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विंडोज आधारित सिस्‍टम में गुगल वाइस टाइपिंगहममें से अधिकांश लोगों को टंकण करना काफी श्रमसाध्‍य एवं उबाऊ कार्य लगता है और हम सभी यह सेाचते हैं कि व्‍यक्ति की आवाज सुन कर पाठ्य टाइप हो जाए तो कितना अच्‍छा होगा। गुगल कम्‍पनी यह सुविधा सभी के लिए निशुल्क प्रदान करती है। ...
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  December 6, 2015, 10:50 am
गुगल वाइस टाइपिंग                                                              - संतोष कुमार गुप्‍ता हममें से अधिकांश लोगों को टंकण करना काफी श्रमसाध्‍य एवं उबाऊ कार्य लगता है। इस समस्‍या का समाधान विंडोज़, एंड्रायड तथा मैक आधारित विविध वा...
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  October 15, 2015, 6:00 am
डिजिटल लॉकर संतोष कुमार गुप्‍ता कनिष्‍ठ हिन्‍दी अनुवादकसूचना क्रॉंति के इस युग में दस्‍तावेजों को सुरक्षित रखना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। सुरक्षा एवं सुविधा,दोनों की दृष्टि से यह कार्य महत्‍वपूर्ण है। डिजिटल लॉकर में आवश्‍यक दस्‍तावेज संचित करने पर उप...
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  July 3, 2015, 8:56 pm
'हाय, कर्ण, तू क्यों जन्मा था? जन्मा तो क्यों वीर हुआ?कवच और कुण्डल-भूषित भी तेरा अधम शरीर हुआ?धँस जाये वह देश अतल में, गुण की जहाँ नहीं पहचान?जाति-गोत्र के बल से ही आदर पाते हैं जहाँ सुजान?'नहीं पूछता है कोई तुम व्रती , वीर या दानी हो?सभी पूछते मात्र यही, तुम किस कुल के अभिमानी ...
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Tag :रश्मिरथी/रामधारी सिंह '' दिनकर '
  April 29, 2013, 8:47 am
वीर वही है जो कि शत्रु पर जब भी खड्‌ग उठाता है,मानवता के महागुणों की सत्ता भूल न जाता है।सीमित जो रख सके खड्‌ग को, पास उसी को आने दो,विप्रजाति के सिवा किसी को मत तलवार उठाने दो।'जब-जब मैं शर-चाप उठा कर करतब कुछ दिखलाता हूँ,सुनकर आशीर्वाद देव का, धन्य-धन्य हो जाता हूँ।'जियो, ज...
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Tag :रश्मिरथी/रामधारी सिंह '' दिनकर '
  April 22, 2013, 10:04 am
वीर वही है जो कि शत्रु पर जब भी खड्‌ग उठाता है,मानवता के महागुणों की सत्ता भूल न जाता है।सीमित जो रख सके खड्‌ग को, पास उसी को आने दो,विप्रजाति के सिवा किसी को मत तलवार उठाने दो।'जब-जब मैं शर-चाप उठा कर करतब कुछ दिखलाता हूँ,सुनकर आशीर्वाद देव का, धन्य-धन्य हो जाता हूँ।'जियो, ज...
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  April 22, 2013, 10:04 am
वीर वही है जो कि शत्रु पर जब भी खड्‌ग उठाता है,मानवता के महागुणों की सत्ता भूल न जाता है।सीमित जो रख सके खड्‌ग को, पास उसी को आने दो,विप्रजाति के सिवा किसी को मत तलवार उठाने दो।'जब-जब मैं शर-चाप उठा कर करतब कुछ दिखलाता हूँ,सुनकर आशीर्वाद देव का, धन्य-धन्य हो जाता हूँ।'जियो, ज...
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  April 22, 2013, 10:04 am
सिर था जो सारे समाज का, वही अनादर पाता है।जो भी खिलता फूल, भुजा के ऊपर चढ़ता जाता है।चारों ओर लोभ की ज्वाला, चारों ओर भोग की जय;पाप-भार से दबी-धँसी जा रही धरा पल-पल निश्चय।'जब तक भोगी भूप प्रजाओं के नेता कहलायेंगे,ज्ञान, त्याग, तप नहीं श्रेष्ठता का जबतक पद पायेंगे।अशन-वसन स...
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Tag :रश्मिरथी/रामधारी सिंह '' दिनकर '
  April 15, 2013, 5:30 am
सिर था जो सारे समाज का, वही अनादर पाता है।जो भी खिलता फूल, भुजा के ऊपर चढ़ता जाता है।चारों ओर लोभ की ज्वाला, चारों ओर भोग की जय;पाप-भार से दबी-धँसी जा रही धरा पल-पल निश्चय।'जब तक भोगी भूप प्रजाओं के नेता कहलायेंगे,ज्ञान, त्याग, तप नहीं श्रेष्ठता का जबतक पद पायेंगे।अशन-वसन स...
