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Blog: यादें...

Blogger: अशोक सलूजा
आंखों-देखी दास्तां, श्मशान की ... अपनों  के साथ, किसी अपने को छोड़ने मैं श्मशान गया बड़ा ही परेशान था जिंदगी से वो, जो आज जहाँ से गया पहुंचे वहां सब अपने, आखरी रस्मों पर उलझे पड़े थेकोई अपना, अर्थी पर आंसू बहा रहा था कोई अर्थी को, घी लकड़ी से सज़ा रहा था कोई इसको मंजिल जिन... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   8:57am 4 Sep 2018 #
Blogger: अशोक सलूजा
दास्ताँ.... पेड़ से बिछुड़े सूखे पत्ते की तन से उतरे आत्मा रूपी ...कपड़े लत्ते की ...-अकेला जीवन नाम है ...पतझड़ का...फिर पतझड़ में, पत्ता टूटाशाख़ से उसका, नाता छुटा,जब तक था, डाली पे लटका  न जान को था, कोई भी खटका.. अब कौन करें उसकी रखवाली रूठ गया जब बगिया का माली.. क्यों सूख के नीचे गिरा ... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   1:36pm 26 Mar 2018 #
Blogger: अशोक सलूजा
मेरे मन के भावों की तुकबंदी ....मुझे ख़ुदा की ख़ुदाई पसंद हैमुझे आसमां की ऊंचाई पसंद है मुझे धरती की चौड़ाई पसंद है मुझे समंदर की गहराई पसंद है... पहाड़ों की ऊंचाई पसंद हैघाटियों की गहराई पसंद है नदी की लम्बाई पसंद हैपहाड़ों के गीत पसंद हैंझरनों के संगीत पसंद हैं... सूर... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   9:03am 11 Nov 2017 #
Blogger: अशोक सलूजा
जो बीत रहा, वो आज है....जो गुज़र गया वो कल था जो बीत रहा वो आज है कल मालिक थावो तख्तो-ताज का आज बन गया सिर्फ इक दबी आवाज़ है वो कल था ,ये आज है ......कल बहारें थी ,सपनों का दौर था आज वीराने हैं ,खांसी का शोर है वो कल था, ये आज है .....क्या पापा..आप का जमाना और था आज हम हैं ..आज का... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   8:01am 31 Aug 2017 #
Blogger: अशोक सलूजा
ये वक्त है....??? ये वक्त है, जो बहुत कुछ हम से कराता है ये वक्त है, जो बहुत कुछ हम को दिखाता है  ये वक्त है, जो बहुत कुछ हम को समझाता है ये वक्त है, जो नाकामयाबी पर हम को चिड़ाता है ये वक्त है, जो अपनी मर्ज़ी से हम को चलाता हैये वक्त है, जो हम को गद्दी पर बैठाता है ये वक्त ह... Read more
clicks 125 View   Vote 1 Like   10:00pm 25 Jul 2017 #
Blogger: अशोक सलूजा
वक्त.....वक्त की बात है!!! वक्त वक्त की बात है वक्त क्या क्या दिखलाता है वक्त क्या क्या समझाता है लड़े-झगड़े गले मिले गिले-शिकवे दूर हुए ...... ये हमारे वक्त की बात है..... लड़े- झगड़े गले मिले लबों पे मुस्कान दिल से दूर हुए.... ये आज के वक्त की बात है ..... दुनियां की उलझनो... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   6:54am 21 Jul 2017 #
Blogger: अशोक सलूजा
यादें...: कामयाबी की तदबीरें...???#हिंदी_ब्लागिँग: ब्लॉग में लिखने वालों को भी फिर से पढ़ा जाने लगा है  या जाने लगेगा .....बहुत मंजे हुए ब्लोगरों की मेहनत फिर  से रंग लाएगी...और हम जैसो ...... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   6:27am 20 Jul 2017 #
Blogger: अशोक सलूजा
ब्लॉग में लिखने वालों को भी फिर से पढ़ा जाने लगा है या जाने लगेगा .....बहुत मंजे हुए ब्लोगरों की मेहनत फिर से रंग लाएगी...और हम जैसो की भी सुनी जाएगी ....इसी उम्मीद पर अपने साधारण से शब्दों में अपने साधारण विचार ....आप के सामने ....ये क्या है ,इसको क्या कहते है ये सब आप जाने ???जो द... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   6:34am 5 Jul 2017 #
Blogger: अशोक सलूजा
