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Blog: कुछ विशेष...

Blogger: सुनीता शानू
एक लड़की के जीवन में साजन के सपने क्या मायने रखते हैं यह बताने की जरूरत नहीं है, और यह भी झूठ ही होगा कि कोई लड़की सपने देखे और उसमें साजन को न देखे। कोई न बताये तो यह और बात है, हम तो झूठ नहीं बोलते  तो भई नहीं बोलते। जब दादी परियों की और राजकुमार की कहानियाँ सुनाती थी उस वक्... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   2:30pm 25 May 2020 #दिल की बातें
Blogger: सुनीता शानू
(कोरोनापर दिल्ली की हालिया रिपोर्ट...)यह तो सब जानते हैं दिल्ली में एक ऐसी आबादी भी बसती है जो पढ़ी-लिखी नही है, और जिनका काम है रोज कमाना और रोज खाना, इनमें आधे लोग ऐसे हैं जिनके पास राशनकार्ड भी नहीं है।अब बात आती है क्या लॉक डाउन का दिल्ली अच्छी तरह से पालन कर रही है। तो य... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   5:25pm 26 Apr 2020 #
Blogger: सुनीता शानू
राजस्थान डायरी में पढिये कोरोना पर एक विशेष रिपोर्टदिल्ली का दिल हुआ लोक डाउन....कोरोना के कहर ने सम्पूर्ण विश्व में त्राही मचा रखी है, एक बड़ी संख्या में लोग कोरोना से संक्रमित होते जा रहे हैं, वही विदेश से लौटे कुछ भारतियों की वजह से बड़े-बड़े शहरों में भी कोरोना ने अपने ड... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   1:00pm 11 Apr 2020 #
Blogger: सुनीता शानू
कभी-कभी कुछ चीज़े विशेष होती हैं, और आपसे लिखवाकर ही दम लेती हैं, ज़िक्र होना भी चाहिए, किसी भी रचना को लिखने के बाद, या पुस्तक के प्रकाशन के बाद उस पर पाठक का हक़ हो जाता है, अतः उसी पाठकीय धर्म को निभाते हुए मै आपको एक ऎसे विशेषांक से रु-ब-रु करवाने जा रही हूँ जिसका सम्पादन करन... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   1:49pm 5 Feb 2020 #मीराँबाई
Blogger: सुनीता शानू
दोस्ती जब भी किसी से की जाए, पहले जांच परख ली जाए, जांच लिया जाए कि आपने जिससे दोस्ती की है उसे आप पर भरोसा है भी कि नहीं, यह भी देख लिया जाए कि वह आपकी निस्वार्थ दोस्ती को आपकी मतलबपरस्ती तो नहीं मान बैठेगा, आपको जानना पड़ेगा आपके दोस्त के दोस्त कैसे हैं, इंसान किसी की न सुन... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   4:03pm 1 Dec 2019 #
Blogger: सुनीता शानू
कालों के काल महाकाल की नगरी उज्जैन जाने का अवसर मिला। यूं तो ज्ज्जैन के कई नाम हैं मुख्यरूप से उज्जैन को उज्जयिनी के नाम से पुकारते हैं। उज्जैन आज भी भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को बचाए हुए हैं, यहाँ लगने वाला कुम्भ का मेला जग प्रसिध्द है। इसे सिंहस्थ महापर्व क... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   6:14pm 10 Sep 2019 #कविता
Blogger: सुनीता शानू
कोमल बचपन पर कठोर होती दुनिया...हर 8 वें मिनिट में एक बच्चा गायब हो रहा है...नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) का यह आँकड़ा हमें डराता है, सावधान करता है और यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपने बच्चों का ख्याल रखने में नाकामयाब रहे हैं। हमारे लिये यह बेहद शर्मनाक बात ह... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   9:56am 11 Aug 2018 #
Blogger: सुनीता शानू
सबसे पहली बात तो यही आश्चर्य करती है कि हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे तीर्थ स्थल पर एडवेंचर्स जैसा क्या होगा, जब भी किसी से पूछा था कि तुम चलोगे बस एक ही जवाब मिला, हमारी उम्र नहीं है जी हरिद्वार जाने की, या हमें तो मरने के बाद हमारे बच्चे ले जायेंगे और गंगा में बहा आयेंगें... बहरहा... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   4:21pm 22 Aug 2017 #
Blogger: सुनीता शानू
