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Hasiba khelibaa dhariba dhyanam

अरमानो का सावन रह रह घुमड़ता है मन के आँगन में,और उनकी बाहों में एक मौसम बीत जाता है ||उनके बालों की खुशबू अब भी बाक़ी है मेरी सांसो में ,सारी रात मेरा सपना महकता रहा ||...
Hasiba khelibaa dhariba dhyanam...
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  April 27, 2012, 3:30 am
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