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  April 15, 2013, 5:30 am
सिर था जो सारे समाज का, वही अनादर पाता है।जो भी खिलता फूल, भुजा के ऊपर चढ़ता जाता है।चारों ओर लोभ की ज्वाला, चारों ओर भोग की जय;पाप-भार से दबी-धँसी जा रही धरा पल-पल निश्चय।'जब तक भोगी भूप प्रजाओं के नेता कहलायेंगे,ज्ञान, त्याग, तप नहीं श्रेष्ठता का जबतक पद पायेंगे।अशन-वसन स...
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  April 15, 2013, 5:30 am
टैबलेट में हिन्‍दी गुगल इंस्‍टालेशनसूचना प्रौद्योगिकी के विकास के साथ ही बाजार में दिन प्रतिदिन नए-नए इलेक्‍ट्रॉनिक गैजेट आ रहे हैं इनमें सर्वाधिक प्रचलित हैं टैबलेट्स तथा स्‍मार्ट फोन । इस अंक में टैबलेट्स में गुगल हिन्‍दी एप्पलिकेशन इंस्‍टॉल करने संबंधी जानका...
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  April 13, 2013, 8:00 am
खड्‌ग बड़ा उद्धत होता है, उद्धत होते हैं राजे,इसीलिए तो सदा बनाते रहते वे रण के बाजे।और करे ज्ञानी ब्राह्मण क्या? असि-विहीन मन डरता है,राजा देता मान, भूप का वह भी आदर करता है।'सुनता कौन यहाँ ब्राह्मण की, करते सब अपने मन की,डुबो रही शोणित में भू को भूपों की लिप्सा रण की।औ' रण ...
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Tag :रश्मिरथी/रामधारी सिंह '' दिनकर '
  April 8, 2013, 10:37 am
कर्ण मुग्ध हो भक्ति-भाव में मग्न हुआ-सा जाता है,कभी जटा पर हाथ फेरता, पीठ कभी सहलाता है,चढें नहीं चीटियाँ बदन पर, पड़े नहीं तृण-पात कहीं,कर्ण सजग है, उचट जाय गुरुवर की कच्ची नींद नहीं।'वृद्ध देह, तप से कृश काया , उस पर आयुध-सञ्चालन,हाथ, पड़ा श्रम-भार देव पर असमय यह मेरे कारण।क...
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Tag :रश्मिरथी / दिनकर
  March 25, 2013, 5:00 am
श्रद्धा बढ़ती अजिन-दर्भ पर, परशु देख मन डरता है,युद्ध-शिविर या तपोभूमि यह, समझ नहीं कुछ पड़ता है।हवन-कुण्ड जिसका यह उसके ही क्या हैं ये धनुष-कुठार?जिस मुनि की यह स्रुवा, उसी की कैसे हो सकती तलवार?आयी है वीरता तपोवन में क्या पुण्य कमाने को?या संन्यास साधना में है दैहिक शक्...
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Tag :रश्मिरथी / दिनकर
  March 18, 2013, 5:00 am
शीतल, विरल एक कानन शोभित अधित्यका के ऊपर,कहीं उत्स-प्रस्त्रवण चमकते, झरते कहीं शुभ निर्झर।जहाँ भूमि समतल, सुन्दर है, नहीं दीखते है पाहन,हरियाली के बीच खड़ा है, विस्तृत एक उटज पावन।आस-पास कुछ कटे हुए पीले धनखेत सुहाते हैं,शशक, मूस, गिलहरी, कबूतर घूम-घूम कण खाते हैं।कुछ तन्...
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Tag :रश्मिरथी / दिनकर
  March 11, 2013, 5:00 am
जनमे नहीं जगत् में अर्जुन! कोई प्रतिबल तेरा,टँगा रहा है एक इसी पर ध्यान आज तक मेरा।एकलव्य से लिया अँगूठा, कढ़ी न मुख से आह,रखा चाहता हूँ निष्कंटक बेटा! तेरी राह।'मगर, आज जो कुछ देखा, उससे धीरज हिलता है,मुझे कर्ण में चरम वीरता का लक्षण मिलता है।बढ़ता गया अगर निष्कंटक यह उद्...
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Tag :रश्मिरथी / दिनकर
  March 4, 2013, 5:00 am
'करना क्या अपमान ठीक है इस अनमोल रतन का,मानवता की इस विभूति का, धरती के इस धन का।बिना राज्य यदि नहीं वीरता का इसको अधिकार,तो मेरी यह खुली घोषणा सुने सकल संसार।'अंगदेश का मुकुट कर्ण के मस्तक पर धरता हूँ।एक राज्य इस महावीर के हित अर्पित करता हूँ।'रखा कर्ण के सिर पर उसने अपन...
