar 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
मेरे आंगन में एक गुलमोहर लगा दो...जिस से बातें करते-करते , वक़्त के हर लम्हे को मैं चुरा लूं,शाम-सवेरे एक टक देखूं, जिसके दरश से मैं किस्सा बना लूं,मेरे आंगन में एक गुलमोहर लगा दो...गीले-गीले मौसम मैं फिर, जिसके रंग में, मैं तन यह रंगालूँ,हंसती-गिरती पंखुड़ियों से मैं, अपना घर-ब... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   11:43am 25 Mar 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
बसंत उत्सव चल रहा  है और हम सभी अपनी-अपनी भावनाओं के द्वारा  पूरी तरह प्रकृति से, प्रकृति में, प्रकृति के लिए समर्पित हैं! कोई रंगों की बात कर रहा है, कोई त्योहारों की, कोई कविता, गीत-संगीत और भावों  की बात कर रहा है, कोई त्रासदी के अनुभव सुना रहा है तो  कोई स... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   10:40am 17 Mar 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
सीने में बसर करता है, एक  चेहरा,मासूम सा, मेरा अपना सा, मेरे ही अक्स जैसा... थोडा नटखट,थोडा नमकीन,मीठी-मीठी बातें करता, खट्टे मीठे ज़िक्रे कहता,कभी शायरी के समंदर सा गहरे.. आंसुओ से नीले शब्द बुनता, कभी पंछियों की तरह... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   5:09am 16 Mar 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
मेरे एहसासों के पन्नों पर आज दूसरा रंग प्रेम और उसकी तड़प का है, मैं कवित्री तो नहीं हूँ परन्तु भावों को रंगों का जामा पहनाने का प्रयास किया है...क्या करूँ इन काली आखों का,यह उनकी आखों में अपना अक्स जो नहीं देख सकतीं,             नाका... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   5:13am 15 Mar 2011 #
Blogger: Kavita Prasad
मुझसे अक्क्सर मेरे अज़ीज़ कहते हैं की हमें अपने उड़ते हुए एहसासों को पन्नों पर उतार लेना चाहिए, लेकिन कभी लगा ही नहीं की हिंदी पर मेरी पकड़ इतनी है की एक ब्लॉग शुरू कर सकूँ, सिर्फ अपने एहसासों  को व्यक्त  क... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   10:30am 7 Mar 2011 #
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