ताऊ रामपुरिया जी ....ताऊ की पहल ...उजड़े चमन को बसाने में ...मेरी शुभकामनाये ताऊ को इस चमन में नये,पुराने  फूल खिलाने  में ....बड़े दिनों के बाद ब्लॉग पर यादें आईं है, गर्मी में बीते हुए बचपन की दोपहरी की गर्मियों की....आप सब से साझा कर बड़ी ख़ुशी महसूस कर रहा हूँ ....बस,आप की नज़र चाहि... Read more
clicks 284 View   Vote 0 Like   3:45am 1 Jul 2017 #
Blogger: अशोक सलूजा
कहाँ...मेरी है माँ ???कितना प्यारा था बचपन कितना न्यारा था  बचपनजब प्यारी सी माँ के लिए हम सब इक-दूजे से लड़ते थे ऊँची आवाज़ में झगड़ते थे ये मेरी है माँ ,ये मेरी है माँ आज हम भी वही माँ भी वहीबस वो प्यारा, सा बचपन नहीहो गये आज हम सब जवांवक्त छोड़ गया पीछे निशांहम आज भी ल... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   1:14pm 8 May 2016 #
Blogger: अशोक सलूजा
कौन रखता है याद , गुज़रे वक्त की बात ये ही वक्त है यादों का ,गुज़रे वक्त की बातों का....  --अशोक'अकेला'अंगूठी...में जड़ा वो जादू कापत्थर .....मासूम बचपन का सच .....गली में खेलते हुए किसी से सुना ..किसी के पास जादू की अंगूठी है और वो उसमें किसी को भी कुछ भी दिखा सकता है .....सिर्फ एक आने ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   4:02pm 27 Apr 2016 #
Blogger: अशोक सलूजा
लगा के बेटियों को, गले से है हँसाया जाता न इसके के बदले, कभी भी है रुलाया जाता बेटो में देखता बाप, अपने है बचपन की छायामिलता बुढ़ापे में सुकून, पा कर है इनका साया.....मेरी वो आरज़ू......जो हो सकी न पूरी ???काश! मैं भी माँ के आँचल की, छाया में सोता  खूब जी भर खिलखिलाता, फिर कभी खुल ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   7:33am 23 Feb 2016 #
Blogger: अशोक सलूजा
हद हो गई इंतज़ार की ....इधर तो कोई झाँक के भी राज़ी नही लगता ...किसी को क्या कहें ..यहाँ अपना भी ये ही हाल है ..इधर आतेआते आज छे महीने होने को आ रहे हैं ???पता नही क्यों ...पर यहाँ जैसा अपनापन कहीं नही ..यहाँ आ कर ऐसा लगता है जैसे भूला भटका शाम को अपने घर आ जाये ....और भूला न कहलाये .... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   10:17am 4 Feb 2016 #
Blogger: अशोक सलूजा
आज फिर बहुत दिनों के बाद ....यह मेरे दिल से निकले मेरे अहसास हैं ..अपने चारों तरफ़ देखे मेरे तजुर्बात है.... जो, जैसा मैं महसूस करता हूँ ...वो,वैसा ही साधारण सा लिख देता हूँ.......--अशोक'सलूजा'कितना तपाया है...??? जिन्दगी ने..!!!  क्या बताऊँ कितना तपाया है, जिन्दगी ने हर पग पे ठोकर ,तड़प... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   10:03pm 12 Aug 2015 #
Blogger: अशोक सलूजा
अकेलेपन में चारो तरफ, सन्नाटा है ,खामोशियाँ हैसाथ देने को सिर्फ, अपनों की एहसां-फ़रामोशियां हैं .....--अशोक'अकेला'वकत के साथ क्या.... नही बदलता??? वक्त के साथ इंसान बदल जाता है वक्त के साथ ईमान बदल जाता है, वक्त के साथ शैतान बदल जाता है वक्त के साथ भगवान बदल जाता है.... वक्त ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   7:13am 11 May 2015 #
Blogger: अशोक सलूजा
बहुत वक्त लगा दिया मैंने, ये महसूस करने में,अब मेरे ज़ज्बातों की कीमत, कुछ भी नही..... --अशोक'अकेला'पुराना,मैं समाचार हूँ !!!! मैं बीच मझधार हूँ ,बड़ा ही लाचार हूँ कोई न पढ़ें मुझको  मैं वो बासी अखबार हूँ  कोई न डाले गले मुझको मुरझाया फूलों का हार हूँ न कोई अब सुनें मु... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   10:03pm 27 Feb 2015 #
Blogger: अशोक सलूजा
माना ,ज़वानी के अपने ज़ज्बें हैंपर बुढ़ापे के भी ,अपने तजुर्बें हैं ......  --अशोक'अकेला'जिन्दगी क्या है .....? जिन्दगी क्या है , ग़मों-सुकून का समुंदर कामयाबी तैर गयी , नाकामी डूब गयी अंदर दूसरों के गिरेबान में झांकता रहा उम्र-भर न कभी झाँका ,न देखा अपने दिल के अंदर बैठ क... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   7:32am 12 Jan 2015 #