कलम की ताकत कभी तलवार से कम नहीं रही है, आज हम बात कर रहे हैं गणेश शंकर विद्यार्थी की, जिन्होनें अपनी कलम की ताकत से अंग्रेज़ी शासन की नींव हिला दी थी।26 अक्टूबर 1890 तीर्थराज प्रयाग में जन्में गणेशशंकर विद्यार्थी बचपन से ही राष्ट्रभक्त थे, पिता से हिंदी पढ़ते-पढ़ते उन्हें हिं... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   8:21am 15 Aug 2016 #
Blogger: सुनीता शानू
आज हम उस लौह पुरूष की बात कर रहे हैं जो राष्ट्रीय एकता के अद्भुत शिल्पी थे, जिनके ह्रुदय में भारत बसता था,जो किसान की आत्मा कहे जाते थे... जी हाँ ऎसे थे स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल । इनका जन्म 31 अक्टूबर सन 1875 में गुजरात में हुआ था।स्वतंत्रता आ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   8:15am 15 Aug 2016 #
Blogger: सुनीता शानू
आज हम जिन्हेंयाद कर रहे हैं उन वीर सेनानी को 1857 की क्रांति का पहला शहीद सिपाही कहा जाता है। भारत की आज़ादी की पहली लड़ाई छेड़ने वाला ये वीर बहादुर सिपाही कोई और नहीं शहीद मंगल पांडे के नाम से जाना जाता है। इनका जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गाँव में हुआ ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   8:07am 15 Aug 2016 #
Blogger: सुनीता शानू
आज ज्ञान चतुर्वेदी जी का जन्म-दिन है, उनके जन्म-दिवस पर सब कुछ न कुछ उपहार स्वरूप लिख रहे हैं, मैने बस उन्हें एक पत्र लिखा है... आजकल खुले पत्र का रिवाज़ सा बन गया है, छुप-छुप कर लिखे जाने वाले प्रेम पत्र ही पत्रिकाओं में छपने लग गये हैं तो यह बहुत साधारण सी बात है कि मैने ज्ञान... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   2:18pm 2 Aug 2016 #
Blogger: सुनीता शानू
साहित्य अमृत के नये अंक में पढिये मेरा एक व्यंग्य... पर उपदेश कुशल बहुतेरे, नसीहतबाज़ कहें या पर-उपदेशक इन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता, आजकल ये सारे के सारे उपदेशानन्द व्हाट्स एप्प और फ़ेसबुक बाबा के घर बैठे नजर आते हैं, सुबह जैसे ही मोबाइल ओपन किया तपाक से एक नसीहत दे मारी, रा... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   12:41pm 7 Jul 2016 #
Blogger: सुनीता शानू
अँधेरे से उजाले की ओर ले जाती प्रेम-कहानी"अँधेरे का मध्य बिंदु "वंदना गुप्ता का प्रथम उपन्यास है । इससे पहले उनकी पहचान एक कवयित्री और एक ब्लॉगर के रूप में ही थी...सबसे पहली बात मेरे मन में जो आती है वह ये है कि जिस विषय पर हमारा समाज कभी बात करना पसंद नहीं करता, जिसे नई पीढी... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   12:29pm 7 Jul 2016 #
Blogger: सुनीता शानू
प्यारी बेटी सुगंधा,ढेर सारा प्यार एवं शुभाशीषतुम जानती हो मेरे लिये तुम्हारा होना क्या मायने रखता है,  तुम्हारे होने से मै खुद को भरा-भरा महसूस करती हूँ, मुझे याद है जब तुम इस घर से विदा हुई थी कितना रोई थी, उस वक्त तुम्हारा रोना हम सबको कई हफ़्तों तक रुलाता रहा था, रातों ... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   12:53pm 25 May 2016 #
Blogger: सुनीता शानू
महानगरों में माँ बनने के मायने किस तरह बदल गये हैं, आप भी पढ़ कर अपनी राय अवश्य दें, नई दुनियां की नायिका पत्रिका में प्रकाशित एक आर्टिकल...।मैट्रो में माँ बनने के मायने बदलेनिदा फ़ाजली साहब का एक शेर है...बाँट के अपना चेहरा, माथा, आँखें, जाने कहाँ गईफ़टे पुराने एक एलबम में, चंच... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   12:41pm 25 May 2016 #
Blogger: सुनीता शानू
पहरेदारी मुल्क की सौंप हमारे हाथ ..सारा भारत चैन से सोये सारी रात .भारतीय सेना के एक ऑफ़िसर विजेंद्र शर्मा की यह पंक्तियाँ बरबस ही याद आ रही हैं, आप भी सोचिये इस विषय में। हमारे बुजूर्ग कहा करते थे, "पर उपदेश कुशल बहुतेरे"यानि जिनकी कथनी और करनी में फ़र्क होता है उनकी बात कोई... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   8:36am 8 Jan 2016 #