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Tag :रश्मिरथी / दिनकर
  February 25, 2013, 5:00 am
फिरा कर्ण, त्यों 'साधु-साधु' कह उठे सकल नर-नारी,राजवंश के नेताओं पर पड़ी विपद् अति भारी।द्रोण, भीष्म, अर्जुन, सब फीके, सब हो रहे उदास,एक सुयोधन बढ़ा, बोलते हुए, 'वीर! शाबाश !'द्वन्द्व-युद्ध के लिए पार्थ को फिर उसने ललकारा,अर्जुन को चुप ही रहने का गुरु ने किया इशारा।कृपाचार...
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Tag :रश्मिरथी / दिनकर
  February 25, 2013, 5:00 am
आज से प्रति सोमवार रामधारी दिनकर द्वारा रचित " रश्मिरथी " यहाँ प्रस्तुत किया जाएगा .... आभार रश्मिरथी का अर्थ होता है वह व्यक्ति, जिसका रथ रश्मि अर्थात पुण्य का हो । इस काव्य में रश्मिरथी नाम कर्ण का है । जय हो' जग में जले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को,जिस नर में भी बसे, हमारा न...
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  February 18, 2013, 5:00 am
आज से प्रति सोमवार रामधारी दिनकर द्वारा रचित " रश्मिरथी " यहाँ प्रस्तुत किया जाएगा .... आभार रश्मिरथी का अर्थ होता है वह व्यक्ति, जिसका रथ रश्मि अर्थात पुण्य का हो । इस काव्य में रश्मिरथी नाम कर्ण का है । जय हो' जग में जले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को,जिस नर में भी बसे, हमारा ...
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Tag :रश्मिरथी / दिनकर
  February 18, 2013, 5:00 am
आज से प्रति सोमवार रामधारी दिनकर द्वारा रचित "रश्मिरथी "यहाँ प्रस्तुत किया जाएगा .... आभार रश्मिरथी का अर्थ होता है वह व्यक्ति, जिसका रथ रश्मि अर्थात पुण्य का हो । इस काव्य में रश्मिरथी नाम कर्ण का है । जय हो'जग में जले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को,जिस नर में भी बसे, हमारा नम...
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  February 18, 2013, 5:00 am
प्रेरक प्रसंग-40यह गाजा-बाजा किसलिए?1930 के अप्रैल के महीने की बात है। गांधी जी के नेतृत्व में दाण्डी कूच (नमक सत्याग्रह) पूरा हो चुका था और अब खजूर का पेड़ काटने का सत्याग्रह चल रहा था। कराडी नामक गांव में पड़ाव था। एक छोटी सी झोपड़ी में गांधी जी रहते थे। एक दिन सुबह-सुबह गांव व...
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Tag :मनोज कुमार
  January 22, 2013, 6:00 am
जन्म -- 27 नवंबर 1907 निधन -- 18 जनवरी 2003 मधुशाला ..... भाग ---16मेरी हाला में सबने पाई अपनी-अपनी हाला,मेरे प्याले में सबने पाया अपना-अपना प्याला,मेरे साकी में सबने अपना प्यारा साकी देखा,जिसकी जैसी रुचि थी उसने वैसी देखी मधुशाला।।१३१।यह मदिरालय के आँसू हैं, नहीं-नहीं मादक हाला,यह मदि...
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Tag :मधुशाला / हरिवंश राय बच्चन
  January 21, 2013, 5:00 am
जन्म -- 27 नवंबर 1907 निधन -- 18 जनवरी 2003 मधुशाला ..... भाग ---15वह हाला, कर शांत सके जो मेरे अंतर की ज्वाला, जिसमें मैं बिंबित - प्रतिबिम्बित  प्रतिपल, वह मेरा प्याला,मधुशाला वह नहीं जहाँ पर मदिरा बेची जाती है,भेंट जहाँ मस्ती की मिलती मेरी तो वह मधुशाला।।१२१।मतवालापन हाला से ले मैंने ...
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Tag :मधुशाला / हरिवंश राय बच्चन
  January 14, 2013, 3:36 pm
जन्म -- 27 नवंबर 1907 निधन -- 18 जनवरी 2003 मधुशाला ..... भाग ---14 जला हृदय की भट्टी खींची मैंने आँसू की हाला,छलछल छलका करता इससे पल पल पलकों का प्याला,आँखें आज बनी हैं साकी, गाल गुलाबी पी होते,कहो न विरही मुझको, मैं हूँ चलती फिरती मधुशाला!।१११।कितनी जल्दी रंग बदलती है अपना चंचल हाला,कित...
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Tag :मधुशाला / हरिवंश राय बच्चन
  January 7, 2013, 5:00 am
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