Blogger: अशोक सलूजा
हर कदम पे ज़ालिम जिन्दगी रोज़ इक नया इम्तहान लेती है किसी को बक्शे खुशियों के लम्हे  तो किसी की साँसे थाम लेती है ... --अशोक'अकेला' ये रिश्ते ...ये नाते ???  कैसे हैं ये रिश्ते ,कैसे हैं ये नाते जितना सम्भालो,उतना फ़िसल जाते क्यों मुहं फेर चल दिए उस ओर बंधी जो साथ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:17pm 10 Oct 2014 #
Blogger: अशोक सलूजा
बहुतदिनों बाद लिख रहा हूँ ...शायद फिर बहुत दिन बाद लिख पाँऊ....जहाँ जा रहा हूँ ,वहाँ इन्टरनेट की प्रोब्लम रहती है ....स्वस्थ रहें !ब्लॉग पर आजकल पतझड़ का मौसम चल रहा है पर उम्मीद अभी बाकी है ????हर पतझड़ के बाद हरियाली आती है लगे दिल पे चोट ,सुकूने ख्वाबो-ख्याली आती है ....,--अशो... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   10:03pm 20 Aug 2014 #
Blogger: अशोक सलूजा
आजलगभग तीन महीने होने को हैं ...जब से एक भी पोस्ट नही लिख पाया ...कारण,पिछले काफ़ी दिनों से मेरा डेरा धनोल्टी (मसूरी) में था और वहाँ बी.एस.एन एलइन्टरनेट की अच्छी सुविधा न होने के कारण न चाहते हुए भी ऐसा हो गया .. न कुछ लिख सका .न किसी ब्लॉग पर आप से रु-ब-रु हो सका ...इसके लिए आप... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   10:03pm 22 Jun 2014 #
Blogger: अशोक सलूजा
आजमैं अपने जीवन के, ७२ बसंत पुरे कर चूका हूँ, और ७३ वें बसंत में कदम रख रहा हूँ ...सफ़र कहाँ तक है ,कब तक है ,ये भविष्य के गर्भ में छिपा है ...आप से सिर्फ एक बात का इच्छुक हूँ, आप के स्नेह का ,आप की दुआ का ,सिर्फ एक दुआ ...जब तक आप के बीच रहूँ !!! स्वस्थ रहूँ ..दुआ कीजिये ,दिल से कीजिये ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   10:03pm 26 Mar 2014 #
Blogger: अशोक सलूजा
अब मर्ज़ी नही हमारी ...      है अब.. वक्त की बारी !!!सुना करते थे, जीवन में इक दौर ऐसा, भी आता है अकेले, पड़े रहोगे कोने में झाँकने न कोई आता है...अब इंतज़ार रहता है हरदम घर में किसी के आने का , भूले-भटके ही सही... किसी के द्वारा हाल पूछे जाने का.. जब दिल में दर्द होता है ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   4:36am 23 Feb 2014 #
Blogger: अशोक सलूजा
कैसा है मन, कभी-कभी  ये यूँ भी उदास होता है...सब कुछ है,पास फिर भी खालीपन का अहसास होता है.... ---अशोक'अकेला'यहाँ हर शख्स ......उदास सा क्यों है ???बलाएँ अपनों की लिए जा रहा है  भ्रम के दायरे में जिए जा रहा है खा रहा है अपने ही खून से दगा और खून के घूंट पिए जा रहा है रह-रह के ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   4:43am 21 Jan 2014 #
Blogger: अशोक सलूजा
काँटों भरी फूलों से सजी .....दुनियां है ये !!!क्यों बैठा उदास ,यूँ हैरान सा क्यों है कुछ तो बता , यूँ परेशान सा क्यों है... गुलों से गुलज़ार था ये चमन तेरा लगता ये आज वीरान सा क्यों है... हमेशा चहल-पहल थी इस डगर पर आज ये रास्ता सुनसान सा क्यों है... क्या न मिला, तुझको इस जहाँ ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   10:03pm 22 Dec 2013 #
Blogger: अशोक सलूजा
वो यादें ......बचपन की !!! ये बातें .....बाद पचपन की !!!कल और आजवो शोखियाँ ,वो मस्तियाँवो शरारतें ,वो खुराफ्तें  वो यादें बचपन की ...ये उदासियाँ ,ये वीरानियाँये बेईमानियाँ, ये शामते ये बातें ,बाद पचपन की ...न खौफ़ था ,न फ़िक्र थीन थी जिम्मेवारियां थी बस बचपन की किलकारियाँवो यादे... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   8:03am 11 Dec 2013 #
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