Blogger: सुनीता शानू
जब बहुत छोटी थी तब माँ को देखा करती थी करवाचौथ का व्रत करते हुयें. माँ सजधज कर जब बहुत सारे पकवान बनाया करती थी, हम बच्चे आश्चर्य करते थे कि माँ ने पानी तक नहीं पिया है कहीं गिर न जाये, पिता माँ का पूरा ख्याल रखते थे, यहाँ तक की आटा लगाना सब्जी काटना जैसे काम करने से भी नहीं च... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   2:33pm 30 Oct 2015 #
Blogger: सुनीता शानू
ये बुराड़ी के एक वृध्दाश्रम की तस्वीरें हैं, जहाँ हम पूरे परिवार के साथ खाना खिलाने गये थे, जाने से पहले मन में बहुत उत्साह था, कि उन लोगों को देखूंगी जो स्वेच्छा से अपने बच्चों से दूर रहते हैं, या जिन्होनें संसार से विरक्त होकर सन्यासी जीवन जीने की चाह रखी होगी। लेकिन व... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   8:45am 14 Oct 2015 #
Blogger: सुनीता शानू
                                बाढ़ की सम्भावनायें सामनें हैं/ और नदिया के किनारे घर बने हैं... आप सोच रहे होंगे कि उस शख्स को तो फिर डूब ही जाना पड़ेगा। लेकिन नहीं ऎसा नहीं है, आप अपने घर की दीवारे वाटर प्रूफ़ बनाईये, बाहर कुछ नाव बाँधकर रखिये, कुछ टायर ट्यूब व... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   11:54am 31 Jul 2015 #
Blogger: सुनीता शानू
भैंस बहुत ही परेशान है, करे... तो क्या करे? या तो किसी तालाब में डूब मरे, लेकिन वो तो तैरना जानती है सो आत्महत्या भी नहीं कर पा रही है। कल तक पच्चीस किलो दूध और चार टाइम गोबर करके घर वालों के लिये दूध और उपलों का इंतजाम भैंस के द्वारा हो रहा था कि अचानक एक सिरफ़िरे डायरेक्टर की ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   12:35pm 30 Jul 2015 #
Blogger: सुनीता शानू
जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा और हर साल उमड़-घुमड़ कर आने वाले श्रद्धालुओं की भक्ति देख कर मन प्रफ़ुल्लित हो उठता है, लेकिन पुलिस की चौकस निगरानी, सरकार की ओर से भक्तों के लिये सभी प्रकार की सुविधाये, साधु-संतो के पहचान पत्र तक बन जाने के बाद भी जगन्नाथ पुरी में इतनी प्राणघातक भ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   10:31am 19 Jul 2015 #
Blogger: सुनीता शानू
मुहल्ला अस्सी का ट्रेलर देखा, देखते ही बचपन में होने वाली रामलीला याद आ गई, याद आ गये वे सभी भांड जो देवी-देवताओं का स्वाँग धरकर पैसा माँगते फिरते हैं, मुहल्ला अस्सी में भी देवी-देवताओं का स्वाँग रचकर गाली-गलौज की गई है, हम बेशक सारा दिन मंदिर की घंटियाँ न बजायें लेकिन फ़... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   3:26am 2 Jul 2015 #
Blogger: सुनीता शानू
सुनीता शानूएक कमरे में ऎसे गुमसुम बैठे हैं, जैसे किसी शोक सभा में मौजूद हों। कभी लगता है सब के सब गूंगे-बहरे हो गए हैं। कान में मशीन घुसा ली है। कुछ लोग बीच-बीच में मुस्कुराते हैं, कभी गुस्सा करते हैं तो कभी हंसते भी हैं। लेकिन एक-दूसरे को देखते तक नहीं। यूं कहें कि एक दूसर... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   9:47am 19 Jun 2015 #
Blogger: सुनीता शानू
पेड़-पौधे परिवार के सदस्यों की तरह समझे जायेंगे तो वातावरण भी हमारे घर में रिश्तों में आई मिठास सा घुल जायेगा, जैसे परिवार का हर सदस्य घर में कुछ न कुछ योगदान देता ही है, पेड़-पौधे भी मनुष्य जीवन के लिये अपना सब कुछ न्यौछावर कर देते हैं...एक समय था जब हम अपने घर की क्यारियो... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   3:26pm 5 Jun 2015 #पेड़-पौधे
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